भाभी की ननद और मेरा लण्ड-4

(Bhabhi Ki Nanad Aur Mera Lund-4)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

दलबीर सिंह
मैंने अपनी कहानी के पिछले भाग में लिखा था कि कैसे भाभी ने योजना बना कर मुझे माला की चूत दिलवाई और खुद भाभी ने भी मुझसे उस रात में दो बार चुदाई करवाई।

उस रात बहुत बढ़िया नींद आई सुबह दिन निकलने से पहले मैंने और भाभी ने एक बार और चुदाई करी माला के साथ दर्द के कारण उस समय दोबारा नहीं कर पाया।

जब मैं शाम को भाभी के घर पहुँचा तो जाने से पहले 15-20 गिरियाँ बादाम की खाकर गया कि आज तो दोनों की चूत लूँगा और कहीं कल की तरह थकावट ना हो जाए, पर जैसे ही मैं भाभी के घर पहुँचा तो भाभी बड़ी थकी सी लग रही थी।

मैंने भाभी से पूछा- क्या हुआ? ऐसे थकी सी क्यों लग रही हो?
तो वो बोली- कुछ नहीं यार, मेरे पेट में दर्द हो रहा है।
मैंने कहा- दवाई ला दूँ क्या?
तो भाभी बोली- यह दवाई से नहीं जायेगा, यह महीने का दर्द है।

मैं मन ही मन खुश हो गया कि चलो नई चूत मिलेगी पुरानी का मौका तो मिलता ही रहेगा।
भाभी बोली- बिट्टू, मैं तो कुछ कर नहीं पाऊँगी आज !

मैंने अपनापन जताते हुए कहा- भाभी कोई बात बात नहीं, आप ठीक हो जाओ, यह सब तो होता ही रहेगा, जब आप ठीक हो जाओगी तब कर लेंगे, अभी आप आराम करो।

यह कहते हुए मैं बैडरूम में चला गया, माला वहाँ बैठी थी और कोई मैग्जीन पढ़ रही थी। मैंने धीरे से जाकर पीछे से उसकी आंखें बंद कर ली, उसने भी कोई विरोध नहीं किया, शायद वो समझ गई थी कि यह मैं ही हूँ। उसने अपना शरीर और ढीला छोड़ दिया मैंने भी हिम्मत करते हुए अपना हाथ उसकी आँखों से हटा कर आराम से नीचे की ओर खिसका दिए और कमीज़ के ऊपर से ही उसकी चूचियों पर फेरने शुरू कर दिए।

10-12 सेकेण्ड में उसकी साँसें तेज़ होने लगीं, पर फिर वो खुद संभाल कर बोली- बहुत जल्दी है क्या? थोड़ा तो सब्र करो।
मैंने भी उसकी बात समझते हुए अपने हाथ पीछे खींच लिए।

माला उठी और बोली- सब्ज़ी तो तैयार है, मैंने टाइम से ही बना ली थी, बस फुल्के उतारने हैं।

इतने में भाभी भी अंदर आ गई और बोली- माला, खाना अभी खाओगे क्या तुम लोग? तो मैं रोटियाँ सेक दूं !
तो माला बोली- भाभी, आप आराम कर लो, रोटी मैं बना लेती हूँ, बल्कि आप गर्म गर्म खा लो, मैं रोटी सेकती हूँ और बिट्टू आपको पकड़ा देगा।

एक बार मना करके फिर भाभी मान गई माला ने गैस जलाई और रोटी सेकने लगी, मैंने भाभी को खाना खिला दिया।

फिर माला बोली- बिट्टू, एक काम करो तुम भी यहीं मेरे पास आ जाओ, मैं तुम्हे भी गर्म गर्म खिला देती हूँ।
मैंने बोला- ठीक है जानू !

मैं भाभी के खाने के बर्तन लेकर रसोई में आ गया और दोबारा बैडरूम में जा कर भाभी को रजाई निकाल कर दे आया कि भाभी आप आराम कर लो।

मैंने रसोई में आने के बाद माला से कहा- लाओ डार्लिंग, खाना दो !
उसने मेरी तरफ तिरछी नज़र से देखा और मुस्कुरा कर बोली- अभी लो जी !
जैसे औरतें अपने पति को बुलाती हैं।

उसका ऐसे कहने का अंदाज़ बड़ा मस्त था। माला ने मुझे खाना लगा कर दिया और मैं भी उसके पास ही बैठ गया और अपने साथ साथ उसे भी खाना अपने हाथ से खिलाने लगा और वो भी रोटी बिल्कुल प्यार से पका कर मुझे दे रही थी और साथ साथ खुद भी खा रही थी। यह भी एक ऐसा अनुभव था जो मुझे अपने जीवन में पहली ही बार हासिल हो रहा था।

हम दोनों ने साथ खाना खाया और मैं उसे बोला- एक काम करो, तुम बर्तन मांज लो, मैं दूध गर्म कर लेता हूँ।
तो माला बोली- तुम रहने दो।
मैंने कहा- इससे टाइम बचेगा !
तो उसने सहमति में अपना सर हिला दिया और बोली- ठीक है !

जितनी देर में उसने बर्तन मांजे, मैंने दूध गर्म कर लिया था। इसके बाद माला ने बाहर का गेट लॉक किया और मैं दूध लेकर अंदर चला गया, अंदर जाकर मैंने रूम हीटर चालू कर दिया और दूध का पतीला उसके सामने रख दिया, फिर भाभी से बोला- भाभी, सोना कैसे कैसे है?

भाभी बोली- मैं छोटी वाली रज़ाई ले रही हूँ, तुम दोनों बड़ी रज़ाई में लेट जाओ !

माला भी अंदर आ चुकी थी और अब वो बाथरूम में चली गई थी पेशाब करने तो भाभी बोली- बिट्टू, आज मैं तो कुछ कर नहीं सकती, तुझे इसी से अपना काम चलाना है, आज ढंग से सब कुछ कर लेना और कोई कपड़ा रख लेना साफ़ करने के लिए !

मैं मन ही मन सोच रहा था ‘अँधा क्या मांगे, दो आँखें’

माला पेशाब करके आई तो मैं भी पेशाब करने चला गया और आज के बारे में सोच कर रोमंचित हो रहा था और मेरे लण्ड महाराज तो अभी से अपना सर उठाये तैयार हो रहे थे और तनाव की वजह से मुझे पेशाब करने में कुछ अधिक समय लगा क्योंकि पुरुषों की पेशाब और वीर्य के लिए एक ही नलकी होती है और जब लण्ड तना हुआ हो तो पेशाब वाली नलकी पर दबाव पड़ता है इससे सभी पुरुषों को तनाव के समय पेशाब करने में ज्यदा टाइम लगता है।

मेरे पेशाब करके आने तक माला रजाई में घुस चुकी थी मैंने भी बाथरूम से बाहर आकर हाथ पोंछे और मैं भी रजाई में घुस गया, आज सोने की स्थिति थोड़ी सी बदली हुई थी, भाभी दीवार की तरफ सोई थी फिर माला और फिर बाहर की तरफ मैं था।

लेटने के बाद कुछ पल तो मैं शांत लेटा रहा और उम्मीद कर रहा था कि माला पहल करेगी, पर कुछ देर तक उसकी तरफ से पहल न होने पर मैंने ही पहल की, मैंने माला की तरफ करवट ले ली और अपना बांया हाथ उसके पेट पर रख दिया।

मेरे हाथ रखते ही उसके जिस्म में एक सिहरन सी दौड़ गई जो कि मैंने स्पष्ट महसूस की। हालांकि कल हमारे बीच में सब कुछ हो चुका था पर फिर भी एक अनजान सी झिझक लग रही थी। मैंने सर उठा कर भाभी की तरफ देखा, भाभी भी हमारी तरफ देख रही थी और मुझसे आँखें मिलते ही बोली- क्या हुआ? आज मेरी तो छुट्टी है अब तुम दोनों तो एन्जॉय कर लो, दो दिन का ही समय है फिर तो इसके भैया आ जायेंगे फिर कोई मौका नहीं मिलेगा।

भाभी की बात मैंने अंदर तक महसूस की और सोचा कि अब देर करना ठीक नहीं है, मैंने अपने हाथों को हरकत देनी शुरू कर दी और धीरे से अपने हाथ को उसके पेट से ऊपर की तरफ सरकाते हुए उसकी चूचियों की तरफ बढ़ाया और धीरे से उसकी चूचियों पर ले गया, यह जान कर मुझे बड़े ज़ोर का झटका लगा कि उसने ब्रा नहीं पहन रखी थी, यानि कि वो पहले से ही तैयार थी बस मेरी पहल की ही ज़रूरत थी और जैसे ही मैंने उसकी कमीज़ के ऊपर से ही उसकी घुंडियों को पकड़ा, चने के दाने के बराबर के निप्पल मेरे हाथ लगते ही टाईट होने लगे थे, साथ ही उसके मुंह से आवाज़ निकली- सीईईई आआह्हह ह्हह !

और इस आवाज़ ने मेरे लिए सिग्नल का काम किया, इसके साथ ही मैंने अपना हाथ कमीज़ के ऊपर से हटा कर उसकी कमीज़ के अंदर डाल दिया और बारी बारी से उसकी दोनों चूचियों के सहलाने और दबाने लगा।

अब उसने करवट लेकर अपना मुँह मेरी तरफ कर लिया और अपने तपते हुए मेरे होंठों पर रख कर चुम्बन करने लगी। अब जब सामने से बत्ती हरी हो तो फिर मौका कौन गंवाता है, मैंने भी तुरंत उसके होंठों को अपने होंठों में कैद कर लिया और लगा बड़े प्यार से चूसने कभी, उसका निचला होंठ मेरे मुँह में आ जाता और कभी ऊपर वाला और वो भी बराबर प्रत्युत्तर दे रही थी।

जैसे ही मैं उसका ऊपर वाला होंठ अपने मुंह में भरता तो वो मेरा निचला होंठ चूसना शुरू कर देती और जब मैं उसका निचला होंठ चूसता तो वो मेरा ऊपर वाला होंठ अपने मुंह में भर के चूसना शुरू कर देती और साथ ही हमारे दोनों के मुंह से मंहह अमूउह्ह की अस्प्ष्ट सी आवाज़ें निकल रही थीं।

उसके करवट लेने से मेरा सीधा हाथ तो उसके सर के नीचे आ गया था पर मेरा बायाँ हाथ बराबर अपना काम कर रहा था और बारी बारी से दोनों चूचियों को मसल रहा था। उसकी चूचियों को मसलते हुए कब मेरे हाथ नर्म से सख्त हो गए, मुझे पता ही नहीं चला, अब मैंने उसकी कमीज़ को ऊपर की ओर उठाना शुरू कर दिया और उसके भरे भरे मम्मों को कमीज़ से बाहर निकाल लिया और अपना मुंह उसके होंठों से हटा कर उसकी चूचियों को चूसना शुरू कर दिया बारी बारी से कभी एक तो कभी दूसरी, उसके निप्पल एकदम सख्त हो गए थे।

इधर मैंने अपना हाथ जो उसकी चूचियों से हटाया था उसकी सलवार के अंदर डाल दिया अब मुझे दूसरा झटका लगा जब मैंने देखा कि आज उसने पेन्टी भी नहीं पहन रखी थी जैसे ही मेरा हाथ सरकता हुआ उसकी छोली (भग्नासा) पर लगा तो वो एकदम से मचल उठी और एकदम ऐसे फ़ड़फ़ड़ाई जैसे पानी से निकलने पर मछली तड़पती है और साथ ही ‘आअह्ह आआःहह’ की आवाज़ उसके मुंह से निकली और उसके हाथ ने मेरे पजामे के ऊपर से ही मेरे तनतनाते हुए लौड़े को एकदम कस कर पकड़ लिया और पूरे जोर से भींचने लगी।

जोश तो पूरा आ रहा था पर मैं तो आज दो को चोदने की तैयारी करके आया था इस लिए आने से पहले मैं एक बार मुठ मार के आया था क्योंकि अगर एक बार पहले से ही मुठ मार ली जाये तो फिर आदमी को झड़ने में समय ज्यादा लगता है और आदमी ज्यादा देर तक चुदाई कर सकता है। इस लिए मुझे कल की भांति यह डर नहीं था कि काम जल्दी हो जायेगा। मैंने उठ कर अपनी कमीज़ और बनियान एक साथ ही उतार दिए और पजामे का नाड़ा भी खोल दिया। इसके बाद मैंने माला के सर के

नीचे हाथ डाल कर उसे उठाया और जैसे ही उसकी कमीज़ को पकड़ा उसने अपने दोनों हाथ ऊपर की तरफ उठा दिए और कमीज़ उतारने में मेरी सहायता कर दी।
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दोनों के ऊपर के कपड़े उतर चुके थे, मेरे पजामे का नाड़ा भी खुल चुका था और उसकी सलवार खोलनी बाकी थी जिसमें कि मैंने एक मिनट भी नहीं लगाया और उसका नाड़ा खींच कर खोल दिया और सलवार को नीचे की तरफ खींचा तो उसने अपने चूतड़ उठा दिए और मैंने उसकी सलवार भी जल्दी से उतार दी।

अब माला के जिस्म पर तो एक धागा तक नहीं था और मेरे जिस्म पर पजामा था और मैं चाहता था किसी तरह से माला को गर्म कर दूँ क्योंकि औरत पूरी तरह से सहयोग सिर्फ तब ही करती है कि या तो वो सेक्स अभ्यस्त हो या फिर पूरी तरह से गर्म हो !

आज मैं अपने पूरे के पूरे ज्ञान को आजमाना चाहता था इसलिए मैंने अपने आप को आज चूत चाटने के लिए तैयार किया था पर अभी मानसिक रूप से पूरी तरह से मैं तैयार नहीं था, मैं यह भी चाहता था कि आज माला की चुदाई कुछ इस तरीके से करूँ कि उसे मज़ा भी आ जाये और वो याद भी रखे।

मैं उसकी चूत चाटना चाह रहा था पर साथ ही मन में कुछ घिन सी भी थी। फिर मैंने अपने आप को मानसिक रूप से तैयार किया और पलटी मर के अपना मुंह रजाई के अंदर कर के अपना मुंह मैंने माला की चूत की तरफ कर लिया और अब मेरी टाँगें माला के सर की तरफ थीं। मैंने अपना मुंह उसकी चूत पर लगाया, थोड़ा सा उबकाई जैसा महसूस हुआ पर फिर भी मैंने अपना मन कड़ा करके अपनी जीभ उसकी चूत पर लगा दी, उसकी चूत काफी गीली थी और उसमें से जो पानी सा निकला था वो बिल्कुल उसी तरह का था जो मुठ मरने से पहले चिपचिपा सा मेरे लण्ड में से निकलता था, उसकी चूत में थोड़ी अलग तरह की गन्ध थी।

मैंने अपनी हिम्मत जुटाई और अपनी जीभ उसकी चूत पर लगा दी थोड़ा चिपचिपा और नमकीन सा स्वाद चूत का और मेरे जीभ लगते ही उसके मुंह से आह्ह्ह की आवाज़ निकली और उसने मेरा पजामा और अंडरवियर एक साथ नीचे को खींच कर मेरी टांगों में से निकाल दिया।

मैंने सोचा कि अब वो मेरे लण्ड को अपने मुंह में लेगी।

कहानी जारी रहेगी।
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