मेरा कामुक बदन और अतृप्त यौवन- 4

(Mera Kamuk Badan Aur Atript Yauvan- Part 4)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अन्तर्वासना पर हिन्दी सेक्स कहानी पढ़ने वाले सभी पाठकों को सोनाली का नमस्कार!
मैं अपनी सेक्स कहानी में आपका फिर से स्वागत करती हूँ।
कुछ समय से अस्वस्थ होने के कारण मुझे इस भाग को लिखने में समय लग गया, इसके लिए मैं आप सभी से क्षमा मांगती हूँ।

मेरी इस कहानी के तीसरे भाग में आपने पढ़ा कि मनीषा के साथ मस्ती करने के बाद मैं थक चुकी थी और फिर रोहन के लगातार चोदने की वजह से मैं और थक गई थी पर रोहन अभी तक नहीं झड़ा था तो उसने मेरी गांड में अपना लंड डालने का बोला जिसके लिए बाद में मैंने स्वीकृति दे दी थी।

अब आगे-

मैंने उसे हाँ बोल दिया और उससे बोला अगर ज्यादा दर्द हुआ तो मैं गांड में लंड नहीं डलवाऊंगी।
रोहन ने मेरी बात मान ली और तैयार हो गया।

मैंने रोहन को क्रीम लाने के लिए कहा तो वो उठकर क्रीम ले आया। फिर मैंने रोहन से मेरी गांड के छेद पर क्रीम लगाने को बोला। उसने ढेर सारी क्रीम अपनी उंगली से मेरी गांड के छेद के ऊपर और कुछ क्रीम अंदर भर दी।

वैसे तो रोहन का लंड बहुत गीला था पर फिर भी उसने अपने लंड को भी क्रीम से मल लिया।
अब रोहन बिल्कुल तैयार था पर मुझे बहुत डर लग रहा था।

मैं रोहन को फिर से याद दिलाते हुए बोली- रोहन, अगर दर्द हुआ तो फिर मैं नहीं करवाऊँगी।
तो रोहन बोला- मम्मी आप चिंता मत करो, मैं आपको बिल्कुल भी दर्द नहीं होने दूंगा।

रोहन ने मुझे उल्टा लिटा दिया और घोड़ी बनने का बोला तो मैं अपने दोनों हाथों को बेड पर रखकर घोड़ी बन गई।
मैंने डर के मारे अपने मम्मों और सर को भी बेड से चिपका दिया।

फिर रोहन उठा और मेरी गांड पर हाथ फेरते हुए मेरी गांड से अपने लंड को टच करने लगा, फिर उसने अपने लंड को मेरी गांड के छेद पर रख दिया।
मैं समझ चुकी थी कि आज मैं दर्द से तड़पने वाली हूँ, मेरी धड़कनें तेज होने लगी थी।

रोहन ने मेरी गांड के छेद को अपने दोनों हाथों से खींचकर फैलाया और फिर अपने लंड को हल्के से अंदर की तरफ धकेला।
मुझे हल्का सा दर्द हुआ तो मैंने अपने हाथों से अपनी गांड को पकड़ लिया।

रोहन ले सख्त लण्ड का आधा सुपारा मेरी गांड में घुस चुका था फिर रोहन ने एक और हल्के धक्के में अपना सुपाड़ा मेरी गांड के अंदर कर दिया।

मैं चिल्ला उठी मैंने दर्द में कराहते हुए रोहन को बोला- रोहन, मुझे गांड में दर्द हो रहा है। अब इससे ज्यादा दर्द मैं सहन नहीं कर पाऊँगी।

रोहन बोला- मम्मी, बस अब इससे ज्यादा दर्द नहीं होने दूँगा आपको।
मैं कुछ नहीं बोली और वैसे ही लेटी रही।

रोहन ने कुछ देर के लिये अपने धक्कों को रोक दिया, वो मेरे नॉर्मल होने का इंतेजार कर रहा था।
थोड़ी देर बाद जब उसे लगा कि अब मुझे दर्द नहीं हो रहा तो उसने धीरे धीरे ही अपने लंड के सुपारे को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

वो लंड को धीरे से बाहर करता और फिर थोड़े से दबाव के साथ ही उसे फिर से अंदर कर देता।
ऐसा करते करते उसका लंड मेरी गांड के अंदर जाने लगा था पर इसमें एक मीठे से दर्द के अलावा रोहन के प्यार का एहसास था।

वो इतना धीरे से ये सब कर रहा था कि कब रोहन का आधा लंड मेरी गांड के अंदर बाहर होने लगा, मुझे पता ही नहीं लगा।
मैं भी अब मस्त हो चुकी थी और ‘आआहहहह… रोहन… …आ…आ… हा.. हा.. ओह्ह… मेरे लाल… उफ्फ्फ…’ की सीत्कारें भर रही थी।

फिर रोहन ने अपने लंड का दबाव मेरी गांड पर बढ़ाना शुरू कर दिया और उसका थोड़ा और लंड मेरी गांड के अंदर चला गया।
मैं ‘अआई आअहूचच…’ करते हुए रोहन को बोली- रोहन बेटा, अब इससे ज्यादा अंदर मत डालो, मुझे दर्द हो रहा है।

वो रुक गया और फिर उतने ही घुसे हुए लंड से मेरी गांड को चोदना शुरू कर दिया।
पहले तो वो हल्के हल्के धक्कों से मेरी गांड को चोद रहा था फिर धीरे धीरे उसने अपने धक्कों की गति बढ़ा दी।

रोहन मेरी कमर को पकड़कर मुझे आगे की तरफ धक्के दे रहा था।
मैं भी मीठे से दर्द और मजे के साथ अपनी गांड को अपने बेटे रोहन से चुदवा रही थी।

फिर रोहन ने मुझे वैसे ही पकड़कर उठाया, उसका लंड अभी भी मेरी गांड के अंदर था, वो नीचे लेट गया और मुझे अपने ऊपर बैठा लिया।

अब मैं रोहन के ऊपर बैठी हुई थी और उसका लंड मेरी गांड के अंदर था।
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मैं थक चुकी थी तो मैंने अपना शरीर रोहन के शरीर के ऊपर रख दिया था।
मेरे मम्मे रोहन के सीने पर रगड़ खा रहे थे और फिर वो मेरे होंठों को चूमने लगा।

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