उसे चुत चुदाई से ज्यादा अपनेपन की जरूरत थी-1

(Use Chut Chudai Se Jyada Apnepan Ki Jarurat Thi- Part 1)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अन्तर्वासना पाठकों और पाठिकाओं को प्रियम दुबे के लंड का सादर नमस्कार!
दोस्तो, यह मेरे जीवन की एक सच्ची घटना है।

मामा के लड़के की सगाई थी और मुझे फंक्शन अटेंड करने जयपुर जाना था। मैं अक्सर जब भी ट्रेवल करता हूँ तो एसी क्लास में रिजर्वेशन नहीं कराता क्यूंकि वहाँ बैठे लोगों को एक दूसरे से कोई ज्यादा मतलब नहीं होता और सभी लोग अपने में ही मस्त रहते हैं। और साथ ही मैं हमेशा दो टिकट बुक कराता हूँ कि न जाने कब किसी अनजान हसीना से मुलाकात हो जाये और मैं अपनी सीट से उसकी चुत शेयर कर सकूँ।
जयपुर जाने के लिए भी मैंने सेकंड सिटिंग में दो टिकट बुक करा ली थीं।

टाइम पर स्टेशन पहुँच कर मैंने ट्रेन पकड़ ली। दिसम्बर का महीना था और सर्दी बहुत ज्यादा थी। अभी ट्रेन चले हुए एक मिनट ही हुआ था कि एक आकर्षक महिला मेरे पास आई और पूछा कि मेरे बगल वाली सीट खाली है क्या?
मेरी तो जैसे लॉटरी ही निकलने वाली थी, मैंने कुछ सोचने का नाटक किया और अपने बगल वाली सीट जो कि मेरी ही थी उस महिला को बैठने के लिए दे दी।
उसने मुझे शुक्रिया कहा और वो मेरे बगल में बैठ गई।

नोन ऐसी कोच होने के कारण खिड़की में से सर्द हवा आ रही थी। उस महिला ने शॉल ओढ़ा हुआ था। किसी वजह से जब उसने शॉल को एक मिनट के लिए हटाया तो मुझे उसके आकर्षक कामुक बदन का एहसास हुआ।
वाह! क्या बदन दिया था ऊपर वाले ने उसे! इतनी सर्दी के बावजूद उसका शाल के अंदर पहना हुआ स्लीवलेस ब्लाउज और नाभि के नीचे बंधी साड़ी मेरे सोये हुए लंड को खड़ा करने के लिए काफी था।
उसके लगभग 36 साइज के मुम्मे बिल्कुल तने हुए थे और गांड भी बाहर की ओर उभरी हुई थी।
बदन ऐसा था जैसे दूध में केसर मिला दिया हो।

शायद उसने मेरा अचानक से खड़ा हुआ लंड देख लिया था। एक हल्की सी मुस्कुराहट के साथ उसने शाल को वापस लपेट लिया था। मैंने भी सोच लिया था कि इसको चोदने की कुछ जुगाड़ करता हूँ।

बातचीत शुरू हुई तो पता चला कि उसके परिवार में सिर्फ वो और उसकी जवान बेटी है। पति का देहांत हुए 12 बरस हो चुके थे। बेटी एयर होस्टेस थी।
महिला जिसका नाम कनिका था वो यहाँ एक दिन पहले ही अपने किसी परिचित के यहाँ आई थी। अचानक फ्लाइट में डयूटी लगने के कारण उसकी बेटी को जॉब पर जाना पड़ गया। जिसकी वजह से कनिका को बिना रिजर्वेशन जयपुर जाना था।

अगला स्टेशन आने तक हम एक दूसरे के बारे में काफी कुछ जान चुके थे। महिला बहुत सम्पन्न परिवार से थी। जयपुर के पॉश एरिया में उसका 3 बैडरूम फ्लैट था।

मुझे सर्दी में ठिठुरता देख उसने मुझे अपनी शाल ओढ़ने के लिए दे दी। क्यूँकि एक ही शाल थी इसलिए हम दोनों ने शाल को ओढ़ लिया। उसके बदन की खुशबू मेरे बदन में सिहरन पैदा कर रही थी।

धीरे धीरे कब हम एक दूसरे के और करीब आ गए पता ही नहीं चला। एक दूसरे की सांसें हम दोनों महसूस कर रहे थे, हमारे हाथ एक दूसरे को टच कर रहे थे। सर्दी की वजह से एक दूसरे से चिपकना अच्छा लग रहा था। उसने अपनी आंखें बंद करके मेरे कंधे पर अपना सिर रख दिया।

अब कनिका का हाथ मेरे लंड के ऊपर तक आ चुका था। मेरा लंड तो पहले से ही सलामी दे रहा था, कनिका ने मेरे खड़े लंड का उभार महसूस किया और मेरे सुलगते लंड के ऊपर सहलाने लगी। वासना के लाल डोरे उसकी आँखों में साफ दिखाई दे रहे थे।
मैंने भी कोई विरोध नहीं किया, मेरी तरफ से हरी झंडी मिलते ही उसके मखमली हाथों ने मेरा आपरेशन चालू कर दिया।

हम दोनों ही एक दूसरे से कुछ भी नहीं बोल रहे थे।

धीरे धीरे उसने मेरे पैंट की चैन खोल कर मेरा लंड अपने हाथ में ले लिया और लंड के टोपे को ऊपर नीचे करने लगी।
मैं भी अपने हाथ से उसके नंगे पेट को सहलाने लगा। धीरे धीरे हाथों को मैंने उसकी चुची पर रख दिया, मुझे ऐसा लगा कि रूई का कोई गोला मेरे हाथ में आ गया है।
मुझे अच्छी तरह मालूम है कि औरत को अगर ठीक से गर्म कर दिया जाए तो वो अपनी चुत हथेली में रख कर परोस देती है।

अब मैंने भी देर न करते हुए उसके ब्लाउज के सारे हुक खोल दिये और उसकी चुची को प्यार से मसलने लगा। उसकी चुची तनी हुई थी। मैं एक एक करके उसकी चुची की घुंडियों को मसल रहा था। आग दोनों तरफ सुलग रही थी। मेरे लंड की गर्मी से वो बहुत उत्तेजित हो रही थी।

धीरे धीरे मेरा हाथ उसकी ऊंची घाटियों से होता हुआ गहराई की तरफ जाने लगा। मेरा हाथ उसकी चुत को छूने के लिए मचल रहा था। साड़ी के अंदर से काफी कोशिश करने के बाद भी जब मेरा हाथ अंदर नहीं गया तो कनिका ने अंगड़ाई लेते हुए अपनी वासना भरी नजरों से मुझे देखा और अपने हाई हील्स सैंडल्स उतार कर अपने दोनों पैर ऊपर कर लिए।

अब मेरे लिए मेरी मंजिल दूर नहीं थी। मेरा हाथ नीचे से सीधे सरकते हुए उसकी पेंटी तक पहुँच गया। जैसे ही मैंने अपना हाथ उसकी गीली पेंटी के ऊपर से उसकी फूली हुई चुत पर रखा, उसने अपनी आंखें बंद कर लीं और मेरे लंड को जोर से दबा दिया।
एक हल्की सी चीख मेरे मुंह से निकली, साथ ही उसके मुँह से भी सॉरी निकला। मैं उसकी पेंटी के ऊपर से ही उसकी चुत को सहलाने लगा। चुत की दरार पेंटी के ऊपर से साफ महसूस हो रही थी।

अब हम दोनों के हाथों की रफ्तार ट्रेन की रफ्तार से भी ज्यादा तेज हो चली थी। कनिका ने थोड़ा सा हिलडुल कर अपनी पेंटी उतारने का इशारा किया।
कनिका ने बिल्कुल नए फैशन की पेंटी पहनी हुई थी। पेंटी में एक तरफ हुक थे और दूसरी तरफ गांठ वाली डोरी थी।

अगले ही पल कनिका के चुत के पर्दे को मैंने अलग कर दिया अब उसकी चुत की दरार ओर मेरे हाथों के बीच कोई फासला नहीं था। वो मेरे लंड को पागलों की तरह हिला रही थी। अगर हम ट्रेन में ना होते तो कनिका मेरा लंड चबा ही जाती।
वो तो अच्छा था कि ज्यादातर लोग सो ही रहे थे और लाइट भी बंद थी।

कनिका की चुत एकदम साफ थी, लगता था कि उसने एक या दो दिन पहले ही वैक्स कराई है। उसके दाने को जैसे ही मैंने सहलाया उसकी कामुक सिसकारी निकल गई और साथ ही उसने अपनी टाँगें थोड़ी ओर फैला दी।

अब मैंने उसकी चुत में धीरे धीरे उंगली घुसाना शुरू किया। मुझे कोई खास दिक्कत नहीं आ रही थी उसकी चुत गुफा में घुसने की। अपनी उंगली मैं धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा। अब उसकी चुत काफी ज्यादा पनिया गई थी, वो भी काफी कोशिश कर रही थी कि मेरे लंड का पानी छुट जाए लेकिन कनिका को क्या मालूम था कि मैं एक जिगोलो हूँ और जिगोलो का पानी उसकी मर्जी से ही छूट सकता है।

जो भी हो, हम दोनों उस हसीन पल का आनन्द उठा रहे थे। अब कनिका का बदन ऐंठने लगा था, वो धीरे से कान में फुसफुसाई- और तेज़ करो।
मैंने अपने होंठों पर उंगली रख कर उसे चुप रहने का इशारा किया और अपने हाथ की स्पीड बढ़ा दी। कनिका के मुँह से धीरे धीरे उम्म्ह… अहह… हय… याह… की आवाजें आने लगी।

मैंने अपना दूसरा हाथ उसके होठों पर रखा और उसकी गुफा में अपने इंजन की रफ्तार बढ़ा दी। अब हमारी गाड़ी मंजिल पर पहुंचने के करीब ही थी।
कनिका ने बिना किसी की परवाह किये हुये मुझे अपने से कस के चिपका लिया और अचानक मेरी हथेली पर ऐसा लगा कि कोई अंडा फूट गया हो।
कनिका करीब दो मिनट तक मुझसे कस के चिपकी रही। कनिका की चुत से निकले हुए पानी को मैं अपने हाथों से उसकी चुत ओर जांघों पर धीरे धीरे मलता रहा।

अब कनिका के चेहरे पर सन्तुष्टि के भाव साफ दिखाई दे रहे थे लेकिन मेरा लंड गर्म पकोड़े की तरह फूल गया था।
ट्रेन जयपुर पहुँचने वाली थी इसलिए आंखों ही आंखों में एक दूसरे से अलग होने का इशारा करके हम अलग हो गए।

स्टेशन आने की वजह से अन्य यात्री भी अपना अपना सामान उठाने लग गए थे। हमने भी अपना सामान उठाया और बाहर आकर हमने टैक्सी की और कनिका के घर की तरफ चल दिये।

घर पहुँचते पहुँचते रात के दो बज गए थे, चाबी उसकी बेटी गमले के पीछे रख कर गई थी।
बहुत आलीशान फ्लैट था कनिका का!

वहाँ पहुँचते ही कनिका ने मुझे फ्रेश हो जाने के लिए कहा। बाथरूम में कई जोड़ी ब्रा और पेंटी टंगी हुई थी। अब वो कनिका की थी या उसकी बेटी की, इसका मुझे अंदाजा नहीं हुआ। लेकिन थी वो सारी ब्रांडेड और लेटेस्ट फैशन की।

गीज़र ऑन करके मैंने गर्म पानी से मुंह धोया फिर अपने लंड को भी धोया जो हल्का सा चिपचिपा हो गया था।

जब मैं बाहर आया तो कनिका भी दूसरे बाथरूम से फ्रेश होकर आ गई थी। उसने हल्के आसमानी रंग की टॉप और लाल रंग का लोअर पहना हुआ था। वो बहुत खुश लग रही थी।

चाय बनाते बनाते हम बात करने लगे। उसे जब मैंने बताया कि मैं एक जिगोलो हूँ तो वो बहुत खुश हुई।
मैं उसके पीछे खड़ा होकर उसके चूतड़ों पर हाथ फेरने लगा और साथ ही उसकी गर्दन और कान के अंदर अपनी जीभ फिरा रहा था।
कनिका ने पलट कर मुझे अपनी बाहों में भर लिया और मेरा साथ देने लगी। उसके गोलों के उभार मेरे सीने में गड़ रहे थे।
हम जल्दी ही अलग हुए और चाय पी।

कनिका बोली- चलो अब आराम करते हैं।
मुझे मालूम था कि वो कैसा आराम चाहती थी, उसकी चुत का कौवा काँव काँव कर रहा था।

अगले ही पल हम दोनों उसके मखमली बिस्तर में थे। अब हमें कोई डर नहीं था।

कनिका मेरे बिल्कुल करीब आ गई और मेरे बालों में अपनी उंगलियां फिराने लगी। उसका एक हाथ पैंट के ऊपर से मेरे लंड पर फिसलने लगा।
मैंने भी बिना देर किए उसका टॉप उतार दिया, उसकी चूचियाँ ब्रा में से पहले से आजाद थी। कनिका ने भी मेरी टीशर्ट और बनियान दोनों को जल्दी से मेरे बदन से अलग कर दिया।

मेरी छाती पर बहुत घने बाल हैं, यह देखकर कनिका ने कहा कि उसे छाती पर बाल बहुत पसंद हैं और फिर वो एक हाथ से मेरी छाती के बालों पर उंगलियां फिराने लगी।
इस बीच उसने मेरा पैंट और चड्डी भी उतार दी थी।
मैंने भी कनिका का लोअर उतार दिया।

अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे। कनिका की चुत के दर्शन अब हो रहे थे मुझे! उसकी गुलाबी चुत में एक कसावट थी, चुत का दाना उत्तेजना की वजह से थोड़ा बड़ा हो गया था।
शरीर की गर्मी से बाहर की सर्दी की माँ चुद चुकी थी।

कनिका अब मेरे ऊपर थी और मेरे होंठों से अपने होंठ उसने कस कर चिपका दिए, मैं भी उसका पूरा साथ दे रहा था, मैं अपने एक हाथ से उसकी चुत के कौवे को सहला रहा था और दूसरे हाथ से उसकी गांड को!
उसके नरम दूध मेरी छाती से चिपके हुए थे।

क्या गज़ब का किस कर रही थी वो मुझे! अपनी पूरी जीभ कभी मेरे मुंह में घुसा देती और कभी मेरी जीभ अपने मुँह में लेकर चूसती रहती।
पंद्रह मिनट तक हमारा किस का प्रोग्राम चलता रहा।

अब मैंने कनिका को सीधा लिटाया और उसकी नाभि से लेकर उसकी गर्दन तक अपनी जीभ फिराने लगा। उसके बदन में अजीब सी सिहरन उठने लगी।
मैं जानता हूँ कि औरत को सेक्स से ज्यादा मजा फोरप्ले में आता है। मैं उसके बदन के हर हिस्से को अपनी जीभ की नोक से सहला रहा था। उसकी एक एक उंगली को मैंने किस किया।

कनिका ने अब अपनी टांगें खोल दी और अपने हाथों से पकड़कर मेरा सिर अपनी चुत की तरफ धकेल रही थी। साफ था कि वो अपनी चुत मुझसे चटवाना चाहती थी।
मैंने भी उसका साथ दिया और उसकी चुत की फाँकों में अपनी जीभ फिराने लगा। मुझे उसकी चुत में जीभ घुसाने की कोई जल्दी नहीं थी। मैं चुत की फाँकों को ऊपर से ही चाटने लगा।

वो सिहर उठी। कनिका की कामुक आवाजों से कमरा गूंज रहा था- चाटो मेरे राजा… मेरी चुत की प्यास बुझा दो… बना लो आज अपनी रानी मुझे… आह आ आहा… घुसा दो चुत में अपनी जीभ अंदर तक… मैं तुम्हें खुश कर दूंगी… कब से मेरी चुत प्यासी है मेरे राजा… आज मेरी चुत का भोसड़ा बना दो।

मैंने भी अब धीरे धीरे उसकी चुत में अपनी जीभ अंदर करना शुरू किया और साथ ही दोनों हाथों से उसकी चुची दबाता जा रहा था। उसकी चुची जो पहले फूल की तरह मुलायम थी, अब कड़क हो गई थी।

मेरी जीभ उसकी चुत की गहराइयों में उतर चुकी थी, उसकी चुत से बहुत मादक खुशबू आ रही थी।
कनिका मेरा सिर जोर से अपनी चुत में दबाये जा रही थी, मैं भी कनिका की चुत को अपनी जीभ से चोदता जा रहा था।

थोड़ी देर बाद कनिका ने मेरा सिर पूरी ताकत से अपनी चुत में दबा लिया और अपनी टाँगों को भींच लिया। मैं समझ गया कि इसका काम होने वाला है।
कनिका का पूरा बदन अकड़ रहा था, उसने अपनी आंखें बंद कर लीं, एक झटका सा लगा और मेरी जीभ होंठ सब गाढ़े खारे पानी से तर बतर हो गए। मैंने चाट चाट कर सारा पानी चुत से साफ कर दिया।

कनिका बहुत खुश हुई।

अब मैं कनिका के बगल में आ गया था, वह बोली- प्रियम्, तुमने मुझे आज वो सुख दिया है जो मेरे पति मुझे कभी नहीं दे पाए। अब मेरी बारी है।
यह कहकर उसने मेरे लंड को चूमना चालू कर दिया। लंड को वो अपने दोनों होठों की दरारों में फिरा रही थी। साथ ही साथ मेरी गोलियों को भी चूस लेती थी।
वाकयी वो लंड चूसने में माहिर थी।

अब उसने मेरे सुपारे को चारों तरफ से जीभ से चाटना शुरू किया। मैं तो दूसरी दुनिया में पहुंच चुका था। अभी तक उसने मेरा लंड अपने मुँह के अंदर नहीं लिया था।

वो लंड को दस मिनट तक ऐसे ही चाटती रही। मैंने उसके बाल पकड़कर अपने लंड पर थोड़ा दबाया तो उसने मेरा इशारा समझते हुए पूरा लंड अपने मुंह में ले लिया।
पागल सा हो गया था मैं कनिका की इस अदा को देख कर! कुल्फी की तरह वो मेरे लंड को चूसे जा रही थी।

दस मिनट तक चूसने से मेरा लंड लाल पड़ गया था। पानी अभी तक नहीं छूट पाया था मेरा!

अब मैंने कनिका को खींच कर अपने बगल में बुला लिया, कनिका ने मुझसे पूछा- क्या बात है तुम्हें क्या मजा नहीं आया?
मैंने कहा- रानी तुमने मुझे जन्नत की सैर कराई है।
‘तो तुम्हारा पानी क्यूँ नहीं छूटा?’
मैंने कहा- मैं एक जिगोलो हूँ और मेरा पेशा यही है कि औरत का पानी छूट जाए पर मेरा पानी न छूटे!

उसने कहा- चलो लगी शर्त, मैं दिखाऊँगी तुम्हें तुम्हारा पानी छुड़ा कर! अगर मैं हारी या जीती दोनों सूरत में इनाम तुम्हें ही मिलेगा। मैंने कहा- मंजूर है।
मुझे तो मालूम ही था कि जीतना मुझे ही था।
अब हम दोनों तैयार थे चुदाई करने के लिए!

कनिका ने अपनी चुत और मेरे लंड को टॉवल से अच्छी तरफ से पोंछा, उसने अपनी चुत पूरी तरह से सुखा ली थी जिससे मेरा लंड उसकी चुत में टाइट जाए।
मैं उसकी चुत के आगे घुटने के बल बैठ गया और उसकी टाँगें अपने कंधों पर रख ली। एक बार अपने लंड को उसकी चुत की दरार में ऊपर से नीचे की तरफ फिराया तो कनिका कसमसा उठी।

कनिका को चुदने की ज्यादा जल्दी थी, उसने मेरा लंड अपने हाथों से पकड़कर अपने चुत के छेद पर रख दिया। मैंने भी एक जोर का झटका मारा और लंड पूरा एक ही बार में कनिका की चुत के अन्दर घुस गया।
उसकी चीख निकल गई- धीरे कर बहनचोद… मैं कहीं नहीं भागी जा रही! चोद ले आज जी भर के… बना दे मेरी चुत का चबूतरा… आह ह उह उह ह…..कई साल बाद मुझे लंड मिला है।
ना जाने वो क्या क्या कहे जा रही थी।

मैंने भी शुरू शुरू में धीरे धीरे झटके लगाए, जब कनिका की चुत थोड़ी गीली हो गई तो मैंने झटकों की रफ्तार बढ़ा दी। सच कहूँ तो मुझे लगा वास्तव में वो पति की मौत के बाद पहली बार चुद रही है।
मेरा लंड उसकी चुत की गहराइयों से भी पार जाकर उसकी बच्चेदानी से टकरा रहा था। हर झटके में कनिका की मीठी चीख निकल जाती थी।

आधे घंटे की जबरदस्त चुदाई में कनिका की चुत दो बार पानी छोड़ चुकी थी।
मैंने अब कनिका की टाँगों को नीचे रखा और उसकी चुत में लंड डाले हुए ही उसको खिसकाकर बेड के सिहराने तक लाया। मैं बेड के नीचे खड़ा हो गया और कनिका ने अपनी टाँगों का घेरा मेरी पीठ पर लगा लिया। मेरे दोनों हाथ अब कनिका के मुम्मों के ऊपर थे। मैं जानता था कि इस बार की चुदाई के बाद कनिका की चुत की आग काफी हद तक शांत हो जाएगी।

मेरे हर झटके में कनिका के मुंह से सिसकारी निकल रही थी- चोद ले साले अपनी रंडी बना ले मुझे… फाड़ दे मेरा भोसड़ा… क्या खाकर आया है बहनचोद… आह आह ह ह उम्म आह मार दिया।

इस आसन में भी उसकी चुत पानी छोड़ चुकी थी। कनिका की चुत फूल कर और ज्यादा गुलाबी हो गई थी।
‘मैं हार गई जान तू जीत गया… अब जिद मत कर, छुड़ा ले अपना पानी! भर दे मेरी चुत को अपने पानी से!’

मैंने कहा- ठीक है लेकिन मैं पानी चुत में नहीं तुम्हारे मुंह में निकालूंगा।
‘भोसड़ी के… पहले क्यूँ नहीं निकाला? मैं तो खुद प्यासी हूँ। ले बुझा दे मेरी प्यास!’

वो उठी और घुटने के बल बैठ कर मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी, बहुत तेजी से मेरे लंड को वो आगे पीछे कर रही थी।
अब मैंने भी फैसला कर लिया था कि इसे ओर न तड़पाया जाए।

यह सोचकर मैंने अपनी इच्छाशक्ति से अपना पानी उसके मुंह में छोड़ दिया। वो गपागप मेरा सारा पानी पी गई और चाट चाट कर मेरे लंड को साफ कर दिया।
अब वो उठी और मेरे गले से लिपट गई- तुमने मुझे मेरे जीवन का सबसे हसीन सुख दिया है। मैं बरसों से अपने शरीर की आग में जल रही थी। तुम सच में मास्टर हो चुदाई के!

अब हम दोनों ही थक चुके थे, हमने आराम करने का फैसला किया, दोनों बेड पर एक दूसरे से चिपक कर सो गए।
कनिका ने किसी छोटे बच्चे की तरह अपना सिर मेरी छाती में दुबका लिया। मुझे एहसास हुआ कि कनिका को सेक्स से ज्यादा अपनेपन की जरूरत है।

लेकिन मैं सेक्स के अलावा कुछ और किसी को नहीं दे सकता हूँ। मेरा काम ही ऐसा है कि मुझे भावनाओं में कभी नहीं बहना! यह मेरे और मेरे क्लाइंट दोनों के लिए नुकसानदायक है।

कनिका के बदन की गर्मी से में कब नींद के आगोश में आ गया पता ही नहीं चला।

सुबह दस बजे कनिका ने मुझे जगाया, बोली- आप फ्रेश हो लो, मैं चाय बना कर लाती हूँ।

मैंने कहा- मुझे एक बार और प्यार करना है!
उसने मुस्कुरा कर अपना हाथ मेरे लंड पर रख दिया।
मेरा लंड भी तैयार था कनिका को चोदने के लिए।

इस बार हमने सिंपल स्टाइल में चुदाई की, कनिका मेरे नीचे थी और मैं कनिका के ऊपर!
कनिका मुझे ऐसे प्यार कर रही थी जैसे मैं उसका पति हूँ।

इस बार की चुदाई बहुत मस्त रही। आधे घंटे की चुदाई के बाद मैंने अपना सारा माल कनिका की चुत में निकाल दिया। परम संतुष्टि के भाव उसके चेहरे पर दिखाई दे रहे थे, उसने मेरे माथे पर किस किया और बोली- चलो फ्रेश हो लो।

मुझे भी मामा के यहाँ जाना था, मैं उठा और बाथरूम में चला गया, वहाँ से सीधा नहा कर ही में बाहर निकला।

कनिका चाय ले आई थी, हम दोनों ने साथ चाय पी।
‘तो मि. जिगोलो कितनी फीस हुई तुम्हारी?’ यह कहती हुई कनिका मेरी गोद में आकर बैठ गई। उसने एक शार्ट स्कर्ट डाला हुआ था। स्कर्ट के अंदर कनिका ने पेंटी नहीं पहनी हुई थी। उसकी चुत की दरार ठीक मेरे खड़े हुए लंड के ऊपर थी।

कनिका ने अपनी जीभ मेरे मुंह के अंदर डाल दी थी, मैं भी बड़े चाव से उसकी जीभ चूस रहा था।
एक लंबी किस के बाद उसने फिर अपना सवाल दोहराया।

‘कनिका, इस बार कोई फीस नहीं है! हाँ अगली बार या अभी से अगर तुम मेरी सर्विस लेना चाहो तो तुम्हें मेरी फीस देनी होगी।’
कनिका ने कहा- ठीक है, मैं तुम्हें अभी से अगले दिन तक हॉयर कर रही हूँ।

मैंने भी रजामंदी दे दी लेकिन शर्त रखी कि दोपहर को दो बजे से लेकर शाम को सात बजे तक मैं मामा के यहाँ जाऊँगा।
वो इसके लिए राजी हो गई।

मित्रो, अब इसके आगे की कहानी बाद में लिखूंगा।
आप मुझे अपने सुझाव मुझे मेरी ईमेल पर भेंजें।
[email protected]

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