पड़ोस की भाभी की गर्म चूत में मेरा लंड-1

(Pados Ki Bhabhi Ki Garam Chut Me Mera Lund- Part 1)

दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी है, उम्मीद करता हूँ आपको पसन्द आएगी.
कहानी आरम्भ करने से पहले मैं अपने बारे में बता देना चाहता हूँ. मेरा नाम प्रणय है. मेरी उम्र 20 साल है और कद 6 फुट का है. मैं महाराष्ट्र के भंडारा से हूँ. काम वासना के लिए एक अति पिपासु लड़का कहा जा सकता हूँ. शुरू से मेरी सेक्स में कुछ ज़्यादा ही रूचि है.

इस कहानी की शुरूआत 2012 में हुई और 2015 में खत्म हुई.

जब सन 2012 में मैं स्कूल था, जवानी की दहलीज मुझे झझकोरने लगी थी, ये तब की घटना है. उन दिनों मेरे पड़ोस में एक फैमिली रहती थी. उस फैमिली में सिर्फ 2 लोग ही थे. सुरेश भैय्या जिनकी उम्र 29 साल थी और 25 साल की नीलम भाभी थीं. उनकी शादी को अभी 2 साल ही हुए थे. सुरेश भैया हमारे ही शहर में सरकारी नौकरी में थे.

सुरेश भैया मेरे अच्छे पड़ोसी दोस्त थे, उनकी एक साल की एक बेटी थी. मैं उनके घर आता जाता रहता था और मेरे मम्मी और पापा की भैया भाभी से अच्छी बनती थी. इसी वजह से मैं हमेशा सुरेश भैया के घर जाता रहता था.

एक दिन मैं सुरेश भैया के घर गया था. उनके घर का दरवाजा हल्का सा टिका हुआ था. मैं सीधा घर के अन्दर चला गया और नीलम भाभी को आवाज देने लगा.
तभी नीलम भाभी बोलीं- हां रुको, आ रही हूँ.

मैं हॉल में सोफे पे बैठ गया. मुझे जोर से पेशाब लगी थी, तो मैं बाथरूम की ओर चल दिया.

तभी मेरी नजर भाभी के बेडरूम की तरफ चली गयी. जब मैं कौतूहल वश बेडरूम की तरफ मुड़ा, तो देखा कि भाभी कपड़े पहन रही थीं. वो अपनी ब्रा पहनने की कोशिश कर रही थीं.
क्या मस्त फिगर था भाभी जी का … मेरा लंड तो उनकी भरपूर जवानी को देख कर एकदम से खड़ा हो गया. जैसे कि आप जानते हैं कि मैं जवानी की दहलीज पर कदम रख चुका था, तो मेरा लंड भी फन उठाने लगा था.

सिर्फ कुछ ही पल भाभी के रूप को देखने के बाद मेरा लंड सलामी देने लगा. मेरी गांड भी फट रही थी कि कहीं भाभी जी देख न लें. साथ ही मैं उतने ही नज़ारे में खुद को रोक ना सका और बाथरूम की ओर चल दिया. मैं बाथरूम में जाकर मूतने की कोशिश करने लगा. लेकिन लंड के अकड़ जाने के कारण मेरी पेशाब निकल ही नहीं रही थी.

मैं लंड को सहलाने लगा और बस मुठ मारने ही वाला था तभी भाभी की आवाज आई- प्रणय!
उनकी इस आवाज से मेरा लंड एकदम से ढीला हो गया और मैं जल्दी से पेशाब करके तुरन्त बाथरूम से निकल कर भाभी के पास चला गया.

मैं उनके करीब जाते ही एकदम से चौंक गया. भाभी तौलिये से अपने चुचे ढके हुए मेरे तरफ देख रही थीं.
भाभी बोलीं- ऐसे क्या देख रहे हो, जरा मेरी हेल्प करो प्लीज़!
मैं हकलाते हुए बोला- क..क्या भाभी?
भाभी बोलीं- मेरी ब्रा का हुक लग नहीं रहा है, जरा लगा दो.

मैं भाभी के पीछे हो गया और हुक लगाने लगा.
उफ्फ्फ … क्या मस्त 32-29-36 का फिगर था भाभी का … मेरे से तो रहा ही नहीं जा रहा था. मैं उनके बदन को अच्छी तरह निहार रहा था. मेरा लंड खड़ा हो गया था.
भाभी ने मेरा तना हुआ लंड देख लिया और हंस पड़ीं.
मुझे झेंप आ गई.
खैर … मैं वहां से अपने घर चला गया और भाभी के बारे में सोच कर मुठ मारने लगा.

दूसरे दिन मैं स्कूल चला गया और ये सब मैंने अपने खास दोस्त को बताया.
उसने कहा- तुझे भाभी को चोदना है, तो अन्तर्वासना पर कहानी पढ़, वहां पर ऐसी बहुत सी सच्ची कहानी हैं. तुझे उधर से आईडिया भी मिल जाएगा, फिर तू भाभी को आराम से चोद पाएगा.

इसी के बाद मैं अन्तर्वासना की कहानी पढ़ने लगा. मुझे इधर की सेक्स कहानी पढ़ने में मजा आने लगा. मैं रोज भाभी के बारे में सोच कर मुठ मारने लगा. अन्तर्वासना पे मैं ख़ास तौर से देवर भाभी की चुदाई वाली कहानी पढ़ता था. बस तभी से मैं भाभी को चोदने के प्लान बनाने लगा.

अब मैं रोज किसी ना किसी बहाने नीलम भाभी के घर जाने लगा और कभी उन्हें नहाते या कभी कपड़े बदलते देखने लगा. भाभी के चुचे क्या मस्त और उठे हुए थे. दोस्तों भाभी के एकदम गोल और कड़क चुचे देख कर मेरा मन करता था कि बस खा जाऊं. लेकिन कभी हिम्मत ही नहीं हुई.

भाभी भी दिन भर बोर होतीं, तो मेरे घर में आ जातीं. मैं एक कोने में बैठ कर उनके चुचे घूरता रहता. ऐसा सिलसिला काफी दिनों तक चालू रहा.

ऐसे करते करते समय बीतता गया और अब मेरे बोर्ड के एग्जाम चालू हो गए. जब मेरे एग्जाम खत्म हुए, तब फिर से मेरी यौन कुंठा ने मेरे लंड पर दस्तक दी. काफी दिन बाद मैं भाभी के घर गया. आज दरवाजा बन्द था. मैंने सोचा कि शायद अन्दर भाभी कपड़े पहन रही होंगी.
भाभी के आंगन में एक छोटा गार्डन है. मैं उस तरफ गया. भाभी के बेडरूम की एक खिड़की उसी गार्डन में खुलती है. लेकिन उस खिड़की में कूलर लगा हुआ था. फिर भी मैं बेडरूम में देखने की कोशिश करने लगा.

जब मेरी नजर बेडरूम में पड़ी, तो मेरी आंखें फटी की फ़टी रह गईं.

भाभी बेड पर एकदम नंगी पड़ी थीं. तभी बाजू से एक आदमी आया और भाभी को चूमने लगा. उसने भाभी के चूत पर अपना मुँह रखा और भाभी की चूत चूसने लगा.
क्या चिकनी चूत थी दोस्त … मस्त मुलायम डबल रोटी की तरह फूली हुई चूत मेरे लंड को आतंकवादी बनाने पर तुली हुई थी.

उस अपरिचित आदमी ने भाभी की चूत चूसने के साथ चाटना भी शुरू कर दिया. भाभी एकदम से कामुक सिस्कारियां लेने लगीं और ‘आह्ह्ह … उम्म्ह… अहह… हय… याह… अह्ह …’ करते हुए उस आदमी का सर अपनी चूत पे दबाने लगीं.
कुछ ही देर बाद भाभी की सिसकारियों की आवाज बढ़ने लगी.

फिर वो उठकर 69 की पोजीशन में लेट गईं. अब उस आदमी ने अपना लंड भाभी से चुसवाया और इसके बाद सीधे होकर उनकी बुर में लंड पेल दिया. उस आदमी का लंड 7 इंच का रहा होगा. मोटा और लम्बा लंड एकदम से घुसने से भाभी की चीख निकल पड़ी- उईई ईईई मर गयी … थोड़ा धीरे डालो न मुकेश!
मतलब उस आदमी का नाम मुकेश था.

उसने और एक धक्का लगा दिया. अब उसका पूरा लंड भाभी की चूत में चला गया. भाभी की चुदाई शुरू हो गयी. करीब 20 मिनट बाद भाभी चरम सीमा पे आ गईं और चिल्लाने लगीं- आहा अह्हह अहह उम्मह और जोर से … अह्ह्ह्ह … मुकेश जोर से अह्ह्ह ओह्ह्ह!
भाभी ने उसको जोर से जकड़ लिया और झड़ गईं.

मैं खिड़की बाहर से अपना लंड सहलाने लगा था. उधर मुकेश भी अब झड़ने वाला था. वो और तेजी तेजी से भाभी की चूत में धक्के लगाने लगा. कुछ धक्कों के बाद वो भी झड़ गया और भाभी के ऊपर चित होकर ढेर हो गया.
उनकी चुदाई खत्म हो गयी थी. मैं भी अपने घर चला गया और बाथरूम जाकर मुठ मारने लगा.

मेरी अभी छुट्टियां चल रही थीं. मैं भाभी के घर की ओर नजर रखने लगा. मैंने चैक किया कि मुकेश हफ्ते में एक दिन जरूर आता. उसके आते ही मैं भाभी की चुदाई देखने चला जाता.

फिर अगले महीने में अचानक सुरेश भैया की तबियत खराब होने लगी. एक दिन रात को उन्हें एडमिट करना पड़ा. भैया की तबियत अचानक बिगड़ती ही चली गई और 15 दिन बाद भैया की मृत्यु हो गयी. उन्हें अचानक ब्रेनहैमरेज हुआ था.
भाभी की जिन्दगी में एक तूफ़ान आ गया था. कुछ दिन बाद सब जैसे तैसे चलने लगा. मैंने देखा कि उन दिनों मुकेश भी नहीं आ रहा था. शायद भाभी को अपने पति के जाने का गम था और वे इसी वजह से अपनी रंगरेलियां मनाना उचित नहीं समझ रही थीं.

कुछ दिनों बाद मेरा रिजल्ट आया और अब मैं स्कूल की अंतिम क्लास में आ गया था.

थोड़े दिनों बाद मुकेश फिर से आने लगा था. अब वो हफ्ते में 2 बार आने लगा, कभी कभी वो रात में भी भाभी के पास ही रुकने लगा था. भाभी अब भी मुझे अक्सर किसी ना किसी काम से बुलाया करती थीं. लेकिन मैं क्या बताऊं दोस्तों, मेरी गांड इतनी फटती थी कि कहीं मैंने कुछ किया और भाभी ने मुझे नहीं झेला तो क्या होगा. कहीं भाभी मेरे घर में शिकायत ना कर दें.

मैं ये जानते हुए भी डरता था कि भाभी को भी लंड की जरूरत है. वे बाहरी आदमी से चुदाई करवाती हैं.

इस तरह एक साल और निकल गया. इसी दौरान मेरी कद काठी में एकदम से बदलाव हुआ और मैं एक पूरा गबरू मर्द दिखने लगा. इसका एक कारण ये भी था कि मैंने जिम जाना शुरू कर दिया था. अब सन 2014 चल रहा था. मेरे पास एंड्राइड मोबाइल भी आ गया था.

एक दिन भाभी के घर पर बैठ कर मैं उनकी बेटी के साथ खेल रहा था. भाभी की लड़की अब तीन साल की हो चुकी थी.
तभी भाभी ने मेरा मोबाइल ले लिया और व्हाट्सऐप के वीडियो देखने लगीं. तभी उन्होंने मेरे मोबाइल में कुछ ब्लू फ़िल्म देख लीं और मुझसे बोलीं- प्रणय, तुम ये सब देखते हो?
मैंने पूछा- क्या भाभी?
वे बिंदास बोलीं- ब्लू फ़िल्म.
मैं हड़बड़ाया, मैंने सोचा कि अब क्या बोलूँ. मैंने सकुचाते हुए बोल दिया- हां भाभी, कभी कभी कोई भेज देता है तो देख लेता हूँ.
भाभी बोलीं- तेरी कोई जीएफ नहीं है क्या?
मैं बोला- नहीं भाभी … लेकिन मैं किसी को लाइक करता हूँ.
भाभी बोलीं- किसे?
मैंने भाभी को उस लड़की के बारे में सब कुछ बता दिया.

तभी भाभी के मोबाइल पर किसी का फ़ोन आया और भाभी अलग हो कर बात करने लगीं.
थोड़ी देर में भाभी बोलीं- अच्छा प्रणय अब तुम चले जाओ, शाम को आना. मैं बेटी को सुला देती हूँ … और थोड़ी देर खुद भी आराम कर लेती हूँ.
मैं चला गया.

थोड़ी देर बाद भाभी के घर में मुकेश जाता हुआ दिखा, मुझे समझ आ गया कि भाभी ने मुझे घर क्यों भेज दिया था.

इतना हो जाने के बाद भी मेरी उनसे बात नहीं बनी. अब मैं स्नातक के फर्स्ट इयर में आ गया और मुझसे एक लड़की भी पट गयी. अब तक मैं उसको 3 बार चोद भी चुका था.

चुदाई कर लेने के बाद मुझे कुछ साहस आ गया था. मैंने अपने लंड की ताकत को भी समझ लिया था. जिस तरह से वो लड़की मेरे लंड के सामने चिल्लाने लगती थी और मैं उसे कम से कम तीन बार झड़ाने के बाद झड़ता था, उससे मुझे ये आत्मविश्वास आ गया था कि भाभी भी मेरे जवान लंड से चुदवा कर खुश हो जाएंगी.

ये सब सोच कर इस बार मैंने ठान लिया था कि अब मैं भाभी को चोद कर रहूँगा. मैं जोर शोर से भाभी की चूत चुदाई का प्लान बनाने लगा. उनकी बेटी भी अब प्ले स्कूल में जाने लगी थी.

एक दिन मैं घर पे अकेला ही था तब भाभी आईं और मेरी मम्मी को आवाज देने लगीं.
मैंने कहा- भाभी, मम्मी घर पर नहीं हैं, वे हॉस्पिटल गयी हैं.
भाभी मेरे पास आकर बैठ गईं. हम दोनों में इधर उधर की बात होने लगीं.
मैंने हिम्मत कर के भाभी से कहा- भाभी एक बात कहूँ?
भाभी- बोल न?
मैं- आप किसी को बोलोगी तो नहीं?
भाभी- हां बोल ना … मैं किसी को कुछ नहीं बोलूंगी.
मैंने कहा- भाभी, मुझे एक बार आपको किस करना है.
भाभी हंस पड़ीं और बोलीं- ठीक है ले ले.

मैं भाभी को किस करने लगा और धीरे धीरे उनके चुचे दबाने लगा. भाभी ने मुझे अलग कर दिया. भाभी बोलीं- तू किस मांग कऱ ये क्या कर रहा है … रुक मैं अभी तेरी मम्मी को सब बताती हूँ.
मैंने माफ़ी माँगते हुए कहा- भाभी मैंने आज तक सेक्स नहीं किया है. मेरा भी मन करता है, प्लीज़ एक बार भाभी!
भाभी बोलीं- क्यों तेरी जीएफ नहीं है क्या?
मैंने कहा- नहीं है भाभी … वो लड़की नहीं पटी … आपका मन नहीं करता क्या … अब तो भैया भी नहीं रहे हैं.

भाभी गुस्से में लाल हो गई, भाभी बोलीं- नहीं करता मेरा मन.
मैं भी बोला- हां कैसे करेगा … मुकेश जो है … मुझे सब पता है, हफ्ते में दो बार आता है … सब देखा है मैंने.
भाभी एकदम से चुप हो गईं. फिर वो मुझसे खुलने लगीं- तुमने ये सब किसी को बताया तो नहीं न?
मैंने कहा- नहीं … प्लीज़ भाभी करने दो ना.

मैंने भाभी के होंठों पर अपने होंठ रख दिए. भाभी के ब्लाउज के ऊपर से चुचे दबाने लगा. भाभी भी विरोध नहीं कर रही थीं. मैंने भाभी को जल्द से चोदना बेहतर समझा और भाभी को नंगी करके चित लिटा दिया. मैंने भाभी की बुर में लंड डाल दिया, लेकिन दोस्तों अति उत्तेजना की वजह से मैं न जाने क्यों 2 मिनट भी टिक नहीं पाया.
भाभी मुझ पर हंस पड़ीं और कपड़े पहन कऱ चली गईं.

उसके बाद भाभी ने मुझे शिकायत करने की धमकी दी और मैं भी अपनी मर्दानगी साबित नहीं कर पाया था.
लेकिन दोस्तो, असली कहानी बाकी है.
अगला भाग जरूर पढ़ें.
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कहानी का अगला भाग: पड़ोस की भाभी की गर्म चूत में मेरा लंड-2

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