मेरी चूत और गांड दोनों प्यासी हैं-3

(Meri Chut Aur Gand dono Pyasi Hain- Part 3)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

मैंने रणवीर को चाय थमाई और रसोई में जाकर नाश्ता बनाने लगी।
कुछ देर बाद मैंने रणवीर को नाश्ता दिया और कहा- तुम तैयार हो जाओ, तब तक मैं तुम्हारे लिए खाना बना देती हूँ, नहीं तो तुम्हें दिन में भी बाहर ही खाना पड़ेगा।
रणवीर ने नाश्ता किया और कहा- मैं नहा लेता हूँ फिर मैं तुम्हें तुम्हारे घर छोड़ दूँगा।

रणवीर नहाने चला गया और मैं इधर रसोई में खाना बनाने लगी। मैंने एक घंटे में खाना बना दिया और रणवीर की प्रतीक्षा करने लगी कि वो कब आएगा और मुझे छोड़ने जाएगा।
एक घण्टा हो गया और रणवीर साहब अभी भी बाथरूम में ही थे। पता नहीं ये इतनी देर तक बाथरूम में क्या कर रहे थे, बहुत देर हो गई थी, मैंने बाथरूम का दरवाज़ा खटखटाया, पूछा- रणवीर और कितनी देर लगेगी?

रणवीर बोला- बस आधे घंटे में आता हूँ।
मैंने कहा- ठीक है और बिस्तर में लेट के मैग्ज़ीन पढ़ने लगी।
तभी मुझे ज़ोर की सू सू आ गई।
मैंने रणवीर को कहा- जल्दी निकलो, मुझे वाशरूम जाना है।
रणवीर के कहा- बस दस मिनट रुक जाओ मैं बस आ रहा हूँ नहा कर।
पर मुझसे काबू नहीं हुआ और मैंने कहा- बस अब कण्ट्रोल नहीं हो रहा, तुम दरवाज़ा खोलो मुझे सू-सू करना है जल्दी!

रणवीर ने बाथरूम का दरवाज़ा खोला और उसका नंगे बदन और फड़कते हुए लंड ने अभी झलक दिखाई। मैं दौड़ के वाशरूम गई और मूतने लगी।
क्यूंकि इनका वाशरूम और बाथरूम एक ही था इसलिए मैं जो भी कर रही थी, रणवीर को सब कुछ दिख रहा था, पर रणवीर के लिए कुछ नया नहीं था हमने रात भर एक-दूसरे को अच्छे से देख लिया था।

रणवीर चुपचाप वहाँ खड़ा मुझे देख रहा था। मुझे इस बात का एहसास तब हुआ, जब मैं पेशाब करके पीछे घूमी और अपनी सलवार का नाड़ा बाँध रही थी। मैं नाड़ा बाँधते-बाँधते बाहर आ रही थी, तभी रणवीर ने थोड़ा सा पानी मेरी नाड़े और पेट के बीच में छिड़का, जो सीधे मेरी चूत पर गिरा और मेरी थोड़ी सी सलवार गीली हो गई।

मैंने रणवीर को दोनों आँखों से घूरा और फिर नजरअंदाज़ कर बाहर आने लगी। तभी रणवीर ने फिर शरारत की और पीछे से मेरी नितम्बों पर पानी फेंक दिया। अब मेरी सलवार आगे और पीछे दोनों से गीली हो गई थी। आगे से तो ज्यादा गीली नहीं हुई थी, पर पीछे तो ऐसे लग रहा था जैसे मैं नहा कर बाहर आई हूँ। दोनों टाँगें ठंडी हो गई। अब मेरे अंदर की शेरनी भी जाग गई और मैं पलटी, मग उठाया और रणवीर के ऊपर मुँह पर पानी फेंक दिया।

इतनी देर में तो रणवीर ने न तो आव देखा न ताव और मुझे अभी बाँहों में भर लिया और शावर चला दिया। अब तो मैं पूरी तरह भीग गई थी। मैंने शुरुआत में छुड़ाने की कोशिश की पर रणवीर की मजबूत पकड़ के आगे मेरी एक न चली और अब मैं पूरी तरह भीग गई थी।

रणवीर ने मुझे अपनी बाँहों में चिपका कर भर रखा था और वो अपनी दोनों हाथों से मेरे कूल्हों को सहला रहा था। उससे एक बात से मुझे यह तो अंदाजा हो गया था कि रणवीर कि भूख अभी शान्त नहीं हुई थी। वैसे तो मेरी भी नहीं हुई थी, पर मैं तो बस समय के साथ चल रही थी क्योंकि मुझे पता था जो हुआ और जो होगा अच्छे के लिए ही होगा।

खैर छोड़िए इन बातों को और हम नहाने पर ध्यान देते हैं।

जैसे कि मैंने आपको बताया रणवीर ने मुझे अपनी बाँहों में दबोच रखा था और अपने हाथों से मेरे कूल्हों को सहला रहा था, तभी मैंने भी पहल की और नीचे हाथ डाल कर उसके लंड को अपने हाथों में पकड़ कर सहलाने लगी।

धीरे-धीरे रणवीर की पकड़ ढीली होती गई, पर मेरी पिछाड़ी पर उसके हाथों का दबाव बढ़ता गया और वो उससे धीरे-धीरे की बजाय अब ज़ोर-ज़ोर से पकड़ कर दबाए जा रहा था।

मैंने भी अपना काम जारी रखा और फिर अपना हाथ रणवीर से लंड से हटा कर अपने दोनों हाथों से रणवीर के गालों को पकड़ा और चूमने लगी। रणवीर ने भी अपना हाथ मेरी पिछाड़ी से हठा दिया और मुझे पकड़ कर चूमने लगा।

करीब दस मिनट तब शावर में हमने एक-दूसरे को चूमा और फिर रणवीर ने मेरे कपड़े उतार दिए। रणवीर ने मुझे शावर की ओर घुमाया और मेरे पीछे आ गया, वो पीछे से मुझे पकड़ कर मेरे चूचुकों को खींचने लगा। इससे जहाँ एक तरफ मुझे दर्द हो रहा था, वहीं एक दर्द भरी चुभन का अहसास भी हो रहा था और मजा भी आ रहा था।

धीरे-धीरे रणवीर ने अपने हाथ मेरे चूचुकों से हटाकर, मेरे दोनों मम्मों को अपने दोनों हाथों में भर लिया और दबाने लगा।

मैंने भी उसके हाथों पर अपना हाथ रखकर पूरा सहयोग किया। सब कुछ तो रणवीर कर रहा था, पर मैं कहाँ पीछे रहने वाली थी। अब मैं नीचे झुकी और रणवीर के लंड को अपने हाथों में पकड़ा और सहलाने लगी।

रणवीर मेरे सर पर हाथ फिरा रहा था। मैंने उसके लंड को अपने एक हाथ में पकड़ा और अपने मुँह में डाल कर चचोरने लगी। शुरूआत में तो मैं धीरे-धीरे कर रही थी, पर बाद में मैंने उसकी स्पीड तेज कर दी। रणवीर ने मेरे बालों पर अपनी पकड़ तेज कर दी और मुझे अपनी लंड की तरफ खींचने लगा।

वैसे शुरुआत में जब मैं लंड मुँह में लेती थी तो मुझे ज्यादा अच्छा नहीं लगता था, पर धीरे-धीरे मुझे इस बात का अहसास हुआ कि लड़के इसे बहुत पसंद करते हैं और इसी वजह से मैंने लड़कों के लंड चूसने शुरू किए। इससे उन्हें अच्छा भी लगता है और हमारे प्रति उनका प्यार भी बढ़ता है।

जब मेरा लंड से मन भर गया, तब मैं ऊपर उठी और रणवीर के होंठों पर अपने होंठों को रखकर फिर से चूमने लगी।

क्योंकि हम काफी देर से बाथरूम में पानी में थे इसलिए बाथरूम से जल्दी बाहर आना जरूरी था, नहीं तो हम बीमार पड़ सकते थे। इसलिए मैंने पास में रखा साबुन उठाया और रणवीर को साबुन लगाने लगी और फिर रणवीर ने भी मेरे बदन पर साबुन मला और फिर हम दोनों ने एक-दूसरे को अपने हाथों से साफ़ कर दिया।

रणवीर ने मुझे तौलिये में लपेट कर अपनी बाँहों में उठाया और बिस्तर पर लाकर छोड़ दिया। अभी भी हम दोनों की आँखें एक-दूसरे से नहीं हटी थीं।

रणवीर ने मुझे बिस्तर पर लेटाया और मेरे ऊपर आकर मुझे फिर से चूमने लगा। इस बार उसके चूमने के निशाने पर मेरे होंठ के बजाए मेरा पूरा नंगा बदन था, जो उसने ऊपर से शुरू किया और मेरी जाँघ तक चूमता रहा। अपने दोनों हाथों से मेरे मम्मों को दबाने के आनन्द उठाता रहा।

अब उसके होंठ मेरी चूत की पंखुड़ियों के पास थे पर फिर भी उसका हाथ मेरे मम्मों का साथ छोड़ने को तैयार नहीं था। थोड़ी देर बाद उसने अपने हाथ मेरे मम्मों से हटाए और दोनों हाथों से मेरी दोनों टाँगें फैला दीं और अपनी जीभ से मेरी चूत की पंखुड़ियों के बीच में अठखेलियाँ करने लगा।

मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और मजा भी आ रहा था। थोड़ी ही देर में मैं गरमा गई और मेरे मुँह से तरह-तरह की आवाज निकलने लगी।
रणवीर बोला- आज तुझे बहुत मजा आने वाला है।

रणवीर ने अपने लंड में हल्का सा अपना थूक लगा कर चूत में लंड का सुपारा टिका दिया और धीरे-धीरे मेरी चूत के ऊपर रगड़ने लगा। मेरी सिसकारियाँ तेज़ हो रही थी, मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था इसलिए मैंने रणवीर के लंड को अपने नाज़ुक हाथों से पकड़ लिया और बोली- ऊओह्ह… ह्हह रणवीर कितना मोटा और सख्त हो गया है तुम्हारा लंड, लगता है अब ये ‘मिसाइल’ अपने लक्ष्य पर दागने के लिए पूरी तरह तैयार हो गया है।

रणवीर हँसने लगा और इशारा समझ गया, अपना लंड पकड़ कर मेरी चूत के ऊपर सटा दिया।

एक ज़ोरदार धक्के से रणवीर का लंड मेरी चूत के अंदर था और मेरी आँखें एक मीठे दर्द के कारण खुली की खुली रह गईं। मुझे लगा था रणवीर धीरे-धीरे घुसाएगा, पर इसने तो एक ही बार में राकेट लांच कर दिया।

मुझे हल्का का दर्द हो रहा था क्योंकि यह मेरा पहली बार तो था नहीं और मुझे इसकी आदत भी थी, इसलिए ज्यादा दर्द नहीं हुआ। थोड़ा सा दर्द तो होता ही है। रणवीर मेरे ऊपर लेट गया और अपने होंठ से मेरे होंठ दबा लिए।

रणवीर ने फिर अपना लंड बाहर निकाला, फिर से एक जोरदार झटका मारा और लण्ड पूरा मेरी चूत में समा गया। मैंने रणवीर की पीठ को कस कर पकड़ लिया।

रणवीर अब धीरे-धीरे धक्के देने लगा। मुझे भी मजा आ रहा था। मैं भी मजे में आईई… उई…ईई… उफ्फफ… कर-कर के चूत नीचे से उठा-उठा कर चुदवा रही थी और कामुक सीत्कारें कर रही थी।

‘मज़े से चोदो, जानू बहुत मजा आ रहा है… बस… आअह्हूऊ… ऊउस्स… हायईई… इतना बड़ा लंड… मर गई आज तो… तू मेरी फाड़ देएएएए…’

रणवीर मेरी भावनाओं को समझ गया था और वो भी हँस कर अपनी चुदाई में लीन था। धीरे-धीरे रणवीर ने स्पीड बढ़ा दी और चुदाई का मजा आने लगा।

मैं भी रणवीर के धक्के के साथ अपनी कमर उछाल-उछाल कर अपनी चूत में अपने रणवीर का लण्ड लेते लगातार बड़बड़ा रही थी- ओह! अह! अह! रणवीर आज तो रात से भी ज्यादा मजा आ गया। मुझे तो तुमने मुझे दिन में तारे दिखा दिए। तुम्हें वाकयी में औरत की चूत चोदने की कला आती है। कितनी लकी है तुम्हारी बीवी जो उसे तुम जैसा पति मिला। चोद लो! चोद लो आज अपनी सहेली को ही अपनी बीवी समझ कर! उसकी मस्त चूत में अपना लण्ड डाल कर खूब चोदो! बहुत मजा आ रहा है मुझे।

कमरे के अन्दर रणवीर और मेरी चुदाई की ‘फ़च-फ़च’ की आवाजें गूंज रही थी।

‘आआह्ह… हआ… आह्ह… ह्ह… ऊउईई… ईआ… अह… ऊऊम्म… म्माआह… ऊह्हह…’

पंद्रह मिनट तक जोर-जोर के धक्कों से मेरी चूत चोदने के बाद रणवीर ने अपना धक्कों की रफ़्तार थोड़ी धीमी कर दी। थोड़ी देर में रणवीर झड़ने वाला था। मैंने उसका लंड बाहर निकाला और फिर वो मेरे ऊपर ही लेट गया।

थोड़ी देर तक हम वैसे ही लेटे रहे, फिर मैं उठी रणवीर के नीचे लिटाया और फिर मैंने अपने हाथों से अपने रणवीर का लण्ड पकड़ कर सहलाते हुए बोली- रणवीर तुम्हारा लण्ड बहुत ही शानदार है और मुझे तुमसे अपनी चूत चुदवा कर बहुत मजा आया। दो बार में ही तो मैं तो तुम्हारे और तुम्हारे लंड की मुरीद बन गई हूँ यार।

मेरी यह बात सुन कर रणवीर हँसने लगा। फिर मैं भी रणवीर के सीने पर अपना सर रखकर लेट गई।
तभी रणवीर ने पूछा- तुम्हें घर नहीं जाना?
मैं तुरंत उठी और बोली- कैसा घर? कौन सा घर? क्या यह मेरा घर नहीं?
रणवीर मेरे होंठों को पकड़ कर चूमने लगा और फिर बोला- जूही, न सिर्फ यह घर तुम्हारा है बल्कि यह घरवाला भी तुम्हारा ही समझो! हा हा!

अभी तो पहले दिन की शुरुआत हुई है, आगे-आगे देखिए होता है क्या!

इस भाग में बस इतना ही। आपके ढेर सारे ईमेल मुझे मिल रहे हैं, उन सभी को मेरा तहे दिल से शुक्रिया जो आपने मेरी कहानी और लिखने के ढंग को सराहा। मैं आगे भी यही कोशिश जारी रखूँगी और आपके इमेल का मुझे हमेशा इंतज़ार रहता है।
आप लोगों को मेरे जीवन का यह हिस्सा कैसा लगा? जरूर बताइएगा।
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