मेरी चूत और गांड दोनों प्यासी हैं-5

(Meri Chut Aur Gand dono Pyasi Hain- Part 5)

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मेरी इस कहानी के चार भाग आप पढ़ चुके हैं। अब पेश है उससे आगे!

रणवीर का लंड कभी अंदर कभी बाहर आ जा रहा था। उसने मेरे कबूतरों को छोड़कर मेरी कमर पकड़ ली और जोर-जोर से चोदने लगा। सच में इतना लम्बा और मोटा लंड जब अंदर-बाहर जा रहा था तो मुझे नशा सा हो गया।
‘साले चोद… चोद जोर से… चोद… सीईईए… आहह्ह… हैईइ… अह्ह… अह्ह… अह्ह…’

मेरी गांड मटक रही थी- आह्हह… शाबाश रणवीर… कैरी ऑन… प्लीज डोंट स्टॉप… फ़क मी… आह… आह्हह… हय हय… आह्हह… आहह्ह… शाबाश जोर से, पूरा लंड डाल कर चोदो… आह्हह… अह्हह… म्मम्म्म… सीई… हय मैं गई बस… बस… बस गई।’

रणवीर ने थोड़ी देर में अपने वीर्य की पिचकारी मेरी गांड पर मार दी और फिर अपने लंड से उसे मेरे गांड पर मलने लगा। थोड़ी देर बाद मैं उल्टी ही लेट गई और रणवीर भी मेरे ऊपर लेट गया और दोनों हाथों से मेरे मम्मों को दबाने लगा।
मुझे अब इस खेल में बहुत मजा आने लगा। फ़िर हम दोनों शांत होकर एक दूसरे से लिपट कर लेट गए। दस मिनट बाद मैं उठी और रणवीर के लंड को अपने हाथ में ले लिया।
मैंने बड़े प्यार से मेरे लंड को कहा- यू आर सो स्वीट!

मैंने रणवीर को प्यारी सी चुम्मी दी और अपने उसके लंड को मुँह में डाल लिया। अब मैं लंड को लॉलीपॉप की तरह रणवीर को दिखा-दिखा कर चूस रही थी और रणवीर मंद-मंद मुस्कुरा रहा था।

उसके बाद मैं रणवीर के ऊपर पीठ उसकी तरफ करके उसके पेट पर बैठ गई। फिर हम 69 की पोजीशन में एक-दूसरे के लण्ड-चूत को प्यार करने लगे।

रणवीर जहाँ मेरी प्यारी चूत के साथ छुपन-छुपाई खेल रहा था वहीं मैं भी उसके काले सांप के साथ दोस्ती करने में लीन थी। जब हमारा मन भर गया तो हम थोड़ी देर वैसे ही लेटे रहे और फिर रणवीर ने मुझे नीचे लेटाया और वो भी साथ में आकर लेट गया। हम लोग बिस्तर पर बाँहों में बाँहें डाले लेट गए और अब थोड़ी नींद भी आ रही थी।

हम लोग थोड़ी देर वहीं सो गए। नींद खुली तो 7 बज रहे थे मैं उठी, कपड़े पहने और रसोई में चली गई और गैस जलाने लगी, पर गैस जल ही नहीं रही थी क्यूंकि गैस खत्म हो चुकी थी।

मैंने रणवीर को उठाया और बताया- यार, गैस खत्म हो गई है, फ़ोन करके मंगा लो। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं!

रणवीर ने गैस एजेंसी में फ़ोन लगाया पर उसने अभी गैस देने से साफ़ मना कर दिया, वो बोला 5 -6 दिन पहली बुकिंग करते तो आज मिल जाती। अब अगले हफ़्ते ही हो पायेगा। हम दोनों टेंशन में आ गये।
फिर रणवीर ने उसके दोस्त सोनू को फ़ोन लगाया और पता नहीं क्या बात हुई, पर वो मुझसे बोला- साढ़े आठ बजे तक गैस सिलेंडर आ जायेगा।
मैंने रणवीर से पूछा- किसको फ़ोन किया था?
तो रणवीर बोला- मेरा कॉलेज फ्रेंड है सोनू, उसने ब्लैक में जुगाड़ की है, तो वो वहीं से ला रहा है।

मेरी भी जान में जान आई, चलो गैस-सिलेंडर आ जायेगा तो राहत मिलेगी। रणवीर और मैं थोड़ी देर बैठ के टीवी देखने लगे फिर रणवीर उठ कर बाथरूम चला गया और इधर दरवाजे की घण्टी बजी।
मैं उठी और दरवाज़ा खोला तो एक हट्टा-कट्टा, तगड़ा आदमी था जिसके साथ में एक गैस एजेंसी का लड़का था, जो गैस लिए हुए थे मैं समझ गई वो सोनू होगा।
सोनू बोला- नमस्ते भाभीजी!

मैं जब तक कुछ बोल पाती, वो लड़के को ले कर अंदर आ गया और रसोई में ले गया। उसने पुराना गैस-सिलेंडर निकाला और नया लगा दिया और लड़के को बोला- तू जा, मैं थोड़ी देर से आता हूँ।
मैंने पूछा- पैसे!
तो सोनू बोला- अरे भाभीजी आपसे क्या पैसे लेने, घर की बात है।
उतने में रणवीर भी बाथरूम से बाहर आ गया।
मैंने बोला- आप लोग बैठो, मैं चाय बना कर लाती हूँ।

मैं रसोई में चली गई और चाय बनाने लगी। उधर उन दोनों मर्दो की बातें चालू हो गईं।
सोनू बोला- वाह साले, क्या बीवी है तेरी!
तो रणवीर उसे कोने में ले गया और बोला- यार बीवी नहीं है वो, यार मेरी बहुत अच्छी फ्रेंड है। बीवी तो बाहर गई है। मुझे बाहर से खाना पड़ रहा था और तबियत भी ख़राब हो गई थी, इसलिए जूही बोली कि वो यहीं रुक जाती हूँ थोड़े दिन, ताकि तुम्हारी मदद भी हो जायेगी और घर का खाना खाओगे तो तबियत भी ठीक हो जायेगी।
सोनू बोला- सिर्फ फ्रेंड है या और कुछ भी!

तो रणवीर बोला- यार ऐसा मत बोल, बहुत क्लोज-फ्रेंड है यार, इनफैक्ट फ्रेंड से बढ़ कर है। अपनी बीवी के बाद अगर मैं किसी से कुछ शेयर कर सकता हूँ तो वो है जूही और जहाँ बात अट्रैक्शन की आती है तो यार एक लड़का और लड़की इतने क्लोज-फ्रेंड हैं तो अट्रैक्शन तो होता ही है।
मैं चाय लेकर आई और चाय देकर बेडरूम में चली गई। दोनों की बातें अभी भी चालू थीं।
दोनों ने चाय पी और सोनू बोला- अब मैं निकलता हूँ।

तो रणवीर बोला- अबे रुक जा थोड़ी देर में खाना बन जाएगा खाना कर ही जाना न, तेरी कौन सा बीवी वेट कर रही होगी। आजा बैठ, चले जाना खाना खाकर।
सोनू ने शुरुवात में तो थोड़ी बहुत आनाकानी की पर फिर मान गया और दोनों टीवी देखने लगे। मैं वापस रसोई में जाकर खाना बनाने लगी। थोड़ी देर बाद मैं भी आकर टीवी के पास बैठ गई और दोनों से बातें करने लगी। बातों-बातों में कब रात के ग्यारह बज गये, पता ही नहीं चला।
मैंने कहा- मैं खाना लेकर आती हूँ।

तो रणवीर बोला- अरे नहीं थोड़ा रुको, फ्रिज में एक रेड-वाइन पड़ी है, थोड़ी पीते हैं फिर खाना खाएंगे।
मैंने कहाँ ठीक है और आकर बैठ गई।
रणवीर उठा, रेड-वाइन निकाली, तीन गिलास लिए और वाइन डाल दी।

मैंने कहाँ मैं नहीं पियूंगी, मैं ये सब नहीं पीती।
रणवीर बोला- इसमें अल्कोहल नहीं होता, यह दारु नहीं, वाइन है। इससे नशा भी नहीं होता, बस रिलैक्स हो जाओगी। रेड वाइन को लेने के बाद सारी थकान मिट जाती है और फिर वीकेंड को एन्जॉय नहीं करेंगे तो कब करेंगे।
उसने मेरे हाथ में गिलास थमा दिया। मैंने यूं ही पकड़ कर रखा था और उनकी बातें सुन रही थी। दोनों खूब मज़े से पी रहे थे और अपनी कहानियाँ सुना रहे थे।
तभी रणवीर ने मुझे टोका- यार हमारे तीन पैग खत्म हो गये और तुमने अभी तक एक गिलास भी खत्म नहीं किया।

मैंने एक घूँट पिया, बड़ा कड़वा सा था, गाढ़ा सा लिक्विड लग रहा था। मैंने जैसे-तैसे एक गिलास खत्म किया, पर रणवीर ने तभी फिर से गिलास भर दिया।
मैंने बोला- क्या है ये यार! अब मुझसे नहीं पीया जा रहा।
रणवीर बोला- बस लास्ट, ये खत्म कर लो फिर हम खाना खाते हैं।

मैंने खाने की सोच कर जल्दी से पी ली और उठी सोचा खाना लगा देती हूँ। पर अब तो मेरी मर गई थी मुझे हल्के-हल्के चक्कर से आने लगे थे और सर भी घूम रहा था ऐसे लग रहा था सब कुछ घूम रहा है मैं कुर्सी पकड़ कर खड़ी हो गई।
रणवीर बोला- क्या हुआ?
मैंने कहा- कुछ नहीं, बस थोड़ा चक्कर सा आ रहा है मैं ठीक हूँ।
रणवीर बोला- तुम थोड़ी देर यहीं बैठ जाओ, फिर चली जाना।

मैंने यही ठीक समझा और कुर्सी पर बैठ गई। थोड़ी देर बाद रणवीर मेरे पास आया। मेरी जाँघों पर हाथ रखा और पूछा- तुम ठीक तो हो न!
मैंने कहा- पता नहीं, अजीब सा लग रहा है, मैं सो जाती हूँ, तुम लोग खाना खा लो। मैं बाद में खा लूँगी।
रणवीर बोला- चलो ठीक है, मैं तुम्हें कमरे तक छोड़ देता हूँ।
रणवीर मुझे पकड़ कर बेडरूम में ले जाने लगा, तभी अचानक से फ़ोन की घण्टी बजी तो रणवीर ने सोनू को बुलाया और कहा कि इसे ले जाकर कमरे में सुला दे, वो अभी कुछ देर में आता है।

सोनू मुझ बेड पर लेटाने लगा, तभी उसके पैर मेरे पैरों में फंस गए और वो मेरे ऊपर गिर गया और बचने के चक्कर में उसने अपने दोनों हाथ ऊपर कर लिए थे, जिस वजह से जब वो गिरा तो उसके दोनों हाथ मेरे मम्मे के ऊपर आ गए और उसके होंठ मेरे होंठों से टकरा गये। फिर क्या था सोनू ने आव देखा न ताव और चुम्बन करने लगा।

मैं उसे रोकना चाहती थी, पर इतनी हिम्मत नहीं थी कि उसे रोक पाऊँ, इसलिए बस जो करते बन रहा था वही कर रही थी। सोनू मुझे चुम्बन करने लगा, पर मेरा तो सर घूम रहा था और आखें बंद थीं।

सोनू मुझे चूमते चूमते मेरे मम्मे दबा रहा था। मुझे इतना होश तो था कि कोई मेरे मम्मे दबा रहा है पर इतनी हिम्मत नहीं थी कि उसके हाथ हटा दूँ या कुछ बोल पाऊँ। उसके चूसने का अंदाज़ और नशे में होने के कारण मैं तो जन्नत की सैर कर रही थी। अब सोनू एक हाथ से मेरी चूचियाँ दबा रहा था, दूसरे हाथ से मेरी चूत सहला रहा था।

थोड़ी देर में तो उसने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और बेड पर लेटा दिया और मुझे ऊपर से लेकर नीचे तक चूमने लगा। फिर वो मेरे ऊपर आ गया और मेरे चूत के आस-पास लंड फिराने लगा। फिर सोनू ने तुंरत मेरे ऊपर आकर मेरे दोनों टाँगें फैला दीं और लंड को हाथ से चूत के पास ले गया, उसने कमर से एक धक्का नीचे को दिया और मैंने ऊपर की ओर, और लंड चूत के अन्दर।

मुझे ऐसा लगा ना जाने मैं कहाँ गिर गई। इतने जोर का दर्द उठा, पर सोनू ने धक्के लगाने बंद नहीं किये। थोड़ी देर में सोनू आराम से धक्के लगाने लगा, मेरी थोड़ी-थोड़ी उतरने भी लगी थी और मुझे अब मजा भी आ रहा था।

सोनू अब दोनों हाथों से मेरे मम्मे पकड़ कर मसल रहा था। मुझे अब दर्द नहीं हो रहा था, इसलिए सोनू के साथ मजा आने लगा था। करीब दस मिनट के बाद सोनू मेरे ऊपर गिर गया। थोड़ी देर में वो उठा और लंड एक बार फिर चूत में घुसा दिया। सोनू ने फिर से धक्के मारने शुरू किए।

धीरे-धीरे मुझे समझ आ रहा था क्या हो रहा है, इसलिए मैं भी टाँगें उठा कर साथ दे रही थी। दस मिनट बाद सोनू हाँफने लगा और अपना वीर्य मेरी टांगों में गिरा दिया और मेरे ऊपर आकर लेट गया।
तो मैंने कहा- मुझे कस कर पकड़ लो, मैं भी गई।
और हम दोनों शिथिल अवस्था में कुछ देर पड़े रहे।

इस भाग में इतना ही अगले पड़ाव में मैं आपको बताऊँगी कि क्या हुआ जब रणवीर आया और पूरे हफ्ते भर हमने कैसे खूब मज़े किए। आप लोगों को मेरे जीवन का यह हिस्सा कैसा लगा? मुझे जरूर बताइएगा।
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