हम भी इन्सान हैं-2

प्रेषक : सिद्धार्थ शर्मा

मार्च अप्रैल में हमारे इम्तिहान चले, तो हमने अपनी पढ़ाई पर ध्यान दिया।

फिर आया मई ! मई का आना क्या था, मैं उसे रोज चोदने लगा। अचानक एक दिन अचानक मुझे रास्ते में उसकी बड़ी बहन जो शादीशुदा हैं, मिल गई, उनके पति मरीन इंजिनियर हैं इस चक्कर में वो कई कई महीने बाहर रहते हैं।

वो मेरे पास आई और बोलीं- मुझे तुम्हारे और अनुपमा के बीच जो कुछ भी चल रहा है सब पता है। मैं तुम्हारे मम्मी पापा को सब बताऊँगी।

मैं डर गया, मैंने कहा- दीदी, किसी को मत बताइयेगा !

मुझे ऐसे देख कर दीदी बोलीं- ठीक है, पर तुम्हें मेरा काम करना पड़ेगा !

मैं बोला- ठीक है, कर दूंगा।

उन्होंने कहा- कल मेरे घर पर दस बजे पहुँच जाना !

दीदी का घर शहर के दूसरे छोर पर था। मैं डरते डरते उनके घर पर पहुँचा और बेल बजाई।

उन्होंने गेट खोला। वो घर पर अकेली थी शायद। उन्होंने एक गहरे गले का टॉप और काली पजामी पहन रखी थी। जो भी हो, वो बहुत सुन्दर और सेक्सी लग रही थी।

उन्होंने मुझे बहुत डरा देख कहा- चल अन्दर आ जा !

उन्होंने मुझे बिठाया और पानी पिलाया।

थोड़ी देर में मैंने उनसे पूछा- दीदी, क्या काम करना है? बोलो !

तो वो तपाक से बोलीं- जो तू रोज करता है !

वो उठ कर मेरे बगल में बैठ गई, उन्होंने मेरे लंड पर हाथ रखा और बोलीं- मेरे पति महीनों घर से बाहर रहते है और मुझे दिन-रात बस अकेले रहने पड़ता है। उन्होंने कहा- उस दिन तुम्हारी और अनुपमा की चुदाई देख कर मेरी चूत गीली हो गई थी।

और उन्होंने कहा- आज मेरी प्यास बुझा दो।उनके यह कहने भर से मेरा डर भाग गया। मैं उनके स्तन उनके टॉप के ऊपर से सहलाने लगा। उनके स्तन बहुत बड़े थे और उन्होंने अन्दर ब्रा तक नहीं पहनी थी, उनका हाथ भी मेरे लंड को सहला रहा था।

उन्होंने मेरी जींस की जिप खोल दी और मेरे लंड को बाहर निकाल लिया। वो ज़मीन पर बैठ गई और मेरे लंड को चूसना शुरू किया। सच में साली क्या लंड चूसती थी ! कभी लंड को पूरा मुँह में ले लेती थी तो कभी अपनी जुबान से लंड चाटती थी।

शादीशुदा औरत अलग ही होती है !

मैंने उसे खड़ा किया और उसके टॉप को निकाला।सच में उसके स्तन बहुत बड़े थे, मैंने एक को मुँह में लिया, एक बार तो उनके निप्पल को काट भी लिया। वो चिल्ला पड़ीं।

मैंने फिर उन्हें सोफ़े पर बैठाया और उनके पयजामी को उनकी टाँगों पर से केले के छिलके की तरह से उतारा, उन्होंने काली पैंटी पहन रखी थी, मैंने अपने शरीर से भी सारे कपड़े उतार दिए। मैंने उनकी पैंटी पर से ही उनकी चूत रगड़नी शुरू कर दी।

वो बहुत गरम थीं, उनकी चूत बहुत गीली थी। मैंने भी जोर लगा के उनकी पैंटी फाड़ दी और उनकी चूत में अपनी जुबान डाल दी। उनके मुँह से आआह्ह की आवाज निकली और उन्होंने मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत में दबाना शुरू किया। पाँच मिनट के बाद मैं खड़ा हुआ और अपना लंड उनकी चूत पर रगड़ने लगा और एक ही झटके में लंड उनकी चूत में पेल दिया।

वो तैयार नहीं थीं इस हमले के लिए और गलियाने लगीं मुझे, पर मैं रुका नहीं, उन्हें चोदने लगा, कभी अपना लंड पूरा बाहर निकालता और एक बार में ठूंस देता !

उन्हें अब मज़ा आ रहा था, चिल्ला रहीं थी पागलों की तरह- सिद्धार्थ चोद ! मुझे जोर से चोद !

मैंने फिर उनको उल्टा किया और पीछे से लंड डाला उनकी चूत में। थोड़ी देर में वो झड़ गई, मैं भी झड़ने वाला था तो वो बोलीं- चूत में न झाड़ना।

और तुरंत मुड़ कर उन्होंने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। मैं उनके मुँह में झड़ गया। थोड़ी देर में वो अन्दर गई और कुछ रुपये ले कर आईं और मुझे देने लगीं तो मैंने कहा- यह क्या?

तो कहती- तुम्हारा ईनाम ! काम करते रहो, ईनाम मिलता रहेगा।

यह भी बोलीं- अगर बाहर भी काम करना हो तो बोलो ! मेरी जैसी बहुत हैं जिनके पति 6-7 महीने तक शिप पर रहते हैं और वो भी चुदाई के लिए मरती हैं।

मेरे लिए इससे अच्छा क्या था, मैंने हाँ बोल दी। उसके बाद मैंने 7-8 औरतों को चोदा और अच्छा खासा कमाने लगा।

पर उनमें से एक औरत की कहानी जरुर बताऊँगा आप सबको।

उसका नाम आलिया था और उसकी शादी को तो 8 साल हो चुके थे पर तब भी वो बहुत ही खूबसूरत थी। उसने मुझे घर बुलाया था। जैसे भी मैं उसके घर पहुँचा, मैं ठीक से देख भी नहीं पाया था कि उसने मुझे अन्दर खींचा और दरवाजा बंद कर दिया।

मैं कुछ समझ पाता इससे पहले वो मेरे को सोफा पर धकेल कल मेरी जींस खोल चुकी थी। उसने लाल टॉप और नीली जींस पहन रखी थी।

उसने तुरंत मेरा लंड निकाला और उसे मुँह में लेकर चूसने लगी, मेरा लंड तुरंत ही तन गया। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ रहे हैं।

थोड़ी देर में वो पीछे गई और खुद ही अपने कपड़े निकाल दिए, बड़ी अदा से उसने कपड़े उतारे, पहले तो अपने टॉप को उतारा, फिर पीछे मुड़ गई जिससे उसकी गांड मेरे सामने हो गई थी, फ़िर वो हल्का सा झुकी और अपनी जींस निकालने लगी, बड़ी नशीले अंदाज में इशारा करके मुझसे बुलाया।

अब वो सिर्फ लाल ब्रा और लाल पैंटी में थी। मैंने पहले अपने सारे कपड़े उतारे और उसके पास गया। मैंने पीछे से उसे पकड़ा और उसके चूच्चे सहलाने लगा।

सच में एक गर्म माल लगी थी हाथ ! मैंने एक हाथ से उसके स्तन दबाना चालू रखा और एक हाथ उसकी चूत पर ले गया। वो बहुत गर्म हो चुकी थी। मैंने उसे अपनी गोद में उठाया और उससे बेडरूम का रास्ता पूछा, फिर उसी के बेड पर जाकर पटक दिया। मैंने उसकी पैंटी उतारी और उसकी ब्रा भी।

अब वो नंगी पड़ी थी मेरे सामने ! मैंने उसकी चूत चटनी शुरू की। शुरू किया ही था कि वो झर गई। उसने फिर मुझे लिटा दिया और खुद अपनी चूत का मुँह फैला कर मेरे खड़े लंड पर बैठ गई, एक झटके में पूरा लंड उसकी चूत में समां चुका था। वो खुद ही ऊपर नीचे होकर मुझे आनन्द दे रही थी।इतना मज़ा तो मुझे कभी नहीं आया था।

लगभग दस मिनट यह कामक्रिया चली, फ़िर उसने कहा- अब नहीं सहा जा,ता मेरी गांड मार लो तुम।

मेरा क्या, मेरे तो दोनों हाथ में लड्डू था, मैंने उसको खड़ा किया और बेड पर झुकने को कहा।

मैंने अपने लंड पर थूक लगाया और उसकी गांड पर अपना लंड दबाने लगा। उसकी गांड बहुत कसी थी पर किसी तरह लंड अन्दर गया। उसकी गांड की गरमाई ने मुझे पागल कर दिया था।

मैंने उसकी गांड मारनी शुरू की। इतनी कसी गांड, ऊपर से साली ने अपनी गांड के छेद को और कस रही थी।

पर मैंने भी सोचा कि आज साली को मज़ा देता हूँ, पूरा लंड बाहर खीचा और एक बार में लंड उसकी गांड की गहराइयों में ठेल दिया।

वो चिल्लाई, पर कहने लगी- मादरचोद और अन्दर तक डाल !

थोड़ी देर में मैं उसकी गांड में झड़ गया।

यह मेरी ज़िन्दगी का सबसे अच्छी चुदाई थी।

जाते समय उसने मुझे पाँच हजार रुपये दिए और दोबारा आने को कहा।

तो कैसी लगी आपको मेरी कहानी, मुझे बताइयेगा जरूर !

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प्रकाशित : 13 जून 2013

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