मेरी कामाग्नि : अपने बेटे के लिए-1

(Meri Kamagni_Apne Bete Ke Liye- Part 1)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

दोस्तो.. मेरी कहानी के तीसरे भाग
मेरी कामाग्नि : भतीजे के साथ सेक्स का मजा-2 में आपने पढ़ा कि जब मैं सो रही थी तो रोहन चुपचाप मेरे कमरे में आया.. पर मैं उसके आने की आहट से जाग चुकी थी और वैसे ही उसे अपनी हल्की अधखुली हुई आँखों से देख रही थी.. पर वो इस बात से बिल्कुल अंजान था और मेरी पैंटी को सूंघ और चाट रहा था।

अब आगे..

मेरी पैन्टी में बेटे ने मुठ मारी

रोहन की इस हरकत से मैं सकते में आ गई। मैं कुछ समझ नहीं पा रही थी कि अब मैं क्या करूँ। मेरा बेटा मेरी ही आँखों के सामने मेरी पैंटी को लेकर उसे सूंघ रहा था.. शायद उसे उसमें से मेरी चूत से निकले हुए पानी की खुशबू आ रही थी.. जो कि थोड़ी ही देर पहले आलोक के द्वारा मेरी चुदाई के दौरान गीली हो गई थी।

फिर उसने अपनी पैंट खोली और वो उसमें से अपना लण्ड निकाल कर मेरी पैंटी पर रगड़ने लगा।

उसकी इस हरकत से मैं तिलमिला उठी और बिस्तर से उठकर खड़ी हो गई। मैं उठकर उसके पास गई पर वो अपनी आँखें बंद किए हुए पूरी मस्ती में अपने लण्ड को मेरी पैंटी से रगड़ रहा था, उसे मेरे आने का जरा भी आभास नहीं था।

मैं उस पर चिल्ला भी नहीं सकती थी.. क्योंकि आलोक भी घर पर था। अगर आलोक को यह बात पता चल जाती.. तो वो ना जाने मेरे और रोहन के बारे में क्या सोचने लगता।

तभी मैंने अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसके हाथों से अपनी पैंटी खींच ली और उसके गाल पर एक तमाचा कस दिया.. जिससे उसकी आँखें खुलीं और सामने मुझे खड़ा देखकर डर गया।

पैंटी खींचते ही उसका लण्ड साफ दिखने लगा.. जो कि बहुत मोटा और लम्बा था शायद आलोक के लण्ड से भी बड़ा।
खुद को इस तरह पकड़े जाने से वो काँपने लगा और रोने लगा।

मैं गुस्से में थी- यह क्या कर रहा था तू.. मैं तुझे यही सब सीखने के लिए स्कूल में पढ़ा रही हूँ?
रोहन- सॉरी मम्मी.. गलती हो गई मुझसे.. प्लीज माफ़ कर दो मुझे.. सॉरी.. अब आगे से ऐसा कभी नहीं करूँगा।

उसका लण्ड अभी तक खड़ा था और अभी तक पैंट से बाहर निकला हुआ था, मैंने उससे उसके कपड़ों को ठीक करने का बोला।

एकाएक उसकी नज़र उसके लण्ड पर गई.. जो बाहर निकला हुआ था। वो अपने लण्ड को छुपाने की कोशिश करने लगा और उसे अपनी पैंट में वापस डालने लगा.. पर लण्ड खड़ा होने के कारण वो अन्दर नहीं जा पा रहा था।

तभी उसके लण्ड से वीर्य की धार निकलने लगी.. जो कि सीधे मेरी कमर और साड़ी के नीचे के हिस्से को भिगाने लगी। यह तो अब हद ही हो चुकी थी.. मेरा पारा सातवें आसमान पर पहुँच गया और मैं उसमें एक और तमाचा देने को हुई.. पर तभी वो बोला- ये मैंने जानबूझ कर नहीं किया मम्मी..
और वो फिर से रोने लगा।

मुझे उसे रोता देखकर तरस आने लगा।
आखिर था तो वो मेरा बेटा ही.. जिसे मैं बहुत प्यार करती थी और वो भी मुझे बहुत प्यार करता था.. पर शायद गलत संगतों में पड़कर उसने यह कदम उठाया था।

उसे रोता देखकर मेरा दिल पिंघल गया और मुझे भी रोना आने लगा, मैंने उसे वहाँ से जाने के लिए बोला.. तो वो चला गया।

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