माँ की गांड का दीवाना-2

(Maa Ki Gand Ka Diwana- Part 2)

हेलो दोस्तो, मैं प्रेम गुरु एक बार फिर से अपनी कहानी का दूसरा हिस्सा लेकर हाजिर हूँ।
मेरी पहली कहानी
माँ की गांड का दीवाना-1
अगर आप लोगों ने नहीं पढ़ी है तो ज़रूर पढ़ें मैं उसका लिंक भी दे रहा हूँ.
और आप लोगों ने जो मुझे मेल भेजे मेरी कहानी पर… मुझे बहुत खुशी हुई। मुझे अब भी आपकी मेल का इंतजार रहेगा. मैं सबको रिप्लाई ज़रूर करता हूँ. तो आप मुझे, मेरी कहानी कैसी लगी, ये ज़रूर बतायें।

अब और समय ना लेते हुए मैं सीधे कहानी पर आता हूँ।
तो अब तक आपको मैंने बताया था कि कैसे मैं रात में सोते हुए माँ की गांड को छू कर और माँ को नंगी नहाते हुए देखकर मज़ा ले रहा था।

इसी तरह से एक पूरा साल गुजर गया… अब मैं 19 साल का हो चुका था और मेरी जवानी भी अब कुछ ज़्यादा ही उफान मारने लग गयी थी।

ऐसे ही एक रात में मैं अपनी माँ की गांड पर हाथ फिरा रहा था कि मुझसे रुका ही नहीं गया और मैंने कुछ ज़ोर से ही अपनी माँ की गांड को दबा दिया। मुझे माँ की गोल गोल और मखमली गांड को दबाने में बहुत मजा आया।
और मैंने फिर से ज़ोर से गांड को दबाया तो माँ की आँख खुल गयी और मैं फ़टाफ़ट वहाँ से चला गया और आकर सो गया.

मुझे नींद नहीं आ रही थी, मैं सोच रहा था कि कल क्या होगा… और डर भी रहा था।
लेकिन जैसा मैंने सोचा था, वैसा कुछ भी नहीं हुआ, मेरी माँ की कोई तरफ से कोई रेस्पोन्स नहीं आया।

अगले दिन फिर मैंने सोती हुई माँ की गांड को ज़ोर से दबाया और फिर माँ की आँख खुलने पर फिर भाग गया। अब माँ की तरफ से कोई रेस्पॉन्स नहीं आ रहा था तो मेरी हिम्मत बाद गयी।
आज माँ घाघरा पहन कर सोई हुई थी मैंने माँ का घाघरा ऊपर उठा दिया, अब माँ की गोल गोल मखमली गांड मेरे सामने थी, मैंने झट से माँ की गांड पर अपना हाथ रख दिया.
आअहह… क्या फीलिंग थी।

मैं उस फीलिंग के आगोश में खोता जा रहा था और मेरा हाथ माँ की गांड को कसता जा रहा था। मैंने माँ की गांड के ऊपर वाले चूतड़ को दबा रखा था और मेरी बीच वाली उंगली माँ की गांड के छेद को छू रही थी।
आहह… मेरा मन कर रहा था कि अभी अपना लंड माँ की गांड में उतार दूँ।

तभी मेरी माँ की आँख खुल गयी और उन्होंने गुस्से से मेरी तरफ देखा।
तो मैं वहाँ से चला गया और मुठ मार कर सो गया।

अब भी दिन में माँ बिल्कुल शांत थी। अब कुछ दिन ऐसा ही चला।

एक दिन माँ ने फिर से घाघरा पहना हुआ था। मैं बहुत खुश हुआ कि आज फिर कुछ नंगा बदन छूने को मिलेगा। मैं बस रात का इंतजार कर रहा था।

आख़िरकार वो पल आ गया, रात का 1 बजा हुआ था, सब सो रहे थे, मैं उठा और माँ के पास गया। उनका घाघरा घुटनों तक उठा हुआ था लेकिन मैं उदास हो गया क्योंकि आज माँ करवट लेकर नहीं, सीधी सोई हुई थी।

फिर मैंने सोचा कि क्यों ना आज माँ की गांड के नहीं, चूत के मज़े लिए जायें।
तो मैंने मां का घाघरा ऊपर उठा दिया. उन्होने पेंटी नहीं पहनी हुई थी।
आआ आहह माँ की नागी चूत मेरी आँखों के सामने थी, उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, बिल्कुल चिकनी चूत थी उनकी।

अब मैंने अपना एक हाथ माँ की चूत की तरफ बढ़ाया। जैसे ही मेरे हाथ ने माँ की चूत को छुआ, मेरे रोंगटे खड़े हो गये क्योंकि उनकी चूत बहुत मुलायम थी।
मैंने धीरे धीरे उनकी चूत को अपनी उंगलियों से सहलाया, उनकी तरफ से कोई हलचल नहीं हुई तो मैंने अपनी उंगलियों को धीरे-धीरे नीचे उनकी चूत के छेद की तरफ बढ़ाना शुरू कर दिया। अब मेरा हाथ उनकी चूत के छेद तक पहुँच चुका था। माँ की चूत के छेद पर मुझे थोड़ा गीलापन महसूस हुआ।

मैंने थोड़ी देर उनके छेद को सहलाया और फिर अपनी पहली उंगली को माँ की चूत के छेद के अंदर डालने लगा। बिना किसी रुकावट के मेरी पूरी उंगली माँ की चूत के अंदर घुस गयी।
अब मैंने अपनी उंगली को अंदर बाहर करना शुरू किया लेकिन मुझे लग रहा था कि मेरी माँ की चूत का छेद बड़ा है और मेरी उंगली बहुत पतली।
तो मैंने अपनी दूसरी उंगली भी माँ की चूत में डाल दी।

अब मुझे माँ की चूत की गर्म दीवारें महसूस हो रही थी। मैंने अपनी उंगलियों को आगे पीछे करना शुरू कर दिया। माँ की गर्म चूत में उंगली करने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। मैं चूत में उंगली कर रहा था कि मैंने महसूस किया कि मेरी माँ कामुक सिसकारियाँ ले रही है।

मैं अपना चेहरा माँ के चेहरे के पास लेके गया और उनकी सिसकारियाँ सुनी, मेरी माँ मेरे उंगली करने से सिसकारियाँ ले रही थी. मुझे लगा कि माँ को मज़ा आ रहा है तो मैंने अपनी उंगलियों की रफ़्तार थोड़ी तेज़ की तो माँ की सिसकारियों की आवाज़ भी तेज़ हो गयी।
मुझे लगने लगा कि आज शायद मेरी माँ मुझसे चुदवा ले।

लेकिन मेरा सोचना ग़लत था, तभी माँ की आँख खुली और मुझे गुस्से से देखा और मुझे थप्पड़ मार दिया और मुझे वहाँ से जाने का इशारा किया तो मैं वहाँ से चला गया।
अब मुझे माँ के थप्पड़ मारने पर मुझे उन पर ग़ुस्सा भी आ रहा था और डर भी लग रहा था कि कल क्या होगा।
और इसी कशमकश में रात निकल गयी।

अगली सुबह तो कुछ नहीं हुआ लेकिन दोपहर को मैं अकेला बैठा था तब माँ मेरे पास आई और मेरा कान पकड़ कर मरोड़ दिया और बोली- मुझे सब पता है कि तू क्या करता है. अगर आगे से कुछ किया तो तेरे पापा को बता दूँगी और घर से निकलवा दूँगी।
इतना ही बोल कर मां अपना गुस्सा दिखा के चली गयी।

कल रात के थप्पड़ का गुस्सा तो था ही और अब ऊपर से ये आटिट्यूड। दोस्तो, जब कोई लड़की हमको आटिट्यूड दिखा के चली जाए तो मन करता है कि बस ये एक बार चोदने को मिल जाए तो इसको ऐसा चोदूँ कि इसकी चीखें निकलवा दूं, एक ही धक्के में पूरा लंड अंदर घुसा दूं और आँखों से आँसू निकलवा दूं।

बस यही मेरी हालत थी और डर भी था कि कहीं पापा को ना बता दे… तो मैंने अब अपनी माँ के साथ रात में सेक्स के मज़े लेना बंद कर दिया।
अब बस उसे नहाते हुए देख कर मुठ मारने लगा और अपने ख़्वाबों में ही माँ की चूत और गांड को चोदने लगा।

ऐसे ही कुछ दिन बीत गये और मेरा कॉलेज में अड्मिशन हो गया और माँ की चूत और गांड को चोद कर उनकी चीखें निकलवाने की हसरत लिए मैं कॉलेज में चला गया और वहीं हॉस्टल में रहने लगा।
अब कभी कभी मैं घर आता था और जब आता था तब नहाते हुए माँ की चूत और गांड को देख कर हिलता था। मुझे लग रहा था मेरी हसरत कभी पूरी नहीं होगी. मैं हॉस्टल में भी ख़्वाबों में माँ की चूत और गांड को चोदता था और माँ की चीखें निकलवाता था।
मैं अंतर्वासना पर माँ की चुदाई की कहानियाँ पढ़ता और अपनी माँ को चोदने का प्लान बनाता रहता लेकिन कभी माँ की चुदाई का मौका नहीं मिल पा रहा था। बस माँ की चूत और गांड की सपनों में ही चुदाई का मजा लेता रहा और ऐसे ही वक़्त बीत गया।

तो दोस्तो, कैसी लगी मेरी सच्ची कहानी?
आप मुझे मेल पर ज़रूर बतायें, मुझे आपकी मेल का इंतज़ार रहेगा।
मेरी मेल आइडी है [email protected]
मुझे मेल पर ज़रूर कीजिएगा दोस्तो, अगर आपको अच्छी नहीं भी लगी तो भी ज़रूर बतायें। आपके सजेशन का मुझे इंतज़ार रहेगा।
आपका अपना प्रेम