लखनऊ की शबनम के जिस्म की पहली छुअन का अहसास-2

(Lucknow Ki Shabnam Ke Jism Ki Pahli Chhuan Ka Ahsas- Part 2)

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अब तक आपने पढ़ा..
शबनम मेरे रूम पर थी। मेरा उसको चोदने का मूड बन रहा था।
अब आगे..

अगले दिन छुट्टी थी सो कोई जल्दीबाजी की टेंशन नहीं थी। अब उसके अब शरीर पर लगा केक चिपक सा रहा था।
मैंने कहा- वाशरूम में जाकर इसे धो लो।

वो वाशरूम में जाकर जैसे ही पानी के लिए झुकी, मैंने जानबूझ कर शावर ऑन कर दिया.. जिससे वो पानी में भीग गई।
वो कहने लगी- यह क्या किया यार.. मेरे कपड़े गीले हो गए।
मैंने उससे कपड़े बदलने को कहा..
तो उसने कहा- मैं पहनूंगी क्या? मैं और कोई दूसरे कपड़े भी नहीं लाई हूँ।

मैंने बहाना किया- परेशान मत हो मेरे पास इंतजाम है।
मैंने उसे एक लाल रंग की साड़ी देते हुए कहा- मैंने आपको जन्म दिन का तोहफा देने को कहा था.. ये आपको देने के लिए ही लाया था.. पर दे नहीं पाया था। सो रखा हुआ था.. आज लगता है आपको गिफ्ट देने को सही वक़्त है।

उसने बड़े प्यार से गिफ्ट को ले लिया बाथरूम में जाकर उसने गिफ्ट पैक खोल कर सारे कपड़े निकाले और पहनने लगी। मैंने उसके लिए साड़ी ब्लाउज के साथ काले रंग की पेंटी और ब्रा रखी थी। जो कि ठीक उसकी साइज़ के ही ले आया था।

जिस दिन मैंने उसकी चूची को पकड़ा था उसी दिन मैंने उसकी चूची की साइज़ का अंदाज़ा लगा लिया था और मूवी में उसकी पेंटी निकाल कर मेरे पास आ ही गई थी। तो मैंने उसी साइज़ की दूसरी ले ली थी।

वो कुछ समय बाद आई तो वो नहाने के बाद जन्नत की हूर और अप्सरा जैसी लग रही थी। मैं बस उसे देखता ही रह गया।
वह मेरे पास आई और बोली- ऐसे क्या देख रहे हैं?

मैंने उसको पकड़ लिया और उसके भीगे होंठों को चूमने लगा। फिर मैं भी नहा कर आया और हम दोनों ने खाना खाया।
उसने कहा- अब मुझे घर जाना चाहिए।
मैंने कहा- कल सुबह चली जाना। लोग क्या कहेंगे कि सूट में गई थी और साड़ी में आई हो।
‘हाँ.. यह बात तो सही है।

वो रुक गई.. शायद वो भी यही चाहती थी.. क्योंकि अब वो भी सेक्स करने के लिए तन-मन से तैयार हो चुकी थी।
फिर क्या था.. मैंने टीवी आन किया और फिर वही ‘हेट स्टोरी-2’ मूवीज लगा कर देखने लगे।

हम दोनों एक ही बिस्तर पर थे.. धीरे-धीरे शबनम गरम सीन देख कर गर्म होने लगी। मैं भी उसी वक़्त उसे प्यार से सहलाने लगा। कभी कमर पर.. तो कभी गालों को सहलाने लगा।

फिर मैंने लाइट ऑफ की और उसके सीने के पास जाकर उसकी दोनों चूचियों को मसलने लगा। धीरे-धीरे उसकी कमर को सहलाते हुए उसकी योनि की तरफ बढ़ने लगा।

मैंने उसकी साड़ी को खोल दिया और पूरी तरह हटा दिया। उसकी दोनों जाँघों को सहलाते हुए मैंने ऊपर की तरफ अपने हाथों को बढ़ाया और उसके ब्लाउज़ को भी खोल दिया।

फिर उसकी पीठ को चूमते हुए उसकी दोनों चूचियों को सहलाने लगा और चूमने लगा। मैंने उसकी दोनों चूचियों को चूम-चूम कर उसको मस्त कर दिया था। पर अभी तक मैंने शबनम की ब्रा नहीं खोली थी.. जब वो गर्म हो गई तो उसने ब्रा खोलने को कहा।

फिर क्या था.. मैंने बिना देर किए ब्रा उतार फेंका और उसकी दोनों चूचियों को अपने मुँह में लेकर अपने होंठों से निप्पलों को घुमा-घुमा कर प्यार से चूमने लगा। मेरी इस हरकत और छुवन से शबनम अब पूरी तरह गर्म हो चुकी थी।

अब वो अपने कमर और टाँगों को हिलाने लगी। मैं उसकी जाँघों के आस-पास सहलाते और चूमते हुए उसकी बुर की तरफ बढ़ा और मैंने उसको पेंटी को उतारने के लिए इशारा किया।

शबनम ने अपनी कमर को उठा दिया.. तो मैंने तुरंत उसकी लाल कलर की पेंटी उतार दी। फिर अपनी उंगली से बुर को छूने लगा। मेरी इस हरकत से उसके शरीर में एक सनसनाहट सी फ़ैल गई थी.. जिससे उसने अपने दोनों पैर आपस में जकड़ कर कस लिए थे।
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फिर मैं उसकी कमर और उसकी योनि के आस-पास चूमने लगा और फिर धीरे से उसके पैरों को अलग करते हुए, उसकी योनि पर अपना लिंग का सुपारा रख दिया।

जैसे कि शबनम पहले से ही गर्म और सेक्स के लिए तैयार हो चुकी थी.. सो मेरा गर्म और लम्बा लंड उसकी बुर में घुसने लगा.. पर ज्यादा नहीं घुस सका, केवल लंड का सुपारा ही उसकी बुर में घुस सका था, बाकी लंड अभी बाहर ही था।

मैंने थोड़ा धक्का लगाया.. तो शबनम की बुर में लंड का कुछ हिस्सा घुस गया और मैं धीरे-धीरे करते हुए अपने लिंग को अन्दर-बाहर करने लगा था.. जिससे शबनम को मजा मिल रहा था। अब बुर की झिल्ली फाड़ने का वक्त आ गया था।

मैंने दाँतों को भींच कर एक मजबूत धक्का लगाया.. तो शबनम चिल्ला उठी और कहने लगी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… बाहर निकालिए नहीं तो मैं मर जाऊँगी।
मैं कुछ देर रुक गया और उसको चूमने लगा। फिर मैं उसके होंठों को.. गालों को चूसते हुए उसकी बुर में अपने लिंग को अन्दर-बाहर करता रहा।

फिर मैंने शबनम के होंठों को अपने होंठों को कस कर भरते हुए अपना लंड शबनम की बुर की गहराइयों में डाल दिया।
इस बार उसकी चिल्लाहट मेरे मुँह में ही रह गई।

मैं फिर रुक गया.. कुछ पल बाद शबनम अपनी बुर से मेरे लंड पर झटका मारने लगी। मुझे उसकी चुदाई का मजा और अधिक आने लगा। अब शबनम खूब जोर-जोर से मेरे लंड पर अपनी बुर से धक्का मारने लगी और मैं अपने लंड से शबनम की बुर को चोदने लगा।

मैं पूरी ताकत से उसकी बुर के अन्दर तक चोदने की हर कोशिश कर रहा था। शबनम को खूब मज़ा मिल रहा था। इस तरह हम दोनों ने जम कर कई मिनट तक जानदार चुदाई की और बाद में शबनम ने अपनी बुर का गर्म अमृत रस छोड़ दिया। मैंने भी उसके दो मिनट बाद शबनम की बुर में अन्दर ही अपने लंड का खौलता हुआ रस छोड़ दिया।

अब हम दोनों शांत होकर एक-दूसरे के ऊपर पड़े रहे।

उसके बाद शबनम को कुछ मिनट बाद पेशाब लगी.. तो उसको उठ कर जाने में दर्द होने लगा, वो मेरी तरफ कातर भाव से देखने लगी। मैंने प्यार से उसको अपनी बांहों में उठाया और बाथरूम में ले गया, उसको पेशाब करा कर उसकी बुर को पानी से साफ़ किया और अपने लंड को भी धोया जो कि उसकी बुर से बहते हुए खून से लाल हो गया था।

फिर उसको लाकर बिस्तर पर लिटा दिया। वो बिस्तर पर अपनी फटी हुई बुर का खून देख कर समझ गई थी कि अब उसकी बुर पूरी तरह से खुल गई है, उसका कुंवारापन खत्म हो चुका है, मैंने भी अपना गीला लंड कपड़े से साफ़ किया और आकर लेट गया।

फिर मैं शबनम को अपने सीने से चिपका कर अपनी बांहों में भर कर.. उसके होंठों को फिर चूमने लगा। वो भी मुझे प्यार से चूमने लगी।
कुछ ही पलों बाद मैंने उसकी दोनों टांगों को फैला दिया और उसकी बुर को अपने गर्म होंठों से फिर से चाटने लगा। लगभग 5 मिनट बाद शबनम फिर से अपनी बुर का झटका मेरे मुँह पर मारने लगी। मैंने उसकी बुर को चाट-चाट उसको चोदने के लिए पूरी तरह तैयार कर दिया।

अब उसकी बुर में मैंने अपना लंड लगाया और एक लम्बा झटका मारा। मेरा पूरा लंड एक बार में शबनम की बुर की जड़ तक अन्दर घुस गया। इस बार भी उसे थोड़ा दर्द हुआ.. पर अब शबनम लंड की प्यासी बन चुकी थी.. सो उसको चुदवाने के सिवा कुछ समझ में नहीं आ रहा था।

उसने मेरे चूतड़ों को जकड़ लिया और मैं उसकी चूची को अपने मुँह में लेकर उसकी धकापेल चुदाई करने लगा। मैं होंठों से उसके होंठ और चूची दोनों को चूसते हुए चोदने में लगा था।

मैं शबनम को पूरी ताकत और जोश से पूरा 20 मिनट तक चोदता रहा, शबनम भी मुझसे पूरे मजे से चुदवाने में लगी थी।
उसने अपनी जिन्दगी में पहली बार चुदवाने का मज़ा पाया था.. क्योंकि उसने पहली बार सेक्स किया था।

हम दोनों एक साथ ही अपने अपने लंड और बुर को झाड़ कर अमृत रस छोड़ते हुए शांत हो गए। इस बार शबनम ने चुदाई का भरपूर मजा पाया और फिर हम दोनों नंगे ही चिपक कर सो गए।

अगले दिन की भी छुट्टी थी.. तो शबनम मेरे रूम पर ही थी, दिन और रात में हम दोनों ने कई बार चुदाई का मजा लिया और जिस्म की आग को ठंडी करने का मजा लिया।

उसके अगले दिन सुबह उठ कर हम दोनों एक साथ नहाए और एक-दूसरे को किस करते हुए हम दोनों लोग स्कूल आ गए।

अब जब भी सेक्स करने का मन करता है.. तो कभी मैं शबनम के रूम पर.. तो कभी शबनम मेरे रूम आ जाती है और इस तरह हम लोग सेक्स का भरपूर आनन्द उठाते हैं।

अब तक हम दोनों सैकड़ों बार से सेक्स कर चुके हैं। आज भी शबनम को मैं नए-नए तरीके से चोदता हूँ। आज भी वो मुझसे दिल लगा कर चुदवाती है। मैं भी पूरे तन-मन से शबनम को चोदता हूँ और सेक्स का एन्जॉय करता हूँ।

दोस्तो.. मेरी यह प्रेम भरी बुर चोदन की कहानी आप सबको कैसी लगी.. जरूर बताइएगा। इसके लिए आप मेरे ईमेल पर लिख सकते हैं।
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