बॉस की गरम सेक्सी बीवी-2

(Boss Ki Garam Sexy Biwi- Part 2)

मेरे बॉस की सेक्सी बीवी की चुदाई स्टोरी के पहले भाग
बॉस की गरम सेक्सी बीवी-1
में आपने पढ़ा कि वो मुझसे अपने बदन की वैक्सिंग करवा रही थी.
अब आगे:

मैं ऊपर से उसके यौनांग के आसपास फैले बाल देख सकता था और साथ ही देख सकता था उसके अंग के अंदरूनी हिस्से की सुरक्षा में तैनात उसकी गहरे रंग की बाहरी दीवारें जो पौना इंच तक बाहर निकली हुई थीं और मेरा मुंह खुश्क करने के लिये पर्याप्त थीं।

उसके पेट के निचले हिस्से पर बने कट के निशान से सिजेरियन का पता चलता था। यह भी बड़े घर की लड़कियों का एक फैशन था कि वे बच्चा पॉसिबल हो तो भी योनिमार्ग से नहीं पैदा करना चाहती थीं।

“नजारा कर चुके हो तो काम शुरू करो।” उसने मुझे घूरते हुए सख्त स्वर में कहा।
और मैं यंत्रचलित सा अपने काम से लग गया।

उस खास मुकाम में वैक्स लगाने या स्ट्रिप से उसे उखाड़ने के दरमियान मेरी निगाहें बार-बार उन दीवारों में छुपने की कोशिश करते अंदरूनी हिस्से को टटोल रही थीं और जानबूझकर मैं उसकी क्लिटोरिस छू रहा था जिससे उसके बदन में पड़ती थरथराहट भी मैं अनुभव कर सकता था।

वह मुझे कुछ भी समझती हो लेकिन था तो मैं भी मर्द ही और एक विपरीतलिंगी शरीर के स्पर्श से उसका शरीर भी अपनी प्रतिक्रिया तो देता ही। मुझे यकीन था कि जितनी देर में मैंने उसकी योनि के आसपास के बाल साफ किये, उतनी देर में वह काफी गीली हो चुकी होगी।

बहरहाल, दस मिनट में काम खत्म हुआ और वह उठ बैठी।
“गुड जॉब …” उसने प्रशंसात्मक स्वर में कहा और अपना मोबाइल उठा कर मेरी तरफ बढ़ा दिया।

“मैं थोड़ी देर में आती हूँ.. तब तक यह सामान वापस रख दो और इस पर मसाज के वीडियो देखो। अब जब यह कर लिया है तो वह भी कर लोगे।”
मेरा दिल फिर जोर से धड़का.. किस मूड में थी यह जालिम औरत। मैं कशमकश का प्रदर्शन करता उसे देखता रह गया और वह उठ कर बाथरूम में घुस गयी।

वैक्सिंग के सामान को हटा कर मैं उसी टेबल पर बैठ कर मसाज का वीडियो देखने लगा। यह कोई नयी चीज नहीं थी.. अपने मोबाइल पे ही दसियों वीडियो देख चुका था मैं।
करीब पांच मिनट में वीडियो ख़त्म हुआ और पांच मिनट में वह वापस आई। देख के लगता था कि इस बीच वो नहा ली थी या टॉवल गीला कर अपने शरीर को अच्छे से पौंछ डाला था।

“वहाँ ऊपर रेक में मसाज आयल रखा है, साथ में बाउल भी है.. उसमे आयल निकाल लो और यहीं रख लो।” मुझे बताते हुए वह खुद टेबल पे लेट गयी और साथ लाये दूसरे तौलिये को रोल करके सरहाने की जगह रख दिया।
अब खुद उस तौलिये पे चेहरा टिकाती औंधी हो गयी और आँखें मूँद लीं- जैसे समझ में आये करो.. मैं नहीं टोकूंगी।

अच्छा है कि टोकेगी नहीं कम से कम.. मैं थोड़ा बेफिक्र हो कर पहले उसके हाथों का मसाज करने लगा। उंगलियाँ तेल में डुबा कर उसके हाथ को गीला करता और कंधे तक उसे मलता। साथ ही उसे मोड़ता तोड़ता और दबाता भी।

दोनों हाथ हो गये तो उसकी पीठ के ऊपरी हिस्से पर तेल डाल कर उस पर दबाव देते उसे मलने लगा।

यहां उसने खुद समझदारी का परिचय देते हुए टॉवल खोल ही दिया। यानि नीचे तो वह नग्न थी मगर टॉवल से ढकी थी.. जिसे एकदम नीचे सरका कर मैंने उसके नितम्ब तक पंहुचा दी थी और यूँ उसकी पूरी पीठ अनावृत हो गयी थी।

मैंने दोनों हाथों से उसकी पीठ की मालिश एकदम दक्ष अंदाज में करने लगा। मुझे पता था कि कहां कहां पे दबाव डालना था और उसी हिसाब से मैं अपना काम कर रहा था। मैं साईड से उसके दब कर फैले स्तन देख सकता था और पीठ मलते हुए मेरी उंगलियों को मैं उन किनारों से छुआ देता था।

“ऐसे न बन रहा हो तो टेबल पर ही चढ़ आओ।” उसने आंखें बंद किये-किये कहा।

“पैंट में तेल लग जायेगा।” मैंने अपनी समस्या बताई।

“तो पैंट और शर्ट उतार दो। बाद में नहा के पहन लेना।” उसने अपनी तरफ से छूट दी और मेरे मुंह में पानी आ गया।

इससे पहले कि उसका मूड बदल जाता, मैंने झटपट अपने कपड़े उतार कर साईड में हैंगर पर टांगे और मात्र अंडरवियर में आ गया। औरत कमीनी सही मगर फिर भी थी वह औरत ही और मेरे लिये इतना काफी था।

उसने आवाजों से भले मेरे कपड़े उतारने का अंदाजा लगाया हो लेकिन आंख खोल कर देखना नहीं गवारा किया था। जबकि मैं फ्री मोड में आ कर टेबल पर चढ़ आया और उसके दोनों ओर घुटने टिका कर अपने सख्त हाथों से उसके पीठ की मसाज करने लगा।

“पीठ पर काफी बल लगा चुके हो.. पैर इंतजार कर रहे हैं।” थोड़ी देर बाद उसने टोका।

मैं पीछे सरकता उसके पैरों पर टखनों तक पंहुच गया और वहां से दोनों जांघों तक तेल फैला कर उन्हें मलने लगा। इस पोजीशन में हालाँकि उसके कूल्हों को तौलिये से ढक रखा था लेकिन फिर भी नीचे से योनि के दर्शन हो रहे थे और मेरे लार टपकाने के लिये इतना काफी था।

“और ऊपर तक.. तौलिया हटा दो। जब छुपाने वाली चीज ही देख ली तो कूल्हे दिखाने से क्या बिगड़ जायेगा।” उसने आंखें खोल कर मुझे देखते हुए कहा।
मैंने तत्काल तौलिया हटा कर किनारे डाल दिया। उसके दोनों पुष्ट गोल और स्ट्रेचेबल नितम्ब आवरण रहित हो गये।

अब मैंने नीचे से ऊपर तक तेल डाल दिया और सख्त हाथों को पिंडलियों, जांघों से ले कर उसके नर्म नर्म चूतरों तक फिराने लगा। जितना जोर नीचे जांघों पर लगाता, उससे कहीं ज्यादा उसके चूतरों पर लगाता और उन्हें मसलने पर वैसा ही आनन्द आ रहा था जैसा वक्षों से आता।

इस बीच जानबूझकर मैं दोनों कूल्हों को एक दूसरे के समानांतर चीर देता जिससे न सिर्फ उसकी योनि का निचला हिस्सा प्रदर्शित हो जाता, बल्कि उसकी गुदा का छेद भी खुल के सामने आ जाता। वह भी इस चीज को समझ रही होगी लेकिन परपुरुष स्पर्श का रोमांच उसे भी मजा दे ही रहा होगा।

जब इससे जी भर गया तो मैंने उसे सीधे लेटने को कहा, जिससे उसके कसे हुए वक्ष भी मेरे सामने आ गये जिनसे मैं अभी तक वंचित था। उसके भूरे चूचुक भी काफी निकले हुए थे और उत्तेजना की वजह से खड़े थे, जबकि उनके आसपास का भूरा हिस्सा कोई खास बड़ा नहीं था।

मैं उसके पंजों के पास बैठ गया और उसके पैर घुटनों से मोड़ दिये, जिससे मुझे उसके पंजों की मालिश करने की आसानी हो गयी। उसकी एक-एक उंगली की मालिश करके मैंने सामने से घुटने और पिंडलियों को अच्छे से मसाज किया और फिर उसके पैर सीधे कर दिये।

तत्पश्चात उसकी जांघों को उनके जोड़ तक मलने लगा, जिससे मेरा हाथ बार-बार उसकी भगनासा को छू जाता था और मैं साफ महसूस कर सकता था कि उसकी योनि गीली हो रही थी।

इसके बाद उसकी नाभि में तेल डाल कर पूरे पेट को हल्के हाथों से मसाज देने लगा, जिस क्रम में मेरे दोनों हाथ बार-बार उसके स्तनों से टकरा रहे थे।

पेट पर हाथ चला चुकने के बाद मैंने तेल उसके सीने पर गिराया और पूरे सीने पर गर्दन तक फैला दिया। अब पहली बार उसके ठोस स्तन मेरे हाथ आये और थोड़ी मालिश गर्दन और ऊपरी पिंजर को दे के मैंने अपना सारा ध्यान उन दो रबर गेंद जैसे अवयवों पर लगा दिया और जबरदस्त अंदाज में उन्हें मलने लगा.. उन्हें मसलने के साथ ही दोनों कठोर हो चुकी घुंडियों को भी मलने, मसलने और खींचने पर जोर दे रहा था।

“हो एकदम प्योर मालिशिये ही।” बीच में उसके मुंह से बस इतना ही निकला। उसकी आंखें मजे के अतिरेक से मुंद गयी थीं और होंठ भी उसने भींच लिये थे। उसके बदन में आता तनाव मैं साफ महसूस कर सकता था।

फिर मौका देख के मैंने एक हाथ से उसके दूध मसलने तो जारी रखे और दूसरे हाथ को पेट से फिसलाते नीचे ले जा कर उसकी योनि रगड़ने लगा.. इस बार वह अपने होंठों से जोर की ‘सी …’ निकलने से न रोक सकी।

जब उसे पलट के कुछ बोलते न पाया तो मेरी हिम्मत और बढ़ गयी और मैंने हाथ में थोड़ा और तेल लगा कर अपना पूरा ध्यान उसकी योनि पर फोकस कर दिया।

उसे नीचे से ऊपर तक मसलना शुरू कर दिया.. उसकी निकली हुई क्लिटरिस वाल को खींचने लगा और एक उंगली अंदर घुसानी शुरू कर दी। उसने अब होंठ भींच लिये थे ताकि कोई आवाज न निकल सके।

लेकिन उसके जिस्म की अकड़न बता रही थी कि उसे मजा आ रहा था.. फिर एक हाथ से उसकी भगनासा को मसलते रगड़ते दूसरे हाथ की उंगली अंदर डाल कर जी-स्पॉट की तलाश में हौले-हौले ऊपरी हिस्से को रगड़ देने लगा।

थोड़ी देर तक वह एंठती बर्दाश्त करती रही फिर थोड़ी झुंझला पड़ी- अबे साले.. डंडा नहीं है तेरे पास कि उंगली से ही खोदता रहेगा?
बस इतनी सी हो तो बात थी कि हरामजादी खुद अपने मुंह से कह दे। डंडा तो मेरे पास था ही और पूरी तरह टाईट था।

चड्डी उतारने में देर नहीं लगाई मैंने और थोड़ा आयल टोपी पर लगा कर उसी सूरत में उसकी जांघों पर बैठे-बैठे, जांघों को हल्का सा खोल कर योनिमुख से सटा कर अपनी उंगली से अंदर ठेल दिया। सही रास्ता मिल गया तो वह सरक कर अंदर पंहुच गया और वह एक संतुष्टिजनक ‘आह …’ करके रह गयी।

फिर मैं उसी पोजीशन में बैठे-बैठे कमर चलाते धक्के लगाने लगा और दोनों हाथों से उसके दूध आटे की तरह गूंथने लगा।
यह पोजीशन कोई सुविधाजनक तो नहीं थी, जल्दी ही बोर हो कर हट गया और उसे उल्टा कर लिया और उस पर लद गया। उसके जिस्म पर लगा आयल मेरे जिस्म पर भी लग गया।

अपने पैरों के दबाव से उसके पैर फैला दिये और नीचे से जब ऊपर हुआ तो हर तरफ तेल की वजह से मौजूद फैली चिकनाहट की वजह से “भय्या’ को सुविधाजनक छेद ढूंढने में रत्ती भर भी मुश्किल न आई और वह “फक’ से अंदर जा घुसा।

अब मैं उसके जिस्म पर रपटने लगा।

और छोटा भाई उसकी बहन की गहराई में गोते लगाने लगा और ‘गच-गच’ की मधुर ध्वनि कमरे में गूँजती कानों में शहद घोलने लगी।

हालाँकि मुझे इस बात का लगातार डर था कि कब वह भन्ना कर मेरी औकात बताने लगे, और इस डर की वजह से ही मैं अपनी उत्तेजना पर एकाग्र नहीं कर पा रहा था जिससे लगातार धक्के लगाने के बाद भी मैं चरम पर नहीं पंहुच पा रहा था जबकि वह चरम पर पंहुच चुकी थी लेकिन गनीमत थी कि तब भी उसने मुझे रोका नहीं था।

शीशों से बाहर झमाझम होती बारिश दिख रही थी और भीगते हुए घर, पेड़ पौधे दिख रहे थे.. बारिश का शोर कमरे में भी पंहुच रहा था और इस बीच संभोग से उत्पन्न “गचाक-फचाक’ की आवाजें भी उस शोर में समाहित हो रही थीं।

जब कंसन्ट्रेट नहीं कर पाया तो खुद पे भी झुंझलाहट होने लगी और अंततः मैंने उससे अलग हो कर उसे सीधा कर लिया।

उसके चेहरे से लग रहा था जैसे अपने स्खलन के बावजूद उसका जी नहीं भरा था और यह चीज मेरे लिये अच्छी ही थी।

सबसे जनरल पोजीशन में मैंने उसकी टांगें घुटनों से मोड़ कर फैलाईं और डंडे को सीधा अंदर घुसा कर उसके ऊपर लद गया। एक हाथ से अपने को संतुलित करते दूसरे हाथ से उसका एक बूब मसलते उसके होंठों पर होंठ टिका दिये।

दिमाग के किसी कोने में यह था कि वह चेहरा घुमा लेगी, लेकिन उसने चेहरा नहीं घुमाया और मैं धक्के लगाते उसके होंठों को चूसने लगा। पहले कुछ देर वह निष्क्रिय रही, फिर जवाबी कीर्तन करते मेरे होंठ को चूसने लगी।

बीच में खुद अपनी जुबान मेरे मुंह में घुसा दी और मैं उसे चूसने लगा।

धीरे-धीरे मुझे यकीन हो गया कि वह बिना मुझे झड़ाये लात नहीं मारेगी तो मुझे एकाग्र होने की सुविधा मिल गयी और इस यकीन के साथ कि मैं वाकयी में उसे चोद रहा हूं.. उसके अंग की गर्मी और घर्षण को अपने लिंग पर महसूस करते जोर-जोर से धक्के लगाने लगा।

चरम पर पंहुचने पर मैंने उसके होंठ और दूध दोनों छोड़ दिये और कुहनियों पर बैलेंस बना कर बुरी तरह धक्के लगाने लगा। और जिस पल छोटे भाई ने फूल कर वीर्य उगलना शुरू किया, वह भी अकड़ कर जोर से थरथराते हुए मुझसे लिपट गयी।

थोड़ी देर चरम सुख को अनुभव करने के बाद मैं उससे अलग हट कर हांफने लगा।

खेल खत्म हो चुका था। वह उठ कर बाथरूम चली गयी और मैंने भी उठ कर तौलिये से ही अपना शरीर अच्छे से पौंछ कर कपड़े पहन लिये और वह निकली तो इजाजत ले कर मैं वहां से बारिश में ही निकल लिया।

इसके बाद मुझे लगा था कि चूँकि वह मेरे नीचे आ चुकी थी तो उसका व्यवहार मेरे प्रति बदल जायेगा लेकिन वह रत्ती भर भी न बदली और लगता ही नहीं था कि कभी हमारे बीच वह सब भी हुआ था।

मैंने दो महीने बहुत बर्दाश्त कर लिया उस नकचढ़ी औरत को, फिर मेरा जब्त टूट गया और मैंने एक बहाना बना कर रोनित की नौकरी को अलविदा कह दिया।

समाप्त
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