मेरी पड़ोसन ज्योति आंटी की चुदाई

(Meri Padosan Jyoti Aunty Ki Chudai )

दोस्तो, मेरा नाम सुमित है। मैं दिल्ली में रहता हूँ. मेरी उमर 23 साल है। मेरे पड़ोस में ज्योति आंटी रहने आई।
कुछ ही दिनों में हम दोनों अच्छी तरह घुल मिल गए।
ज्योति आंटी बहुत ही चिकनी थी, उसकी चुची बहुत ही मोटी थी, हम दोनों बहुत फ्रैंक थे पर हमारे बीच कोई ग़लत बात नहीं थी। आंटी बहुत सरीफ़ थी। वो तो साली अपनी चुची एकदम छुपा कर रखती थी।

ज्योति आंटी का पति अकसर टूअर पर जाता था।

एक दिन आंटी कपड़ा तो रही थी। में किसी काम से आंटी के घर गया, मैंने देखा कि आंटी की आधी चुची बाहर निकली हुई थी। बहनचोद… बहुत चिकनी चुची थी।
आंटी कपड़ों पर सोटा मार रही थी, सोटा मारते मारते आंटी की चुची भी हिल रही थी। आंटी की चुची देख कर मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया। मैंने सोचा कि आंटी की चुची इतना चिकनी है तो पूरी नंगी आंटी कितनी चिकनी होगी।

आंटी ने मुझे देख कर अपनी चुची छुपा ली… बहन चोद बहुत शरीफ़ थी.

फिर आंटी बोली- सुमीत आज़ मेरा काम में हाथ बंटवा दो।
तो मैं बोला- क्यों नहीं!
आंटी बोली- ये कपड़े मशीन में डाल दो।
मैं आगे बढ़ा तो आंटी मशीन के पास खड़ी थी तो मैंने सोचा आंटी की गांड पर हाथ तो लगा दे।
मैं जानबूझ कर फिसल कर आंटी पर जा गिरा।

बहनचोद आंटी पूरी मेरे साथ लग गई, आंटी की गांड पर मेरा लण्ड लग गया। वाह… बहुत ही मजेदार पल था।
आंटी बोली- लल्लू, आराम से!
फिर मैं मशीन में कपड़े डालने लगा तो आंटी मेरा पीछे आकर खड़ी हो गई।

तो मैंने सोचा- चलो अब चुची भी छू ले।
मैं जानबूझ कर झटका खाकर पीछा हुआ और आंटी ने मुझे बचाने के लिए कस कर पकड़ लिया।
बहनचोद आंटी की पूरी चुची, पेट और चूत मुझसे चिपक गई। वाह मेरी तो लाटरी लग गई थी.

अब तो भूखे शेर के मुँह को खून लग गया था।
बस अब मैंने आंटी की चुदाई का मन बना लिया था।
क्योकि आंटी तो सरीफ़ थी। और औकई अंको माना कभी भूख भी नहीं देकि थी। माना अपने दोनों डोतो के साथ चोदन का प्रोग्राम बना लिया। सनडे का दिन था। मेने आंटी को फ़ार्म हाउस जाना के लिया बोला। तो आंटी बोली क्यो जाना है। तो मा बोला आंटी जी आपको एक सुरपरिज़े दना है। आंटी तयर हो गयि। उधर रहुल और वरुन फ़रम हौसे पहुनचा।। मैं और अतुनती भी पहुँच गाये आंटी बोली क्या था तेरा सर्प्राइज़ । तभी राहुल कचा मई आंटी कॠसामने आ कर बोला । अरी चिक्नी क्या हाल है। । आंटी मुघसा बोलि सुमित येअह सब कया है। तो मैं बोला । प्यारी आंटी आज़्ज़ हम तुगसा अपनी भूख मिटयँगे । मीना आंटी को कसकर पाकर लिया। और औसकी सारी उतरना लगा।आंटी बोली नहीं नहीं सुमीत बेटा।प्लज़ मुघा जाने दो मई तो अपना पति को क्या मुँह ढेखौंगी। तो मई बोला चुप साली । तो आंटी ना मुघा ढाका दिया। और वरुण आंटी को पूरा नंगा कर दिया। फिर क्या था। आंटी का ननगा बदम अपनि और अकरशित कर रहा था

फिर माना अपना 5 इंच लंड निकाला। जो की काफ़ी मोटा था। और आंटी के मुँह मई डालने लगा तो आंटी ना मुँह नहीं खोला ।फिर राहुल ना आंटी का मुँह खोला। और माना अपना लॅंड आंटी के मुँह में डाला।और उसके पकर कर उसा सुकिनग करवना लगा। इधर वरुन आंटी कि चूत चत रहा । तो रहुल आंटी का मोमो का मजा लरहा। आंटी एक दम गर्म कचोरि बन गयि थी.। फिर मेने अपना लंड आंटी के मुँह सा निकाला । और मेरा मान आंटी की छूट मारना को हुआ। क्योकि सकिंग कर वा कर मई बहुत गर्म था। और आंटी मुघसे जयदा गर्म थी। मीना आंटी को आराम से लिटाठ??। और आंटी की तँगा उठाई। और अपना लंड आंटी की छूट मई डालना लगा।

आंटी की छूट जयदा नहीं खुली थी। इसलिया मेरा तोड़ा सा लॅंड आंटी की छूट में गया। जा हे आंटी की छूट में लंड डाला।तो आंटी ने मुघा एक करा झटका दिया। आंटी झटके सा आंटी की ताने हिलती थी। और मुघा ढाका लगा और पूरा लंड आंटी के अंदेर चला गया। भन चोदि बहुत गर्म थी. मैं घसा मरना चुरु हो आंटी हेर 2 मिन बद झतका मरति। कयोकि उसमा बहुत सेक्स था। चूत मरता वकत औनति का पुरा सरिर हिल रहा था। 15 मिन बाद मैरा घर गया। और मल आंटी कि चूत का बहर निकला।

फिर आंटी रहुल सा

बोली- अरे कुत्ते तू भी आ जा, अब तुमने एक शेरनी की भूख जगा दी है। आ जा अब मेरी भूख मिटा।

फिर राहुल ना उस कचोरि को लनद खिलया फिर वरुण ना। हूमना लगभग 4 घंटे तक आंटी को छोड़ा। फिर सो गया।

अगला दिन हमने आंटी की गांड मारी। आंटी की गांड मैं जब मना अपना लण्ड दला तो असा लगा जसा गर्म चुरि मखन मैं दलति। इतनि चिकनि गांड । वोव। जब मना आंटी कि गांड मर रहा तो आंटी कि पुरि गांड हिल रहि थी. मेरा 20 मिन बद घरा।फिर रहुल ना गांड मरि फिर वरुण ने। उस्डीन हमना आंटी को 7 घाटे चोदा।आंटी को छूट मरवना की बहुत गंदी लत पर गयी थी। हम हैर रोज़ आंटी की गांड मरते 15 दीनो में आंटी की गांड बहुत मोटी होगाई रेअल्ली यर। यहा तका कि आंटी ना कचि दलना भी चोर दिया था।

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