मेरी मां की समझदारी, मुझे चोदना सिखाया-1

(maa ki chudai sex story Meri Maa Ne Mujhe Chodna Sikhaya- Part 1)

मेरा नाम रोहन है। मैं यह स्टोरी सबको बताना चाहता हूं क्योंकि सबको यह समझना चाहिए कि मां कभी अनजान नहीं रहती खास करके अपने बच्चों से।

मेरी मां मृणाली सबसे अच्छी मां है और खूबसूरत भी है, तन से भी और मन से भी!
उन्होंने मुझे समझा, मेरे लिए यही सबसे बड़ी बात है। मेरे पापा जो सब जानकर भी अनजान रहे… उन्होंने मेरी मां को हमेशा यही समझाया कि बच्चों का हमेशा ख्याल रखना, उन्हें जो भी जरूरी हो उस चीज की शिक्षा उन्हें घर पर ही देना।

मेरे घर वाले बहुत ही खुले विचारों वाले हैं और आपस में बहुत फ्रेंडली हैं। मेरे घर में मेरे मम्मी पापा, मैं और मुझसे छोटी बहन है, मैं और मेरी बहन हमेशा साथ-साथ नहाते थे पर मेरे मन में कभी गलत ख्याल नहीं आया।

मैं शुरु से ही मम्मी और बहन के साथ नहाता था, वह भी बिल्कुल नंगा… मेरी मम्मी और मेरी बहन भी नंगी होकर मेरे साथ नहाया करती थी और मेरे सामने ही कपड़े पहना करती थी। कभी-कभी मैं उनकी चूत भी छू लेता था पर वे कुछ नहीं कहती थी बल्कि उसे दिखा कर बताती थी कि यहाँ से पेशाब करते हैं और खोल कर दिखा देती थी।

कभी-कभी उनकी चूत पर हल्के हल्के बाल हुआ करते थे… तो कभी-कभी उनकी चूत एकदम साफ हुआ करती थी ताकि मुझे उनकी चूत आसानी से देखने को मिले।
मम्मी को भी अपनी चूत पर बाल पसंद नहीं थे।

कई बार नहाते वक्त मैंने मम्मी के बूब्स भी छूए और दबाए हैं, मेरी मम्मी के बूब्स एकदम कसे हुए और गोलाकार हैं जब कभी वह घर पर अकेली होती हैं तो गर्मियों में बिना ब्रा के सिफ पैंटी में ही घर के काम करती हैं… उनका उपरी हिस्सा बिल्कुल खुला हुआ होता है।
कभी-कभी यह देख कर मेरा लंड भी खड़ा हो जाता था… पर मम्मी कुछ नहीं कहती थी..
वे कहती थी- यह सब नेचुरल है और अगर सेक्स के बारे में कभी कुछ पूछना हो तो बेहिचक मुझसे पूछ लेना…
पर मैं शरमाता था।

मेरी मम्मी की नजर में मैं कभी गलत नहीं था क्योंकि वे जानती थी कि जिन लड़कों को यह सब छूने या देखने को नहीं मिलती, वे या तो बाहर किसी वेश्या के साथ सेक्स करते हैं या फिर ड्रग्स का सहारा लेते हैं और फिर किसी के साथ देह शोषण कर देते हैं।

यह बात 2 साल पहले की है, एक रात मैं सो रहा था… मेरी आंख खुल गई।
सर्दियों का समय था, मैं हमेशा मम्मी के साथ ही सोता था उनकी रजाई में… उस रात मैंने देखा कि मम्मी सोई हुई थी… तो मैंने अपना हाथ उनके ऊपर रख दिया।

वैसे तो मैंने कई बार अपने मम्मी पापा की चुदाई देखी है और वह सब देख कर मैं इतना तो जान ही गया था कि लंड को चूत में कैसे डालते हैं और कुछ पोजीशंस भी देख ली थी… पर मैंने आज तक कभी मुट्ठ नहीं मारी थी।

मम्मी ने एक ढीला गाउन पहन रखा था… मम्मी सिर्फ रात को ही गाउन पहन कर सोती थी। मेरे मन में ना जाने क्या हुआ, मैंने उनका गाउन ऊपर करना शुरु कर दिया और धीरे-धीरे डरते हुए मैंने उनका गाउन जांघों तक ऊपर कर दिया। मम्मी का गाउन जांघों से ज्यादा ऊपर नहीं हुआ।

मैं बहुत उत्तेजित हो रहा था… मैंने अपना पजामा उतार दिया, पर डर रहा था कि अगर मम्मी उठ गई तो क्या होगा।

पर शायद मम्मी जागी हुई थी, उन्होंने करवट ली तो मैंने पीछे से ही उनका गाउन पेट तक पूरा ऊपर उठा दिया और फिर मैं उनसे लिपट कर सोने का नाटक करने लगा।
मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था, मैं अपने लंड को उनकी गांड पर रगड़ने लगा।

मैं ऐसे ही मजे ले रहा था… मम्मी भी अपनी गांड को पीछे की तरफ मेरे लंड पर दबाने लगी। मैं समझ चुका था कि मम्मी जागी हुई है।

थोड़ी देर बाद मम्मी को भी लगा कि शायद मैं आगे से भी अपना लंड उनकी चूत से लगाना चाहता हूं… तो उन्होंने मेरी तरफ करवट ली। फिर मैं धीरे धीरे उनकी टांगों पर हाथ फेरने लगा तो मम्मी ने अपने पैरों को खोल दिया… मैं एकदम से डर गया।

मैं रजाई उठाकर उन्हें देखने लगा… नाइट लैंप की रोशनी में मम्मी बहुत ही सुंदर दिख रही थी। मैंने धीरे से उनकी पेंटी को उनकी जांघों तक उतार दिया और फिर अपना लंड उनकी चूत पर लगाया और अंदर करने करने लगा। पर मेरा लंड उनकी चूत के अंदर नहीं जा पाया क्योंकि उस पर कोई ऑयल नहीं लगा था और फिर उस रात मैं उसी तरह थक कर सो गया।

सुबह मम्मी उठी पर उन्होंने कुछ नहीं कहा, हम दोनों में रोज की तरह ही बात हुई और मैं स्कूल चला गया। पर सारा दिन मैं रात के बारे में सोचता रहा!
खैर रात हुई और हम लोग खाना खाकर सोने चले गए। मैं भी अपनी मम्मी पापा के साथ सोने लगा पर मुझे नींद नहीं आ रही थी।

रात को पापा उठे, उन्होंने मम्मी को भी उठाया, फिर वे दोनों एक दूसरे को किस करने लगे और फिर धीरे से पापा ने अपना लंड मम्मी की चूत में डाल दिया और फिर पापा धीरे धीरे उन्हें चोदने लगे।

यह सब देख कर मैं बहुत उत्तेजित हो गया था।

मम्मी के मुंह से सिसकारियां निकल रही थी… उम्म्ह… अहह… हय… याह… मम्मी धीरे से पापा के कान में बोली- जरा आराम से करो… वरना बेटा जाग जाएगा! फिर पापा ने मम्मी को घोड़ी बनाया और पीछे से अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया।
थोड़ी देर की चुदाई के बाद वे दोनों झड़ गए।

थोड़ी देर बाद पापा सो गए तो मम्मी उठी और अपनी चूत साफ करने लगी और फिर उन्होंने मेरी तरफ देखा और हंस पड़ी… वे जानती थी कि मैं जाग रहा हूं।फिर भी मैं आंखें बंद करके सोया रहा।

फिर मैंने धीरे से आंख खोल कर देखा कि मम्मी अपनी चूत पर वैसलीन लगा रही थी, उन्होंने ढेर सारी वैसलीन अपनी चूत पर लगाई और फिर वेसलिन की डिब्बी मेरे पास रख कर बिस्तर पर लेट गई।
मैं समझ गया था कि मम्मी यह सब क्यों कर रही थी।

थोड़ी देर बाद मम्मी भी सो गई… फिर मैं उठा और मम्मी की तरफ देखा, उन्होंने अपना गाउन थोड़ा ऊपर किया हुआ था।
मैंने धीरे से रजाई हटाई और धीरे धीरे उनका गाउन कमर तक ऊपर कर दिया… मैंने अपना पजामा भी उतार दिया, मेरा लंड अच्छा खासा मोटा और लंबा था जिसे मम्मी मुझे नहलाते वक्त देखती थी।

खैर फिर मैंने वैसलीन की डिब्बी उठाकर अपने लंड पर अच्छी तरह से वैसलिन की मालिश की और फिर मम्मी की चूत पर अपना लंड लगा दिया।

मुझे मम्मी की चूत के छेद का पता तो था ही… क्योंकि मैं कई बार उनकी चूत देख चुका था… फिर अपने लंड को धीरे धीरे मम्मी की चूत के अंदर डालने लगा।
मेरा लगभग आधा लंड उनकी चूत के अंदर चला गया।
मैं बहुत उत्तेजित हो चुका था पर मुझे चोदने का भी कोई एक्सपीरियंस नहीं था… फिर भी मैं धीरे-धीरे मम्मी की चूत चोदने लगा।
वैसलीन लगी होने की वजह से मेरा पूरा लंड मम्मी की चूत के अंदर घुस गया। मैंने मम्मी की चूत में जोर से धक्के देना शुरु कर दिया… और फिर मेरे लंड से पेशाब जैसा कुछ बाहर आने लगा जो मैंने मम्मी की चूत के अंदर ही डाल दिया… पर मुझे कोई डर नहीं था क्योंकि जो कुछ भी हो रहा था शायद उसके लिए मम्मी भी तैयार थी।

उस रात मैंने एक और बार मम्मी को चोदा… पर मम्मी ने अपनी आँखें नहीं खोली।

अगले दिन जब मैं सोकर उठा तो मैं डर रहा था कि कल रात जो हुआ उसके लिए मम्मी भी रजामंद थी या यह मेरा सिर्फ एक वहम था। अगर मम्मी ने यह बात किसी को बता दी तो मैं तो मर ही जाऊंगा।
पर ऐसा नहीं हुआ… मम्मी रोज की तरह ही मेरे साथ व्यवहार कर रही थी। अब मुझे पक्का विश्वास हो गया था… कि इस सबमें मम्मी भी आनंद लेती हैं।

फिर तो यह मेरा रोज का नियम बन गया, तकरीबन अगले 10 दिन तक मैं रोज रात को मम्मी को चोदता और फिर अपना पेशाब उनकी चूत में ही भर देता था।

हम लोग फिर भी रोज एक साथ नहाते थे… नहाते वक्त मम्मी जानबूझकर अपनी चूत खोलकर साफ करती थी और जब मैं पीछे खड़ा होता था… तो मेरा लंड हमेशा खड़ा रहता था और पीछे से मम्मी की गांड को टच करता था पर मम्मी ने कभी कुछ नहीं कहा।मम्मी इस सब से बिल्कुल अंजान बन रही थी जैसे कि कुछ हो ही नहीं रहा हो।

रात को पहले पापा मम्मी को चोदते थे और फिर उनके सो जाने के बाद मैं मम्मी को चोदा करता था पर हम दोनों हमेशा इस बात से अनजान बनते रहे।

सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था… पर एक रात मम्मी ने पापा को बोला- आप रोज अपना पानी मेरी चूत में छोड़ देते हो… अगर मैं प्रेगनेंट हो गई तो… अब आप मुझे चोदते समय अपने लंड पर कंडोम चढ़ा लिया करो।
मम्मी कि इस बात पर पापा बोले- ठीक है… वैसे तो मैं हमेशा ही कंडोम लगाता हूं और जब कंडोम नहीं होता तुम्हें तुम्हारे बूब्स पर अपना रस निकाल देता हूं।

तब मम्मी ने कहा- कंडोम कैसे लगाते हैं… एक बार चढ़ा कर दिखाओ ना? और हा.. कंडोम हमेशा बिस्तर के नीचे ही पड़े होते हैं, आप वहीं से उठा लिया करो।
मैं समझ गया कि मम्मी यह सब मुझे कह रही हैं।
यह हिंदी चुदाई की कहानी आप अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं!

मैंने हल्के से आंखें खोलकर देखा कि पापा अपने मोटे लंड पर कंडोम लगा रहे थे पर मुझे पूरी तरह से समझ में नहीं आया।
फिर पापा ने मम्मी की टांगों को फैलाया और टांगों के बीच में आकर अपना लंड उनकी चूत के अंदर डालने लगे और उन्होंने मम्मी की चूत को चोदना शुरू कर दिया।
मम्मी भी पूरे जोश के साथ पापा से चुद रही थी।

थोड़ी देर बाद वे दोनों झड़ कर सो गए… थोड़ी देर बाद मैंने भी उठ कर बिस्तर के नीचे से कंडोम का एक पैकेट निकाल लिया और उसे अपने लंड पर चढ़ाने लगा… पर मैं उसे चढ़ा नहीं पाया और फिर वापस आकर मम्मी से लिपट गया।

मम्मी ने भी नींद में मेरी तरफ करवट ले ली, फिर मैंने उनके गाउन को पूरा खोल दिया। आज मम्मी ने अंदर ब्रा और पेंटी नहीं पहनी थी इसीलिए गाउन खुलते ही वह पूरी नंगी हो गई।

मैंने मम्मी के बड़े-बड़े मम्मों में अपना मुंह छुपा लिया और उन्हें सूंघने लगा… मैं उनको दबाना और चाटना भी चाहता था पर मेरी इतनी हिम्मत नहीं हो रही थी।
मैंने अपने लंड को उनकी चूत के अंदर डाल दिया।

मम्मी की चूत अंदर से बहुत गीली थी इसीलिए मेरा लंड आसानी से उनकी चूत के अंदर घुस गया, मैं उनकी चूत में अपने लंड को अंदर करने लगा।

थोड़ी देर की एक तरफा चुदाई के बाद फिर से मैंने अपना पेशाब मम्मी की चूत में लबालब भर दिया। फिर मैंने अपना लंड मम्मी की चूत से बाहर निकाला और वापस उनके गाउन को पहना दिया और फिर मैं भी सो गया।

मां की चूत की चुदाई की कहानी अभी जारी है। आपको यह सेक्स स्टोरी पसंद आई या नहीं, कृपया मुझे मेल कीजिये।
[email protected]

कहानी का अगला भाग: मेरी मां की समझदारी, मुझे चोदना सिखाया-2

What did you think of this story??

Comments

Scroll To Top