घर की सुख शांति के लिये पापा के परस्त्रीगमन का उत्तराधिकारी बना-6

(Ghar Ki Sukh Shanti Ke Liye Papa Ki Maal Ko Choda- part 6)

This story is part of a series:

अगले दिन पापा के ऑफिस जाने के बाद मैंने कॉलेज से छुट्टी मारने की सोची और दस बजे के बाद अपने घर को बंद करके आंटी के दरवाज़े पर दस्तक दी जो कुछ की क्षणों के बाद उन्होंने खोला।
उनको देख कर मैं स्तब्ध रह गया क्योंकि उस समय आंटी ने अपने शरीर को सिर्फ एक तौलिया में लपेट रखा था।
उन्होंने मुझे जल्दी से अन्दर आने को कहा तथा मेरे अंदर कदम रखते ही उन्होंने दरवाज़े को तुरंत बंद कर दिया।

दरवाज़ा बंद होते ही आंटी ने मुझे उनके पीछे आने को कह कर बेडरूम की ओर चल पड़ी तथा वहाँ पहुँचते ही उन्होंने अपना तौलिया उतारा और बिस्तर के पास ही रखी कुर्सी पर फेंक कर बिल्कुल निर्वस्त्र हो कर मेरी ओर मुड़ी।
आंटी की इस हरकत पर मुझे कुछ संकोच हुआ और मैंने झट से अपनी नजरें उन पर से हटा कर बोला- क्या मेरे सामने पूर्ण नग्न खड़े हो कर आप लज्जित महसूस नहीं कर रही हो?

मेरे प्रश्न सुनकर वह हंस कर बोली- कल जब तुम यहाँ आये थे तब तो तुमने मेरी नाइटी के बाहर से ही झाँक कर बता दिया था कि मैंने अन्दर ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी। जब वीडियो चल रहा था तब तो तुम मेरे गुप्तांगों को बड़ी ही ललचाई नज़रों से देख रहे थे तो अब आँखें क्यों फेर रहे हो? जब तुम वीडियो में मेरे मूल्यवान खजाने को देख ही चुके हो तो मुझे इन्हें वास्तविक में दिखाने में क्यों झिझक होनी चाहिए?
मैंने आंटी की ओर देखते हुए कहा- मैं तो उम्र में आपसे छोटा हूँ और अनजाने में कई नादानियाँ कर सकता हूँ। लेकिन आप तो मुझे बड़ी हैं इसलिए आपको तो अपनी लज्जा एवं आदर का ध्यान रखना चाहिए।

आंटी बिस्तर पर पड़ी नाइटी को उठा कर पहनते हुए बिल्कुल मेरे पास आ कर बोली- नारी की लज्जा उसके वस्त्रों में होती है और जब एक बार वह किसी के सामने निर्वस्त्र हो जाती है तो उसकी लज्जा उसके उतरे हुए कपड़ों में ही सिमट कर ही रह जाती है। तुम्हारे सामने मुझे नग्न होने में कोई शर्म महसूस इसलिए नहीं हो रही क्योंकि तुम मुझे निर्वस्त्र ही नहीं बल्कि सहवास करते हुए भी देख चुके हो। तुमने मेरे हर गुप्तांग को बहुत ही बारीकी से देखा है इसलिए अगर मैं पर्दा कर भी लूं तब भी तुम मुझे प्राकृतिक मूल रूप में देख ही लोगे।

उनकी बात सुन कर निरुत्तर होने पर मैंने कहा- अच्छा इस बात की छोड़िये और उस बात पर आइये जिसके लिए मुझे यहाँ बुलाया है।
आंटी ने मेरा हाथ पकड़ कर बिस्तर की ओर खींचते हुए कहा- जब से यहाँ आये हो तब से खड़े ही हो। बेहतर होगा की हम दोनों ज़रा आराम से यहाँ बैठ कर बात करें। तुम्हें तो खुश होना चाहिए की कम से कम मैंने तुम्हारा आधा कहना तो मान ही लिया है।

मैंने अचंभित होते हुए कहा- आप ने मेरा कौन सा आधा कहना मान लिया है?
आंटी बोली- तुमने मुझे तुम्हारे पापा से अलग होने के लिए कहा था इसलिए तुम्हारे पापा के साथ कल रात का कार्यक्रम रद्द करके मैंने तुम्हारा आधा कहना तो मान ही लिया है। अब तो तुम्हें विश्वास हो जाना चाहिए की अगर तुम मेरे द्वारा सुझाया गया दूसरा रास्ता या विकल्प मान लोगे तो तुम्हारी हर इच्छा पूरी करने के लिए मैं तुम्हारे पापा के रास्ते से सदा के लिए हट जाऊंगी।
मैंने झुंझलाते हुए कहा- आंटी, आपने अभी तक ना तो दूसरा रास्ता बताया है और ना ही कोई विकल्प का उल्लेख किया है तो मेरे मानने की बात कहाँ से आई?

आंटी ने पलट कर कहा- दूसरा रास्ता तो कल बताया था जिसे तुमने कल ही नकार दिया था इसीलिए लिए तुम्हें विकल्प बताने के लिए ही आज बुलाया है। जो मैं कह रही हूँ उसे शांत मन से सुनो और उसका उत्तर सोच समझ कर ही देना।
इससे पहले कि मैं कुछ बोलता आंटी ने कहा- अगर तुम चाहो तो तुम्हारे पापा का विकल्प तुम खुद बन सकते हो। यह विकल्प मैं अपनी इच्छा से दे रही हूँ और अब सिर्फ तुम्हारी सहमति मिलने की अपेक्षा है।

आंटी ने कुछ गोल मोल बात करी थी इसलिए उसे समझने के लिए मैंने कहा- आपने जो भी कहा है वह मुझे बिल्कुल समझ नहीं आया है। अगर आप उस बात को ज़रा सरल एवं स्पष्ट शब्दों में कहेंगी तो बेहतर होगा जिससे हमारी बात आगे बढ़ सकती है।

मेरी बात सुन कर आंटी बोली- अगर तुम सरल एवं स्पष्ट भाषा में सुनना चाहते हो तो सुनो: क्योंकि मेरे पति मुझे यौन आनंद एवं संतुष्टि नहीं देते हैं इसलिए उसे पाने के लिए मुझे एक पुरुष की आवश्यकता है। वह आनंद एवं संतुष्टि मुझे तुम्हारे पापा ने दी है इसलिए मैंने उनसे सम्बन्ध बनाए थे। अगर तुम अपने पापा और मेरे बीच के यौन सम्बन्धों का अंत चाहते हो तो उनकी जगह तुम मेरे साथ यौन सम्बन्ध बना लो। मेरा ऐसा कहने का एक कारण और भी है की हम दोनों के बीच के सम्बन्ध की बात हमारे बीच में ही गुप्त रहेगी तथा किसी तीसरे को इसकी भनक भी नहीं लगेगी। मैं तुम्हारे पापा के बारे में किसी को नहीं कहूँगी और तुम मेरे बारे में किसी को नहीं बताओगे।

आंटी की स्पष्ट बात सुन कर मैं अपने को उनकी चतुराई की दाद देने से नहीं रोक सका और बोला- आंटी, सच में आपकी बात की तो सहराना करनी ही पड़ेगी। आप तो एक तीर से दो शिकार कर रही हो। पहला आप अपने आनंद एवं संतुष्टि पाने की आड़ में अपनी यौन क्रिया की भूख मिटाने के लिए एक जवान लिंग का प्रबंध कर रही हैं। दूसरा मैं कभी आपके राज़ नहीं खोल दूँ इसलिए अपनी गोपनीयता तथा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए मुझे अपने चंगुल में फसाना चाहती हैं।

मेरी बात सुन कर आंटी हँसते हुए बोली- अनु, मैंने यह बात कहने से पहले तो इस तरह का कुछ भी नहीं सोचा और ना ही मेरा ऐसा कोई इरादा है। मैंने तो तुम्हें एक विकल्प दिया है जिसमें यह समावेश करने की कोशिश करी है कि हम दोनों एक दूसरे की बात मान कर एक दूसरे की ज़रूरतें पूरी कर सकें। अगर तुम्हें यह विकल्प पसंद नहीं है तो जैसा चल रहा है वैसा ही चलने दो।
आंटी की बात के अंतिम शब्द सुन कर मैं चुप हो गया क्योंकि मैं समझ गया था की एक बहुत चतुर शिकारी नारी ने मुझे अपनी कुशलता से अपने शिकंजे में बाँध लिया था।

तभी मेरे मस्तिष्क में विचार उभर आये और मैंने सोचा की आंटी के साथ सहवास करने के लिए सहमति देने से मेरे भी दो फायदे हैं।
एक तो आंटी पापा से अलग हो जायेगी और हमारे घर पर आया खतरा टल जाएगा तथा दूसरा आंटी की वीडियो देखते समय मेरे मन में उनके शरीर को पाने की इच्छा भी पूरी हो जाएगी।

मैंने कुछ देर सोचने के बाद आंटी से कहा- आंटी, अगर मैं आप की बात मान जाऊं तो क्या आप पापा के साथ सहवास करना सदा के लिए छोड़ देंगी? अगर मेरे से भी आपको आनंद एवं संतुष्टि नहीं मिली तो आप क्या करेंगी? लेकिन मैं रात में तो आपके घर आ नहीं सकता तो आप को आनंद और संतुष्टि कैसे मिलेगी?
आंटी ने कहा- मेरे पास तुम्हारे तीन प्रश्नों का उत्तर है। हाँ मैं तुम्हारे पापा को सदा के लिए छोड़ दूंगी और इसका मैं वचन देती हूँ। मुझे पूर्ण विश्वास है कि तुम मुझे सम्पूर्ण आनंद एवं संतुष्टि प्रदान करोगे क्योंकि तुम्हारे लिंग की मोटाई तुम्हारे पापा और मेरे पति के लिंग से अधिक है। दिन हो या रात जब भी तुम्हारे अंकल घर पर नहीं हों तब तुम मुझे आनंद एवं संतुष्टि देने के लिए बेझिझक मेरे घर आ जाया करना।”

मैंने कहा- आप कैसे कह रही हो कि मेरा लिंग अंकल और पापा के लिंग से अधिक मोटा है? मैं कैसे विश्वास करूँ कि आप मुझे पूर्ण यौन आनंद एवं संतुष्टि दोगी?”
आंटी ने कहा- जैसे तुमने यह बता दिया था कि मैंने नाइटी के अंदर क्या नहीं पहना है इसी तरह जब तुम मेरे वीडियो देख रहे थे तब मैंने तुम्हारे लोअर के अंदर खड़े लिंग की मोटाई एवं उसका आकार को जाँच लिया था। इस समय तो मैं तुम्हें आश्वासन दे सकती हूँ कि सहवास करते समय आनंद एवं संतुष्टि के लिए मैं अपना सम्पूर्ण सहयोग तुम्हें दूँगी और जो तुम कहोगे वह सब करूँगी।

मैं सोच रहा था कि आंटी से क्या कहूँ तभी उन्होंने मेरे से चिपकाते हुए कहा- अगर तुम्हें कोई फैसला लेने में दिक्कत हो रही है तो मैं एक सुझाव देती हूँ। क्यों नहीं हम दोनों अभी इसी समय एक बार सम्भोग करके यह जान लें कि हमें आनंद एवं संतुष्टि मिलती है या नहीं? हम दोनों में से जिसे भी आनंद एवं संतुष्टि नहीं मिलती वह दूसरे को सत्य बोल कर बता दे कि उसने क्या कमी महसूस करी है।
उनकी बात सुन कर मैंने कहा- आंटी, आप चाहती हैं कि जैसे कोई वाहन खरीदने से पहले उसका परीक्षण यानि के ट्रायल करता है उसी तरह हम यौन सम्बन्ध से पहले दोनों एक बार यौन क्रिया कर के परीक्षण कर ले की आनंद एवं संतुष्टि मिलेगी की नहीं?

मेरी बात सुनते ही आंटी ने आगे झुक कर मुझे अपने बाहुपाश में ले कर मेरे गाल को चूमते हुए कहा- वाह, मैंने जो कहा है तुमने उसे बिल्कुल सही समझा और तुम्हारे द्वारा दी गयी उपमा की भी दाद देनी पड़ेगी। तो बोलो क्या तुम मेरे साथ एक बार यौन क्रिया कर के आनंद एवं संतुष्टि का परीक्षण करने को तैयार हो?

मैंने सोचा कि एक बार यौन क्रिया करके देख लेने में कोई क्षति नहीं होने वाली और दोनों को एक दूसरे के गुप्तांगों को देखने और महसूस करने तथा उनकी क्षमता का भी पता चल जाएगा इसलिए उन्हें परीक्षण के लिए अपनी सहमति दे दी।

मेरी सहमति मिलते ही आंटी ने तुरंत अपने बाहुपाश को कसते हुए मेरे होंठों पर अपने होंठ रख कर उन्हें चूमने एवं चूसने लगी। मैं भी उनका साथ देने लगा और उनके होंठों के बीच में अपनी जिह्वा डाल दी जिसे उन्होंने तुरंत स्वीकार करते हुए चूसने लगी।
लगभग दस मिनट तक चुम्बनों का आदान प्रदान करने और एक दूसरे के होंठों एवं जिह्वा को चूसने के बाद जब हम अलग हुए तब दोनों की साँस फूल गयी थी।

लेकिन उन फूली साँसों की परवाह किया बिना आंटी ने अपनी नाइटी उतारी और नग्न हो कर मेरी टी-शर्ट और लोअर उतारने लगी।
कुछ ही क्षणों में मैं भी नग्न हो कर दोबारा आंटी के बाहुपाश में चला गया और उनके शरीर की गर्मी को महसूस करने लगा।
आंटी के मुलायम त्वचा वाले उठे हुए ठोस उरोजों की कठोर चूचुक मेरे सीने से लग कर उसे भेदने की कोशिश कर रहे थे और उनके कामुकता से तपते शरीर की गर्मी के कारण मेरा लिंग भी अर्ध चेतना की स्थिति से जाग कर पूर्ण चेतना में खड़ा हो गया।

जैसे ही आंटी को उनकी जाँघों पर मेरे सख्त लिंग की चुभन महसूस हुई तब उन्होंने उसे एक हाथ से पकड़ कर सहलाने लगी। आंटी द्वारा मेरे लिंग को सहलाने से जब मेरी उत्तेजना में वृद्धि होने लगी तब मैंने भी उन्हें उत्तेजित करने की मंशा से उनके उरोजों को मसलने एवं चूसने लगा।
मेरे द्वारा आंटी के उरोज चूसना शुरू करने के दो मिनटों में ही उनके मुंह से सिसकारियों का संगीत निकलने लगा और पाँच मिनट उपरान्त वह सिसकारियाँ ऊँची सीत्कारियों में बदल गयी।

आंटी का शरीर रह रह कर लहराने लगा और जब उन्होंने मेरे लिंग को अपने जघन-स्थल पर रगड़ने लगी तब मैंने अपने एक हाथ से उनके भगान्कुर को सहलाना शुरू कर दिया।
बस फिर क्या था आंटी के मुख से हर आधे मिनट के बाद सिसकारी और एक मिनट के बाद एक सीत्कार निकल जाती तथा उनके भगान्कुर से निकल रही तरंगों के कारण उनका शरीर मचल जाता।
तीन चार मिनट तक यह क्रिया करते रहने के बाद आंटी ने एक बहुत ही जोर की सीत्कार मारी और मुझसे अलग हो कर अपनी टांगों को कस के भींचते हुए बिस्तर पर लेट गयीं।
मेरे पूछने पर की क्या हुआ तो वह बोली- मेरे पूरे शरीर में झनझनाहट होने लगी थी और अब मेरी योनि के अंदर बहुत तेज़ सिकुड़न तथा खिंचावट हो रही है। बिल्कुल वैसी ही जैसी तुम्हारे पापा के साथ पहली बार संसर्ग कर रही थी।

आंटी की बात सुन कर मैं भी उनके साथ ही बिस्तर पर लेट गया तथा उनके शरीर के अलग अलग अंगों पर अपने हाथ फेरता रहा।
दो मिनट शांत लेटे रहने के बाद आंटी पहले तो उठ कर कुछ क्षणों के लिए बैठी फिर पलट कर मेरे पाँव की ओर सिर करके लेट गयी और मेरे लिंग को अपने मुंह में डाल कर चूसने लगी।
मैं आंटी की चूचुकों को अपनी उँगलियों के बीच में मसलते हुए सोच ही रहा था कि मैं क्या करूँ कि इतने में आंटी ने मेरे मुंह के आगे अपनी योनि करते हुए मुझे उसे चाटने का इशारा किया।
मैंने तुरंत अपने मुंह को उनकी योनि पर लगा कर पहले तो अपनी जीभ से उनके भगान्कुर को सहलाने और बाद में जीभ को उनकी योनि के अन्दर डाल कर घुमाने लगा।

आंटी की चूचुकों पर मेरे हाथों और मेरी जीभ द्वारा भगान्कुर एवं योनि के अंदर एक साथ किये गए आक्रमण के कारण अगले तीन मिनट में आंटी अपने कूल्हे उचकाने लगी तथा सीत्कारियों मारने लगी।

उसके दो मिनट के बाद उन्होंने बहुत ही ऊँचे स्वर में सीत्कार मारते हुए अपनी दोनों जाँघों एवं टांगों को भींच लिया और उनके शरीर में स्पंदन होने लगा।
आंटी के तुरंत अपने मुंह से मेरे लिंग को बाहर निकालते हुए कहा- अनु, अब रहा नहीं जाता तुम जल्दी से मेरे ऊपर आ जाओ और संसर्ग शुरू करो।

कहानी जारी रहेगी.
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