सगी मौसी की चुदाई: पारिवारिक चुदाई की कहानी-4

(Sagi Mausi Ki Chudai: Parivarik Chudai Ki Kahani- Part 4)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

दोस्तो, आज मैं सिज़लिंग सोना अपनी कहानी ‘पारिवारिक चुदाई की कहानी’ का चौथा भाग ‘सगी मौसी की चुदाई’ लेकर उपस्थित हूँ… और आशा करती हूँ कि पिछले भागों की तरह यह भी आपको पसंद आएगी।

अभी तक आपने पढ़ा कि मैं अपने बेटे रोहन, बेटी अन्नू, मेरे जेठ का बेटा आलोक, आलोक की नवविवाहिता बहन स्वाति और स्वाति के पति अनिल, मेरी बहन का बेटा रोहित… के साथ नैनीताल घूमने आई हुई हूँ. पिछली रात मैं होटल में एक अनजान आदमी आदित्य से चुदी.

अब आगे-
अगले दिन सुबह जब मेरी नींद खुली तो मैं अन्नू और रोहन के साथ सो रही थी… मैंने खुद को देखा तो मैं गाउन पहने हुए थी और अंदर ब्रा पैंटी भी पहनी थी।
पर फिर मैं वैसे ही लेटी रही और पिछली रात के बारे में सोचने लगी।

मुझे कल के बारे में कुछ भी स्पष्ट याद नहीं था और न ही मुझे कोई दर्द हो रहा था… बस कुछ तस्वीरें सी चल रही थी दिमाग के अंदर… और यह कहानी उन्ही तस्वीरों के आधार पर है।
जो भी हुआ… गत रात में हुई मेरी गांड और चूत की चुदाई के बारे में सोच कर मेरे लबों पर एक मुस्कान सी आ गई।

थोड़ी देर बाद रोहन भी जाग गया. मैं रोहन और अन्नू के बीच में ही सो रही थी तो रोहन मुझसे लिपट गया, उसने अपने हाथ मेरी कमर पर रख दिये और मैंने रोहन की तरफ करवट ले ली।
करवट लेते ही रोहन ने मेरे होंठों पर एक चुम्मी दी और मुझसे बोला- गुड मॉर्निंग मम्मी…
मैंने भी मुस्कुराते हुए रोहन को गुड मोर्निंग कहा।

फिर रोहन ने कहा- मम्मी कल आपकी तबियत ठीक तो थी ना?
मैंने उसे पूछा- क्यों.. क्या हुआ?
तो रोहन ने कहा- कल जब हम लोग वापस आए थे..तो आप बहुत गहरी नींद में सो रही थी.. और दरवाज़ा भी लॉक नहीं था।
मैंने कहा- मैं बस थोड़ा थक गई थी शायद… इसलिए गहरी नींद में सोई हुई थी।

रोहन ने कहा- मम्मी.. कल मैंने रोहित से बात की थी।
मैंने पूछा- अच्छा.. क्या बात हुई तुम लोगों के बीच में?
रोहन ने कहा- मम्मी मैंने उससे बातों में पूछा कि तूने कभी किसी नंगी औरत या नंगी लड़की को देखा है.. तो रोहित बोला कि उसने कई बार अपनी मम्मी (यानि कि मेरी बहन) को नंगी देखा है।

मैंने रोहन से कहा- तो तूने क्या कहा रोहित से?
रोहन ने कहा- मम्मी फिर मैंने भी उसे बता दिया कि मैंने भी आपको कई बार नंगी देखा है।
मैंने रोहन पर गुस्सा करते हुए कहा- रोहन पागल हो गया है क्या तू… ऐसा बोलने की क्या जरूरत थी तुझे?
रोहन ने कहा- मम्मी, जरूरत थी तभी तो मैंने उसे यह सब बोला। उसके बाद रोहित ने खुद ही मुझसे बोल दिया कि परसों उसने गलती से आपको नंगी देख लिया था… तो मैंने उसे समझा दिया कि आप भी उसकी माँ जैसी हो.. और इतनी छोटी सी बात का कोई बुरा नहीं मानता है।
मैंने रोहन से कहा- चल ठीक है.. अब जो हुआ उसे भूल जाओ.. अब आगे के बारे में सोचो।

तभी अन्नू भी सोकर उठ गई, उसके बाद हम लोग तैयार होने लगे।

जब मैं नहाने जा रही थी तभी रोहित रूम में आ गया। हम दोनों की नज़रें आपस में टकरा गई..अब रोहित मुझे एक लड़के की तरह नहीं बल्कि एक मर्द के रूप में नज़र आ रहा था क्योंकि जब से रोहन ने मुझे उन दोनों के कारनामे बताये हैं तब से मेरा नजरिया रोहित के प्रति पूर्ण रूप से बदल चुका है।

तभी रोहित ने मुझसे कहा- मौसीजी… मेरी तबियत ठीक नहीं है, मैं आप लोगों के साथ घूमने नहीं चल पाऊँगा।
सब लोग तैयार हो चुके थे.. आलोक, स्वाति और अनिल बाहर हमारा ही इंतज़ार कर रहे थे… क्योंकि रोहित की तबियत ठीक नहीं थी तो मुझे भी उसकी देखभाल के लिए वही रुकना पड़ा।

सब लोगों के जाने के बाद रोहित मेरे ही रूम में आ गया. मैं अभी भी कल रात वाला गाउन और कपड़े पहने हुए थी। मैंने उसे एक टेबलेट लाकर दी और उसे वही आराम करने के लिए कहा।
रोहित वहीं सो गया.

मैं भी अकेली बोर हो रही थी तो मैं भी रोहित के साथ बेड पर लेट गई और थोड़ी देर बाद मैं भी सो गई।

करीब दो बजे मेरी नींद खुली… रोहित उस वक्त अपना मोबाइल चला रहा था… मैंने रोहित से पूछा- रोहित, अब तबियत कैसी है?
रोहित ने मेरी तरफ देखा और कहा- अब मैं ठीक हूँ मौसी!
तभी रोहित की नज़र मेरी जाँघों की तरफ गई और उसने अपनी नजरें झुका ली… तभी मुझे पता लगा कि लेटने की वजह से मेरा गाउन मेरी जाँघों तक चढ़ा हुआ था जिसके अंदर से मेरी पैंटी भी आराम से देखी जा सकती थी।

मैं रोहित की तरफ देखते हुए खुद को ठीक करते हुए बिस्तर से उठ गई. मेरी नज़र रोहित की पैंट की तरफ गई क्योंकि उसका लंड खड़ा हो चुका था और वो उसे अपने हाथों से छिपाने की नाकाम कोशिशें कर रहा था। शायद वो काफी देर से मेरी जांघों और पैंटी को निहार रहा था।

रोहित का खड़ा लंड देखकर मुझे कल की चुदाई की याद आने लगी… और अब मेरी भी चूत में खुजली होने लगी।
रोहित भी काफी सुंदर और आकर्षक लगता है पर वो रोहन से भी करीब एक साल छोटा है।

उसके बाद हम दोनों आपस में बाते करने लगे। जब रोहित को लगा कि मैं परसो के बारे में उससे नाराज़ नहीं हूँ तो उसने मुझसे कहा- मौसीजी उस दिन के लिए सॉरी… वो सब एक गलतफहमी की वजह से हुआ था।
मैंने रोहित से कहा- कोई बात नहीं…
और हंसते हुए रोहित से बोली- अब जो देखना था… वो तो तूने देख लिया।
मेरी बात सुनकर रोहित भी मुस्कुरा दिया और बोला- मौसी वैसे आप अभी तक बहुत सुंदर और सेक्सी हो… काश आपको फिर से एक बार और उस हालत में देख सकूं।

रोहित की बात सुनकर मेरे ऊपर भी चुदास हावी होने लगी और मैंने कहा- अच्छा… बड़ा देखने का मन है तेरा… अभी ही दिखा दूँ क्या और वैसे मेरे अलावा किस किस को नंगी देख लिया है तूने?
रोहित ने कहा- कभी कभी मम्मी जब नहाकर आती है तो मेरे सामने ही कपड़े बदल लेती हैं… तभी उनको देख लेता हूँ और मैं भी नहाकर उनके सामने ही कपड़े बदल लेता हूँ।

तो मैंने कहा- मुझे पूजा (मेरी बहन और रोहित की माँ) से तेरी शिकायत करनी पड़ेगी… बहुत गलत बातें सीखने लगा है तू!
फिर मैंने रोहित से कहा- रोहित मैं नहाने जा रही हूँ… अगर कहीं जाना हो तो बता कर जाना… नहीं तो किसी और की नज़र मुझ पर पड़ जाएगी।
रोहित ने कहा- मौसीजी चलिए ना हम पूल में नहाएंगे!

मेरा भी पूल में नहाने का मन था तो मैंने उसे हाँ बोल दिया।

फिर रोहित ने मुझे कहा- मौसी पर मेरी एक शर्त है… आप पूल में गाउन पहन कर नहीं जाओगी।
मैंने रोहित से कहा- तो फिर मैं क्या पहनूँगी रोहित?
रोहित ने वही दीवार पर टंगी अन्नू की स्कर्ट और लो टीशर्ट की तरफ इशारा करते हुए कहा- आज आप ये कपड़े पहनोगी।

मैंने उसे मना कर दिया.

पर फिर रोहित ने मुझे अपनी कसम दे दी तो ना चाहते हुए भी मुझे वो कपड़े पहनने के लिए हाँ बोलना पड़ा।
मैं उन कपड़ो को लेकर बाथरूम जाने लगी तो रोहित ने मुझे रोक लिया और बोला- यहीं बदल लीजिये ना मौसी प्लीज?

रोहित के ज्यादा जोर देने पर मैं मान गई… वैसे भी वो मुझे नंगी देख ही चुका था और मैं भी गर्म हो रही थी।
मैंने कहा- चल ठीक है… अब तुझसे भी क्या शर्माना… तू भी अपने कपड़े बदल ले।
रोहित ने कहा- मौसीजी… पहले आप बदलिए फिर मैं अपने रूम में जाकर बदल लूंगा।
मैंने कहा- तेरे कहने पर मैं तेरे सामने ही कपड़े पहन रही हूँ और तू मुझसे शर्मा रहा है… मैं भी तेरी माँ जैसी हूँ… तुम मेरे सामने भी बदल सकते हो… चलो यहीं बदलो… देखो, मैं भी तुम्हारे सामने ही बदल रही हूँ।

मैंने रोहित का जवाब सुने बिना ही अपने गाउन को खोल दिया जो मेरे हाथों और पैरों से सरकता हुआ जमीन पर गिर पड़ा। मैंने अंदर काले रंग की ब्रा पैंटी पहनी हुई थी, गाउन के उतरते ही मेरा चमकदार संगमरमरी बदन रोहित के सामने उजागर हो गया, रोहित बिना अपनी आँखें बंद किये मेरे बदन को टकटकी लगाए घूर रहा था।

मैंने देर न करते हुए अन्नू की स्कर्ट और टीशर्ट को पहन लिया। अन्नू की स्कर्ट तो मुझे जाँघों तक आ गई पर उसकी टीशर्ट मेरे स्तनों को मुश्किल से ढक पा रही थी और मेरे पेट तक ही आ रही थी।
काली स्कर्ट और सफेद टीशर्ट के बीच में मेरी नंगी कमर किसी चांद से कम नहीं लग रही थी.

यह सब देखकर रोहित का लंड अपने उफान पर आ गया और पैंट के ऊपर से उसका उभार साफ दिख रहा था।

कपड़े पहनकर मैंने रोहित से कहा- मेरा तो हो गया… अब तेरी बारी है।
रोहित ने कहा- मौसी, मैंने अंदर चड्डी नहीं पहनी है।
मैंने कहा- अच्छा तो ये बात है, तूने भी तो मुझे नंगी देखा है… अब शर्मा मत… मैं भी तुम्हारी मम्मी जैसी हूँ और तुम मेरे बेटे जैसे हो… हमें एक दूसरे को नंगा देखने में शर्म कैसी?

रोहित ने मेरी बात सुनते ही अपना लोवर उतार दिया… लोवर उतरते ही उसका खड़ा मोटा लंड फनफनाता हुआ बाहर आ गया… मेरी नज़र तो रोहित के लंड पर ही टिकी रह गई… इतने मोटे लंड को देखकर मेरी चुदाई करने की इच्छा फिर से जागृत हो गई।
रोहित ने अपना बॉक्सर उठाया और पहनने लगा.

मैंने छेड़ते हुए रोहित से कहा- तुम तो काफी बड़े हो गए हो रोहित!
और अपने होठों पर जीभ फिरते हुए एक चुदासी मुस्कान रोहित को दे दी।

फिर हम लोग पूल में आ गए… थोड़ी भीड़ थी इसलिए हम लोग ज्यादा देर वहाँ नहीं रुके और वापस अपने रूम में आ गए।
हम दोनों बिल्कुल खामोश थे।

मैंने रोहित से कहा- हमें यहाँ फिर से नहा लेना चाहिए रोहित…
और इतना बोलते ही मैंने अपनी टीशर्ट और स्कर्ट उतार दी। मैंने रोहित से कहा- रोहित क्या तुम मेरे साथ नहाना चाहोगे क्योंकि मुझे अपनी पीठ पर साबुन लगवाना है तो बेहतर होगा हम दोनों साथ में ही नहा लेते हैं।

रोहित भी मेरे नंगे जिस्म को देखने के लिए काफी उत्तेजित था… उसने तुरंत हाँ कर दी।
पर मैंने कहा- रोहित तुम ये बॉक्सर पहनकर मेरे साथ ठीक से नहीं नहा पाओगे।
रोहित ने भी चतुराई दिखाते हुए कहा- हाँ.. मौसी पर आप भी अपनी ब्रा पैंटी पहनकर मेरे साथ ठीक ने नहीं नहा पाओगी.. आपको भी ये उतारनी पड़ेंगी।
मैंने कहा- ठीक है… मैं भी उतार देती हूँ!

और इतना बोलकर मैंने अपनी ब्रा का हुक खोलकर उसे नीचे गिरा दिया और फिर अपनी उंगलियों से खींचकर पैंटी को भी उतार दिया.
रोहित मेरे नंगे जिस्म, मेरी नंगी चुची, मेरी नंगी चुत को देखकर बिल्कुल ठगा सा रह गया। मैंने उसे होश दिलाते हुए कहा- अब तू अपना बॉक्सर खुद उतारेगा या मैं उतारूं?
रोहित अभी भी थोड़ा शर्मा रहा था पर फिर उसने अपना बॉक्सर उतार दिया.

उसका लंड अभी भी खड़ा था… जाहिर सी बात थी यह सब मेरे नंगे बदन के कारण ही था। उसका खड़ा लंड देखकर मैं समझ गई कि रोहित क्यों इतना शर्मा रहा है.

मैंने रोहित से उसके लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा- तो क्या तुम इसलिये इतने शर्मा रहे हो… अरे बेटा यह तो प्राकृतिक है… और मुझे खुशी है कि ये सब मेरी वजह से हो रहा है… मतलब अब तुम बिल्कुल जवान हो चुके हो।

फिर हम दोनों बाथरूम में आ गए. आते ही मैं सीधा बाथटब में लेट गई और हाथ देकर रोहित को भी अंदर बुला लिया. मैंने रोहित के हाथ में साबुन देते हुए कहा- मेरी पीठ पर मल दो इसे!
मैं अपना चेहरा पानी से बाहर निकालकर टब में उल्टी लेट गई और रोहित मेरी कमर को अपनी टाँगों के बीच में रखकर मेरी गांड पर बैठ गया.. रोहित का लंड तो शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा था… ऊपर से मेरी नंगी पीठ का स्पर्श उसे और उत्तेजित कर रहा था। उसका लंबा लंड उचक-उचक कर अपनी मौसी की गांड को छूने की कोशिश कर रहा था।

तभी उसका लंड मेरी गांड के छेद पर टकरा गया…जिस कारण मैं चिहुँक गई और रोहित से बोली- अभी मुझे पीछे कुछ टकराया है।
रोहित सकपका गया और उसने अपना लंड पीछे लेते हुए कहा- माफ करना मौसीजी…गलती से टच हो गया।
मैंने रोहित को समझाते हुए कहा- इसमे कोई गलत बात नहीं है कि हमारे शरीर के हिस्से आपस में टकरा जाए।

मैं भी अब सीधी बैठ गई और रोहित के हाथों से साबुन लेकर बोली- लाओ मैं भी तुम्हारी पीठ पर साबुन लगा देती हूँ!
फिर मैंने रोहित की पीठ और फिर उसकी छाती पर भी साबुन मल दिया.
साबुन लगते वक्त मेरे मम्मे रोहित के शरीर से रगड़ खा रहे थे।

मैंने रोहित से कहा- रोहित, अब मेरी छाती पर साबुन लगाने की तुम्हारी बारी है.
तो रोहित शर्मा गया पर उसने अपने हाथों में साबुन ले लिया और फिर उसने मेरे उरोजों को अपने हाथों में भर लिया और उन पर साबुन लगाने लगा.
रोहित का सपना आज सच हो रहा था।

हम दोनों बिल्कुल नंगे तो थे ही और अब आपस में काफी खुल चुके थे, मैंने रोहित के खड़े लंड को अपने हाथों से टटोलते हुए कहा- तुम अपने सामान को ठीक से साफ नहीं करते क्या… देखो तो ये कितना काला हो रहा है…लाओ मैं इसे साफ कर देती हूँ।

मैंने अपने हाथों में साबुन लगाया और अपने दोनों हाथों से रोहित के लंड को अपने हाथों में भर लिया और उसे रगड़ने लगी.
रोहित काफी उत्तेजित हो गया, उसने भी अपने हाथों से मेरी चूचियों को उमेठना शुरू कर दिया. हम दोनों भली भांति जानते थे कि अब हम दोनों रुकने वाले नहीं है।

रोहित के लंड को सहलाने से उसने सिसकारियां भरनी शुरू कर दी- आहहहहह मौसी… रूक्को… मैं झड़ने वाला हूँ… आपके हाथ गंदे हो जाएंगे।
मैंने रोहित से कहा- रोहित अगर तुम चाहो तो मेरे मुँह में भी झड़ सकते हो।
रोहित ने कहा- क्या सच में मौसी… आप मेरा वीर्य अपने मुँह के अंदर लेना चाहोगी?

मैंने तुरंत अपनी जीभ बाहर निकालते हुए रोहित के लंड को चाटना शुरू कर दिया और फिर उसके लंड को मुँह के अंदर भर लिया ‘उमम्म… उम्म…’ की आवाज़ के साथ रोहित का लंड मेरे मुँह को चोदने लगा.
रोहित अपने चरम पर ही चल रहा था, उसने मेरे चूचों को जोर से खींचते हुए मेरे मुँह में ही झड़ना शुरू कर दिया ‘आहह… मममा… सस्सी… ये लो… मैं तो गया…
और फिर उसके लंड से पिचकारियां निकलने लगी, मेरा मुँह रोहित के स्वादिष्ट वीर्य से पूरा भर गया, जिसे मैंने अंदर गटक लिया।

झड़ने के बाद रोहित ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और बोला- मौसी… जिंदगी में पहली बार मैं किसी के मुंह में झड़ा हूँ… और मजा भी बहुत आ रहा था।
मैंने रोहित की बातों को सुनकर उसके माथे पर एक चुम्बन दिया और उससे कहा- ये तो अभी मजे की शुरूआत है… अगर तुम चाहो तो आगे और भी मजा आएगा तुम्हें!
रोहित ने कहा- सच मौसी… आप बहुत अच्छी और सेक्सी हो, काश हम लोग हमेशा ऐसे ही रह सकते साथ में… तो कितना मजा आता।

मैंने रोहित से पूछा- रोहित कभी सेक्स किया है तूने… या किसी को करते हुए देखा है?
रोहित ने कहा- कभी किया तो नहीं है पर मम्मी पापा को कई बार करते हुए देखा है मैंने!
मैंने रोहित को हल्की सी चिमटी काटते हुए कहा- सच में बहुत बदमाश है तू… अपने मम्मी पापा को भी नहीं छोड़ा।

रोहित का लंड फिर से खड़ा हो गया, उसने अपने लंड को हाथ में लेकर कहा- मौसीजी अब आगे का मजा भी दे दीजिए ना मुझे!
मैंने कहा- अब क्या सारे मजे यही टब में लेगा… चल अंदर चलते हैं।

फिर मैंने अपने नंगे जिस्म को टब से बाहर निकाला और रोहित मेरा हाथ पकड़कर मुझे अंदर ले गया।

रूम में जाकर मैं गीली ही बिस्तर पर पीठ के बल लेट गई, मैंने रोहित को मेरी तरफ बुलाया और अपनी टाँगें फैलाते हुए कहा- अब चूसने की बारी तेरी है।

रोहित मेरी टाँगों के बीच आकर बैठ गया और अपने होठों को मेरी चूत पर रख कर चुम्मियां देने लगा… और फिर रोहित अपनी जीभ से मेरी चूत को कुरेदने लगा।

जैसे ही रोहित ने अपनी जीभ से मेरी चूत को रगड़ा, मैं चिल्लाई- और जोर से चूस मेरी चूत… को…
रोहित अभी नया खिलाड़ी था तो उसे तैयार करने के लिए उसका आत्मबल भी बढ़ाना जरूरी था।

कुछ देर बाद मैं भी अपने चरम पर आ गई और मेरी चूत से पानी का ज्वालामुखी फट पड़ा, मैं भी चिल्लाते हुए बोल रही थी- रोहित… मैं झड़ी.. उइई… माँआआआँ… उम्म्ह… अहह… हय… याह… मेरी… चूस ले मुझे… पी जा मेरा पानी… आआहहह…

जब मैं पूरी तरह से झड़ गई तो रोहित ने अपना मुँह मेरी चूत पर से हटाया, उसका चेहरा मेरे पानी से सन चुका था, उसने भी जी भरकर मेरा पानी पिया था।
मैंने रोहित से कहा- रोहित, अब अपना लंड मेरी चूत के अंदर डाल दो।

रोहित ने वैसा ही किया, वो मेरे ऊपर लेट गया और अपने लंड को चूत पर रगड़ने लगा. मैं अपने हाथों से रोहित के लंड को पकड़कर अपनी चूत पर सेट कर अंदर डालने लगी और फिर रोहित से धक्का देने के लिए कहा।
रोहित ने अपने लंड पर दबाव देते हुए कहा- मौसी… आपकी चूत बहुत टाइट है और मुझे भी हल्का दर्द हो रहा है।
मैंने कहा- तुम्हारा लंड है ही इतना मोटा… कि तुम्हें मेरी चूत इतनी कसी हुई लग रही है… और फिर पहली बार करने में थोड़ा दर्द तो होता ही है… और मेरी चूत भी अंदर से फटे जा रही है।

मैंने फिर से रोहित से कहा- अब रुको मत रोहित… अपना लंड मेरी चूत की गहराइयों में उतार दो…. एक ही बार में घुसेड़ दो इसे मेरी चूत के अंदर!
यह सुनकर रोहित ने एक जोरदार धक्का मारा और पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में पेल दिया.
मैंने चीखते हुए रोहित से कहा- और अंदर तक डाल अपने लंड को!

रोहित ने भी अब मेरी जोरदार चुदाई शुरू कर दी, वो अपने गहरे और लंबे धक्कों के साथ मेरी चूत को चोद रहा था।
कुछ देर की जोरदार चुदाई के बाद मैं भी झड़ने को हुई तो मेरे मुंह से बस सिसकारियां ही निकल रही थी ‘आआआअह्ह्ह.. चोद मुझे बेटा… चोद डाल… और अन्दर डाल… अपना लंड… चोद मुझे… चोद मुझे… आआआह्ह्ह… डाल अपना मोटा लंड अपनी मौसी की चूत में… आहहह… आहह्ह… मैं भी झड़ने वाली हूँ… आहह… पेल दे और अंदर…’
और फिर मैंने भी झड़ना शुरू कर दिया।

रोहित भी फिर ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया और उसने भी जोरदार धक्कों के साथ मेरी चूत में झड़ना शुरू कर दिया। जब उसका पूरा गर्म वीर्य मेरी चूत में समा गया तो उसने अपना लंड बाहर खींच लिया… मेरी चूत के पानी की वजह से वो किसी तारे के समान चमक रहा था।

हम दोनों शांत होकर बिस्तर पर लेट गए.

रोहित ने मुझे चूमते हुए कहा- मौसी, काश मैं आपको रोज चोद सकता… तो कितना मजा आता।
रोहित की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बिस्तर से उठ कर बाथरूम चली गई और खुद को साफ करने लगी। रोहित ने भी तब तक अपने कपड़े पहन लिए।

शाम के सात बजने को थे और सब लोग भी आने वाले थे… मैं भी कपड़े पहनकर तैयार हो गई… फिर हम दोनों आपस में बातें करने लगे।

मैंने रोहित से पूछा- तूने अपने मम्मी पापा की चुदाई करते हुए देखा है… तो फिर तेरा भी मन होता होगा ना अपनी माँ की चुदाई करने का?
रोहित ने कहा- हाँ होता तो बहुत है… पर मम्मी के साथ ये सब कर पाना नामुमकिन है… तो बस हिला कर ही काम चला लेता हूँ।

हम दोनों बात कर ही रहे थे कि तब तक सब लोग आ गए… और फिर हम सब लोग खाना खाकर अपने अपने रूम में चले गए।

आगे क्या हुआ… आगे की कहानी अगले भाग में…
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