भाभी के बाद कामवाली-2

प्रेषक : सिंह पंजाबी

जब मैंने उसको सहलाया, वो गर्म होने लगी- साब, क्या कर रहे हैं?

“प्यार कर रहा हूँ !”

“यह सही नहीं है ! मैं किसी की बीवी भी हूँ !”

“तो मैं किसी का पति भी हूँ रानी ! वैसे दिन में जब तू आती है, संवरती नहीं है ! इस वक़्त बिल्कुल अलग लग रही है !

“क्या करूँ? दिन में सँवरने लगी तो मेरे बच्चे भूखें मर जायेंगे, उनका पेट कौन पलेगा?”

“तेरा मर्द क्या करता है?”

“रिक्शा चलाता है, जो कमाता है वो दारु और जुए में उड़ा देता है।”

“कितने घरों में काम करती हो?”

“बहुत हैं साब !”

मैंने उसकी गर्दन को चूमते हुए एक हज़ार का नोट निकाला और उसकी ब्रा में घुसा दिया- रख ले इसको ! काम आएगा।

मैंने उसकी चोली की डोर खींच दी.

“हाय साब ! यह क्या करने लगे?”

“बहुत सेक्सी लग रही हो पीछे से !”

“वो क्या होता है साब?”

“मतलब तेरी नाज़ुक सी पीठ पर यह डोरी बहुत दिलकश लगती है !”

“तो फिर खोल क्यूँ दी?”

“दिलकश लगी, तभी खोली !”

“साब। अब आप जाओ ! क्यूँ रसोई में खुद को तकलीफ देते हैं?”

“आज तेरा घर वाला कहाँ है?”

“पड़ा होगा घर में लुढ़क कर !”

“और तेरा क्या होगा रात को?”

“क्या मतलब?”

“मतलब कि तेरा काम कैसे संवारता है वो साला?”

“साब, लगता है कि आपने ज्यादा चढ़ा ली है !”

“साली तुझे ऐसा क्यूँ लगता है?”

“आप बहक रहे हो ना !”

मैंने उसको वही से बाँहों में उठा लिया, गैस बंद कर मैंने उसको अपने कमरे में लेजा कर फेंका !

“साहेब, यह सब क्या है?”

“सीऽऽ… चुप ! मेरी कमलेश रानी ! क्यूँ पसीने में जवानी खराब करने को तुली है?”

मैं बिस्तर पर लिटा उसको चूमने लगा। मैंने उसकी डोरी पहले खोल दी थी, अब मैंने उसकी चोली ही उतार दी। उसने नीचे काली ब्रा पहनी थी।

“वाह ! क्या लग रही हो !?

वो शरमा सी गई- साब बाहर के सारे दरवाज़े खुले पड़े हैं, बंद करके आती हूँ !

“नहीं ! रुक, मैं करता हूँ !”

मैंने सारे दरवाज़े बंद किये, जब कमरे में घुसा तो वो उलटी लेटी हुई थी।

मैंने उसको दबोच लिया, उसकी पीठ चूमी, फिर उसको घुमा दिया, उसके मम्मे दबाने लगा।

“हाय कमलेश रानी ! क्या माल है तेरे पास !”

मैंने उसके काले काले अंगूर चूसे !

तो वो पगला गई- साब ! लेट हो गई तो घर वाले देखने आ जायेंगे !

“साली, वो शराब पीकर लुढ़का होगा ! वो कहाँ से आ जाएगा?”

“साब, बच्चे थोड़े ही लुढ़क रहे होंगे?”

“ऐसा कर ! तू जा ! उनको खाना-वाना खिलवा दे और वापस लौट आ ! उन्हें सुला कर आ जाना रानी ! यह पैसे जो मैंने दिए हैं, एक हज़ार हैं, पति के हाथ मत दे देना ! उड़ा देगा !”

कमलेश गई, एक घंटे बाद लौटी। अब उसने सूट पहना था, बोली- यह रात आपकी !

मैंने अपनी पत्नी की एक पारभासक नाईटी उसको दी, उसको बाथरूम में उठा ले गया, टब में उसे फेंक, खुद भी घुस गया। वहीं मैंने उसको खूब चूमा, उसको चाटा, वहीं मैंने उसके मुँह में लौड़ा दिया, फिर उठाया, अपने हाथों से उसके सांवले जिस्म को पौंछा, ब्लैक ब्यूटी थी !

मैंने धीरे धीरे उसके चुचूक चूसे, वो गर्म हुई, मैंने उसकी टांगें खोल एक झटके में आधा घुसा दिया।

“अह साब ! बहुत बड़ा है !”

“मजा आया रानी?”

“बहुत ! लेकिन थोड़ा प्यार का दर्द है !” बोली- यही असली मर्द की निशानी होवे जो औरत को दर्द दे ! मारो साब ! मेरी ज़ोर से मारो !

मैंने भी तूफ़ान की तरह उसको ठोका, पूरी रात उसको ठोका, उसकी गांड मारी, मम्मे चोदे ! चूत चोदी !

सुबह मैंने पांच सौ का एक और नोट उसकी ब्रा में घुसाते हुए कहा- रानी तेरी मदद की ज़रुरत है मुझे !

“मेरी मदद? क्या साब?”

“बस जिस घर में तू काम करती है, पिछली गली में रहती है !”

बोली- हाँ वो पम्मो क्या?

हाँ ! उसका नाम पम्मो है, साली बहुत मस्त है, कभी मुझे देख होंठों पर जुबान फेरती है, कभी अपने दांतों से होंठ काट कर मेरा लौड़ा खड़ा करवा निकल जाती है, नज़रों से हम एक दूसरे को चाहते हैं, बस उसका मेरा मिलन नहीं हो रहा !”

“कोई बात नहीं साब ! समझो वो आपके नीचे लेटी ही लेटी ! मेरे पास उसका नंबर है !”

वो बाहर गई और अपने लिफ़ाफ़े से एक डायरी निकाली छोटी सी, उसमें उसका नंबर लिखा था।

“साब, सबके नंबर हैं, जिस दिन छुट्टी करनी होती है, फ़ोन कर देती हूँ ! इसलिए रखें हैं नंबर !”

“कमलेश, तू तो काम की कामवाली है !”

“क्या साब आप भी ना !”

उसके जाने के बाद मैंने पम्मो का नंबर लगाया, उसकी सुरीली आवाज़ में हेलो सुन मेरा दिल धक्-धक् करने लगा- पम्मो जी, आप कैसी हो?

“आप कौन बोल रहे हैं?”

“आपका दीवाना ! तेरी जवान जवानी का रोगग्रस्त रोगी हूँ जिसको देख रोज़ होंठ काट निकल जाती हो हमें छलनी करके !”

“ओह समझ गई ! मेरा नंबर किधर से मिला?”

“बस हम जिस चीज़ के पीछे जाते हैं, उसको तह तक खोद देतें हैं !”

“बी डी ओ साब ! आप भी ना ?”

“रानी, ऐसे मत सार ! बहुत तकलीफ में हूँ ! मेरे पास आकर इलाज़ कर दे !”

“मैं बदनाम हो जाऊँगी?”

“कभी नहीं ! मेरा भी रुतबा है, स्टेटस है !”

“लेकिन कैसे?”

“तू तैयार होकर हनुमान मंदिर के पीछे एक चाय की दुकान है, दस बजे आ जा !”

“ठीक है !”

मैं बहुत खुश था, वो सही समय से पहले ही आ गई।

थोड़ी देर बैठ कर चाय पी और उसको अपनी कार में बिठा लिया जिसके शीशे काले हैं, मैं जब घर से निकला था, गेट खुला रखा था, सीधी कार अंदर !

पहले उतरा, गेट लॉक किया, मौका देख उसको जल्दी से अंदर घुसवा मैंने सभी दरवाज़े बंद कर दिए।

“बहुत तड़पाया है तुमने !”

“सच बताना, नंबर?”

“हाँ, कमलेश से लिया है !”

“ओह !”

मैंने उसको बाँहों में लिया- तुम बहुत सेक्सी हो पम्मो ! तुम करती क्या हो?

“कुछ नहीं ! घरेलू औरत हूँ, पति गुज़र गया था, दो बच्चों के साथ आपकी पिछली गली में माँ पापा के साथ रहती हूँ !”

“ओह !”

मैंने एक एक कर उसके कपड़े उतारे ! क्या सॉलिड माल थी !

मैं तो मर मिटा ! उसकी छाती दूध से सफ़ेद ! मक्खन से भी कोमल !

जब उसने मेरा लौड़ा देखा तो देखती रह गई- इतना बड़ा है आपका?

“क्यूँ? डर गई क्या?”

“ना तो ! मैं क्यूँ डरूँ? यह तो मजा देगा ! ज़ालिम कहाँ छुपा था यह?”

“पति को क्या हुआ था?”

“उसने आत्महत्या की थी !”

मैंने उसकी सलवार उतारी, उसकी चूत देख बावला हो गया !

उसने मेरे लौड़े को खुद मुँह में लेकर चुप्पे लगाये, खुद खेलने लगी। वो बहुत चुदक्कड़ लगी मुझे !

मैंने भी उसका कोई अंग नहीं छोड़ा और आखिर में मैं उसके अंदर समा गया।

क्या औरत थी? उसकी गहराई में मेरा शेर मजे करने लगा !

पूरा दिन मैंने पम्मो को ठोका !

जब अलग हुए बोली- इसीलिए अपने होंठ काटती थी, आपका लौड़ा लेना था !

“यह तो तेरा है आज से !”

“रात को दरवाज़ा खुला होगा, आ जाना !”

दोस्तो, रात उसके घर में ठोका ,फिर हर रात कभी पम्मो कभी प्रिया ! ये थी मेरी मस्त जिन्दगी की कुछ घटनाएँ जिन्हें मैं नहीं भूलता।

जल्दी ही कोई ऐसा वाकया लेकर आऊंगा, तब तक के लिए प्रणाम ! बाय !

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