बॉस की गरम सेक्सी बीवी-1

(Boss Ki Garam Sexy Biwi- Part 1)

मेरे प्रिय पाठको, आपने मेरी पिछली कहानी
अधूरी ख्वाहिशें
पढ़ी और पसंद भी की, धन्यवाद.

डिजिटल क्रांति के चलते अपनी स्थापित नौकरी गंवाने के बाद मुझे काफी दिनों तक संघर्ष करना पड़ा था और उस दौरान दो तीन छोटी-छोटी नौकरियां करनी पड़ी थीं जिनमे से हर नौकरी में कुछ अच्छे तो कुछ बुरे अनुभव रहे थे।

लेकिन दो महीने चली एक नौकरी का अनुभव कुछ हट के रहा था तो उसका ज़िक्र कर रहा हूँ।

रोनित नाम के एक शख्स से जुड़ी थी यह नौकरी, जिसे कंप्यूटर और इंटरनेट वगैरह में दक्ष बन्दे की ज़रूरत थी और उसकी यह रिक्वायरमेंट मुझसे पूरी हो सकती थी तो फ़िलहाल वक़्त गुज़ारने और खर्चे निकालने के लिये मैंने यह नौकरी स्वीकार कर ली थी।

रोनित का ऑफिस तो पत्रकार पुरम गोमती नगर में था और उसका घर महानगर में था। मुझे लगा था कि मुझे उसके ऑफिस तक ही सीमित रहना था लेकिन जब उसने मुझे अपनी सेक्सी बीवी का शोफर कम असिस्टेंट भी बना दिया तो मेरी कोई रूचि उसकी नौकरी में न रह गयी और आगे चल के इसीलिये मैंने उसकी नौकरी को लात मार दी थी।

हालाँकि उसकी बीवी ज़बरदस्त सेक्सी थी, शक्ल सूरत और फिगर आदि से किसी मॉडल या फ़िल्मी हिरोइन को टक्कर देती हुई लेकिन उसका मिजाज़ बेहद खराब था, जबकि खुद रोनित आम सी शक्ल और मोटे शरीर कर स्वामी था और मिजाज़ में इतना बुरा नहीं था।

दोनों वैसे ही थे जैसी बहुतेरी जोड़ियाँ किसी भी पॉश शहर के उच्च वर्ग में मिल जायेंगी.. जहाँ मर्द तो खाता पीता सेहत से बेपरवाह फैला हुआ मिलेगा और उसकी बीवी फिगर कांशियस, योग, एक्सरसाइज़ करके खुद को मेंटेन रखने वाली मिलेगी।

उसका नाम सोनिया था.. साढ़े पांच फिट की लंबाई, गोरा रंग, आकर्षक कटाव लिये नैन नक्श और एकदम बढ़िया शेप में शरीर सौष्ठव, जिसके लिये वह सुबह शाम काफी मेहनत करती थी। उम्र में तीस के आसपास थी। दो बच्चे पैदा कर चुकी थी जिनसे तीन चार बार मेरा सामना हुआ था लेकिन उसकी फिगर से ऐसा लगता नहीं था।

ड्राइवर रखने में सक्षम थे लेकिन जानबूझकर नहीं रखते थे, यह मुझे रोनित की सेक्रेटरी ने ही बताया था। रोनित तो खुद ड्राईव करता था लेकिन सोनिया को जब जरूरत होती तो ऑफिस से ही किसी लड़के को कार ले कर भेज देता था।

कभी मेमसाब को किसी सहेली के घर जाना हो तो चले जाओ, कभी शॉपिंग के लिये जाना हो तो चले जाओ, कभी ब्यूटी पार्लर जाना हो तो चले जाओ।

अच्छा औरत के लिये मेरे दिल में वैसे ही हमेशा सॉफ्ट कार्नर रहा है तो मुझे यह चीज सिर्फ इसलिये नहीं खलने वाली थी कि मुझे अपने काम की जगह जब तब बॉस की बीवी को ढोना पड़ता था.. बल्कि इसलिये खली थी कि सोनिया का व्यवहार आपत्तिजनक था।

वह मुझे यूँ ट्रीट करती थी जैसे मैं वाकई कोई मामूली ड्राइवर होऊं या उसका घरेलू नौकर होऊं कि जब मौका बने डांट दो, झिड़क दो.. यह अहसास दिलाने से मत चूको कि मैं रानी साहिबा हूं और तुम बस एक मामूली ड्राइवर। शायद यही वजह रही होगी कि कोई ड्राइवर उनके यहां परमानेंट रुकता ही न रहा होगा।

जब कभी कभार सेवा देने पर वह मेरी इंसल्ट करने से नहीं चूकती थी तो स्थाई नौकरी में फंसे मजबूर ड्राइवर या घरेलू नौकर के साथ क्या बर्ताव करती होगी। जब भी रोनित मुझे उसके पास चले जाने को कहता, मेरा खून जल के रह जाता था।

उस दिन भी जब रोनित ने कहा कि सोनिया को ब्यूटी पार्लर जाना है, पंहुचा दूं तो नीचे के बाल सुलग गये थे और जी चाहा था कि मुंह पे गाली दे के मना कर दूँ लेकिन मन मसोस कर रह गया था।

मन ही मन पचासों गालियां देता गाड़ी ले कर वहां से चल पड़ा था और बाहर का हाल तो और बुरा था, जिसने दिमाग पूरी तरह भ्रष्ट कर दिया था।

सुबह से रुक-रुक के बारिश हो रही थी और सुबह ऐसी जबरदस्त बारिश हुई थी कि हर तरफ सड़कें नदियाँ बन गयी थीं और चारों तरफ रास्ते जाम हो गये थे। यह तो मुझे बाईक से जाना होता था तो गली कूचों में घुसा कर जैसे तैसे पत्रकार पुरम पहुँच पाया था। खुद रोनित डेढ़ घंटा लेट पंहुचा था और अब दो घंटे बाद मुझे वापस भगा दिया था।

सुबह ऑफिस टाईम वाला जाम तो अब नहीं था लेकिन फैजाबाद रोड पर मेट्रो के काम के चलते तो आम मौसम में जाम रहता था, फिर भला ऐसे मौसम में कैसे राहत मिल जाती।

महानगर में उसके घर तक पंहुचने में एक घंटा लग गया और फिर बड़ी तेज बारिश शुरू हो गयी थी। गाड़ी उनके बंगले तक पंहुचा के मैंने हार्न बजाया तो वह बाहर निकली।

कमबख्त.. थी तो ऐसी हसीन कि हमेशा मेरे मन में ख्याल आता था कि काश इतनी बुरी न होती।

“अंदर आ जाओ।” वह रूखे स्वर में बोली तब मैंने गौर किया कि उसके शरीर पर घरेलू कपड़े ही थे, यानि वह तैयार नहीं हुई थी अभी।
कोई जवाब दिये बिना खामोशी से मैं नीचे उतर कर उसके पीछे चल पड़ा।

“इस बारिश ने भी मुसीबत कर रखी है. सुबह बच्चों की छुट्टी करा दी तो इस बहाने उन्हें नानी के यहां जाने का बहाना मिल गया, अब शाम को उन्हें लाना पड़ेगा। चंदा आई थी लेकिन उसके घर में पानी भर गया है तो वह भी बिना कुछ किये धरे वापस भाग गयी। सुबह से खुद ही सब कर रही हूँ।” वह कलपती हुई बोली।

और मेरे मन में आया तो मैं क्या करूँ.. अपने पति को सुना यह सब। अब घर के काम तो मैं करने से रहा.. अभी नौकरी को लात मार के चला जाऊंगा।

“हर तरफ तो पानी भरा है, कोई काम हो भी तो कैसे।” वह बड़बड़ाती हुई मुझे ड्राईंग रूम में ले आई।
“आपका ब्यूटी पार्लर तो खुला होगा न?” मैंने बैठते हुए पूछा।
जवाब देने के बजाय उसने घूर कर मुझे देखा और वहीं ढका रखा पानी का गिलास उठा कर मेरी तरफ बढ़ा दिया।

“वही मुसीबत हो गयी है। आज शाम किटी में जाना है, स्लीवलेस गाउन पहनना है और इसीलिये सोचा था कि आज ही वैक्सिंग मसाज वगैरह करा लूंगी, लेकिन क्या पता था कि यह बारिश सब गुड़गोबर कर देगी।”

“मतलब.. फिर बंद है क्या?” मैं मन ही मन खुश होते हुए बोला, चलो अच्छा है बला टली और दो घूंट पानी पी कर गिलास टेबल पर रख दिया।
“अरे मेरी माधवी से बात हुई थी कि मैं घर से निकल रही हूँ आप पंहुचिये, तभी तेरे को बुलाया लेकिन अभी उसका फोन आया कि उसके साईड भी सब पानी भरा है और फिलहाल शॉप खुलने का कोई चांस नहीं।”
“फिर.. तो जाना कैंसिल?”
“तुझे बड़ी खुशी हो रही है कि जाना कैंसिल। ब्यूटी पार्लर कैंसिल होने से मेरी किटी थोड़े कैंसिल हो जायेगी। वह तो होनी ही है और मुझे स्लीवलेस गाउन पहनना ही है.. आया समझ में!”

“तो मैं क्या कर सकता हूँ।”
“करने को तो तू यह मनहूस राय भी दे सकता है कि मैं हेयर रिमूवर का इस्तेमाल कर के अंडरआर्म क्लीन कर लूं और खुद अपने हाथों से अपनी मसाज कर लूं.. तेरे मुंह का क्या है, बस हिलना ही तो है।”
“अरे भाभी मैं तो …”

“क्या मैं तो … ज्यादा डॉक्टर न बन। रेजर या वीट वगैरह न लगाती अपने अंडर आर्म पे। आई बात समझ में!”
जी में आया कि गंदी-गंदी गालियां दे दूं दो चार, लेकिन बेबसी से देखता रह गया।

“यह बारिश मेरे पैर रोक सकती है लेकिन मुझे नहीं रोक सकती। मुझे शाम को किटी में जाना है तो जाना है.. वहां बाकायदा परफार्म करना है तो करना है। ऐसे ही थोड़े पार्टी क्वीन कही जाती हूँ मैं।”
“बताइये मैं इसमें क्या कर सकता हूँ?”
“अब तो सबकुछ तू ही कर सकता है।” वह आंखें चमकाते हुए बोली और मैं सरापा सवाल बना उसे देखने लगा।

उसने मुझे उठने का इशारा किया और अपने पीछे चलाती ऊपर की मंजिल पर बने एक छोटे कमरे में ले आई जहां बड़ी-बड़ी खिड़कियों से बाहर बारिश के नजारे तो देखे जा सकते थे लेकिन शीशे ऐसे थे कि बाहर से अंदर का दृश्य नहीं देखा जा सकता था और वैसे भी बाहर बारिश में देखने के लिये होता भी कौन।

कमरे के मध्य में एक टेबल मौजूद थी जिस पर रैक्सीन शीट वाला गद्दा पड़ा हुआ था और सरहाने की साईड में ही एक एंगल की अलमारी थी जिसमें थोड़ा बहुत जो सामान रखा था वह इस बात की चुगली कर रहा था कि यह जगह मसाज के काम आती रही होगी।

“यह प्रापर मसाज रूम बनवा रखा है रोनित ने.. संडे-संडे उनका मालिशिया आता है चंपी करने और कभी-कभी मैं भी चंदा से मसाज ले लेती हूँ।”
“पर मुझे यहां किसलिये लाई हैं?” मैंने संशक भाव से उस कमीनी औरत को देखा जो अब कुटिल अंदाज में मुस्करा रही थी।
“क्योंकि फिलहाल मेरे पास ऐसी हालत में, जब पूरे लखनऊ की माँ बहन एक हुई पड़ी है और घर में दूसरा कोई नहीं है तो तेरे सिवा कोई और विकल्प नहीं।” उसने अर्थपूर्ण दृष्टि से मुझे देखा।
“मतलब?” मैंने अपना सर खुजाया।
“मतलब यह कि तुम मेरी वैक्सिंग करोगे।” उसने निर्णयात्मक स्वर में कहा।

मैं सकपका कर उसे देखने लगा.. मेरे सामने वह खुद को खोलना पसंद करेगी, इस बात से मुझे सख्त हैरानी हुई।
“लल-लेकिन मुझे यह सब नहीं आता।” मैंने अटकते हुए कहा।
“कोई बात नहीं.. मैं सिखा देती हूँ।”

तत्पश्चात उसने अपने हाथ में थमे मोबाईल पे यूट्यूब पे वैक्सिंग का एक वीडियो लगा कर दे दिया और खुद उस कमरे से अटैच बाथरूम में चली गयी।
ऐसा नहीं कि इस तरह के वीडियो मैंने पहले कभी देखे न हों लेकिन इस नजर से तो कभी नहीं देखा था कि एक दिन मुझे खुद करना पड़ेगा.. सो अब उस नजर से इसे समझने की कोशिश करने लगा।
जब तक वीडियो खत्म होता, उससे पहले ही वह बाथरूम से निकल आई और उसे देख के मेरा मुंह खुश्क हो गया।

उसने कपड़े उतार दिये थे और फिल्मी स्टाईल में ही एक टॉवल से खुद को लपेट लिया था। नीचे वह क्या पहने थी क्या नहीं.. यह तो वही जाने लेकिन नितम्ब से नीचे उसकी गोल पुष्ट टांगे जांघों से ही नंगी थीं और ऊपर कंधे, बांहों के साथ सीना भी इस हद तक तो खुला था कि उसकी क्लीवेज दिख रही थी।

“चलो शुरू करो.. वह अलमारी में वैक्स हीटर, वैक्स, वैक्स स्ट्रिप्स, टैल्कम पाउडर, स्ट्रिंजर और कोल्ड क्रीम रखी है, सब यहाँ टेबल पे रख लो और समझ लो कि एक चीज़ तो यह कि वैक्स हल्का गर्म ही लगाना है तो उसके लिये स्पेटुला पे बहुत हल्की लेयर ले कर एकाध सेकेंड हवा में रख कर फिर स्किन पे गिराते ही फ़ौरन फैलानी है.. देर नहीं करनी है कि स्किन जल जाये।”
“अब मैं कौन सा एक्सपर्ट हूँ?”
“नहीं हो तो हो जाओ.. जल गया तो समझ लेना फिर!” वह धमकी देते हुए मेरे सामने बैठ गयी।

मन ही मन उसे फिर गालियाँ देते मैंने वह सारा सामान उठा कर सामने राखी छोटी टेबल पे सजा लिया। वैक्स हीटर को लगा कर उसने जितना वैक्स बताया मैंने उसमे डाल दिया और उसे ऑन कर दिया। स्ट्रिप्स के पैकेट से एक स्ट्रिप निकाल ली और स्पेटुला संभाल लिया।

“पहले हाथ पे करना फिर ऊपर और बैक की तरफ और फिर पैर करना।” उसने आदेशात्मक स्वर में कहा।

हालाँकि यह कोई मेरा पसंदीदा काम नहीं था लेकिन फिर भी ठरकी मन की बात थी कि इतना सोच लेना ही काफी था कि मुझे उसे स्पर्श करने का मौका मिल रहा था तो मैंने थोड़े ध्यान से उसने जैसे बताया वैसे करना शुरू किया।

पहले थोड़ा पाउडर लगा देता, फिर स्पेटुला से वैक्स लेकर उसकी स्किन पे बालों के रुख के हिसाब से फिराता, फिर स्ट्रिप से उसे दबाता और अगले पल में उखाड़ देता। इसके बाद स्ट्रिंजर मल कर कोल्ड क्रीम लगा देता।
फिर एक हाथ साफ़ हो गया तो दूसरा हाथ थाम लिया। फिर दोनों हाथ के बाद कंधे, ऊपरी सीने और पीठ के ऊपरी हिस्से को साफ़ किया और फिर नीचे दोनों पैरों को घुटनों से साफ़ कर दिया।

“अब बगलों के करो।” वह टेबल पर लेटती हुई बोली और दोनों हाथ ऊपर उठा लिये।

उसकी बगलों में कोई बहुत ज्यादा बाल नहीं थे लेकिन साफ करने लायक तो थे ही। वहां इस्तेमाल होने वाले डिओ या परफ्यूम की सुगंध मेरे ठरकी मन में हलचल मचाती मेरे सामान को खड़ा किये दे रही थी। लेकिन फिर भी पूरी तरह एकाग्र रहते, पूरी तन्मयता से मैंने उसकी वैक्सिंग कर दी।

“देखा.. कैसे एक ही बार में मैंने तुम्हें एक्सपर्ट बना दिया।” अब इसका क्रेडिट भी उसी ने ले लिया।
“हो गया न.. इसे हटाऊं फिर?”
“वहां के भी बनाओगे क्या?” उसने मेरी आँखों में झांकते हुए पूछा और मेरा दिल धड़क के रह गया।

मैं अटपटाया सा उसे देखने लगा जैसे फैसला न कर पा रहा होऊं कि हां कहूँ या न और मेरे असमंजस को देख वह एकदम हंस पड़ी- इतना सोच क्या रहे हो.. मेरे प्राइवेट पार्ट को देखने और छूने का मौका मिल रहा है, वह कम है क्या?

“वहां रिस्क भी ज्यादा होगी।”
“जाहिर है.. नाजुक अंग है तो थोड़ी एहतियात से करना।” उसने मेरी स्वीकृति की परवाह किये बगैर बंधी हुई टॉवल को पेट तक उठा दिया।
और तब मुझे पता चला कि उसने नीचे चड्डी नहीं पहनी हुई थी।

क्रमशः

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