मोटे लंड की प्यासी चूत और मेरा चोदू बॉस-1

(Meri Pyasi Chut Aur Mera Chodu Boss- Part 1)

मेरा नाम दीपिका है. मेरा कद 5 फीट 2 इंच है. मेरी शादी हो चुकी है. शादी होने पर मैंने तरह-तरह के सपने देखे थे मगर जैसा सोचा था वैसा कुछ नहीं हुआ.
मुझे उम्मीद थी कि मेरा पति बहुत ही स्मार्ट होगा और मोटे लंड से चोद-चोद कर मुझे जवानी का मजा देगा. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. जब मेरी शादी हुई तो मैं अपने ससुराल गयी जो लखनऊ के एक जाने-माने इलाके में है. जो चीज मुझे सबसे बेकार लगी वो थी मेरी ससुराल. एक छोटा सा दो मंजिला मकान था. मेरा परिचय ससुराल के और लोगों से हुआ. मेरी तीन ननद थीं और एक देवर. मेरे ससुर नहीं थे और सास काफी तेज तर्रार थी.

इस घर में मेरी शादी इसलिए हुई थी क्यूंकि इन लोगों ने दहेज़ के नाम पर कुछ भी नहीं मांगा था. चूंकि मेरे पापा बहुत गरीब आदमी हैं इसलिए वो इस शादी के लिए बिना सोचे-समझे तैयार हो गये. इसलिए मेरी शादी इस घर में पक्की हो गयी क्यूंकि ये लोग कुछ नहीं मांग रहे थे.

मैंने टीवी में हमेशा देखा था की सुहागरात वाले दिन दुल्हन का कमरा बहुत अच्छी तरह से सजा होता है. बेड पर गुलाब के फूलों की सजावट होती है मगर मेरी शादी के दिन ऐसा कुछ नहीं था. कोई सजावट नहीं थी. ये देखकर मुझे कोई ख़ास ख़ुशी नहीं थी.

आज मैं चुदने वाली थी. आज मैं लंड खाने वाली थी. इससे पहले मैं आजतक नहीं चुदी थी और मन में थोड़ी ख़ुशी थी कि आज पति अपने मोटे लंड से चोद-चोदकर जन्नत का मजा दे देगा. आगे जो हुआ वो कुछ ख़ास नहीं था.

अब मैं सुहागरात के दिन हुई अपनी बातें बता रही हूँ जो मेरे पति के साथ हुईं.

मेरे पति गोविन्द ने मुझे नंगी करना शुरू कर दिया. वो बोले- दीपिका क्या तुमने कभी वो किया है?
“नही जी!” मैंने नजरें झुकाकर कहा।
“देखो चुदाई वुदाई कोई अच्छी बात नहीं होती है. इसलिए मुझसे ज्यादा उम्मीद न करना. औरतों को अपना मन पूजा पाठ में अधिक लगाना चाहिये. तुम इस घर की बहू हो. तुम्हारा मुख्य काम घर का काम करना है. खाना बनाओ. घर साफ करो और मेरी माँ की पूरी सेवा करो. यही तुम्हारा काम है!” गोविन्द ने थोड़े रोब के साथ कहा।

मुझे उनकी बात बड़ी अजीब लगी. कैसा पति है मेरा! आज हमारी सुहागरात है और इधर-उधर की बात कर रहा है. मैं सोचने लगी. फिर सब क्लियर हो गया. पति का लंड काफी छोटा था. शायद 4 इंच का होगा. 2-3 मिनट ही मुझे चोद पाते और झड़ जाते. ऐसा लगातार 3 हफ्ते हुआ. बात साफ़ थी कि गोविन्द में जवान मर्दों वाली कोई बात नहीं थी. मैं सही से चुद नहीं पाती. गोविन्द 3-4 धक्के देकर झड़ जाता. कोई रोमांटिक मर्द नहीं था. उसे तो रोमांस का ‘र’ भी नहीं मालूम था.

मैं बाथरूम में जाकर चूत में उंगली करती. मगर दोस्तो, जो मजा एक मोटा 6 इंच लम्बा लंड देता है जो भला उंगली कैसी दे सकती है. मुझे कोई मजा नहीं मिलता. शादी के 6 महीने बीत गये. एक बार भी मेरा पति गोविन्द मुझे सही से चोद नहीं सका. कभी-कभी छिप कर अपने जिओ वाले फोन में चुदाई वाली ब्लू फिल्म देख लेती पर शांति नहीं मिलती. मैं बहुत गर्म औरत थी. अभी सिर्फ 25 साल की उम्र थी मेरी. गोविन्द कभी मेरी गांड भी नहीं मारता था. न ही मुंह पर माल झाड़ता. मेरी चूची भी मुंह में लेकर नहीं चूसता था. मैं मन ही मन सोचती “किस गांडू से शादी हो गयी मेरी?”

इस तरह एक साल गुजर गया.

अब मेरी सास रोज़ ताने मारती कि मेरे पापा ने कोई दहेज़ नहीं दिया और सिर्फ थोड़े से पैसे लगाए शादी में. कोई सामान भी नहीं दिया. आये दिन पैसे को लेकर तू-तू मैं-मैं होने लगी.
“दीपिका, अब तुमको कोई जॉब करनी चाहिये. ऐसे काम नहीं चलेगा. घर में बहुत खर्च होता है. कोई जॉब ढूंढ लो!” अगले दिन गोविन्द ने मुझसे बोल दिया.
मैं भी घर की चारदीवारी से बाहर जाना चाहती थी. अखबार में नौकरी तलाशने लगी. फिर इंटरव्यू के लिए गयी. वो कोई सॉफ्टवेयर बनाने वाली कम्पनी थी. मैं साड़ी पहनकर गयी.

मैंने आपको अपने बदन के आकार के बारे में नहीं बताया. मेरा फिगर 36-30-34 का है.

साड़ी के ब्लाउज में भी मेरी बड़ी-बड़ी चूचियां बाहर की तरफ उभरी हुई होती हैं. मैं कितना भी छुपाने की कोशिश करूं लेकिन मेरे बड़े-बड़े चीनी जैसे मीठे दूध मर्दों की नजर में आ ही जाते हैं और उनके मोटे-मोटे लंडो को खड़ा कर देते हैं. सभी मर्द मुझे खा जाने वाली नजर से देखते हैं और चोदने की कामना करते हैं. सब मेरी रसीली बुर को मुंह में लेकर चूसना-चाटना चाहते हैं. ऐसा सेक्सी सामान हूँ मैं.

मैंने एक बार अपने ब्लाउज की तरफ देखा. मैं गुलाबी साड़ी में थी और आगे से ब्लाउज काफी खुला था. मेरे सफ़ेद चिकने मम्मे नजर में आ रहे थे. मैंने पीछे से बैकलेस डोरी वाला ब्लाउज पहना हुआ था. मेरी चिकनी सफ़ेद मांसल पीठ दिख रही थी.

मैंने आगे से अपने ब्लाउज को थोड़ा ऊपर किया और बॉस के केबिन में चली गयी. मैंने उसे देखा. वो 6 फीट लम्बा एक हट्टा-कट्टा लड़का था. मेरी ही उम्र का होगा.
“हैलो दीपिका जी! गुड मॉर्निंग कैसी हैं आप? मेरा नाम रवि है. ये मेरी ही कम्पनी है. आइये बैठिये आकर!” वो हसंकर बोला.
“ओके सर!” मैं धीमी आवाज में बोली और रवि सर के सामने पड़ी कुर्सी पर बैठ गयी.

वो मुझसे सवाल जबाव करने लगा. मैं बार-बार उसके चेहरे की तरफ देख रही थी. वो अच्छा ही लगा मुझे. वो हंसमुख मर्द था. मैं सोचने लगी कि 6 फुट लम्बा मर्द है ये. मेरा पति गोविन्द तो सिर्फ 5 फीट इंच का है. इसका लंड कितना लम्बा होगा! क्या 7 इंच का होगा? क्या खूब रसीला लंड होगा जो किसी भी जवान औरत की चूत को चोद-चोदकर उसे फाड़ डाले … मैं मन ही मन ये सब बातें सोचने लगी.

“तो आपकी जॉब पक्की है. आप रिसेप्शनिस्ट-कम-अस्सिस्टेंट होंगी और सिर्फ 15 हजार ही मैं आपको दे पाऊंगा.” रवि ने कहा.
“15 हजार?” मेरे मुंह से निकल पड़ा।
“देखिये इससे ज्यादा आपको सैलरी नही पाऊंगा. अभी पिछले साल हमारी कम्पनी को काफी घाटा हुआ है.” रवि सफाई देने लगा.
“मुझे मंजूर है सर!” मैं खुश होकर बोली क्यूंकि 15 हजार रूपये मेरे लिए सही थे.
“ठीक है दीपिका जी, आप कल से आ जाइए.” रवि स्मार्ट बोला।

मैं खुश थी. बस पकड़कर घर आ गयी. रात में करीब 12 बजे मेरे गांडू नंपुसक पति ने मुझे फिर चोदा. बहनचोद 2 धक्के देकर ही झड़ गया. ‘गांडू साला …’ मैंने मन ही मन उनको गाली दी. गोविन्द दूसरी तरफ मुंह करके जोर-जोर से खर्रांटे लेने लगा.

मैं बिस्तर पर नंगी थी. बार-बार मेरे नये बॉस रवि का चेहरा मेरे सामने आ रहा था. मेरे सीधे हाथ की बीच वाली उंगली जो करीब 3-4 इंच लम्बी थी, मेरी बुर में घुस गयी.

“रवि! मुझे अपने मोटे लंड से चोद डालो! मेरे स्त्रीतत्व को सार्थक बना डालो. बॉस मेरी रसीली बुर प्यासी है. इसे चोद-चोदकर इसका भोसड़ा बना डालो! मुझे रंडियों की तरह चोद डालो! मेरे मुंह पर माल झाड़ो! प्लीज! ऐसा करो!” मैं ये सब बातें मन ही मन खुद से कह रही थी.

मेरी बीच वाली उंगली जल्दी-जल्दी मेरी चिकनी चूत में सरपट-सरपट दौड़ रही थी. मैं अपने नये बॉस को सोच-सोचकर दोनों मोटी-मोटी जांघ खोलकर नंगी बिस्तर पर पड़ी थी. कम से कम 20 मिनट चूत में उंगली करती रही. अब झड़ने की बारी थी. पूरे बदन में करंट दौड़ रहा था. मेरा बदन अकड़ गया. चूत में ज्वालामुखी फट रहा था. लग रहा था कि आज मर जाऊंगी.
मीठा नशा था वो. बहुत मीठा. मैं देसी रंडियों की तरह पेश आ रही थी. उसके बाद अपने सीधे हाथ की 2 उंगली अपने भोसड़े में घुसा दी और जल्दी-जल्दी फेंटने लगी और फिर मेरी चूत ने पिचर-पिचर की आवाज के साथ मेरा अमृतरस छोड़ दिया.

मैं लम्बी-लम्बी साँसें लेती रही. अपने नये बॉस से मैं मन ही मन चुद गयी थी.

धीरे-धीरे मैंने काम शुरू कर दिया. मेरा बॉस रवि मुझे कभी उस नजरों से नहीं देखता था. मैं ही उसके पीछे पागल थी. मैं उससे चुदने के सपने देखती थी. सोचती थी कि कभी वो मुझसे प्यार करे. मेरी जॉब 10 बजे से 5 बजे तक थी. ऑफिस में मेरा ज्यादातर काम फोन कॉल के जवाब देने में बीतता था. मेरा वक़्त आराम से कट जाता था. धीरे-धीरे मुझे मेरा बॉस कुछ ज्यादा ही अच्छा लगने लगा. रोज रात में मैं उसके नाम की मुट्ठ मारती थी. शुरू के कई महीने मेरी नजदीकी रवि से ज्यादा नहीं बढ़ पाई.

एक दिन रवि बहुत टेंशन में दिख रहा था. वो अपने केबिन में था और उसकी बेचैनी मैं साफ साफ़ देख सकती थी. मैं अपनी कुर्सी से उठी और सीधा बॉस के पास गयी.
“क्या हुआ बॉस? परेशान दिख रहे हैं आप?” मैंने कहा।
“दीपिका! मेरे सिर में बहुत दर्द है.” रवि बोला।
“लाइये! मैं आपके सिर में मूव का मलहम लगा दूँ.” मैंने कहा।
“अरे तुम रहने दो.” वो मना करने लगा.

मैं अपनी कुर्सी पर आई और अपने बैग से मूव निकाला और रवि को कुर्सी पर बिठाकर माथे पर लगाने लगी. उसे तुरंत ही मूव की ठंडक मिलने लगी. फौरन फायदा होने लगा.

“मेरी बीवी नहीं चाहती है कि मेरी बहनें, भाई या कोई रिश्तेदार मेरे घर आये. जैसे ही कोई आता है वो मेरे लड़के को लेकर अपने मायके चली आती है. इसी बात पर मुझे बहुत गुस्सा आता है. जी करता है हरामजादी को मार डालूं. वो बहुत तेज औरत है. एक बार मैंने उस पर हाथ उठा दिया था. मुझे डिवोर्स देने की धमकी दे रही थी. मेरी बीवी के सामने मेरी एक नहीं चलती है. क्या करूँ?” रवि बॉस अपनी उलझन बताने लगे.

“आप उस पर ज्यादा ध्यान न दो और कहीं कोई खूबसूरत औरत के साथ सेटिंग कर लो और जिन्दगी का मजा लो.” मैं रवि को सलाह देने लगी।

मेरी उँगलियाँ उसके माथे पर जल्दी-जल्दी नाच रही थीं. इसी बीच कब मेरी साड़ी का पल्लू नीचे सरक गया और कब मेरी 36″ की बड़ी-बड़ी रसीली चूचियां बॉस को दिखने लगी मुझे पता नहीं चला.
“अपना पल्लू सही करो!!” रवि कहने लगा।
“ओह्ह!” मेरे मुंह से निकल गया, जब मैंने अपने दूध की तरफ देखा।

करीब 15 मिनट से रवि बॉस मेरे गोल-गोल बड़े-बड़े कबूतर ताड़ रहा था. मैं मूव लगाकर चली गयी. कुछ दिन बाद मेरी सेलरी का दिन था.
“ये लो अपनी सेलरी!” रवि बॉस बोला।
मुझे उसने 16 हजार दिए थे.
“बॉस! शायद आपने गलती से एक हजार ज्यादा लिफाफे में डाल दिये.” मैंने कहा और एक्स्ट्रा पैसा वापिस करने लगी.

रवि मुझे प्यार भरी नजरों से देख रहा था.
“अब तुमको 16 हजार सेलरी ही मिलेगी.” वो हँसकर कहने लगा.
“मगर 16 हजार किस लिये बॉस?” मैं हैरत से बोली।
“तुम मेरे सर में मूव भी लगाती हो. सोच रहा हूँ कि तुम्हारी बात मान लूँ. किसी खूबसूरत औरत से अफेयर कर लूँ. क्या तुम ऐसी किसी औरत को जानती हो?” रवि कहने लगा।
“ठीक है मैं आपको बताऊंगी.” मैं जल्दबाजी में बोली।
“उसकी जरूरत नहीं है. वो खूबसूरत औरत मेरे सामने है.” रवि ने मेरी तरफ देखते हुए कहा।

हम दोनों की नजरें टकरा गयीं. रवि बॉस मुझे सीधा देख रहा था. मैं भी उसे देखे जा रही थी. उसने मेरा हाथ पकड़ लिया. मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा. मैं काँप रही थी. उसने मेरे सीधे हाथ को प्यार से बेहद कोमलता से थामा और अपने होंठों के पास जाकर किस कर दिया. मैं सूखे पत्ते की तरह कांपने लगी. फिर मुझे असहज महसूस होने लगा. मैं वहां से भाग निकली.
अब मैं रवि बॉस से नजरें नहीं मिला पाती थी. एक दिन शाम को ऑफिस के सभी कमर्चारी चले गये. अब ऑफिस में कोई नहीं था. मैं आज भी साड़ी-ब्लाउज में थी. मैं जाने की तयारी कर रही थी. शाम के 5 बज चुके थे. मैं सभी फ़ाइल को सभी जगह रख कर सेट करके लगा रही थी. तभी रवि बॉस ने आकर मुझे पीछे से दबोच लिया.

“आह …” मैं घबरा गयी.
“डरो मत दीपिका!” मैं हूँ.” वो बोला और मेरे गालों पर चुम्मा लेने लगा.
“बॉस …ये आप क्या कर रहे हैं?” मैं घबरा गयी.
“तुमसे प्यार कर रहा हूँ!” वो कहने लगा.

“पर बॉस! मैं एक शादीशुदा औरत हूँ! ये सब ठीक नहीं है. अगर मेरे पति को पता चल गया तो?” मैं धक-धक करते हुए अपने दिल की धड़कन को संभालते हुए बोली. मेरे लिए ये बहुत बड़ी बात थी.
“उसे कुछ नहीं पता चलेगा! आओ मेरे कमरे में चलें.” रवि बोला।

न चाहते हुए भी मैं रवि के साथ चली गयी. उसके कमरे में ऐ.सी. चल रहा था. मैं ठंडी होने लगी. गर्मी भी काफी थी. मुझे अच्छा लग रहा था. रवि बॉस की कुर्सी बहुत बड़ी थी. वो जाकर ऑफिस के मेन गेट को बंद कर आया. फिर आकर अपनी बड़ी सी कुर्सी में बैठ गया. उसने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया. ऐ.सी. की हवा सीधी मेरी तरफ आ रही थी.
रवि मुझे किसी प्रेमिका की तरह गाल पर किस कर रहा था. मैं देखने में काफी सेक्सी माल थी. रोज अच्छी तरह से मेक-अप करके आती थी. मैं भी बिल्कुल रापचिक आइटम लग रही थी.

“बॉस! ये सब सही नहीं है.” मैं मुंह से तो कह रही थी लेकिन अंदर से मैं भी रवि से चुदने के मूड में थी. उसने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया और साड़ी के पल्लू को नीचे सरका दिया. मदमस्त बड़ी-बड़ी चूचियां 36″ की उसे दिख गयी थी. वो प्यार भरे अंदाज से मेरी चूची को अपने बड़े-बड़े हाथों से सहलाने लगा.
“नहीं बॉस! ये सब सही नहीं!” मैं धीरे-धीरे कह रही थी.

रवि आज मुझे चोदने के मूड में था. उसकी आँखों में मैंने पढ़ लिया था. शायद मैं भी यही चाहती थी. धीरे-धीरे वो मेरे मस्त-मस्त आम को सहलाने लगा. फिर हल्का-हल्का दबाने लगा.
“आह आह आई आई …” मेरे मुंह से कामुक आवाजें निकलने लगीं.
अब उसका जोश बढ़ गया. वो और तेज-तेज दबाने लगा. फिर ब्लाउज के बटन खोलने लगा.
“नहीं प्लीज!! ऐसा मत करिये बॉस.” मैं फिर बोली.

उसने ब्लाउस के सभी 4 बटन खोल दिये और मेरे दोनों कन्धों से उसे उतार दिया. मेरी बड़ी-बड़ी 36″ की चूचियां उसके मुंह में जाने को रेडी थीं. उसने जुगाड़ करके मेरी ब्रा के हुक को बहुत जल्दी खोल डाला. ब्रा को उतार कर दूर फेंका और मुझे अपनी तरफ मुंह करके चिपका लिया. मैं अब उसके सामने ऊपर से नंगी हो चुकी थी.
मेरे बॉस रवि स्मार्ट के दोनों हाथ मेरी पीठ को थामे हुए थे. उसका मुंह मेरी रसीली बड़ी-बड़ी चूचियों के बीच में था. वो मुझे हर जगह किस कर रहा था, जल्दी-जल्दी बेसब्री से. किसी कॉलेज के लड़के जैसी बेचैनी वो दिखा रहा था. वो मेरे सफ़ेद गले, चूची, क्लीवेज, मेरे गाल सब जगह पर चुम्मा ले रहा था.
“आई लव यू! दीपिका रानी!” वो कहने लगा.
“आई लव यू बॉस!!” मैंने भी बोल दिया.
“साली आज तुझे चोद डालूँगा! रंडी!” वो जवानी के नशे में बोल पड़ा.

मैं भी आज उसकी रंडी बनने को तैयार थी.
रवि बॉस का तेवर बदल गया. वो मेरा शिकार करने के मूड में हो गया. उसने मेरे गले को पकड़ा और करीब किया और मेरे डार्क पिंक लिपस्टिक वाले होंठों को पास किया और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिये. फिर वो मुझे चूसने लगा. इसी बीच मैं भी भूल गयी कि मैं शादीशुदा औरत हूँ. वो मुझे लिप लॉक होकर चूसने लगा. मैं भी उसे लिप लॉक होकर चूसने लगी.

रवि बॉस आज मुझे रंडियों की तरह चोदने वाला था. उसकी बेताबी उसका हाल बता रही थी. उसने 5 मिनट तक मेरे संतरे जैसे होंठों को चूसा और सारी लिपस्टिक व लिप लाइनर छुड़ा डाली. मेरी दाईं चूची तनी हुई ठीक उसके मुंह के सामने थी. मेरे दोनों कबूतर अब काफी सख्त हो गये थे.

रवि बॉस ने जंगलीपन दिखाना शुरू कर दिया. उसने दोनों हाथों से मेरी निप्पल्स को पकड़ लिया और ऐंठने लगा.

आपको बता दूँ कि मेरी चूचियां संगमरमर जैसी चिकनी और सफ़ेद हैं. मेरे दूध कलश जैसे गोल गोल हैं और निप्पल्स के चारों ओर बड़े-बड़े चमकदार चिकने डार्क कलर के गोले हैं. मेरे आम इतने सेक्सी और कामुक थे कि चोदने से पहले ही कोई मर्द झड़ जाये. ऐसी माल थी मैं.

वो बदतमीजी करने लगा. मुझे अपनी गोद में बिठाकर रवि अपने दोनों हाथों से मेरी निप्पल्स को मरोड़ने लगा.
“ऊई माँ!! उम्म्ह… अहह… हय… याह… अई ऐईई सी … सी … सी! मर गयी बॉस!” मैं जोर से चिल्लाने लगी.
“बहनचोद!! चिल्ला-चिल्ला के अपनी माँ क्यों चुदा रही है. क्या तेरे पति ने कभी तेरी सेक्सी कामुक निप्पल्स को नहीं मरोड़ा?” रवि बॉस बोला और फिर बड़ी तेज-तेज मरोड़ने लगा.

मुझे बहुत जोरों का दर्द हो रहा था. बस किसी तरह मैं बर्दाश्त कर रही थी.
“नहीं बॉस! मेरे पति ने कभी ऐसा नहीं किया.” मैंने दर्द में आँखें बंद कर ली थीं.
“साली!! तेरी चूचियां तो केवल जोर से मरोड़ने के लिए बनी हैं!” रवि बॉस बोला और अगले 7-8 मिनट उसने बड़ी बेदर्दी से मेरे दूध की निप्पल्स को मरोड़-मरोड़ के भर्ता बना दिया. दर्द के कारण मेरी आँखों से आंसू गिरने लगे. फिर रवि बॉस ने मेरी दाईं चूची को पकड़ा और अपने मुंह में तेजी से घुसा लिया और वहशी की तरह चूसने लगा.
“आई! ईईई आराम से बॉस! मैं फिर कराहने लगी.

मगर उसने नहीं सुना और मेरी चूची को चूसने लगा. उसका बस चलता तो मेरे आम को काट ही डालता. उसके दांत तेजी से मेरे नर्म-नर्म दूध में गड़ रहे थे. मुझे उनके इस अंदाज से मजा भी मिल रहा था. वो मुंह में लेकर मेरे कबूतर को चूस रहा था. फिर बायें दूध को भी चूस डाला. मैं भी अब चुदने को राजी हो गई थी.

“बहन की लौड़ी!! आ जा मेरा लौड़ा चूस आकर!” रवि बोला.
उसने तेजी से अपनी पैन्ट की बेल्ट खोली और पैन्ट नीचे कर दी. उसने अपने आसमानी रंग के अंडरवियर को नीचे सरकाया. पकड़ कर मुझे नीचे फर्श पर बिठा दिया.
“चूस मादरचोद!! अच्छे से मेरा लौड़ा चूस!” रवि ने सिसकारी भरते हुए कहा.

मैं भी आतुर हो चुकी थी. आज कितने महीनों बाद उसके लौड़े का दीदार होने वाला था.

कहानी दूसरे भाग में जारी रहेगी. कहानी पर अपनी राय देने के लिए मेल करें और कमेंट करें.
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