उसे चुत चुदाई से ज्यादा अपनेपन की जरूरत थी-1

(Use Chut Chudai Se Jyada Apnepan Ki Jarurat Thi- Part 1)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अन्तर्वासना पाठकों और पाठिकाओं को प्रियम दुबे के लंड का सादर नमस्कार!
दोस्तो, यह मेरे जीवन की एक सच्ची घटना है।

मामा के लड़के की सगाई थी और मुझे फंक्शन अटेंड करने जयपुर जाना था। मैं अक्सर जब भी ट्रेवल करता हूँ तो एसी क्लास में रिजर्वेशन नहीं कराता क्यूंकि वहाँ बैठे लोगों को एक दूसरे से कोई ज्यादा मतलब नहीं होता और सभी लोग अपने में ही मस्त रहते हैं। और साथ ही मैं हमेशा दो टिकट बुक कराता हूँ कि न जाने कब किसी अनजान हसीना से मुलाकात हो जाये और मैं अपनी सीट से उसकी चुत शेयर कर सकूँ।
जयपुर जाने के लिए भी मैंने सेकंड सिटिंग में दो टिकट बुक करा ली थीं।

टाइम पर स्टेशन पहुँच कर मैंने ट्रेन पकड़ ली। दिसम्बर का महीना था और सर्दी बहुत ज्यादा थी। अभी ट्रेन चले हुए एक मिनट ही हुआ था कि एक आकर्षक महिला मेरे पास आई और पूछा कि मेरे बगल वाली सीट खाली है क्या?
मेरी तो जैसे लॉटरी ही निकलने वाली थी, मैंने कुछ सोचने का नाटक किया और अपने बगल वाली सीट जो कि मेरी ही थी उस महिला को बैठने के लिए दे दी।
उसने मुझे शुक्रिया कहा और वो मेरे बगल में बैठ गई।

नोन ऐसी कोच होने के कारण खिड़की में से सर्द हवा आ रही थी। उस महिला ने शॉल ओढ़ा हुआ था। किसी वजह से जब उसने शॉल को एक मिनट के लिए हटाया तो मुझे उसके आकर्षक कामुक बदन का एहसास हुआ।
वाह! क्या बदन दिया था ऊपर वाले ने उसे! इतनी सर्दी के बावजूद उसका शाल के अंदर पहना हुआ स्लीवलेस ब्लाउज और नाभि के नीचे बंधी साड़ी मेरे सोये हुए लंड को खड़ा करने के लिए काफी था।
उसके लगभग 36 साइज के मुम्मे बिल्कुल तने हुए थे और गांड भी बाहर की ओर उभरी हुई थी।
बदन ऐसा था जैसे दूध में केसर मिला दिया हो।

शायद उसने मेरा अचानक से खड़ा हुआ लंड देख लिया था। एक हल्की सी मुस्कुराहट के साथ उसने शाल को वापस लपेट लिया था। मैंने भी सोच लिया था कि इसको चोदने की कुछ जुगाड़ करता हूँ।

बातचीत शुरू हुई तो पता चला कि उसके परिवार में सिर्फ वो और उसकी जवान बेटी है। पति का देहांत हुए 12 बरस हो चुके थे। बेटी एयर होस्टेस थी।
महिला जिसका नाम कनिका था वो यहाँ एक दिन पहले ही अपने किसी परिचित के यहाँ आई थी। अचानक फ्लाइट में डयूटी लगने के कारण उसकी बेटी को जॉब पर जाना पड़ गया। जिसकी वजह से कनिका को बिना रिजर्वेशन जयपुर जाना था।

अगला स्टेशन आने तक हम एक दूसरे के बारे में काफी कुछ जान चुके थे। महिला बहुत सम्पन्न परिवार से थी। जयपुर के पॉश एरिया में उसका 3 बैडरूम फ्लैट था।

मुझे सर्दी में ठिठुरता देख उसने मुझे अपनी शाल ओढ़ने के लिए दे दी। क्यूँकि एक ही शाल थी इसलिए हम दोनों ने शाल को ओढ़ लिया। उसके बदन की खुशबू मेरे बदन में सिहरन पैदा कर रही थी।

धीरे धीरे कब हम एक दूसरे के और करीब आ गए पता ही नहीं चला। एक दूसरे की सांसें हम दोनों महसूस कर रहे थे, हमारे हाथ एक दूसरे को टच कर रहे थे। सर्दी की वजह से एक दूसरे से चिपकना अच्छा लग रहा था। उसने अपनी आंखें बंद करके मेरे कंधे पर अपना सिर रख दिया।

अब कनिका का हाथ मेरे लंड के ऊपर तक आ चुका था। मेरा लंड तो पहले से ही सलामी दे रहा था, कनिका ने मेरे खड़े लंड का उभार महसूस किया और मेरे सुलगते लंड के ऊपर सहलाने लगी। वासना के लाल डोरे उसकी आँखों में साफ दिखाई दे रहे थे।
मैंने भी कोई विरोध नहीं किया, मेरी तरफ से हरी झंडी मिलते ही उसके मखमली हाथों ने मेरा आपरेशन चालू कर दिया।

हम दोनों ही एक दूसरे से कुछ भी नहीं बोल रहे थे।

धीरे धीरे उसने मेरे पैंट की चैन खोल कर मेरा लंड अपने हाथ में ले लिया और लंड के टोपे को ऊपर नीचे करने लगी।
मैं भी अपने हाथ से उसके नंगे पेट को सहलाने लगा। धीरे धीरे हाथों को मैंने उसकी चुची पर रख दिया, मुझे ऐसा लगा कि रूई का कोई गोला मेरे हाथ में आ गया है।
मुझे अच्छी तरह मालूम है कि औरत को अगर ठीक से गर्म कर दिया जाए तो वो अपनी चुत हथेली में रख कर परोस देती है।

अब मैंने भी देर न करते हुए उसके ब्लाउज के सारे हुक खोल दिये और उसकी चुची को प्यार से मसलने लगा। उसकी चुची तनी हुई थी। मैं एक एक करके उसकी चुची की घुंडियों को मसल रहा था। आग दोनों तरफ सुलग रही थी। मेरे लंड की गर्मी से वो बहुत उत्तेजित हो रही थी।

धीरे धीरे मेरा हाथ उसकी ऊंची घाटियों से होता हुआ गहराई की तरफ जाने लगा। मेरा हाथ उसकी चुत को छूने के लिए मचल रहा था। साड़ी के अंदर से काफी कोशिश करने के बाद भी जब मेरा हाथ अंदर नहीं गया तो कनिका ने अंगड़ाई लेते हुए अपनी वासना भरी नजरों से मुझे देखा और अपने हाई हील्स सैंडल्स उतार कर अपने दोनों पैर ऊपर कर लिए।

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