छोटी साली के बाद रूपा-1

लेखक : वीरेंदर

प्रिय पाठको, आपने मेरी कहानियाँ पढ़ी।
अब इस कहानी को पढ़ने से पहले मैं आपको याद दिला दूँ कि मेरी बीवी ने कामवाली माया की बेटी रूपा को घर के काम के लिए रख लिया था। एक रात मेरी छोटी साली ने मेरी बीवी को दवाई के सहारे सुला दिया और हम भूल गए थे कि माया की बेटी रूपा घर में थी, हम अपनी तरफ से बेफिक्र होकर मजे से नंगे एक दूसरे के जिस्मो में खोये थे, रूपा मे मुझे मेरी साली के साथ नंगे होकर चुदाई करते देख लिया।

वैसे मैंने रूपा को पहले भी देखकर जान लिया था कि वो जवान हो रही है, लेकिन जब उसने मुझे नंगा देखा, मुझ उसकी जवानी का पूरा एहसास हुआ।

साली को मैंने आराम से चोदा और अपने कमरे में जाने लगा तो सोचा एक बार देखूँ रूपा सो गई या !!

मुझे माया से कुछ दिन पहले पता चला था कि कोई लड़का रूपा को चाहता है और उसने रूपा को उसके साथ चुम्मा-चाटी करते पकड़ा था।

रूपा कुछ घबराई सी पासे पलट रही थी, वो जमीन पर सोई थी, सोई नहीं थी अभी लेटी थी। मुझे कुछ खुसर-फुसर सुनी तो देखा कि उसके हाथ में एक मोबाइल था और वो किसी से बातें कर रही थी, मैं वहीं रुक गया,

रूपा मोबाइल पर बोल रही थी- तुझे मालूम है, आज जब मैं छोटी दीदी को दूध देने गई तो वहाँ तो नज़ारा बदला हुआ था, साब जी और उनकी छोटी साली दोनों बिल्कुल नंगे थे। बोली- अमर, क्या ऐसा भी होता है कि सही जगह की बजाये उलटी जगह में कुछ हो पाता है?

पता नहीं उसको उसके यार ने क्या जवाब दिया, पर रूपा बोली- शर्म करो, मुझे ऐसी बातें पसंद नहीं हैं।

लेकिन साली एक नंबर की कुतिया थी उसका खाली हाथ कभी उसकी फुद्दी पर जाता कभी उसके मम्मों पर !

मेरे मन में आया- वाह वरिंदर वाह ! इतना करार माल घर में पल रहा है, लगा दे निशाना, पकड़ ले कमीनी को !

लेकिन फिर सोचा कि ऐसे एकदम से कहीं बात बिगड़ जाए।

उसके यार ने पता नहीं उसको क्या कहा, वो बोली- तुम बहुत शैतान हो ! लेकिन मैं इतनी जल्दी ना काबू आऊँगी !

कह कर वो अपनी फुद्दी मसलने लगी, कभी मम्मे मसलने लगती।

मेरा गोपाल पूरा खड़ा था, मैंने अपना मोबाइल निकाला और उसकी मूवी बना डाली।

अब मेरी नजर उस पर थी। सुबह जब मैंने उसको देखा, बड़े गौर से देखा मैंने, उसकी आँखों में आंखें डाल कर देखा और धीरे से आँख दबा दी।

वो शर्म से लाल हो गई, लेकिन उस वक्त सभी घर में थे।

अब मेरा निशाना रूपा की फुद्दी फाड़ने का था, हूँ तो पंजाबी जाट ! क्या हुआ कि गाजियाबाद में बस गया।

दोस्तो, एक बात मैंने नोट की है कि पंजाबी लौड़े की यहाँ औरतें दीवानी हैं, तभी तो यहाँ आकर मैं कितना बड़ा चोदू बन गया था।

रूपा रात को अकेली ही सोती थी लेकिन मोना को रोज़ नींद की दवाई देना सही नहीं था उधर पिंकी भी भारत आ गई थी अपने खसम के साथ।

मेरा दिल रूपा जैसी कमसिन लड़की को कलि से फूल बनाने का था, उसकी फ़ुद्दी के सिंदूर से लौड़े के माथे को तिलक करवाना था।

दोपहर को मौका था, मोना और छोटी साली बाज़ार जाने के लिए तैयार थी, सोचा उनको छोड़ वापस आऊँगा और रूपा से तिलक लगवाऊँगा।

मैं घर लौटा तो पिंकी वहाँ आई हुई थी, मुझे देख उसकी बांछें खिल गई, वो दौड़ी और मेरे सीने लग गई- कैसे हो वरिंदर?

“मैं बिल्कुल ठीकठाक हूँ, तुम सुनाओ? पहले आ जाती, मोना और छोटी को अभी बाज़ार में छोड़ कर आया हूँ।”

“तभी तो आई हूँ राजा ! तूने जो सुख दिया था, मैं वहाँ रहकर नहीं भूली !” मेरे होंठों पर होंठ रगड़ने लगी।

मेरा दिल ताज़ा माल खाने का था, यह बासी औरत कहाँ से आ गई।

पिंकी मुझे बाजू से पकड़ कर कमरे में ले गई और मुझसे लिपटने लगी, मेरा पौरुष जगाने लगी। उसने अपना टॉप उतार फेंका। काली ब्रा में उसके बड़े बड़े चूचे देख मैं भी उनमें खोने लगा और मम्मों को चूसने लगा, वे पहले से बढ़ गए थे।

पिंकी मेरे लौड़े से खेलने लगी, पिंकी चुद कर बोली- अब मुझे बाज़ार छोड़ दो।

“मुझे दूसरी तरफ़ जाना है, ऐसा करता हूँ, तुझे मोड़ से रिक्शा करवा देता हूँ अगर बुरा ना मानो डार्लिंग !”

“कोई बात नहीं वरिंदर, आपने मेरी बैट्री चार्ज कर दी है, रोम-रोम खिल उठा है, उस कमीने ने तो रात को पहले मुझे बीच ही रास्ते छोड़ा और मैं कुछ कह बैठी तो मेरी पिटाई से ठुकाई कर दी !”

उसको छोड़ मैं वापस घर लौट आया, रूपा रसोई में दोपहर का खाना तैयार कर रही थी।

मैं जाकर लॉबी में बैठा, वो आई पानी का ग्लास लेकर, मैंने बहुत प्यार से उसको देखा, मेरी नज़र उसकी छाती पर चली गई, अभी विकास पर थी लेकिन जल्दी एक एटम बम बन कर मतवालों के दिलों को डसने के लिए तैयार हो रही थी।

“क्या बात है रूपा, आज बहुत निखरी हुई हो? रूपा, दिन ब दिन तेरा रूप निखरता जा रहा है, बचकर रहा कर ! बाहर बहुत प्यासे घूमते हैं !”

वो शर्माने लगी।

“क्या हुआ रूपा? तूतो शर्माने लगी, मैं सच कहता हूँ, तुमने तो मुझे भी डस लिया है !”

वो शरमा कर वहाँ से भाग निकली, मुझे लगा कि यह तो साली चालू है, जिस तरह से यह रात को अपने किसी यार से बातें कर रही थी, उसकी बातें सुन सुन कर अपनी सलवार खोल कर बैठी थी, अपने मम्मे दबा रही थी, वो लड़की नाराज़ होने या गुस्से वाला चेहरा बनाने के बजाये शरमा कर हंस कर वहां से तितली की तरह उड़ गई, कहीं मेरा लौड़ा तिलक लगाने से वंचित तो नहीं रह जाएगा।

खैर देखना था किस्मत में क्या है, लाटरी लगती है या नहीं !

भगवान् का नाम लेकर मैं उठा बार में रोमिंग चेयर पर बैठ गया, ग्लास लिया उसमे पैग डाला और रूपा को बुलाया- रसोई से खट्टा मीठा भुजिया लेकर आ !

वो आई, बोली- साहब दोपहर में दारु?

“शवाब को देख शराब पीनी पड़ती है रूपा रानी !”

“नशे में आप क्या करते हो, आपको मालूम भी है?”

“क्या करता हूँ?”

“मैंने कल रात देखा !”

“वो मेरी साली है, आधी घरवाली है मेरी ! तुझे मुफ़्त में फिल्म देखने को मिली और तुझे घंटा चाहिए?” मैंने पैग खींचा, मेरा दिमाग में आया किमेरे पास तो दिल्ली से ली हुई टेबलेट्स पड़ी हैं, उठकर गया, गोली लेकर आया, कोल्ड ड्रिंक में डाल कर मिला ली।

“हे रूपा रानी, बात सुन ! क्या मुझे अकेले को बैठना पड़ेगा? मेरा साथ तो दे दे रूपा !”

मैं नी पीती !”

“क्या साथ देने के लिए शराब पीनी ज़रूरी है? सब कुछ है घर में, यह ले कोल्ड ड्रिंक पकड़, मेरे पास बैठ, तुझे देखता हूँ तो दारु का नशा बढ़ने लगता है। कितने आशिक हैं तेरे इस हुस्न के?”

“क्या आप भी कैसी गंदी बातें करने लगे?” उसने कोल्ड ड्रिंक खत्म कर दी, रसोई में जाकर आटा गूंथने लगी।

उसके हाथ आटे वाले थे, मैं धीरे गया, उसके पीछे खड़ा हो गया। उसने ऊँचा सा कमीज़ पहना था, उसकी गाण्ड मुझे काफी उभरी हुई महसूस हुई। मैंने धीरे से उसकी गाण्ड को सहला दिया।

वो चौंकी- आप साब? यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉंम पर पढ़ रहे हैं।

मैंने उसकी चोटी को एक तरफ़ कर अपने तपते होंठ उसके गहरे गले वाले कमीज़ दे झलकती पीठ पर रख उसके बदन को चूमा।

वो एकदम से मचल उठी, उसके मुँह से सी सी निकली- देखो साब ऐसा मत करो।

उसकी गर्दन से कमीज़ के ऊपर से उंगली फेरता हुआ नीचे आया, कमीज़ उठाया और गाण्ड पर हाथ फेरा। मैंने पीछे से खड़े होकर उसके कमीज के अंदर घुसा दिया। जैसे ही मेरी उंगलियाँ उसके मम्मों पर लगी, वो तड़प उठी।

उसके हाथ खाली नहीं थे, मैंने नोट किया जब मैंने उसके मम्मे पहले पकड़े थे वो नाज़ुक थे मेरे हाथ लगते ही वो अकड़ गए, उसके निप्पल तन गए !

बिल्कुल अपनी माँ पर गई थी, मैंने नोट किया कि उसके चूतड़ भी कसाव खाने लग गए थे, गोली असर कर चुकी थी। इस गोली का तजुर्बा मैंने सबसे पहले उसकी ही माँ पर किया था चार साल पहले।

“आपको सही लग रहा है इतनी छोटी लड़की से ऐसी हरकतें करते हुए?”

“क्या करूँ रूपा रानी ! वैसे तो मैं शायद तुझ पर ध्यान न देता, लेकिन कल रात जब तेरे पीछे गया था कमरे तक, जिस तरह से तूने सलवार घुटनों तक सरकाई हुई थी, कैसे अपने मम्मे खुद दबाने में लगी थी अपने किसी यार से बातें करती करती !”

उसके रंग उड़ने लगे- ऐसा वैसा कुछ नहीं किया मैंने ! आप मुझे मुफ्त में डरा रहे हैं !

“यह मेरा मोबाइल गवाह है, इसमें तेरी मम्मे दबाई और फुद्दी मसलाई की रस्में कैद हैं, देखोगी? तब से मेरा लौड़ा अकड रहा था रूपा रानी !”

उसका जो आटा वहीं का वहीं धरा रह गया था, चुप हो दोबारा गूंथने लगी।

मैंने प्यार से अपना हाथ उसके चिकने पेट पर फेरा, वो अकड़ने लगी थी, उसकी कमीज़ उठाई और तपते हुए होंठ उसकी पीठ पर कई जगह रगड़ने लगा जिससे वो बेकाबू घोड़ी होती जा रही थी।

उसके मम्मों को दबाते दबाते पीठ पर हाथ फेरते फेरते मैं नीचे आया, धीरे से उसकी सलवार का नाड़ा खींच दिया।

“हाय ! यह क्या किया? वापस बाँध दो, वरना आपके हाथ छोड़ते ही यह नीचे गिर जायेगी।”

“कौन है यहाँ तीसरा? मैं ही तो हूँ तेरा साईं दीवाना ! पूरी जिंदगी ऐश करवाऊँगा तुझे रूपा !”

बाकी अगले भाग में !

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