बिजनेस की सीढ़ी बना सेक्स-1

(Business Ki Seedhi Bana Sex- Part 1)

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आज की कहानी रवि ने भेजी है. रवि ने अभी हाल ही में एक बीमा कंपनी ज्वाइन की है, इससे पहले वो बैंकिंग में था.

रवि की शादी हो चुकी है, एक दो साल की बिटिया भी है पर पत्नी रजनी सरकारी टीचर है, अच्छी तनख्वाह मिलती है, नौकरी छोड़ नहीं सकती तो अपने मायके में रहती है और पास के शहर में रोज आती जाती है. बेटी को मां संभाल लेती है.

हालांकि रजनी और रवि दोनों सेक्स के बहुत शौक़ीन हैं पर वक्त की मजबूरी ने उन्हें अलग रहने पर बाध्य कर दिया है. रवि पिछले एक साल से अलग रह रहा है. दूरी इतनी है कि महीने में कभी एक बार ही रजनी के पास जा पाता है, तभी दो दिन के लिए रुक जाता है. पर सफ़र की थकावट और ससुराल में रहने से सेक्स बस मन मारने जैसा ही हो पाता है.
वो रवि और रजनी जिन्होंने शादी के पहले साल में घर पर शायद ही कभी कपड़े पहने हों, अब बहुत सयंमित रहना पड़ता था.

रवि अब फील्ड ऑफिसर बन कर आया है. रवि ने एक होटल में ही रूम ले लिया था, ताकि सफाई और खाने का झंझट न हो.

ब्रांच छोटी है इसलिए रवि ही हेड है. ब्रांच में ज्यादा स्टाफ नहीं है. बस कुल मिला के 7-8 लोग हैं, जिनमें तीन लड़कियां हैं. केवल दो लड़कियां और एक लड़का कुंवारे हैं, बाकी सभी शादीशुदा हैं.

जिस एजेंट का काम सबसे ज्यादा है वो हैं मीना पांडे. मीना एक आकर्षक व्यक्तित्व की मालकिन है और बहुत खुश मिजाज हैं. उम्र है लगभग 28 साल. उनके पति राहुल मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव हैं. बच्चा कोई उनके अभी है नहीं. बच्चा हो भी कैसे … मीना के पति राहुल महीने में 15-20 दिन तो बाहर रहते हैं. जब शहर में रहे भी तो दोस्त शराब उनका पीछा नहीं छोड़ते.

मीना ने अपने आपको काम से बाँध लिया है. घर का बड़ा मकान है और पुश्तैनी पैसा है तो कोई दिक्कत नहीं है. मीना अपनी कमाई से ऐश करती है. बढ़िया कपड़े पहनना, बढ़िया खाना खाना, देर रात घूमना, मूवी ये सब उसके शौक हैं. ऑफिस में चर्चा थी कि मीना को सिगरेट और हल्की ड्रिंक्स से भी परहेज नहीं है.

जो भी हो उसका बिजनेस सबसे ज्यादा होता था. रवि भी काम में बहुत एग्रेसिव है. स्मार्ट है. ड्रेस सेंस बहुत अच्छा है. उसने ज्वाइन करते ही काम को पकड़ना शुरू किया और एक दूसरी लड़की रवीना को सपोर्ट देकर बिजनेस बढ़ाना शुरू किया.

रवीना को भी काम में मजा आने लगा, एक तो रवि जितने कुशल ऑफिसर के साथ काम सीखने को मिल रहा था और बिजनेस मिलने से कमाई भी बढ़ रही थी.
रवि सुबह 12 बजे तक आफ़िस में रहता, उसके बाद फील्ड में निकल जाता. रवीना अधिकतर उसके साथ ही रहती.

अब रवीना उससे जिद करके लंच भी अपने साथ ही करा लेती. हालांकि रवि इसकी भरपाई उसे होटल में खिला कर पूरी कर देता, पर दोनों की पट अच्छी रही थी.

अब इस बिजनेस में कोई टाइम तो होता नहीं है. क्लाइंट कभी कभी शाम, कभी रात का टाइम देते हैं. तो रवि ने रवीना से कहा कि अगर उसे असुविधा हो तो ऐसे क्लाइंट्स का बिजनेस वो दूसरे एजेंट को दिलवा दे.
पर रवीना ने कहा कि उसे कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि वो भी पिछले छह माह से पीजी में रह रही है, तो देर रात आने जाने में उसे कोई टेंशन नहीं है. पीजी में उसे खाना पैक्ड मिलता है तो वो भी दिक्कत नहीं है.

एक महीने में ही रवीना रवि के काफी नजदीक आ गयी थी. हालांकि इस बात को लेकर मीना को भी बहुत उलझन होती थी.
मीना ने एक शनिवार को रवि को अपने घर खाने पर आमंत्रित किया. रवि को बहुत उलझन तो हो रही थी पर मीना के पति राहुल का भी फोन आ गया तो उसे जाना पड़ा. खाने से पहले राहुल ने उसे ड्रिंक्स ऑफर करी तो रवि ने मीना की वजह से मना कर दिया.
पर जब खुद मीना ने ही तीन पेग बना दिए तो फिर तो कोई दिक्कत ही नहीं थी.

ड्रिंक्स के साथ स्नैक्स भी थे. राहुल तो जम कर पीने वाला था. पर रवि ने एक पेग ही लिया … मीना ने डिनर लगा दिया. राहुल ने तो बमुश्किल ही कुछ लिया, वो तो बहक रहा था और जल्दी ही अपने रूम में चला गया.

मीना ने बड़ी शर्मिंदगी के साथ रवि को सॉरी बोला तो रवि बोला- ये मेरे लिए नयी बात नहीं है, मेरे बड़े भाई भी ऐसे ही हैं.

खैर मीना ने रवि की खातिर कोई कसर नहीं छोड़ी. उसने बहुत टाईट ड्रेस पहनी थी जिसमें उसके उभार साफ़ नजर आ रहे थे.

डिनर के बाद रवि ने जाने की बात कही तो मीना बोली- कॉफ़ी पीकर जाना, कल तो सन्डे है.
रवि ने मना भी करना चाहा तो उसने जिद की और रवि का हाथ पकड़ कर सोफे पर बिठा लिया.

इस समय की मीना और ऑफिस की मीना में जमीन आसमान का अन्तर था.

सिगरेट निकालकर रवि ने मीना से इजाजत मांगी तो मीना ने हँसते हुए हाँ कह दी और बल्कि रवि की सिगरेट सुलगा भी दी.
रवि ने कहा- सुना है कि आप भी पी लेती हैं.
तो मीना बोली- हाँ, मुझे कोई एतराज नहीं है, पर अभी आप पीजिये, मैं कॉफ़ी लाती हूँ.
इतना कह कर उसने रवि की सिगरेट से एक सुट्टा मारा और छल्ले छोड़ती हुई रसोई में चली गयी.

जब तक वो कॉफ़ी लायी, रवि ड्राइंग रूम में लगी फोटो और बुक शेल्फ में लगी पुस्तकों को देखता रहा. सभी फोटो मीना और राहुल के बाहर घूमने के थे जिसमें मीना ने काफी एक्सपोज किया हुआ था. बुक शेल्फ में भी रवि को दो-तीन ऐसी किताबें दिखीं जो कम से कम ड्राइंगरूम में तो नहीं होनी चाहिए थीं.
बॉडी मसाज की एक-दो मोटी किताबें थीं. एक किताब कामसूत्र की थी. हालाँकि सभी किताबें महँगी और विदेशी थीं.

जब मीना आई तो रवि के हाथ में थाई मसाज की बुक थी. मीना ने हँसते हुए पूछा- कभी कराई है थाई मसाज?
तो रवि ने भी कह दिया- शादी से पहले दोस्तों के साथ थाईलैंड गया था, वहीं ली थी.

मीना रवि के बगल में ही बैठ गयी. कॉफ़ी के दौरान मीना ने रवि से बिजनेस दिलवाने में सपोर्ट देने को कहा और कहते कहते उसने रवि का हाथ अपने हाथों में ले लिया और बड़े अंदाज से बोली- सर, आपको बिजनेस भी मिलेगा और मुझसे कोई शिकायत भी नहीं होगी.
रवि के लिए यह नया अनुभव था.

मीना का कोमल हाथ अभी भी उसकी जांघों पर था. लम्बे रेड पेंटेड नेल्स … मीना के बदन से आती महकती खुशबू …
रवि को लगा कि कहीं वो बेकाबू न हो जाए. इसलिए उसने एक घूँट में ही कॉफ़ी खत्म की और खड़ा हो गया. उसने मीना से कहा कि वो उसकी पूरी मदद करेगा.

मीना ने आखिरी दांव चलते हुए उसे थैंक्स बोला और कहा कि ऐसे ही आते रहिएगा. राहुल के होने न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता और अब तो रवि ने उसका हाल देख ही लिया.
रवि ने मुस्कुरा कर कहा- जरूर!

पर इसके बाद जो हुआ वो रवि के लिए अप्रत्याशित था. मीना ने रवि को हग किया और कहा कि वो उसकी पर्सनालिटी से बहुत प्रभावित हुई है और उससे दोस्ती करना चाहती है.
अब मीना जैसी जवां, सेक्सी और सलीकेदार लड़की अगर किसी से छाती भिड़ा दे तो लल्लू का भी खड़ा हो जाएगा … यहाँ तो रवि था जिसके लंड को एक महीने से दाना पानी नहीं मिला था.

रवि का कोई एतराज न देख के मीना ने उसे किस भी दे दिया.
पर रवि ने कहा कि बस यहीं तक दोस्ती ठीक है और उसने मुस्कुराते हुए अपने को अलग किया और बाहर आ गया.

रवि को पसीना आ रहा था … मन कहता था कि ये गलत है … दूसरी ओर लंड कहता था कि पास आया मौका छोड़ दिया.

घड़ी में देखा 11 बज रहे थे. तभी उसकी निगाह मोबाइल पर पड़ी … रवीना की पांच मिस्ड कॉल थीं.

रवि ने उसे फोन किया तो वो बोली कि वो शाम से ही फोन मिला रही है, रवि ने फोन नहीं उठाया. एक पार्टी है उन्हें बहुत बड़ा आर्डर मिला है और वो मरीन इन्श्योरेंस सुबह ही चाहते हैं और उन्होंने अपने एक स्टाफ से सारे डाक्यूमेंट्स भिजवा दिए हैं. वो चाहते हैं कि सुबह ऑफिस खुलते ही उन्हें पालिसी इशू हो जाये.

रवीना चाहती थी कि एक बार रवि पेपर्स देख ले क्योंकि वो पार्टी कल दोपहर को बाहर जा रही है.

रवि ने रवीना से पूछा- अब तो लेट हो गए, तुमको दिक्कत होगी रात को. सुबह कर लेंगे.
पर रवीना एक्साइटिड थी, बोली- मेरी चिंता मत कीजिये, मैं पंद्रह मिनट में आपके होटल पहुँच रही हूँ.

रवि के होटल पहुँचने के साथ ही रवीना भी पहुँच गयी. वो बहुत खुश थी. काफी बड़ा बिजनेस था. रवि और ब्रांच के लिए ये बहुत बड़ी उपलब्धि थी.

रवीना बोली- मैंने खाना नहीं खाया है, कुछ मंगवाइये.
हालांकि रसोई बंद हो गया था पर रवि ने रिक्वेस्ट करके उनसे कुछ बाहर से मंगवाने को कहा.

रूम में आकर दोनों ने काम शुरू किया. काम काफी था. रवीना बहुत बेतकुल्लफी से आराम से बिस्तर पर बैठ कर काम कर रही थी. पेट भरने का इंतजाम होटल ने बखूबी कर लिया.

रवि ने सिगरेट की इजाजत रवीना से मांगी तो रवीना ने सिगरेट ही मांग ली. वो बोली- मीना ने ये लत मुझे लगाई है.

काम निबटाते-निबटाते 1 बज गया. रवि ने कहा- चलो तुम्हें पीजी छोड़ आता हूँ.
रवि ने मोटरसाइकिल निकाली, थोड़ी दूर ही गए होंगे कि अचानक तेज बारिश शुरू हो गयी. पीजी दूर थी इसलिए रवि ने बाइक वापिस होटल को मोड़ ली.

दोनों पूरे भीग गए थे. दोनों रूम में आये. समस्या ये थी कि रवीना के कपड़े पूरे भीग गए, अब वो क्या पहने. बारिश तेज थी, रात के डेढ़ बज गए थे. रवि ने रवीना को अपने शॉर्ट्स और टीशर्ट दी. दोनों ने कपड़े बदले.

रवीना ठण्ड से काँप रही थी. रवि के रूम में चाय बनाने कि केतली तो थी पर टी बेग केवल एक ही था.
रवि ने चाय बनाकर रवीना को दी.

रूम में एक ही कम्बल था. रवि ने रवीना को कम्बल में लिपटा कर बेड पर बिठाया. रवीना ने रवि को भी बेड पर ही बैठने को कहा … हालांकि दोनों को ही संकोच हो रहा था, पर मजबूरी थी.
रवीना ने रवि से कहा कि चाय वो पी ले पर रवि ने जबरदस्ती रवीना को ही दी.
तब रवीना बोली- चलो, एक दो सिप आप भी ले लो.
अब एक कप चाय से क्या होता.
रवि ने एक सिप लेकर कहा कि अगर रवीना बुरा न माने तो क्या रवि अपने लिए पेग बना ले.
रवीना ने मुस्कुरा कर हाँ कह दी.

रवि ने पेग बनाया और रवीना के कम्बल में ही पैर घुसा दिया. रवीना ने रवि से पेग से एक सिप मारने को माँगा … सिप लेकर वो बोली कि ये तो बहुत कड़वी है, उसने पहले कभी नहीं पी थी. रवि मुस्कुरा दिया. रवीना ने एक बार फिर सिप किया क्योंकि उसे ये लग रहा था कि शायद इससे कुछ गर्मी मिल जायेगी.

अब कम्बल में दोनों के पैर भी टकरा रहे थे और कुछ कुछ होने लगा था. रवीना का टॉप ढीला था और ब्रा थी नहीं तो जैसे ही कम्बल हटा उसके मम्मों के नुकीले उभार रवि को दीखते. रवि ने अब ध्यान दिया कि रवीना ने अपने नेल्स बहुत खूबसूरती से मेन्टेन कर रखे हैं और खुले बालों में वो बहुत खूबसूरत लग रही थी.

धीरे धीरे दूसरा पेग भी बन गया और अब दोनों एक एक सिप ले रहे थे. रवीना और रवि सटकर कम्बल में बैठे थे. उनके पैर एक दूसरे से चिपके हुए थे.
रवीना बोली- अब मुझे सोना है.
उसकी आवाज अब बहक रही थी. वो तो कम्बल लम्बा कर के उसके अंदर हो गयी और रवि से बोली- लाईट बंद कर दो और तुम भी सो जाओ.

रवि ने लाईट बंद करी और चूंकि डबल बेड था और कम्बल भी बड़ा था तो वो थोड़ी दूरी बना कर लेट गया. रवि का मन भी बेचैन हो रहा था.

रवीना के खराटे आने लगे. रवि ने हिम्मत करके रवीना की ओर करवट करी और एक पैर रवीना के पैर के ऊपर रख दिया. रवीना की ओर से कोई हरकत नहीं हुई. रवि की हिम्मत बढ़ी, उसने एक हाथ रवीना के पेट पर रख दिया … रवीना की टी शर्ट ऊपर उठी हुई थी … रवि ने हाथ एक ही झटके में अंदर कर दिया और सीधे मम्मे की निप्पल पर टच किया.

रवीना की निप्पल तनी हुई थीं. रवीना जगी हुई थी. वो रवि से चिपट गयी और दोनों के होंठ मिल गए. रवीना का पहला सेक्स था और रवि कि भूख पहले तो मीना ने भड़का दी थी और अब गर्म अनछुई जवानी उसे मदहोश कर रही थी.

रवि भूखे शेर की तरह रवीना के अंदर समा जाना चाहता था और रवीना भी अपने इस पहले सेक्स का और आज की व्यापारिक उपलब्धि का भरपूर मजा लेना चाहती थी. रवि ने रवीना के मम्मों को दबाते हुए चूसना शुरू किया तो अनजाने में रवीना के हाथ में रवि का लंड आ गया.

अपने कपड़ों के साथ रवि ने रवीना के कपड़े भी उतार दिए. दोनों आदम ईव की तरह नंगे बदन गुत्थम गुत्था हो रहे थे.

रवीना ने भले ही सेक्स कभी न किया हो, पर ब्लू फिल्म तो देखी ही थीं. उसकी चूत भी गीली हो चुकी थी. रवि ने बाकी रही सही कसर अपनी उंगलियाँ उसकी चूत में कर के पूरी कर दी. रवीना अब हांफने लगी थी. उसका और रवि का चेहरा एक दूसरे के थूक से लस रहा था. रवीन के बाल उलझ कर आगे आ गए थे.

रवि उसके ऊपर चढ़ गया और रवीना की टाँगें ऊपर करके चौड़ा दीं और धीरे से अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया. रवीना की चीख निकल गयी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
पर रवि नहीं माना बस अपने होंठों को उसके मुंह पर रख कर चीख रोक दी और धक्कम पेल मचा दी.

रवीना को शुरू में तो दर्द हुआ पर अब वो भी मजा ले रही थी. रवि बीच बीच में उसके मम्मी भी चूस लेता.

अब रवि के धक्के बढ़ गए थे … वो छूटने वाला था. उसने रवीना के कुंवारेपन की तो मां चोद दी थी पर उसे गर्भवती बनाने का रिस्क वो नहीं लेना चाहता था. इसलिए उसने अपना लंड झटके से बाहर निकाला और रवीना के पेट पर अपना सारा माल गिरा दिया.

तूफ़ान थम चुका था. दोनों निढाल होकर पड़ गए और ऐसे ही सो गए.

कहानी जारी रहेगी.
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