बगल वाली प्यारी चुदासी आंटी

(Bagal waali pyari chudasi aunty)

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम सौरभ है, मैं अन्तर्वासना का पुराना पाठक हूँ. मैं अन्तर्वासना की अधिकतर कहानियाँ पढ़ चुका हूँ। हर बार एक दर्शक की तरह इन कहानियों का आनंद उठाता रहता हूँ। लेकिन इस बार मैंने मेरी ज़िंदगी की एक सच्ची कहानी आपको बताने की कोशिश की है. तो मैं आपके सामने यह मेरी कहानी रखने जा रहा हूँ. पसंद आये तो मुझे मेल करके बताना मत भूलना.
मेरा नाम तो आप सब जान ही गये हो, यह कहानी कुछ महीने ही पुरानी है. मेरी उम्र 25 साल है, दिखने में अच्छा और कद-काठी का भी ठीक ही हूँ मैं।

मैं पुणे का रहने वाला हूँ लेकिन मैं अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान मुंबई में रहा और अभी भी जॉब के लिए मुंबई में ही रहता हूँ। घर वालों से मिलने और किसी काम के सिलसिले में पुणे आता-जाता रहता हूँ।
तो दोस्तो, हम ज़्यादा वक्त गँवाए बिना कहानी पर आते हैं।

मैं पुणे में मेरी फैमिली के साथ एक अपार्टमेंट में रहता हूँ। मेरे घर में माँ, पिताजी, छोटा भाई और मुझे मिलाकर कुल 4 लोगों का परिवार है। पापा का अच्छा खासा कारोबार है।
मेरे फ्लैट के बाजू वाले फ्लैट में राधिका नाम की आंटी, जिनकी उम्र लगभग 40 साल होगी, रहती हैं, और उनका परिवार भी साथ में रहता है।

आंटी की दो बेटियाँ थीं जो पढ़ाई के लिए दूसरे शहर में हॉस्टल में रहती थी. उनके पति जो सरकारी अफसर हैं उनको दौरे आते हैं और उनकी तबियत अक्सर खराब ही रहती है। जब भी उन्हें ऐसे दौरे आते थे तो उन्हें आंटी दवाइयाँ देकर सुलाया करती थी।
आंटी का शरीर उम्र के हिसाब से काफी सुडौल और काफी फिट है।

मैं अपने आख़िरी साल के एग्ज़ाम खत्म करके घर आया हुआ था.ऐसे ही एक दिन सुबह माँ और पिताजी एक देहांत विधि के लिए मेरे गाँव के लिए निकल गये और छोटा भाई कॉलेज की ट्रिप के लिए मनाली 2 दिन पहले जा चुका था, तो घर पर मैं अकेला रह गया.

मेरी माँ ने बाजूवाली आंटी को मेरे खाने के लिए बोल रखा था तो आंटी थोड़ी-थोड़ी देर बाद मुझे खाने पीने की चीज़ों के लिए पूछने लगी लेकिन आंटी जिस बार भी आती एक अलग तरह का गाऊन पहन कर आती और मेरे सामने खाने की चीजें झुककर रखती, वापस जाते समय गांड हिलाकर निकल जाती. इस दौरान उनके मम्मे और गांड मुझे उत्तेजित कर देते थे. मगर मैं उनकी उम्र का और मेरे माँ, पिताजी की इज्जत के ख़याल से बस यह सब चुपचाप ही देख कर रह जाता।
यह सिलसिला दिनभर चलता रहा।

शाम के लगभग 8 बजे मैं तैयार होकर दोस्तों से मिलने के लिए निकला और जाते-जाते सोचा कि आंटी को बता दूँ कि मेरे लिए खाना न बनाए क्योंकि मैं खाना अपने दोस्तों के साथ ही खाने के लिए प्लान कर चुका था.
मैंने आंटी के घर की बेल बजाई और आंटी ने दरवाज़ा खोला तो मैं हैरान रह गया.

इस बार आंटी ने नेट वाला हल्के गुलाबी रंग का गाउन पहना हुआ था. आंटी उस गाउन में कयामत लग रही थी. उनकी नज़रें भी अजीब तरह से मुझे देख रही थीं. मैं कुछ नहीं बोल पाया तो आंटी ने ही बोल दिया- अच्छा हुआ सौरभ तू आ गया, मैं तो तेरे पास ही आने वाली थी रात के खाने के बारे में पूछने के लिए.
मैंने उन्हें बता दिया कि मैं तो बाहर जा रहा हूँ और वहीं से खाकर आऊंगा.
तो उन्होंने कहा- आते समय मेरे लिए आइस क्रीम ले आना!

मैंने हामी भर दी और मैं लिफ्ट की तरफ चल पड़ा. मैंने पीछे मुड़कर देखा तो आंटी मेरी तरफ देखकर मुस्करा रही थी.

मैं बाइक लेने पार्किंग पहुंचा और बाइक बिल्डिंग के बाहर निकालते ही अचानक से ज़ोर की बारिश शुरू हो गई, मैं तो तुरंत वापस आकर बिल्डिंग में घुस गया. मैंने काफी देर इंतज़ार भी किया लेकिन बारिश थी कि रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी.

कुछ देर बाद बारिश थोड़ी कम हो गई थी लेकिन पूरी तरह से बंद नहीं हुई. तभी मेरी नज़र घर की तरफ गई तो देखा कि आंटी मुझे गैलरी से ही देखकर हँस रही थी. मुझे ऊपर आने का इशारा कर रही थी. मैं ऊपर गया तो आंटी दरवाज़े पर ही खड़ी थी.
आंटी बोली- बारिश ने ही रोक लिया तुझे.

आंटी ने मुझे अंदर बुलाया और मैंने देखा कि अंकल भी खाने की टेबल पर बैठकर खाना खा रहे थे. मुझे देखकर उन्होंने मुझे भी खाने के लिए बुला लिया. आंटी ने खाना परोस दिया और खुद भी हमारे साथ बैठकर खाना खाने लगी.
अंकल मेरे सामने ही थे और आंटी बगल में बैठी हुई थी. वह मुझे देखकर मुस्कराती हुई खाना खा रही थी.

कुछ देर बाद आंटी ने अपने पैरों से मेरे पैरों को छूना शुरू कर दिया. उनके पैर मेरे पैरों पर चलते हुए मुझे महसूस हो रहे थे. सामने अंकल बैठे थे इसलिए मैंने आंटी की इस हरकत का कोई जवाब नहीं दिया. चुपचाप खाना खाकर मैंने आंटी को थैंक यू बोला और गुड नाइट कहकर बाहर निकल कर आ गया.
मैं दरवाज़ा खोलकर घर में आ गया.

घर पर आकर मैंने कपड़े बदले और हॉल में सोफे पर आकर बैठ गया तो मेरी नज़रों के सामने राधिका आंटी की दिनभर की हरकतें आने लगीं और मैं उत्तेजित होने लगा. मेरा हाथ अपने आप ही मेरे लंड पर चला गया. कुछ देर बाद मैं अपने लंड को सहलाने लगा. उत्तेजना के कारण कुछ ही देर में मेरे लंड ने बहुत सारा गाढ़ा वीर्य नीचे गिरा दिया.

कुछ समय के लिए मुझे संतुष्टि मिल गई मगर अभी भी बार-बार राधिका आंटी और उनकी सेक्सी हरकतें मेरी नज़रों के सामने नाच रही थीं. वैसे तो मेरी कई गर्लफ्रेंड भी रह चुकी हैं लेकिन मैंने काफी दिनों से सेक्स नहीं किया था इसलिए मैं जल्दी ही झड़ भी गया था.

मैंने खुद को थोड़ा व्यवस्थित किया और फर्श पर गिरा हुआ अपना वीर्य अच्छी तरह से साफ किया. उसके बाद मैं टीवी देखते हुए टाइम पास करने लगा.

कुछ देर बाद दरवाज़े की घंटी बजी. मैंने दरवाज़ा खोला तो आंटी दरवाज़ा धकेल कर अंदर आ गई और उनके हाथ में फलों की एक प्लेट थी. मैं समझ तो गया था कि आंटी ये फ्रूट्स देने का बहाना करके आई हैं और उनके दिल में कुछ और ही चल रहा है.
आंटी ने अभी भी वही सेक्सी गाउन पहना हुआ था.

मैंने कहा- आंटी, आप इस वक्त यहां पर?
आंटी ने कहा- तेरे अंकल तो सो गए हैं इसलिए मैं यहाँ टाइम पास करने के लिए आ गई. तू भी आजा हम साथ में मिलकर फल खाते हैं.

मैं उनसे कुछ दूर बैठा हुआ था तो आंटी खुद ही मेरे पास आकर बैठने लगी. आंटी अपने हाथ से मुझे फल खिलाने लगी. मैं भी उनके हाथ से फल खाने लगा. उसके बाद आंटी ने धीरे से मेरी जांघों पर हाथ फिराना शुरू कर दिया. मैंने एक बार उनका हाथ हटाया, तो आंटी कहने लगी कि मैं तुम्हें अच्छी नहीं लगती क्या?
आंटी ने फिर पूछा- तुम्हारा वह सब करने का मन नहीं करता क्या? तेरे अंकल तो रोज दवाई खाकर सो जाते हैं और अगले दिन सुबह ही उठते हैं. मेरे साथ कुछ भी नहीं करते.

आंटी के मुंह से ऐसी बातें सुनकर सेक्स करने का मन तो मेरा भी कर रहा था लेकिन मैं चुप था.
उसके बाद आंटी ने कहा- जब से तू आया है मैं इसी मौके की तलाश में थी और आज मुझे ये मौका मिला है.
इतना कहकर उन्होंने मेरे लंड को मेरे लोअर के ऊपर से ही पकड़ लिया और सहलाने लगी. उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर अपने बड़े-बड़े मम्मों पर रख दिया. उसके बाद आंटी ने मेरा तना हुआ लंड लोअर से बाहर निकाला और अपने मुंह में भर लिया.

मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ने लगी. मेरी आंखें अपने आप ही बंद हो गई थी. 2 मिनट बाद मैंने देखा कि आंटी मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर लॉलीपोप की तरह चूस रही थी.
वह बीच में ही खड़ी हुई और अपना गाउन उतार दिया. उन्होंने ब्रा भी नहीं पहनी थी. बस एक पिंक कलर की पैंटी पहन रखी थी.

आंटी ने अपनी छोटे-छोटे बालों वाली चूत को मेरे मुंह के सामने कर दिया. मैंने भी बिना कुछ सोचे आंटी की चूत पर मुंह रख दिया. मैंने पूरी जीभ से अंदर तक आंटी की चूत को चाटना शुरू कर दिया. आंटी भी बेकाबू सी होकर मेरा मुंह अपनी चूत पर दबा रही थी. उनके मुंह से हल्की आवाज़ में कामुक सिसकारियाँ भी निकल रही थीं. आंटी की चूत पूरी तरह से गीली और रसीली हो गई थी. चूत का रस मुझे अजीब सा लग रहा था लेकिन आंटी की मदहोश कर देने वाली आवाज़ के साथ मीठा भी लग रहा था.

उसके बाद मैंने भी अपनी टी-शर्ट उतार दी और पूरी तरह से नंगा हो गया. आंटी ने मुझे सोफे पर लेटाकर अपनी चूत को मेरे मुंह पर रख दिया. दूसरी तरफ से आंटी ने मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया. मेरा पूरा लंड आंटी अपने मुंह में लेकर उसको ऊपर से नीचे तक निचोड़ने में लगी हुई थी. मैं भी उनकी चूत का रस पीता जा रहा था. उनकी टांगें एकाएक अकड़ गईं और आंटी मेरे मुंह में ही झड़ गई. उनका नमकीन रस मैं भी पी गया.

उनके होंठों ने जादू दिखाया और मैं भी उनके मुंह में ही झड़ गया. मेरे वीर्य की कुछ बूंदें उनके मुंह से गिरकर मेरे पेट पर गिर गई थीं. फिर आंटी ने उन बूंदों को भी प्यार से चाट लिया.
तभी हम एक दूसरे की बांहों में आ गये, और एक-दूसरे को चूमने लगे.

मुझे राधिका आंटी को नंगी देखकर लग रहा था कि मैं 25 साल की लड़की को नंगी देख रहा हूँ. राधिका आंटी इतनी फिट और सेक्सी लग रही थी.

तभी उसने मुझे बेडरूम में चलने को कहा और आंटी ने मेरे लंड को हाथ से पकड़ा और मुझे बेडरूम की तरफ ले जाने लगी, फिर से मेरा लंड तैयार हो गया था.

आंटी को बेड पर ले जाने के बाद हम दोनों फिर से एक-दूसरे को चूमने लगे. आंटी मेरे लंड को सहलाने लगी और मैंने भी उनकी चूत में उंगली डाली तो वह कराहने लगी. मैं दंग रह गया उनकी इतनी टाइट चूत देखकर. फिर मैं भी हल्के से उंगलियाँ अंदर-बाहर करने लगा. बीच-बीच में जीभ से चाटने लगा.

तब आंटी बेकाबू होकर सिसकारियाँ भरने लगी. मुझसे कहने लगी कि सौरभ ऐसे ही कर … बहुत मज़ा आ रहा है. उम्म्ह… अहह… हय… याह… … सौरभ … ऐसे ही कर मेरी जान … ज़ोर से कर सौरभ … मैं आ गई सौरभ … और आंटी इतना कहकर फिर से झड़ गईं.
मैंने आंटी की चूत चाटकर उनका पूरा रस पी लिया.

मेरा लंड पूरा खड़ा होकर आंटी की तरफ देखने लगा था. तभी मैंने आंटी को बेड के किनारे कर लिया और उनकी टांगें फैला दीं. मैं बीच में आ गया. आंटी ने बताया कि उन्होंने बहुत दिनों से लंड नहीं लिया और मुझसे शुरूआत में आराम से करने के लिए कहा. मैं आंटी के बड़े-बड़े दूधों को निचोड़ कर उनका रस पीने लगा.
आंटी भी हाथ में दूधों को पकड़ कर मुझे पिलाने लगी, कहने लगी- पी जा सौरभ. आंटी का दूध पी जा. आंटी और उसकी चूत आज तेरी है सौरभ … तेरा जो मन करे तू कर … निचोड़ सौरभ.

मैंने बिना समय गँवाए आंटी की चूत पर अपने लंड को ले जाकर रख दिया. उसके बाद मैं आंटी की चूत पर अपना लंड रखकर चूत को लंड से सहलाने लगा. तभी राधिका आंटी ने अपने आप लंड को चूत के छेद पर रख दिया और खुद से ही हल्का सा झटका दे दिया. लंड का मुंह चूत में घुस गया. आंटी एकदम से सिसक उठी. आंटी चिल्ला उठी- मर गई सौरभ!
लंड का मुंह चूत में घुसते ही आंटी ने गांड हिलाकर लंड को बाहर निकाला और कहने लगी कि बहुत दिनों से इसने लंड नहीं लिया है और तेरा लंड है भी बहुत बड़ा.
उसके बाद आंटी उठ गई और मेरे लंड को मुंह में लेकर गीला करने लगी. चूत पर भी ढ़ेर सारा थूक डाल दिया.

तभी मैंने आंटी की चूत के मुंह पर लंड रखा और उनके मुंह में अपना मुंह लगाकर चूमने लगा. मैंने इसी बीच एक ज़ोर का झटका मारा और पूरा लंड चूत में अंदर तक उतार दिया. उसके बाद हल्के से कमर हिलाते हुए देखा कि आंटी की आंखें लाल हो चुकी थीं. जैसे चूत का खून आंखों से निकल रहा हो.

हल्के से झटकों के साथ ही आंटी भी मुझे चूमने लगी, कहने लगी- चोद सौरभ … मुझे चोद दे … चोद-चोद कर अपने वीर्य से मेरी चूत का कुँआ भर दे.
आंटी की उन मादक सिसकारियों और उनके चिल्लाने के कारण मैं भी ताव में आ गया था. उस बीच में आंटी बुरी तरह से थक गयी थी. मैं और आंटी दोनों ही एक साथ झड़ गए.

आंटी मेरे होंठों पर किस करने लगी. वह कहने लगी- मुझे यह खुशी देने के लिए थैंक यू. आज से मैं तेरी हूँ।

तभी मैंने आंटी को डॉगी स्टाइल से सेक्स करने के लिए तैयार कर लिया. आंटी घुटनों पर आ गई. आंटी की बड़ी सी गोल-मटोल गांड और उसके बीच में प्यारी सी छोटे-छोटे बालों वाली चूत दोनों ही चमक रही थीं. तभी मैंने पीछे से राधिका आंटी की गांड पर हाथ रखा और एक हाथ से उनकी चूत के छेद पर लंड को रख दिया. मैंने एक ज़ोर का झटका मारा तो लगा कि मैं जन्नत में पहुंच गया हूँ।

आंटी अपने होंठों से मेरा लंड चूस रही हो ऐसा लग रहा था मुझे. मैं आंटी को ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा. आंटी की चूत पानी छोड़ने लगी. आंटी की गांड की आवाज़ कमरे में गूंजने लगी. तभी राधिका आंटी कराहते हुए कहने लगी कि सौरभ करते रहो बस … आहह …
मैंने आंटी से कहा- मेरा होने वाला है.
तो आंटी ने कहा- मुझे वह गाढ़ा और गर्म माल पीना है. कुछ माल मेरे दूध पर भी गिरा देना.

मैंने भी वैसा ही किया. मेरा सारा रस मैंने आंटी के मुंह में डाल दिया. राधिका आंटी ने उसमें से कुछ रस पी लिया और कुछ रस अपने दूधों पर डालकर फैलाने लगी. मुझे आंटी की नज़रों में एक खुशी सी दिखाई दे रही थी. हम दोनों ने ही एक-दूसरे को खुश कर दिया था.

आंटी ने मुझसे कहा- अगर तू मुझे ऐसे नहीं मिलता तो मैं ब्लैकमेल करके तेरे साथ यह सब करने वाली थी.
लेकिन मैंने उनको समझाया और उनकी तरफ देखकर मुस्करा दिया. मैंने आंटी से कहा कि जब भी उनको मेरी ज़रूरत हो, हम मिल लिया करेंगे.

राधिका आंटी ने घड़ी की तरफ देखा तो रात के 12.40 बज गए थे. तभी आंटी ने मुझे प्यार से चूमा और कल फिर से मिलने का वादा किया. आंटी ने अपने कपड़े पहने और निकल गई.

दोस्तो, ऐसी कई घटनाएँ मेरे साथ हो चुकी हैं. आपको मेरी यह कहानी पसंद आई तो आपके लिए मैं अपने साथ हुई और भी घटनाएँ साझा करना चाहूँगा. यह कहानी कैसी लगी, आप मुझे मेल करके ज़रूर बताइएगा. मुझे आपके मेल का इंतज़ार रहेगा.
आपका प्यारा दोस्त
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