पड़ोस के सलीम भाईजान-3

(Pados Ke Salim Bhaijaan-3)

सेक्स कहानी के पिछले भाग
पड़ोस के सलीम भाईजान-2
में आपने पढ़ा कि कैसे एक सीधी सादी नवविवाहिता अपने किरायेदार के जाल में फंस गई और उसकी कामुकता ने उसके जिस्म को अपने वश में कर लिया.

सलीम ने अपना आखिरी कपड़ा अपनी अंडरवीयर उतारी तो उसका बड़ा सा अजगर उछल कर बाहर निकला और उसके पेट पे टकराया।

उसका बड़ा मूसल देख कर नीतू को शॉक ही लगा, वो उसकी तुलना अपने पति के लंड से करने लगी। नितिन का लंड भी लंबा मोटा था लेकिन सलीम का लंड मानो अजगर ही था। अपनी जिंदगी का दूसरा लंड देख रही थी।

नीतू का यहाँ से वापस लौटना अब नामुमकिन था, उसके शरीर ने बगावत कर दी थी, वासना ने उसके मन पर कब्जा कर लिया था।

अब आगे:

सलीम अब बैड पे घुटनों के बल बैठ गया, अपने सामने डोलता हुआ उसका बड़ा मूसल नीतू आंखें फाड़ कर देख रही थी। सलीम का लंड लंबा था… साधारण छह सात इंच लांबा। रिवाज की वजह से पूरी तरह से खुला चॉकलेटी रंग का टोपा हल्के से प्रीकम की वजह से चमक रहा था, लंड की नसें फूली हुई थी; लंड बिल्कुल किसी नीग्रो के लंड जैसा लग रहा था।

नीतू ने नजर उठा के सलीम की तरफ देखा और धीरे से उसके लंड को अपने दायें हाथ से पकड़ लिया। वह लंड उसके हाथों में पूरी तरह समा भी नहीं रहा था। नीतू ने हल्के से अपना हाथ उसके पूरे लंड पर घुमाया फिर लंड को अपने नाजुक हाथों से पकड़ कर मुठ मारने लगी।
सलीम को तो मानो ऐसा महसूस हो रहा था कि उसका लंड कोई नाजुक चुत के अंदर बाहर हो रहा हो।

बीच में ही वो सलीम के दोनों बॉल्स को पकड़ कर हल्के से मसाज करती और सोचती इसमें कितना रस भरा होगा।

नीतू ने अब दोनों हाथों से लंड को पकड़ा और ज़ोर से मुठ मारने लगी; सलीम सिसकार उठा; एक कामुक लहर उसके लंड से दिमाग तक पहुंची। दोनों ने उसी वक्त एक दूसरे की तरफ देखा। दोनों की ही आंखों में हवस बह रही थी।

थोड़ी देर ऐसे ही मुठ मरवाने के बाद सलीम अपना हाथ नीतू के सर के पीछे ले गया, उसके बालों को पकड़ते हुए उसका मुंह अपने लंड की तरफ धकेलने लगा। नीतू का मुंह उसके लंड के पास आते ही सलीम को क्या चाहिए समझ में आ गया, उसने भी ज्यादा विरोध ना करते हुए अपना मुंह जितना खुलता है उतना खोला और लंड का टोपा अपने मुंह में लिया।

आखिरकार सलीम का लंड नीतू के मुँह में बिना विरोध चला गया।

सलीम ने धीरे से धक्का दिया उससे उसके लंड का टोपा नीतू की नाजुक होठों में और अधिक घुस गया। धीरे धीरे उसने अपना लंड तीन इंच तक अंदर घुसा दिया और उससे ही नीतू की साँसें अटक गई।
उसने झट से लंड बाहर निकाला और खाँसने लगी।

सलीम इस बात पे हंसने लगा तो नीतू भी हंसने लगी। नीतू हल्के से मुस्कुराई और अपना मुँह उसके लंड के तरफ ले गयी।

सलीम को यह समझते देर नहीं लगी कि नीतू ओरल सेक्स में नई है और उसका पूरा लंड अभी अपने मुँह में नहीं ले सकती। नीतू अब लंड का टोपा और जरा सा लंड अपने मुख में लेकर चूसने लगी। एक लाजवाब हुस्न की परी उस काल विद्रूप राक्षस का लंड चूस रही है, यह अहसास ही उसको झड़ने के करीब ले जा रहा था।

नीतू भी आश्चर्य में थी, इसके पहले उसने किसी पर पुरुष को खुद को छूने भी नहीं दिया था पर अब… अब वह एक पराये मर्द का लंड ऐसे चूस रही थी, मानो आइसक्रीम चूस रही हो। नीतू अब उसके लंड पर जीभ घुमाने लगी। लंड बाहर निकालकर सलीम की तरफ देखते हुए लंड पर किस करने लगी, फिर अपनी जीभ बाहर निकालकर उसके पूरे लंड को चाटती।

सलीम ने नीतू को अपने बॉल्स चाटने को बोला। नीतू अब एक नया अवर्णनीय अनुभव ले रही थी। वह अब ये पूरी तरह भूल गई थी कि वह एक शादीशुदा औरत थी, उसके साथ उसके बैड पर उसका पति नहीं एक पराये धर्म का आदमी था।
जैसे ही उसे याद आया कि वो किसी विधर्मीय गैर मर्द के साथ है, तो यह पाप करता सोचकर ही वह उत्तेजित हो गई थी।

यह सब होते हुए उनके बीच में कोई संभाषण नहीं हो रहा था; आ रही थी तो सिर्फ सिसकारियों की, तेज सांसों की, चूसने की, किस करने की, चाटने की आवाजें!
वासना में डूबे दो जिस्म एक दूजे को अपरमित सुख देने में व्यस्त थे।

सलीम ने अचानक अपना लंड उसके मुँह से निकाला तो नीतू ने नाराजगी जताते हुए सलीम की तरफ देखा।
तब सलीम पहली बार बोला- नीतू… जान, कुछ अलग ट्राय करते हैं!
नीतू ने सोचा कि आज रात को वह जो भी कर रही हैं वह सब उसके लिए नया है, तो अब यह आदमी और क्या नया करना चाहता है।

सलीम ने नीतू को पीठ के बल लिटाया और उसके स्तन चूसने शुरू कर दिए, दोनों स्तनों के बीच की जगह भी उसने चाट चाट के गीली कर दी। फिर अपने दोनों घुटने नीतू के दोनों साइड पे रख कर उसके ऊपर बैठ गया। उसने अपना लंड नीतू के स्तनों के बीच रखा और नीतू को अपने बूब्स उसके लंड पर दबाने को बोला जो उसने बिना कोई सवाल पूछे किया।

सलीम अब धीरे धीरे अपना लंड नीतू के बूब्स में अंदर बाहर करने लगा। उसका कड़क लंड नीतू की मुलायम त्वचा से घिसने के अहसास से उसके मुँह से सिसकारी निकल गयी और नीतू की ओर देखते हुए वह बोला- नीतू… इसे बूब जॉब बोलते हैं… तुम्हारे बूब्स है ही इतने सुंदर… कि मैं अपने आप को रोक ही नहीं पाया, तुम को अच्छा लग रहा है ना?

उसके सवाल पर शर्मा कर हल्के से मुस्कुराते हुए हाँ में सर हिलाया। आज रात वह ऐसी चीजें कर रही थी जो कि उसने अपने शादीशुदा जिंदगी में कभी नहीं की थी। अपने स्तनों के बीच एक कड़क मूसल उसको एक अलग ही अनुभूति दे रहा था, बीच बीच में सलीम उसके निप्पल्स को अपनी उंगलियों से पकड़ के मसलता और खींचता।

सलीम का लंड अब उसकी ठोड़ी पर टकरा रहा था। नीतू ने अपना मुँह इस तरह से एडजस्ट किया और खोला कि उसके ठोड़ी पर टकरा रहा लंड डायरेक्ट उसके मुँह में आ जाये। जैसे ही सलीम का लंड नीतू की मुँह में घुसा, नीतू ने उसको अपने होठों में पकड़ा और उस पर अपनी जीभ घुमाई, सलीम के मुँह से सिसकारी बाहर निकली। उसके लंड से निकला प्रीकम नीतू की जबान पर लगा, उसको भी उसका नमकीन स्वाद अच्छा लगा। उसको अब और लंड का पानी चाहिए था, उसको अब सब पानी चाहिए था।

सलीम के स्तन चोदन की वजह से नीतू को सांसें ज़ोर से चल रही थी, वह अब फिर से झड़ने वाली थी, एक ही रात मैं तीसरी बार।
पर सलीम… वह तो थकने का नाम ही नहीं ले रहा था, वह एक लय में नीतू के स्तनों को चोद रहा था।

कुछ देर लगातार चोदने के बाद वह भी झड़ने के करीब आ गया था, उसका लंड भी थरथराने लगा; देखते ही देखते उसके लंड से पहली पिचकारी निकली… सीधा नीतू के गले के अंदर… उसके बाद की तीन चार पिचकारियां नीतू के जीभ, होठों पे गिरी।

इस अचानक घटना से नीतू का दम घुटने लगा, सलीम ने अपना लंड बाहर निकाला और बाकी की पिचकारियां नीतू के मुँह पे, आंखों पर, बालों पर छोड़ दी। गले में उतरे हुए वीर्य का स्वाद नीतू को बहुत अच्छा लगा।
जैसे जैसे सलीम का जोर कम होता गया वैसे वैसे वीर्य उसकी ठोड़ी, गले पर पड़ने लगा, जैसे मोतियों की माला!

मुँह में होठों पर पड़ा वीर्य नीतू चाट गयी और अपनी साफ जीभ सलीम को दिखाई।
दोनों ही एक दूसरे की तरफ देख कर हँसे।

फिर नीतू ने ग़ले पे, आँखों पर पड़ा वीर्य उंगलियों से इकट्ठा किया और अपने मुँह में डाला। सलीम ने भी गर्दन पे पड़ा वीर्य अपने मूसल लंड पे इकट्ठा किया और लंड नीतू की मुँह में डाल दिया। नीतू भी लत लगने जैसा उसका लंड चाट, चूस कर साफ कर दिया।

सलीम अब थक कर नीतू के शरीर पर लेट गया, दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा, दोनों की आंखों में समाधान साफ झलक रहा था। नीतू ने उसके गले में हाथ डालकर उसके होठों पर अपने होंठ रखे और चूमने लगी। सलीम भी उतने ही ज़ोरों से उसको प्रतिसाद दे रहा था।

सीधी साधी पतिव्रता नीतू के जिंदगी की यह भयावह रात अब उसके लिए स्वर्गीय सुख की अनुभूति दे रही थी।

उस थकने वाले अनुभव के बाद दोनों बातें कर रहे थे। कुछ घंटे पहले जो लड़की इस राक्षसी आदमी का चेहरा भी देखना नहीं चाहती थी, उसी आदमी के पास नंगी लेटकर इस तरह बातें कर रही थी कि जैसे जन्म जन्म की प्रेमिका हो।
सलीम को भी यह सब अच्छा लग रहा था, जिस तरह नीतू अपनी मर्जी से इस खेल में शामिल हो गई।

नीतू का विरोध देख कर पहले तो उसे लग रहा था कि पटा नहीं वह अपने मंसूबों में कामयाब भी हो पायेगा या नहीं… और उसके परिणामों का डर भी लग रहा था।
मगर अंत में वह एक शर्मीली परी को अपनी प्रेमिका बनाने में सफल हुआ था।

वे दोनों बातें कर रहे थे, बीच बीच में एक दूसरे को किस कर रहे थे। सलीम बीच में उसके निप्पल्स को चूसता, उनको काटता, उस पे नीतू दर्द से कराह उठती फिर उसको देख कर मुस्कुरा देती। नीतू के हाथ सलीम के पूरे बदन पर घूम रहे थे, खास कर उसके मूसल जैसे लंड पर और बड़े बॉल्स पर… वह अब उस लंड के प्यार में पड़ गयी थी, उसको अब समझ में आ गया था कि वो उससे अब दूर नहीं रह सकती।

नीतू का ध्यान अब घड़ी की तरफ गया, घड़ी में रात के 12:15 बज रहे थे। वह सोचने लगी नितिन का फ़ोन लगभग 10 बजे आया था, और उनकी कामक्रीड़ा तभी से ही शुरु हुई थी। मतलब दो घंटे तक चल रही थी, उसको यह देखकर धक्का लगा, शादी के बाद उसने जितना भी सेक्स किया था वह सब लगभग 10-15 मिनट चलता था, उसमें भी वो थक जाती थी। पर वह पिछले दो घंटे से फोरप्ले ही कर रही थी, अभी तक सलीम ने उसे चोदा भी नहीं था।
वह कितने समय चलेगा… चार घंटा?

उसको यह सोचते ही हँसी आ गयी.

सलीम उसकी तरफ देख रहा था उसने झट से पूछा- जानू… क्या सोच कर मुस्कुरा रही हो?
नीतू अपनी हंसी कंट्रोल करते हुए बोली- सलीम हम दो घंटे से यह सब कर रहे हैं, अभी तक आपने अपना का नाग मेरे बिल में डाला नहीं है। अगर आप ने वह किया तो क्या पूरी रात करोगे?
उस पे सलीम हंसते हुए बोला- हा हा हा… ऐसा ही होगा… मैं तुमको रातभर चोदने वाला हूँ, आज की रात ही नहीं कल का पूरा दिन… कल मैं आफिस को भी नहीं जाऊंगा… सलमा भी दो दिन नहीं आने वाली… तो बस दो दिन और दो रात बस तुम और मैं… सिर्फ चोदने का और चुदवाने का!

नीतू सलीम के प्रोग्राम पर मुस्कुराई, वह सोचने लगी कि इन दो दिन में सलीम उसके साथ क्या क्या करेगा, पर वो सब के लिए अब तैयार थी।

नीतू अब बाथरूम में गयी, कमोड पर बैठ कर सोचने लगी कि ऐसा क्या है इस आदमी में जिसके लिए उसने अपने नितिन को धोखा दिया… नितिन… हे भगवान… अमेरिका में अब दिन होगा… उसका फ़ोन भी आया होगा… फ़ोन तो हॉल में है।

वह नंगी ही बाथरूम से दौड़ती हुई हॉल में पहुँची, मोबाइल चेक किया तो उसकी जान में जान आयी, नितिन का एक भी मिस काल नहीं था, शायद काम में बिजी होगा; नहीं तो अभी तक तीन चार फ़ोन तो आ ही जाते।

सलीम भी उसकी भागदौड़ देखकर बैडरूम से हॉल में आ गया। नीतू ने फ़ोन नीचे रखा पीछे मुड़ कर सलीम कि तरफ देखा और मुस्कुराई।
सलीम बोला- भूख लगी है… कुछ खाने को है क्या?
नीतू भी अब टेंशन फ्री हो गयी थी, उसने प्यार से बोला- है ना… फल हैं, चलेगा? मुझे भी भूख लगी है.

“चलेगा, जो रेडी है वह लाओ, बनाने में टाइम वेस्ट नहीं करेंगे, वह टाइम तुम्हें चोदने में काम आएगा, और तुमको कैसे भूख लगी है, इतना जूस तो पिया तुमने अभी अभी!”
नीतू मुस्कुराते हुए दिखावटी गुस्सा दिखाते हुए किचन में जाने लगी।

सलीम नीतू के चलने पर हिलते हुए नितम्ब देख कर मन ही मन कुछ सोच कर मुस्कुराया, उसे अब दुनिया का सबसे भाग्यशाली आदमी होने का अहसास हो रहा था।

नीतू एक प्लेट में फल काट के लायी, सलीम तब तक सोफे पर बैठे टीवी देख रहा था।
नीतू के वहाँ आते ही उसने खींच कर नीतू को अपनी गोद में बिठा लिया। नीतू को यह अहसास हुआ कि वे दोनों हॉल में नंगे ही थे, यह और एक नया अनुभव था उसके लिए।

सलीम ने कटे सेब को अपने होठों में पकड़ा, फिर आगे झुकते हुए अपना मुँह नीतू के होंठों के करीब ले कर आया और नीतू के होठों पर रख दिया, दोनों के होंठ मिलते ही अपने आप खुल गए। सलीम ने सेब के टुकड़े को अपने मुँह से नीतू की मुँह में धकेल दिया।
नीतू को भी यह सब अच्छा लग रहा था, उसने ऐसे ही सारे फल खाए।

प्लेट्स किचन में रख कर नीतू फिर से हॉल में लौटी, सलीम ने हाथ से उसे अपने पास बैठने का इशारा किया तो नीतू सोफे पर उसके पास जाकर बैठ गई।

ऐसे ही थोड़ी देर टीवी देखने के बाद सलीम ने केबल पर लगी हुई पोर्न फिल्म चालू कर दी तो नीतू शर्मा गयी।
उसको शर्माते हुए देख कर सलीम हंसने लगा।

नीतू ने पहले कभी पोर्न फिल्म नहीं देखी थी। नितिन भी इतना रोमान्टिक नहीं था कि उनके साथ बैठ कर पोर्न फिल्म देखे। उसकी हमेशा से ही ऐसी फ़िल्म देखने चाहत थी और सलीम उसकी यह इच्छा भी पूरी कर रहा था।

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कहानी का अगला भाग: पड़ोस के सलीम भाईजान-4

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