गर्भवती पड़ोसन के फ़्लैट में

(Garbhavati Padosan Ke Flat me)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

मुंबई में, सुना था कि सबसे बड़ी समस्या मकान की होती है इसलिए मैंने अपने कई आफिस के लोगों से कह रखा था कि कोई ढंग का सस्ता सुंदर 1 से 3 कमरों का सेट मेरे लिए खोजें।
मैंने अभी हाल में ही गुजरात से ट्रान्सफर होने पर मुंबई ज्वाइन किया था। यहाँ गेस्ट हाउस में रहते हुए 13 दिन हो चुके थे और 1 सप्ताह में इसे खाली भी करना था पर कोई इंतजाम नहीं हो पाया था।

आज छुट्टी के दिन मैं टीवी देख रहा था और मकान के बारे में भी सोच रहा था तब ही फोन कि घंटी बजी।
फोन मेरे किसी दोस्त के दोस्त का था जिसके जानने वालों का मुंबई में मकान था और उन्होंने मुझे फोन करके बात करने के लिए कहा था।
सुन कर मुझे बहुत अच्छा लगा कि कुछ तो आशा की किरण बंधी।
खैर मैंने फौरन फोन पर बात की और पता चला कि मकान मालिक से ही बात हो रही है।

वो दूसरे शहर में रहते थे तो उन्हें अपने मकान के लिए एक ऐसे किराएदार की आवश्यकता थी जो केयरटेकर की तरह उनके मकान की देखभाल भी कर सके, और बिजली आदि बिलों के भुगतान भी करता रहे, बस यही किराए की राशि होगी जो कि लगभग दस हज़ार के आसपास होता है।
इसलिए उन्होंने ऐसा ऑफर दिया था क्योंकि वो कभी कभी ही आते थे।
उन्होंने जाकर देखने को कहा तो मैंने धन्यवाद देते हुए पता नोट किया और कुछ देर बाद आफिस की गाड़ी से वहाँ गया क्योंकि अभी मैं शहर के भूगोल से परिचित भी नहीं था।

उस बिल्डिंग के सेक्रेटरी से फ्लैट की चाबी लेकर मैं ड्राइवर के साथ 29वें फ्लोर पर गया और फ़्लैट का दरवाजा खोल कर अंदर गया। 3 बेडरूम, 3 बालकनी, हाल, किचन और एक सरवेंट क्वार्टर, 4 एसी, फर्निश्ड फ़्लैट और बहुत बड़ी छत – इतने कम पैसों में कहीं से भी बुरा नहीं था सिवाय इसके कि वह टॉप फ्लोर पर अकेला पेंट हाउस जैसा फ़्लैट था।

मेरा आफिस भी 10 मिनट की दूरी पर था, टहलते हुए आना जाना किया जा सकता था।
इस बिल्डिंग में 3 लिफ्ट हर फ़्लैट के बगल से आने-जाने के लिए थीं। हर फ्लोर पर 3 फ़्लैट थे और हर कोने वाले फ़्लैट के ऊपर पेंट-हाउस नुमा ऐसा फ़्लैट था। हर कमरे में वीडियोफोन की व्यवस्था भी थी। मैंने फौरन मकान मालिक को फोन से मकान लेने की हामी भर दी और 2 दिन बाद रविवार को शिफ्ट करने तथा सेक्रेटरी को सूचित करने के लिए कह दिया।

रविवार को नाश्ता करके मैं अपना एक सूटकेस लेकर उस बिल्डिंग में अपने ड्राइवर के साथ पहुँच गया। सिक्योरिटी गार्ड ने चाबी दी क्योंकि सेक्रेटरी साहब किसी काम से बाहर गए हुए थे, वो मेरे साथ फ्लैट तक आया और बताया कि मैं देख लूँ, अगर कुछ काम और भी करवाना हो तो अभी या फोन से बता सकता हूँ।

मैंने ड्राईवर से एक बार फिर से सब चेक करने के लिए कहा और बेडरूम की अलमारी में अपना सूटकेस रख कर सोफ़े पर बैठ गया।तब तक ड्राइवर ने भी ok रिपोर्ट देते हुए घर जाने की इजाजत मांगी।

छुट्टी का दिन था सो मैंने उसे 200/- देते हुए कार भी शाम तक अपने पास रख कर परिवार के साथ घूमने की इजाजत दे दी और वो चला गया।

मैंने चेनेल लाक कर दिया ताकि कोई ऊपर न आ सके और अंदर आकर सारे कपड़े उतार कर नंगा ही घूमने लगा।
मुझे अकेले रहने पर नंगा रहना, सोना अच्छा लगता है।
और मैं फ़्लैट को अच्छी तरह से देखने का बाद लेट कर सो गया।

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