जूनियर की बीवी-2

(Junior Ki Biwi- part 2)

This story is part of a series:

मेरी सेक्सी कहानी में आपने अभी तक पढ़ा कि मेरी कम्पनी में मेरा असिस्टेंट नया आया था. मैंने जब उसकी बीवी को देखा तो मेरा लंड उसकी चूत का स्वाद चखने के लिए तड़प उठा.
मैंने उसकी बीवी पर डोरे डालने शुरू कर दिए.
अब आगे:

जैसे ही शनिवार आया, छुट्टी थी, तो मैंने अलका को फोन किया और लंच पर आने की दावत दी. लंच के लिए एक हाई क्लास रेस्टोरेंट में जाने का मैं मन बना चुका था. अलका ने थोड़ी न नकुर की लेकिन फिर मान गई.

मैंने ठीक साढ़े बारह बजे अपनी कार उसके पास भिजवा दी. एक बजे हम रेस्टोरेंट पहुँच गए. एक कोने वाली टेबल पहले से बुक करवा रखी थी.

लंच आर्डर करने से पहले मैंने ड्रिंक्स का पूछा तो उसने मना कर दिया यह कहा कर- मैं बहुत ही कम कभी भूले भटके ले लेती हूँ.
मैंने अपने लिए बियर मंगवा ली.

बियर आ गयी तो मैंने पूछा- मैडम जी, थोड़ी सी शेयर करेंगी?
अलका बोली- अच्छा चलिए आधा ग्लास ले लूंगी आपका साथ देने के लिए!
मैंने वेटर को एक और गिलास लाने को बोला.
जब ग्लास आ गया तो उसने खुद बहुत थोड़ी सी करीब एक तिहाई गिलास बियर डाल ली.

चियर्स करके हमने बियर सिप करनी शुरू कर दी. लंच के दौरान इधर उधर की यूँ ही कुछ कुछ बातें चलती रहीं.

अंत में जब कॉफ़ी आयी तो मैंने अलका से पूछा कि उसकी हॉबी क्या क्या हैं.
तो वो बोली- रोमांटिक उपन्यास पढ़ना और रहस्यपूर्ण डरावनी फ़िल्में देखना!
उसने बताया कि उसे कौन बनेगा करोड़पति और बिग बॉस के सिवाय, कोई और टीवी के सीरियल देखने का खास शौक नहीं था.

उसने मुझसे भी मेरी हॉबी के बारे में पूछा तो मैंने कहा कि मैं सत्य घटनाओं को कहानी के रूप में लिखता हूँ.
अलका ने आश्चर्य से ऑंखें फैला के पूछा- अच्छा जी आप कहानियां भी लिखते हैं… किस किस्म की कहानियां लिखते हैं?
मैं- रोमांटिक कहानियां… जो थोड़ी थोड़ी नॉन-वेज भी होती हैं.
अलका- ओहो राज जी… थोड़ी थोड़ी नॉन-वेज… क्या बात है! कहीं छपी हैं ये कहानियां?

उस समय तक मुझे अन्तर्वासना के बारे में मालूम नहीं था इसलिए सात आठ जो कहानियां लिखी थीं वो प्राइवेट सर्कुलेशन में ही थीं. मैं मेरी रानियों को मेल कर देता था और वो अपनी विशेष सहेलियों को पढ़ने दे देती थीं. इस तरह से कहानियां पढ़ने वाले काफी लोग थे परन्तु छपी हुई कहानी जैसे कोई बहुत अधिक सर्कुलेशन नहीं था.
जुलाई 2014 में मुझे अन्तर्वासना के विषय में पता लगा तो मैंने एक एक करके वे सब कहानियां छपने भेज दीं और सभी छप भी चुकी हैं.

यही बात मैंने अलका से भी कही कि सब कहानियां मेरी गर्ल फ्रेंड्स में ही घूम रही हैं. फ़ौरन मुस्कुराते हुए बोली- अच्छा जी तो आपकी गर्ल फ्रेंड्स भी हैं… जान सकती हूँ कितनी हैं, एक या दो?
मैं- पंद्रह… सोलहवीं पर काम चल रहा है… आशा है कि सोलह हो जाएँगी.

अलका खिलखिला के हंसी. बहनचोद क्या क़यामत ढाने वाली हंसी थी हराम की ज़नी की! खन खन खन खन खन खन! बलखाती, मदमाती, मस्त नदिया की आवाज़ जैसी.
फिर बोली- अच्छा एक कहानी मुझे भी भेज दीजिये… मैं भी तो देखूं थोड़ी थोड़ी नॉन वेज कहानी कैसी होती है… आपकी बातों से एक कौतूहल जग उठा है मन में कि नॉन वेज कहानी क्या और कैसी होती है… मैंने कभी पढ़ी नहीं… न थोड़ी थोड़ी नॉन वेज, न ज़्यादा ज़्यादा नॉन वेज.

मैंने तुरंत उसकी मेल आई डी ली और बोला कि घर जाकर दो तीन कहानियां मेल कर दूंगा.

लंच के बाद हम लोग वापिस आ गए, अलका को उसके घर ड्राप किया और मैंने अपने घर आकर तीन कहानियां उसको भेज कर दीं और फिर अपनी सेक्रेटरी अनु जेम्स को चोदने के लिए बुला लिया.
अलका के साथ बिताये गए इन दो घंटों से मेरा लंड बेकाबू होकर फड़क रहा था इसलिए अनु को बुला लिया. वैसे भी उसको 8 -10 दिनों से चोदा भी नहीं था तो वो भी चुदाई के लिए बेक़रार सी थी.

खैर दोपहर तो अनु की चुदाई से रंगीन हो गई; साली को दो बार चोदा और एक बार लंड चुसवा के वीर्य पीने को दिया.

करीब दस बजे अलका का फोन आया- राज जी, आप सोने की तैयारी में तो नहीं हैं ना?
आवाज़ में मैंने कम्पन भांप लिया; यह भी भांप लिया कि उसकी थोड़ी सी साँस चढ़ी हुई थी; पक्का था कि कहानियां पढ़ के अलका पर कामभूत सवार हो गया था और शायद चूत पर उंगली रगड़ रगड़ के शांति लेने की कोशिश में थी.
लोहा गरम था.

मैं- नहीं नहीं अलका जी… मैं तो ग्यारह से पहले नहीं सोता… बोलिये क्या बात है? कैसे इस वक़्त फोन किया? सब ठीक ठाक है ना?
अलका- नहीं राज जी सब ठीक है… मैंने तो सिर्फ यह बताने को फोन किया था कि आपकी दो कहानियां पढ़ ली हैं… बहुत रोचक तरीके से लिखते हैं आप… दोनों कहानियां बहुत अच्छी लगीं.
मैं- धन्यवाद अलका जी… अब तो आप जान गयीं ना थोड़ी थोड़ी नॉन वेज कहानी कैसी होती है ? अब सोयेंगी या तीसरी कहानी भी पढेंगी?
अलका- तीसरी भी पढूंगी… उसके बाद ही सोऊंगी… बिना पढ़े तो रहा न जायगा… आपकी कहानियां काफी रोमांचित कर देती हैं… वैसे कहानी थोड़ी थोड़ी नॉन वेज नहीं बल्कि पूरी ही नॉन वेज है.
मैं हँसते हुए बोला- यदि तीसरी कहानी पढ़ के भी नींद न आए तब क्या करेंगी अलका जी?”
अलका भी हँसते हुए बोली- क्या करुँगी राज जी… कहानी के लेखक को फोन करके जगा दूंगी कि एक और कहानी भेजिए प्लीज़.

मैंने फुसफुसाते हुए कहा- अलका जी, उस लेखक को कोई नाम तो भी था कहानी में.”
अलका ने भी धीमी आवाज़ में कहा- उस लेखक ने तो अपना नाम इतना सुपर नॉन वेज रखा है कि मुझ से तो शर्म के मारे बोला भी न जाएगा.
मैंने गरम लोहे पर चोट मारी- क्यों अलका जी, चूत निवास बोलने में आपको शर्म आती है… जब नाम है तो वही बोलना पड़ेगा न.
अलका- अच्छा मिस्टर निवास जी अब चुप रहिये… आप ना बहुत वो हैं… शरारती फितरत वाले वो!

मैं समझ गया कि कल या हद से हद परसों तक ये अलका से अलका रानी बन जाएगी- ओके अलका जी… मैं भी नहीं सोऊंगा… आप कहानी पढ़िए आराम से… अगर नींद ना आए तो फोन पर बंदा हाज़िर है… मैं तब तक एक और थोड़ी थोड़ी नॉन वेज कहानी लिखता हूँ… ठीक है ना!
“जी निवास जी ठीक है… वैसे भी कल सन्डे है, कौन सा आपको ऑफिस जाना है.” अलका ने फोन बंद कर दिया.

सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि वो मुझे राज जी नहीं बोल रही थी बल्कि चूत निवास को शार्ट करके निवास जी बोल रही थी. मैंने इसका अर्थ यह लगाया कि वो कहना चाहती तो है चूत निवास मगर शर्म से पूरा चूत निवास ना बोल कर सिर्फ निवास कह रही थी.

मैं आराम से उसके फोन की प्रतीक्षा में लेट गया. मुझे पक्का विश्वास था कि फोन आएगा अवश्य.
मेरा अंदाज़ा एकदम सही साबित हुआ. करीब पौने घंटे में फोन की घंटी बजी- निवास जी, आपको जगाया तो नहीं ना?”
आवाज़ थर्राई हुई थी. ज़ाहिर था कि तीन तीन चुदाई की कहानियां पढ़ पढ़ के उस पर भयंकर कामवासना छा गई थी.

“जी अलका जी… मैंने कहा था न मैं आपके सोने के बाद ही सोऊंगा… जाग रहा हूँ… एक और कहानी मेल करूँ?”
“नहीं नहीं मिस्टर राइटर… आपकी कहानियां बहुत उथल पुथल मचा देती हैं… सोच रही थी कॉफी बना लूँ… फिर सोने की कोशिश करती हूँ.”
मैंने कहा- अच्छा आप कॉफ़ी बनाइये… मैं आपको सुलाने का इंतज़ाम लेकर आता हूँ.
अलका- आप क्यों तकलीफ करते हैं इतनी रात में… कॉफ़ी पीकर सो जाउंगी.

मैंने हँसते हुए कहा- मैडम जी कॉफी पीकर थोड़ी बहुत नींद अगर आती होगी तो वो भी भाग जायगी… कोई तकलीफ नहीं होगी मुझे… मैं ब्रांडी साथ लेकर आ रहा हूँ… कॉफ़ी में ब्रांडी मिला के लेंगे तो बढ़िया नींद की मेरी गारंटी.
अलका- ओके जैसा आप ठीक समझें.
लेकिन फिर कुछ सोच के बोली- ज़रा ध्यान से… किसी ने आपको मेरे घर में जाते देख लिया तो गज़ब हो जायगा.
“आप चिंता न करिये मैडम जी… गुलाम पीछे के दरवाज़े से आएगा… आप अपना पीछे का दरवाज़ा खुला रखिये. मैं बस पांच मिनट में आया.”
यह कह के मैंने रेमी मार्टिन की ब्रांडी के दो पेग पैमाने से नाप के एक ग्लास में डाले और पीछे के दरवाज़े से घर से बाहर निकला.

यहाँ थोड़ा सा कम्पनी की कॉलोनी के नक़्शा बता देता हूँ ताकि आपको आगे का हाल बेहतर समझ में आए.
कॉलोनी काफी अच्छी बनी हुई है जैसी कि आम तौर पर बड़ी कंपनियों की कॉलोनियां हुआ करती हैं. मेन गेट से भीतर करीब दो सौ मीटर तक सड़क के दोनों तरफ गार्डन है. उसके बाद गेस्ट हाउस, फिर क्लब और उसके बाद सड़क के दायीं तरफ फैक्ट्री के इंचार्ज यानि मेरा बंगला; और उसके सामने यानि सड़क के बायीं तरफ बच्चों का खेल कूद का मैदान जिसमें छोटे बच्चों के लिए झूले इत्यादि लगे हैं, एक बड़ा सैंड पिट, एक स्केटिंग रिंक है, एक बैडमिंटन कोर्ट, एक टेनिस कोर्ट और एक बड़ा सा प्लेग्राउंड हैं. इसके बाद सड़क दाएं को घूम जाती है और उस पर अफसरों के बंगले हैं.
सड़क इन बंगलों के बाद फिर बाएं घूम जाती है और इस बार उस पर एक पायदान जूनियर अफसरों के, दूसरे स्टाफ और सुपरवाइज़रों के घर हैं. हर लाइन के घरों के पिछवाड़े पिछली वाली लाइन के घरों के पिछवाड़ों के आमने सामने हैं और बीच में किचन गार्डन. हर लाइन के घरों के फ्रंट उसकी अगली लाइन के घरों के फ्रंट के आमने सामने हैं. बहुत आलीशान कॉलोनी है जिसमें करीब डेढ़ सौ परिवार और चालीस बैचलर लड़के और बिन ब्याही लड़कियां रहती हैं. बैचलर लड़कों और कुंवारी लड़कियों के लिए अलग अलग हॉस्टल हैं.

हाँ तो मैं बता रहा था कि मैं घर के पीछे के दरवाज़े से निकला और इधर उधर निगाह दौड़ाई. रात के सवा ग्यारह बजे एकदम सन्नाटा छाया हुआ था. सत्येन का घर मेरे घर के ठीक पीछे नहीं था बल्कि पांच घर छोड़ के दायीं तरफ था. मैंने मन ही मन तय कर लिया कि अगर अलका की चुदाई मिल गई तो जैसे ही मेरे घर के ठीक पीछे वाला घर, जब कभी भी खाली होगा, तो वो घर सत्येन को अलॉट कर दूंगा. आने जाने में सुविधा रहेगी.

लम्बे लबे डग भरता हुआ मैं कुछ ही पलों में सत्येन के घर पहुँच गया. भिड़े हुए दरवाज़े को हल्का सा धक्का दिया तो वो खुल गया. मैं भीतर घुस गया और दरवाज़ा बंद करके सांकल लगा दी. मेरे सामने बरामदा था जहाँ अलका खड़ी हुई मेरा इंतज़ार कर रही थी. मुझे देखते ही वो मुझे आने का इशारा करके अंदर चली गई. बरामदे का दरवाज़ा एक गैलरी में खुलता था और गैलरी के उस पार ड्राइंग रूम था. वहां का नज़ारा बहुत रोमांटिक बना हुआ था.

चुत चुदाई की कहानी जारी रहेगी.
आपका चूतनिवास
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