बेशर्म चालू लेडी डॉक्टर की चूत की ठरक

(Besharm Chalu Lady Doctor Ki Choot Ki Tharak)

हैलो फ्रेंड्स.. मेरा नाम राहुल है। मैं 28 साल का हूँ। मैंने यहाँ बहुत सी हिन्दी सेक्स स्टोरी पढ़ी हैं। मैंने सोचा कि मुझे भी अपना अनुभव लिखना चाहिए।
मैं यहाँ पहली बार लिख रहा हूँ। पहले मैं आप सभी को अपने बारे में बता देना चाहता हूँ।

मैं दिल्ली की एक रिच फैमिली से हूँ। मेरी हाइट 5 फीट 10 इंच है। मेरे पापा ने मुझे पढ़ने के लिए दिल्ली से पुणे भेजा था।

बात 2004 की है। तब मैं पुणे में एक किराए के फ्लैट में अकेला रहता था। उस समय तक मैंने किसी के साथ सेक्स नहीं किया था। हर एक नौजवान की तरह मेरा मन सेक्स करने का तो बहुत करता था.. लेकिन मैं थोड़ा शर्मीले स्वाभाव का हूँ इसलिए मैं कोई लड़की नहीं पटा सका था.. सो बस मुठ मार कर ही काम चला लेता था।

उन दिनों गर्मियों के दिन थे। मेरे नीचे के बाल बड़े हो गए थे। वैसे तो मैं अपने नीचे के बाल वीट क्रीम से ही साफ़ करता हूँ.. लेकिन उस दिन क्रीम नहीं थी.. सो मैंने रेजर से ही बाल साफ़ करने की सोची।
मुझे बाथरूम में गर्मी लग रही थी.. सो मैं जल्दी-जल्दी बाल काट रहा था।

अचानक ब्लेड से मेरे लंड के पास कट लग गया और ब्लीडिंग होने लगी। मैंने बाहर आ कर क्रीम वगैरह लगाई तो थोड़ी देर में खून बहना कम हो गया। मैंने सोचा कट ज्यादा हो गया है सो मुझे टिटनेस का इंजेक्शन लगवा लेना चाहिए।
मेरे फ्लैट से थोड़ी दूर ही 2-3 छोटे-मोटे क्लिनिक हैं, मैं जल्दी से नहा कर इंजेक्शन लगवाने चला गया।

कुछ दूरी पर ही ‘बेटर हेल्थ’ नाम का एक क्लिनिक है.. मैं क्लिनिक के अन्दर गया। वहाँ 3-4 पेशेंट्स ही बैठे थे। रिशेप्शन पर एक मोटी से लड़की बैठी थी।

मैंने उससे कहा- मैम मुझे टिटनेस का इंजेक्शन लगवाना है।
उसने पूछा- क्या हो गया?
मैंने कहा- कुछ खास नहीं.. बस जरा ब्लेड से कट लग गया था।

उसने और ज्यादा नहीं पूछा.. रजिस्टर में मेरा नाम लिखा और वेट करने को बोला। डॉक्टर को दिखाने का मेरा चौथा नम्बर था।

मरीज कम थे तो डॉक्टर सब को आराम-आराम से देख रहा था।

लगभग 20-25 मिनट में मेरा नम्बर आया। जब मैं डॉक्टर के केबिन में दाखिल हुआ.. तो देखा वहाँ तो एक लेडी डॉक्टर बैठी थी।
मुझे उसकी उम्र 35-40 साल के करीब लगी। वो ज्यादा सुंदर तो नहीं थी लेकिन नॉर्मल थी.. ज्यादा मोटी भी नहीं थी। उसकी छाती का नाप भी 36 या 38 इंच का होगा। वैसे वो बिल्कुल गोरी थी।

मैंने डॉक्टर से कहा- मैम, मुझे टिटनेस का इंजेक्शन लगवाना है.. मुझे ब्लेड से कट लग गया था।
डॉक्टर ने पूछा- कट हाथ में लगा है क्या?
मुझे शर्म आने लगी.. मैंने गर्दन हिला कर ‘ना’ कहा।
तब उन्होंने फिर पूछा.. तो मैंने कहा- लगा है।
मैं थोड़ी देर कुछ नहीं बोला.. तब डॉक्टर ने कहा- बताओ ना..
मैंने धीरे से कहा- जी वो.. नीचे लगा है।
डॉक्टर को थोड़ी हँसी आई.. और उन्होंने कहा- देखो शरमाओ नहीं.. मैं तो एक डॉक्टर हूँ और डॉक्टर से क्या शरमाना.. अब सही से बताओ?
मैंने कहा- जी वो मैं नीचे के बाल साफ़ कर रहा था.. तब मेरे ‘उस’ के पास थोड़ा कट लग गया।

डॉक्टर के चेहरे पर फिर एक अजीब से स्माइल थी। मुझे तो वो साली चालू टाइप की लगी।
तभी उसने कहा- साथ वाले बेड पर लेटो।

उधर मैंने देखा उधर एक बर्थ जैसी लगी थी जिस पर मरीज को लेटा कर डॉक्टर इंजेक्शन वगैरह लगाते हैं।
मैं उधर को देखने लगा।

‘मुझे दिखाओ.. कहीं जख्म ज्यादा गहरा तो नहीं है.. और ब्लीडिंग पूरी तरह रुकी है या नहीं..’
उसने खुद कुर्सी से उठ कर दरवाजा जो बंद था.. वो लॉक कर दिया और परदा लगा दिया।

उसने मुझे लेटाया और कट दिखाने को बोला।
मुझे शर्म आ रही थी.. मैं नानुकर करने लगा।

तो डॉक्टर ने कहा- तुम तो लड़कियों की तरह शर्म रहे हो।
यह बात मुझे चुभ गई और मैंने लेटे-लेटे अपना पैन्ट खोला और अंडरवियर को थोड़ा सा नीचे कर दिया।

दोस्तो, मैं दूसरों की तरह ज्यादा फेंका-फेंकी तो नहीं करूँगा.. लेकिन मेरा लंड वास्तव में लम्बा और मोटा है.. मैं चूंकि हरियाणा का हूँ.. सो मेरा जिस्म जन्मजात ही मजबूत है और वैसे भी मुझे जिम जाने की आदत है।

डॉक्टर ने मेरा अंडरवियर पकड़ कर काफ़ी नीचे कर दिया.. और कमीनी मुस्कुराने लगी।

मेरा तो शर्म से मुँह लाल हो गया। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और चुपचाप लेटा रहा।

फिर डॉक्टर ने हाथों में बिना ही कुछ ग्लब्स वगैरह पहने ऐसे ही मेरा लंड पकड़ा और उसे थोड़ा साइड में करके कट को देखने लगी।

उसने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ रखा था और दूसरे हाथ की उंगली कट पर लगा रखी थी। जिस हाथ से उसने मेरे लंड को पकड़ा था.. वो कमीनी उस हाथ से अजीब-अजीब हरकतें कर रही थी।

मुझे तो बहुत हैरानी हो रही थी कि देखो साली कितनी बेशर्म औरत है ये.. लंड को अपने हाथ से कभी टाइट पकड़ती कभी पूरी मुट्ठी में भर लेती.. तो कभी उंगलियों से लौड़े को टुनया रही थी।
मेरी तो हालत खराब होने लगी थी। मतलब मेरा लंड खड़ा होने लगा था।

तब मैंने आँखें खोल कर देखा तो वो साली धीरे-धीरे मुस्कुरा रही थी। फिर उसने मुझसे कहा- हम्म.. काफ़ी बड़ा है..
मैंने शरमाते हुए धीरे से पूछा- जी.. क्या?
उसने कहा- अरे तुम्हारा कट और क्या?

यह कहते हुए उसने जिस हाथ में मेरा लंड पकड़ा हुआ था.. उसकी मुठ्ठी थोड़ी भींच दी। वो मेरे लंड के साथ अपने हाथ से कुछ हरकतें कर रही थी।

फिर उसने थोड़ा हँसते हुए पूछा- ये कट कैसे लगा?
मैंने कहा- जी वो मैं रेजर से अपने बाल साफ़ रहा था.. तभी जल्दी-जल्दी में करने के कारण ब्लेड लग गया।

फिर उसने एकदम से पूछा- अच्छा बाल काट कर गर्लफ्रेंड से मिलने जा रहे थे क्या?
मैंने कहा- नहीं मैम.. मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।
वो बोली- क्यों.. तुम तो अच्छे खासे हैंडसम हो.. तुम्हारी बॉडी भी मस्त है और ये भी..
और उसने अपनी मुठ्ठी में मेरा लंड थोड़ा दबा दिया.. जो कि अब तक पूरा खड़ा हो चुका था।
मैं कुछ नहीं बोला।

उसने फिर स्माइल के साथ पूछा- तो तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड क्यों नहीं है.. मुझसे झूट मत बोलो.. ये बाल किसी गर्लफ्रेंड के लिए ही साफ़ किए होंगे।
मैंने कहा- नहीं मैम मैं सच कह रहा हूँ.. मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। वो तो मुझे बड़े बाल अच्छे नहीं लगते ना.. सो काट रहा था।

फिर उसने किसी दवाई से मेरे कट को थोड़ा साफ़ किया और उसके बाद कोई दवाई लगाई। दवाई लगाते समय भी उसने एक हाथ से मेरा खड़ा लंड जोर से पकड़ रखा था।

अब ये तो कोई बेवकूफ़ भी समझ जाता कि ये औरत किस टाइप की है और क्या चाहती है। लाइफ में पहली बार किसी औरत ने मेरे लंड पर हाथ लगाया था और साथ ही वो लंड के साथ अजीब-अजीब हरकत भी कर रही थी। मुझे लगा मैं तो इसके हाथ में ही झड़ जाऊँगा।

अब मेरी भी उस पर नियत खराब होने लगी थी। उसने मेरा लंड.. जो उसकी मुट्ठी में था.. को थोड़ा ऊपर नीचे किया और मुझसे इधर उधर की बात करने लगी, मेरा नाम पूछा और पूछने लगी कि तुम क्या करते हो.. कहाँ के हो.. किस कॉलेज में पढ़ते हो.. तुम्हें किस तरह की लड़कियां पसंद हैं.. आदि आदि..

जब मैं जबाब देता तो उससे डॉक्टर या मैम कहता.. तो उसने कहा- मेरा नाम मधु जैन है.. तुम मुझे मधु कह सकते हो.. ये मैम.. मैम.. क्या लगा रखा है।
फिर उसने पूछा- सेक्स के बारे में क्या सोचते हो?
मैंने कहा- क्या.. मैं समझा नहीं?

तो उसने कहा- तुम्हारा मन नहीं करता ये सब करने का?
मैंने कहा- बहुत करता है।
उसने पूछा- तो कैसे काम चलाते हो?
मैंने कहा- बस हाथ से ही कर लेता हूँ।

यह सुन कर वो हँसने लगी और बोली- कुछ कामों को खुद अपने हाथ में लेकर करने में उतना मज़ा आता है जितना किसी और के हाथ से करवाने में आता है।

इस बात पर मुझे भी हँसी आ गई। अब मुझे लगा कि जब अगली इतनी बेशर्म है तो मुझे शर्म करने की क्या ज़रूरत है। मैं भी थोड़ा आत्मविश्वास से बात करने लगा। मेरा लंड तो अब भी उसके हाथ में था.. तो सेक्स भी सर चढ़ कर बोल रहा था।

मैंने कहा- मधु जी, आज तक मुझे किसी दूसरे का हाथ मिला ही नहीं.. तो बताओ में क्या करता?
वो हँसते हुए बोली- हाथ तो बहुत हैं.. बस मांगने वाला होना चाहिए। इतना सुन कर मुझे हँसी आ गई और मैंने उसका बायाँ हाथ जो फ्री था.. पकड़ कर उसे अपने ऊपर खींच लिया। वो भी बिना कोई विरोध किए मेरी तरफ़ आ गई।

मैंने उससे ठीक से पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया। अब उसका चेहरा मेरे चेहरे के एकदम पास था।

उसने अपने दोनों हाथों से मेरे गालों को पकड़ा और अपने होंठों मेरे होंठों पर रख दिए। मुझे तो बस मजा ही आ गया। थोड़ी देर में उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी.. क्या मस्त किस कर रही थी साली.. मैंने सोचा बेटा इसी का नाम अनुभव होता है।

फिर उसने मेरे गालों पर किस किया.. वो बर्थ नुमा छोटा सा बिस्तर था और उसकी टाँगें अभी भी नीचे ही थीं.. सो मैं भी खड़ा हो गया।

अब उसने मुझे दीवार से चिपका दिया और बोली- सालों तुम हरियाणा वालों का हथियार भी कितना बड़ा ओर मोटा होता है ना..

मुझे हँसी आई.. वो भी हँसने लगी। फिर वो किस करने लगी। अब मैंने अपने हाथ उसकी पीठ पर घुमाने शुरू कर दिए। थोड़ी देर में मेरे हाथ नीचे उसके चूतड़ों पर चले गए.. क्या मुलायम-मुलायम चूतड़ थे साली के.. हाय.. मेरा तो खड़ा हो गया।

अगले दिन मुझे पता चला था कि उसका साइज़ 36-32-38 था।

मैं उसके मोटे-मोटे चूतड़ों को बुरी तरह दबा रहा था। फिर मैंने अपने हाथ ऊपर करने शुरू किए और उसके चूचों पर हाथ आ गया। मैंने सोचा साले मम्मे भी क्या मस्त चीज़ बनाई है भगवान ने.. तभी तो ये लड़कियां इन को इतना बाहर निकाल-निकाल कर चलती हैं।

उसने अपना एक हाथ नीचे करके मेरा लंड पकड़ लिया और उसे हिलाने लगी। मेरा तो बुरा हाल हो गया था। फिर मेरा लौड़ा हिलाते हिलाते उसका हाथ एकदम से मेरे कट पर लगा तो मुझे दर्द हुआ और मैंने एकदम से ‘आहह..’ बोला।

तब उसे भी थोड़ा होश आया और उसने कहा- सॉरी..
फिर वो बोली- हमें कुछ ज्यादा टाइम हो गया है.. बाहर और भी पेशेंट्स बैठे होंगे।

फिर उसने धीरे से थोड़ा परदा हटा कर देखा तो बाहर 2 औरतें बैठी थीं.. उसने कहा- आज के लिए इतना ही काफ़ी है।

मैं कुछ मायूस हुआ तो उसने अपना विज़िटिंग कार्ड देते हुए कहा- ये मेरा नम्बर है.. शाम को इस नम्बर पर फोन करना और अब तुम जाओ।
मेरा तो दिल ही टूट गया था.. वो कहते हैं न कि खड़े लंड पर किसी ने लाठी मार दी हो.. ऐसा ही महसूस हुआ।

मैं उससे फिर चिपक गया और कहा- नहीं थोड़ा और.. थोड़ा ओर.. बस 2 मिनट और..
वो हँसने लगी और बोली- तो तुम ऐसे नहीं मानोगे।

फिर उसने मुझे सीधा खड़ा किया और खुद घुटनों पर बैठ गई और अब मेरा लंड उसके मुँह के पास था। मैं समझ गया कि ये रंडी क्या करने वाली है। उसने प्यार से अपनी जीभ मेरे सुपारे पर लगाई.. मेरी तो जान ही निकलने को हो गई।

फिर उसने आराम-आराम से अपनी जीभ आगे-आगे घुमाई और उसका एक हाथ मेरे टट्टों से खेलने लगा था। मैं तो जन्नत की सैर कर रहा था।
अब मुझे सच में लग रहा था कि कुछ काम किसी और के हाथ से करवाने में कुछ ज्यादा ही मज़ा है।

उसने धीरे-धीरे आधा लंड मुँह में ले लिया.. मैं तो पागल ही हो गया था।
मैंने अपने दोनों हाथों से उसके सर को कस कर पकड़ लिया था और धीरे-धीरे उसके मुँह में झटके लगाने शुरू कर दिए।

मुझे लग रहा था कि मैं बस झड़ने वाला हूँ। वो उसी तरह प्यार से मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसती रही।

तभी मेरी बॉडी अकड़ने लगी और मैं अपना लंड उसके मुँह में अन्दर धकेलने लगा.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… लेकिन उसने हाथ से रोक रखा था और लौड़े को आधे से ज्यादा अन्दर ना जाने दिया।
मैं तभी झड़ने लगा और मुझे लगा मेरा इतना माल आज तक कभी भी ना निकला होगा।

मैं बहुत देर तक उसके मुँह में झड़ता रहा.. और वो रंडी सारा माल पी गई। फिर मेरे लंड में गुदगुदी सी होने लगी। मैंने अपना लंड उसके मुँह से बाहर निकाल लिया।

वो भी खड़ी हुई और स्माइल के साथ बोली- अब मिली कुछ शांति..
मैंने धीरे से कहा- डार्लिंग बस मज़ा ही आ गया।

वो बोली- बच्चे ये तो सिर्फ ट्रेलर था.. फिल्म तो अभी देखनी बाकी है।

फिर उसने कहा- बहुत ज्यादा टाइम लग गया है.. अब तुम अब जाओ और मेरे पास शाम को कॉल करो। फिर में आगे का प्लान बताती हूँ और अब टाइम ज्यादा हो गया है.. सो तुम्हारा इंजेक्शन भी कल ही लगाऊँगी।
फिर उसने मेरे गाल पर हल्का सा किस किया और ‘बाय’ बोला।

मैंने उसे अपनी तरफ़ खींच कर हग किया और फिर धीरे से बिना आवाज़ किए दरवाजे की कुंडी खोल कर बाहर आ गया। बाहर पेशेंट्स बैठे थे.. मैं चुपचाप नीचे देखता हुआ क्लिनिक से बाहर आ गया।

शाम को क्या हुआ उसकी कहानी फिर कभी लिखूंगा।

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