मेरठ की अंजलि को बनाया लेस्बियन- 1

दोस्तो.. इस बार की कहानी मुझे भोपाल के सलिल ने भेजी है। उन्हें अपनी बात लिखने में मुश्किल हो रही थी इसलिये मुझे ईमेल करके अपना किस्सा लिख भेजा… मैंने उकी कड़ियाँ पिरोकर कहानी का रूप दे दिया।
बस उस कहानी में उन पति-पत्नी की जगह मैं और रवि आ गये हैं।

इस बार भी रविवार की छुट्टी हुई तो मेरे पति रवि ने मेरठ जाने की बात कही। महीने में एक बार तो उनका मेरठ का चक्कर लग ही जाता था।
मैंने पूछा- मेरठ में ऐसा क्या काम है?
तो उन्होंने जवाब दिया- ललित से कुछ काम है।

ललित से उनकी इलाहाबाद में दोस्ती हुई थी, दोनों एक साथ ही पढ़ते थे, शादी के बाद भी ललित से रवि की दोस्ती बनी रही, उन्हीं से मिलने रवि अक्सर मेरठ जाते रहते थे लेकिन मुझे एक बार भी अपने साथ नहीं ले गये।

इस बार न जाने क्यों मुझे कुछ शक हुआ तो रवि के मेरठ पहुँचने के बाद मैंने ललित की बीवी अंजलि को फोन मिलाया।
अंजलि का जवाब तो चौंकाने वाला था, उसका कहना था कि रवि उनके घर नहीं आते बल्कि ललित ही हर महीने में एक बार रवि से मिलने जाते हैं।

मैंने कहा- यही हाल रवि का है, वो भी महीने में एक बार मेरठ जाने की बात कह कर जाते हैं।
मैं समझ गई कि कुछ तो गड़बड़ घोटाला है लेकिन अंजलि को अपने पति पर पूरा भरोसा था, उसका पति ललित पूजा पाठ का शौकीन था। कुछ गलत करने की तो वो सोच भी नहीं सकता था।

इतने सालों बाद भी मेरी अंजलि से मुलाकात नहीं हुई थी। वो गांव में पल-बढ़ कर मेरठ शहर में आई थी, उसके संस्कार तो अभी भी गांव वाले ही थे, साड़ी, सूट से आगे कुछ नहीं।

पिछली बार जब ललित अकेले मेरे घर आये थे तो मैं मिनी स्कर्ट और मिनी टॉप में थी, मुझे देखकर ललित कहने लगे कि अंजलि को भी थोड़ा माडर्न बना दो।

अब समस्या यह थी कि दोनों दोस्त अपनी अपनी बीवियों से झूठ बोलकर घर से निकलते हैं तो करते क्या हैं।
यह जानने के लिये मैंने रवि को फोन किया और साफ बता दिया कि मेरी अंजलि से बात हो गई है इसलिये मुझे सच सच बता दो कि दोनों कहाँ हो और क्या करते हो।
रवि भी समझ गये कि उनकी चोरी पकड़ी गई है इसलिये बोले कि घर आकर सब बता दूँगा।
मैं समझ गई कि दाल में कुछ काला है।

मेरठ से लौट कर रवि ने बताया कि सीधा साधा दिखने वाला ललित दरअसल गांड मरवाने को शौकीन है।
यह सुनकर मुझे काफी हैरानी हुई, मैंने रवि से कहा- मुझे पूरी बात बताओ।

रवि ने बताया कि इलाहाबाद के हॉस्टल में हर संडे को उनके कमरे में दस-बारह दोस्त मिलकर पार्टी करते थे। बाद में चार दोस्तों को छोड़कर सब चले जाते थे और वो चार दोस्त एक दूसरे की गांड मारते थे लेकिन यह बात किसी को पता नहीं थी।
एक बार ललित भी बिना बुलाये पार्टी में आ गया, अंत में हम चार दोस्तों के अलावा वो भी कमरे में रह गया। हमने ललित को घर भेजने की बहुत कोशिश की लेकिन वो राजी ही नहीं हुआ।
हम चारों ने सोचा कि जब वो सो जाएगा तो हम अपना खेल शुरू कर देंगे।

रात के दो बजे हम चारों नंगे हो गये, लाइट बंद थी इसलिये किसी को पहचान नहीं रहे थे। हमें यह भी नहीं पता था कि हमारा एक दोस्त चुपचाप कमरे से बाहर चला गया है।
मतलब यह था कि ललित हमारे कमरे में था और हम उसे ललित भी नहीं मान रहे थे। हमने अंधेरे में ही उसके कपड़े उतार दिये लेकिन वो कुछ भी नहीं बोला।

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