वो कौन थी-3

(Wo Kaun Thi- Part 3)

मेरी सेक्स कहानी के पिछले भाग
वो कौन थी-2
में अपने पढ़ा कि मैं अपने गाँव गया हुआ था चाचा की बेटी की शादी में… सर्दियाँ थी, रात को मैं रजाई में सोया हुआ था, मेरी बगल में कोई लड़की सोई हुयी थी, मैं उसके बदन के साथ खेलने लगा था.
अब आगे:

नीचे से वो अब नंगी हो गयी थी मगर मैं अब भी कपड़े पहने हुए था। अपने कपड़े उतारने के लिये एक बार मैं उससे थोड़ा सा अलग हुआ और रजाई में ही जल्दी से अपने सारे कपड़े उतारकर बिल्कुल नंगा हो गया।

अपने कपड़े उतारने के बाद मैं फिर से उसके मखमली नाजुक बदन से चिपक गया… मगर इस बार जब मैं उसके बदन से चिपका तो मेरे उत्तेजित नंगे लिंग ने उसकी मखमली जांघों को अपनी कठोरता का अहसास करवाया जिससे उसके बदन ने एक झुरझुरी सी ली।

मैं अब उसको सीधा करना चाहता था मगर वो सीधा होने की बजाय मुझसे चिपकती ही जा रही थी। मैंने भी उसको सीधा करने की जबरदस्ती नहीं की बल्कि उसी तरह लेटे लेटे ही एक हाथ से धीरे धीरे उसके नंगे गुदाज नितम्बों व जांघों को सहलाते हुए मैं हल्के हल्के उसके कोमल गालों को चूमने लगा।

उसके मुलायम गालों को चूमते हुए धीरे धीरे मेरे होंठ उसके होंठों पर आ गये जो हल्के हल्के कम्पकपा से रहे थे। मुझसे अब रहा नहीं गया और मैंने हौले से उसके नर्म नाजुक होंठों पर अपने होंठ लगा दिये। मैंने उसके होंठों पर पहले तो धीरे से चूमा और फिर हल्के हल्के उन्हें चूसने लगा… जिससे वो हल्का सा कसमसाने लगी.
उसके रशीले होंठों का रसपान करते हुए मैं धीरे धीरे अब अपने शरीर से ही उसके बदन पर दबाव भी डालने लगा जिससे वो धीरे धीरे सीधी होने लगी और मैं उसके ऊपर चढ़ने लगा.

वो मेरा विरोध तो नहीं रही थी, बस थोड़ा बहुत कसमसा ही रही थी मगर मेरे दबाव डालने पर धीरे धीरे सीधा भी होती जा रही थी… इसी तरह मेरे दबाव डालने से धीरे धीरे वो फिर से बिल्कुल सीधा कमर के बल हो गयी और मैं उसके ऊपर आ गया.

उसके ऊपर आकर मैंने अपने पैरों से ही धीरे धीरे उसके पैरों को फैला दिया और अपनी कमर के नीचे के हिस्से को उसकी दोनों जांघों के बीच कर लिया… मेरा उत्तेजित लिंग अब सीधा उसकी छोटी सी नंगी योनि पर लग गया था जिससे वो थोड़ा सा सहम सी गयी। वो अब भी कुछ नहीं बोल रही थी मगर उसका बदन किसी भट्टी की तरह तप रहा था और जोरो से कंपकपा भी रहा था जैसे कि उसे बहुत तेज सर्दी व बुखार एक साथ हो गया हो।

उस कमरे में और भी कुछ लड़कियां या औरतें सो रही थी, कहीं हमारी हरकतों से वे जाग ना जायें, इसलिये आगे कुछ करने से पहले मैंने सबसे पहले तो हमारी रजाई को ठीक से औढ़ा और फिर एक हाथ से उसके मुँह को दबा लिया जिससे वो फिर से कसमसाने लगी, मगर तब तक मैं दूसरे हाथ से अपने लिंग को पकड़ कर उसकी छोटी सी योनि पर घिसने लगा.

अब तक उसकी योनि प्रेमरश से भीग कर बिल्कुल तर हो गयी थी जिस पर मेरा लिंग अपने आप ही फिसल रहा था… वो अब भी कोई हरकत नहीं कर रही थी मगर उसकी उफनती सांसें और कांपता बदन उसकी हालत बयान कर रहा था।
मैंने अपने लिंग को दो चार बार ही उसकी योनि पर घिसा और फिर योनि के प्रवेशद्वार पर लगाकर जोर से एक धक्का लगा दिया.

एक ही धक्के में मेरा आधा लिंग उसकी छोटी सी योनि की नाजुक फांकों को चीरता हुआ अन्दर धंस गया.
जिससे वो जोर से ऊऊऊ… ह्हह हूँहूँहूँहूँ… ऊऊऊ… की अवाज के साथ चिंहुक पड़ी और उसका पूरा बदन तन सा गया।
मुझे पता था मेरा लिंग उसकी छोटी सी योनि में जाते ही वो चिल्ला देगी इसलिये मैंने पहले ही हाथ से उसका मुँह दबा लिया था, यहाँ तक कि मैं तो ये भी समझ रहा था कि ये कुवाँरी होगी और आसानी से मेरा लिंग उसकी योनि में नहीं जायेगा मगर एक ही झटके में मेरा आधा लिंग उसकी योनि में चला गया था। इसका मतलब यह था कि ये कुँवारी तो बिल्कुल नहीं थी।

मैंने अब थोड़ा सा अपने लिंग को बाहर खींच कर फिर एक जोर का धक्का लगा दिया, इस बार लगभग मेरा पूरा लिंग उसकी योनि में समा गया और इस बार भी वो उऊऊ… उम्म्ह… अहह… हय… याह… हहूहू… ऊऊऊऊ… करके रह गयी।

मैंने पूरा लिंग उसकी योनि में घुसाने के बाद अपना हाथ उसके मुंह पर से हटा लिया, वो अब भी कुछ बोल तो नहीं रही थी मगर लम्बी लम्बी सांसें लेते हुए हल्का हल्का कसमसा रही थी।

उसने एक तरफ गर्दन की हुई थी इसलिये मैंने हल्के हल्के उसकी गर्दन पर चुमना शुरू कर दिया और धीरे धीरे ऊपर की तरफ बढ़ने लगा..
तभी मेरा ध्यान उसके गले की चेन (गले का आभुषण) ने खींच लिया. पता नहीं मुझे क्या सूझा कि मैं उसकी गर्दन वा गालों को सहलाने के बहाने उसके गले की चेन का मुआयना करने लगा. उसने गले में एक पतली सी चेन पहनी हुई थी‌ और उसमें दिल के आकार का एक लॉकेट भी लगा हुआ था। जब तक मैंने उसकी गले की चेन का मुआयना किया तब तक मैं उसकी गर्दन पर ही चूमता रहा.

कुछ देर उसकी गर्दन पर चूमने के बाद मेरे होंठ ऊपर उसके कोमल गालों पर से होते हुए उसके होंठों पर आ गये. साथ ही मैंने नीचे से अब धीरे धीरे अपने कूल्हों को हिलाते हुए धक्के भी लगाने शुरू कर दिये.
धीरे धीरे धक्के लगाते हुए मैंने उसके होंठों को अपने मुँह में भर लिया और फिर से उनको चूसना शुरू कर दिया. उसके होंठों को चूसते हुए मैंने धीरे से अपनी जीभ उसके मुँह में घुसा दी जिससे पहले तो वो थोड़ा सा कसमसाई मगर फिर वो भी मेरी जीभ को हल्के हल्के अपने होंठों से दबाने लगी.

मैं भी अब धीरे धीरे अपनी गति बढ़ने लगा मगर इतनी जोर से भी नहीं कि धक्का लगाने से किसी प्रकार की कोई आवाज निकले. मैं बस अपने कूल्हों को ही हिलाकर धक्के लगा रहा था क्योंकि हमारे बगल में और भी कोई सो रहा था, उनके जागने का भी मुझे डर था इसलिये मैं बस अपने कूल्हे ही उचका रहा था।

उसके मुँह से अब हल्की हल्की सिसकारियाँ फूटना शुरु हो गयी थी और नीचे से उसकी कमर भी अब कुछ कुछ हरकत करने लगी थी, साथ ही मेरे होंठों को भी वो अब जोर से चूसने लगी थी। मैंने भी अब थोड़ा जोर से उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया जिसका जवाब उसने भी मेरे ऊपर के होंठ को हल्का सा काट लिया.
मेरे लिये उसका इतना इशारा तो काफी था, मैं भी अब जोर से उसके रशीले होंठों को चूसने लगा, साथ ही मैं अपना एक हाथ अब उसकी कसी हुई गोलाइयों पर भी ले आया.

मैं तो पूरा ही नंगा था मगर उसने अब भी ऊपर शर्ट पहना हुआ था, उसकी गोलाइयों को नंगा करने के लिये मैं उसके होंठों को चूसते हुए धीरे धीरे उसके शर्ट को भी ऊपर की तरफ खिसकाने लगा… मैं नीचे से धक्के तो लगा ही रहा था साथ ही उसके रशीले होंठों को कस कस कर रश चूसते हुए मैं अब उसके शर्ट को भी ऊपर की तरफ उठा रहा था, ये तीनों काम मैं एक साथ ही कर रहा था।

धीरे धीरे मैंने उसके शर्ट के साथ साथ उसकी ब्रा को भी ऊपर तक उठाकर उसकी दोनों गोलाइयों को नंगा कर लिया. उसकी चुची के नंगा होते ही मैंने उसके होंठों को छोड़ दिया और थोड़ा सा उठ कर एक हाथ से उसकी एक नंगी चुची को दबोच लिया.
किसी स्पंज के जैसी ऊपर से मुलायम और अन्दर से ठोस भरी हुई उसकी चुची हाथ में आते ही मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसे जोर से मसल दिया‌ जिससे वो ऊऊ… ह्हहहुहुँ… की धीमी सी आवाज के साथ थोड़ा सा कसमसाई और उसने मेरे हाथ को अपनी चुची पर से हटा दिया।

मैं फिर से उसकी चुची को पकड़ना चाहता था मगर उससे पहले ही उसने अपने दोनों हाथो से पककर मुझे वापस अपने ऊपर खींच लिया जिससे उसकी नर्म मुलायम नंगी चूचियां मेरे सीने से पिस गयी।

वो भी अब मेरा साथ दे रही थी इसलिये मैं अब तेजी से धक्के लगाने लगा। मेरे साथ साथ वो भी अब जोरो से अपनी कमर हिला रही थी मगर हमारे धक्को में वो बात नहीं थी जो खुलकर धक्का लगाने में होती है।

तभी उसने अपने पैरों को उठाकर मेरी जांघों पर रख लिया, साथ ही अपने हाथों से भी मेरे शरीर को कस कर जकड़ लिया और फिर अपने हाथों व पैरों के सहारे मुझे अपने बदन पर कस कस कर आगे पीछे हिलाने लगी, जिससे मेरा लिंग तो उसकी योनि में अन्दर बाहर हो ही रहा था, साथ ही उसकी योनि व उसकी नंगी चुचियों के साथ साथ उसका पूरा मखमली बदन ही मेरे शरीर से मसला जाने लगा.

उसकी यह तरकीब मुझे बहुत पसंद आई, मैं भी अब इसी तरह अपने पूरे बदन का भार उसके मखमली बदन पर डालकर खुद को जल्दी जल्दी आगे पीछे करने लगा जिससे उसकी सिसकारियाँ तेज हो गयी।

अब तो मेरा जोश दोगुना हो गया और मैं अपनी पूरी तेजी से अपने शरीर को आगे पीछे हिलाने लगा और वो जोर से इईईई… श्श्श्श… अआ… हहहह… इईईई… श्श्श्शश… अअआ… ह्हह्ह… की आवाजें निकालने लगी।

मुझे अब फिर से डर लगने लगने लगा कि उसकी आवाज कहीं कोई सुन ना ले इसलिये मैंने उसके होंठों को फिर से अपने मुँह में भर कर बन्द कर दिया मगर वो अब भी उऊऊऊ… ह्हुहहु… उऊऊऊ… ह्हुहुहुहु… की आवाज करती रही। मैं तो पूरी तेजी से अपने शरीर को आगे पीछे कर ही रहा था साथ ही वो भी अपने हाथों व पैरों से मुझे आगे पीछे हिलाते हुए मेरे शरीर के भार से अपने मखमली बदन को कस कस कर मसलवा रही थी, मेरे हर धक्के के साथ वो उऊऊऊ… ह्हुहहु… उऊऊऊ… ह्हुहुहुहु… कर रही थी।

हम दोनों की ही सांसें अब उखड़ने लगी और पसीने से बदन भीग गये… फिर तभी वो किसी बेल की तरह मेरे शरीर से लिपट गयी, उसका बदन किसी कमान की तरह तन गया और उसकी छोटी सी योनि रह रह कर मेरे लिंग को अपने प्रेमरश से नहलाने लगी। उसके साथ साथ मैं भी चर्म पर पहुंच गया था, मैंने भी उसको जोर से भींच लिया और अपना सारा वीर्य उसकी योनि में ही उड़ेल दिया।

रस स्खलन के बाद कुछ देर तक हम दोनों ऐसे ही एक दूसरे की बांहों में समाये हुए अपनी अपनी उखड़ी सांसों को काबू में करने की कोशिश करते रहे।
फिर कुछ देर बाद उसने मुझे अपने ऊपर से धकेल कर नीचे कर दिया और उठ कर अपने कपड़े पहनने‌ लगी। कपड़े पहनने के बाद वो दूसरी रजाई में जाना चाहती थी मगर मैंने उसका हाथ पकड़कर वापस अपने ऊपर खींच लिया। तभी मैंने ध्यान दिया कि उसने हाथ में घड़ी भी पहनी हुई थी।

मेरे खींचने पर वो फिर से मेरी रजाई में ही सो गयी मगर उसने अब दूसरी तरफ करवट कर ली थी। मैं भी अब फिर से उसके पीछे चिपक गया और उसे अपनी बांहो में भरकर सो गया, पता नहीं कब मुझे नींद आ गयी.

और सुबह जब मेरी आँख खुली तो देखा कि मैं बस अकेला और नंगा ही उस कमरे में सो रहा था। वो तो शुक्र था कि मैंने रजाई ओढ़ रखी थी और उस कमरे का दरवाजा भी बन्द था, नहीं तो मेरी क्या हालत होती!

मैं जल्दी जल्दी अपने कपड़े पहनने लगा. तभी मुझे रात का घटनाक्रम याद आया कि मेरे साथ कमरे में और भी लड़कियाँ या औरतें सो रही थी उनमे से एक के साथ मैंने रात में सेक्स सम्बन्ध भी बनाये थे… मगर अब कमरे में कोई भी नहीं थी; मेरे साथ जो भी कमरे में सो रही थी, वो सब उठकर जा चुकी थी।

अपने कपड़े पहनने के बाद मैं फिर से बिस्तर पर लेट गया और सोचने लगा कि वो कौन थी जिसके साथ मैंने रात में सम्बन्ध बनाये थे, तभी मुझे उसकी कुछ निशानियाँ याद आई, जो रात में उसके साथ सम्बन्ध बनाते समय मैंने ध्यान में दी थी, उनसे मैं उसे पहचान सकता था… और ये बात मेरे दिमाग में आते ही मैं उठकर कमरे से बाहर आ गया।

बाहर सब अपने अपने काम‌ में लगे हुए थे। तैयार होने के बाद मैं भी शादी के काम में लग गया, साथ ही मैं दिन भर शादी में आई हुई सभी लड़कियों को पहचानने की कोशिश करता रहा कि रात में इनमें से मेरे साथ कौन थी मगर मुझे कोई कामयाबी नहीं मिल सकी।

सुमन के मामा की छोटी लड़की अनीता और एक चाचा जी के किसी अन्य रिश्तेदार की लड़की थी जिसको मैं जानता नहीं था, बस दो ने हाथ में घड़ी तो पहनी हुई थी मगर उनमें से किसी ने भी गले में चेन नहीं पहनी हुई थी। मुझे इतना तो अन्दाजा हो गया था कि रात में मेरे साथ इन दोनों में से ही कोई एक थी मगर यह पक्का नहीं पता चल पा रहा था इन दोनों में से कौन मेरे साथ थी। मैंने दोनों से ही बात करके उनके व्यवहार से उन्हें पहचानने की कोशिश भी की मगर दोनों का व्यवहार बिलकुल‌ सामान्य ही था।

मुझे अब दोनों में से पतली सी चेन पहनने वाली‌ लड़की को देखना था और उस चेन में दिल के आकार का लॉकेट भी लगा हो.

वो दिन मेरा ऐसे ही निकल गया, अब मुझे बस शादी वाली रात से ही उम्मीदें थी, मगर शादी वाली रात को‌ जब बारात के स्वागत के लिये सब लड़कियाँ तैयार होकर आई तो मेरी सारी उम्मीद तो धरी की धरी रह ही गयी, ऊपर से मैंने जो थोड़ा बहुत अन्दाजा लगाया था वो भी जाता रहा, क्योंकि वैसी कोई चैन पहने तो मुझे कोई भी लड़की दिखाई नहीं दी बल्कि हाथ में घड़ी लगभग अब सब लड़कियों ने पहनी हुई थी।

खैर शादी के बाद मैं वापस अपने घर आ गया और मेरे दिमाग में ये सवाल बना ही रह गया कि
“वो कौन थी…?”
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