ट्रेन में फंसी पंजाबन कुड़ी -2

(Train Me Fansi Punban Kudi- Part 2)

मेरी सेक्सी देसी कहानी के पिछले भाग
ट्रेन में फंसी पंजाबन कुड़ी -1
में आपने पढ़ा:

मैंने उससे कहा- जान मैं टॉयलेट में जा रहा हूँ.. तुम भी वहाँ आ जाओ।

मैं डिब्बे के टॉयलेट में चला गया और उसका वेट करने लगा। मुझे आए हुए 5 मिनट हो चुके थे.. मगर वो नहीं आई.. मुझे लगा कि वो आएगी ही नहीं।
फिर मायूसी की सोच लिए जैसे ही मैंने टॉयलेट का गेट खोला.. तो उसे खड़ा पाया.. और जब तक में कुछ कहता या करता.. तब तक वो भी अन्दर आ चुकी थी।
वो अन्दर आकर मुझसे कहने लगी- मैं तुम्हारे गेट खोलने का ही इंतज़ार कर रही थी क्योंकि मुझे क्या पता था कि तुम दोनों में से किस टॉयलेट में हो।

अब आगे…

जैसे ही उसने बोलना बन्द किया.. मैंने फिर से अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए।

अब हम दोनों पर सेक्स का पूरा खुमार चढ़ चुका था। मैं अब धीरे-धीरे कपड़ों के ऊपर से ही उसके चूचे दबा रहा था और वो बस सिसकारियाँ ले रही थी।
उसके 36″ के चूचे बिल्कुल रुई की तरह बिल्कुल सॉफ्ट थे।

अब मैं उसकी सलवार का नाड़ा खींचकर खोल चुका था.. जिसके अन्दर मनप्रीत ने काले कलर की पैन्टी पहनी हुई थी.. जो चूत के ऊपर से बुल्कुल गीली हो चुकी थी।
उसका कहना था- ये ठीक नहीं है.. अब हम कुछ ज्यादा ही आगे बढ़ रहे हैं।
तो मैंने उसे समझाते हुए कहा- क्या तुम्हारे मन मैं? ये सब करने की नहीं थी.. बोलो?

अब बस वो बिल्कुल मौन सी खड़ी हो गई और अपना चेहरा नीचे झुका लिया। अब मैं भी समझ चुका था कि बस अब मनप्रीत भी पूरी तरह से तैयार है। मैंने उसकी सलवार नीचे खिसका दी और जल्दी से अपनी पैन्ट भी नीचे खिसका कर जैसे ही लंड बाहर निकाला.. तो उसकी लंड को देखकर एक हिचकी सी निकल गई, वो कहने लगी- ओह्ह बहुत बड़ा है.. नहीं मैं इसे अपनी चूत में नहीं ले सकती.. मेरी चूत अभी बहुत छोटी सी है।

अब मेरे काफ़ी समझाने के बाद वो मान भी गई।
मैंने उसके सिर्फ़ दाहिने पैर में से सलवार निकाल दी और धीरे-धीरे सहलाते हुए उसकी पैन्टी भी उतार दी।
अब मैं अपने खड़े लंड को मनप्रीत की चूत पर रगड़ने लगा और वो भी मस्ती में सिसक रही थी- आअहहाअ.. हहऊ उम्म्म्म.. आआअहहा.. उहह.. बस अब नहीं सहा जा रहा.. अब अन्दर डाल ही दो..

मैंने खड़े-खड़े ही लंड को चूत के छेद पर टिकाकर एक हल्का सा झटका लगाया.. लंड उसकी चूत में आधा घुस चुका.. तो वो दर्द के मारे मेरे कंधों को नोंचने लगी।
और अब बारी थी.. दूसरे झटके की.. जिसके लगते ही उसने मुझे कुछ इस तरह से नोंचा कि कंधों की खाल उसके नाखूनों में आ गई और मेरे कंधों पर से हल्का-हल्का खून भी आने लगा। मनप्रीत ने अपनी चीख को मुँह ही मुँह में दबा लिया.. मगर उसके नाखूनों की वजह से मेरी हल्की सी चीख ज़रूर निकल गई थी।

अब कुछ देर रुकने के बाद मैंने हल्के-हल्के झटके लगाने शुरू किए.. जिससे उसकी सिसकारियां फिर से शुरू हो गईं।

अब उसके मुँह से कुछ इस तरह की आवाज़ निकल रही थीं- आआघहाअ.. आआअरुऊँ.. बहुऊउउत्त्त मजाअ.. आअहह आआआज़हाअ आ रहा हहै.. और्र जोऔर से.. और तेज़ी से करोव.. आह्ह.. और तेज़्ज़्ज़्ज़..

अब हमें जरूरत थी पोज़ बदलने की मगर जगह छोटी होने के कारण ऐसा करना संभव नहीं था।

इतने में उसकी मम्मी की आवाज़ सुनाई पड़ी- मन्नू क्या तू अन्दर है?
तो मनप्रीत ने भी अपनी माँ को आवाज़ लगाई- हाँ माँ मैं अन्दर हूँ।
उसकी माँ कहने लगी- ठीक है.. तू बैग के पास पहुँच.. मैं भी अभी आती हूँ।

तभी सामने वाले टॉयलेट का दरवाजा खुलने और लगने की आवाज आई।

अब हमने जल्दी से अपने-अपने कपड़े पहने और बाहर निकल आए। हमारी चुदाई अधूरी रह गई…
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मनप्रीत सीट पर जाकर बैठ चुकी थी और मैं गेट के पास चला गया था और मनप्रीत की माँ ने आते ही पूछा- तू और अरुण दोनों ही यहाँ नहीं थे.. कहाँ है अरुण?
तो मन्नू ने जबाव दिया- मुझे पता नहीं माँ.. देखती हूँ कि कहाँ चला गया है।
अब वो जैसे ही मुझे ढूँढने के लिए चली तो चूत खुलने के बाद उसकी चाल बदल चुकी थी।

माँ ने पूछा- क्या हुआ.. ऐसे क्यों लंगड़ा रही है?
तो उसने जबाव दिया- कुछ नहीं माँ.. वो… टॉयलेट में फिसल गई थी।
मन्नू मेरे पास आ गई और कहने लगी- यार, अभी भी बहुत दर्द हो रहा है.. जिससे मेरी चाल भी बदल गई है..

अब हम दोनों बातें करते हुए अपनी सीट पर आ चुके थे। मैं और मन्नू दोनों ने एक प्लान किया कि हमारे पेपर का टाइम 1 बजे का है.. तो वहाँ पहुँच कर किसी होटल में हम रूम ले लेंगे और वहीं से पेपर देने के लिए भी साथ में ही निकलेंगे।

इसी तरह हमें बात करते हुए सुबह के 8 बज चुके थे और हम लखनऊ पहुँच गए थे।

फिर वहाँ से एक ऑटो किया.. जो हमें हमारे सेंटर तक ले गया। फिर हमने सेंटर के पास ही एक होटल में दो रूम बुक किए। पेपर होने के बाद अब हमारी रात की ही ट्रेन थी.. पर वो लेट होने के कारण अगले दिन सुबह आने वाली थी।
बस दोस्तों अब हमें चुदाई का एक मौका और मिल गया वो भी रात को..

माँ के सोने के बाद अब मन्नू मेरे रूम में आई और कहने लगी- अरुण आज की पूरी रात में तेरे पास ही हूँ.. जो भी करना है.. आज जी भर कर लो.. जिससे मुझे भी बहुत ख़ुशी मिले।

मेरे पूछने पर उसने यह भी बताया कि माँ बीच में नहीं जागती.. क्योंकि पापा के जाने का उन्हें कुछ ऐसा शाक लगा था कि वो अब नींद की गोलियाँ लेकर सोती हैं।

इतना कहते ही मैं उसके ऊपर कूद पड़ा और फिर कुछ ही देर में हम बिल्कुल नंगे हो गए।

अब मैंने मन्नू से लंड चूसने को कहा.. तो उसने साफ़ मना कर दिया।

मैंने भी कुछ ज्यादा ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं की और खुद ही 69 की पोज़िशन में उसके ऊपर आकर उसकी चूत चाटने लगा.. मगर वो मेरा लंड नहीं चूस रही थी।
अब वो भी चूत को अपनी गाण्ड उठा उठाकर चुसवा रही थी और कुछ ही देर में वो मेरा लौड़ा भी अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।
अब मैं और मन्नू दोनों ही जन्नत का मजा ले रहे थे।

कुछ ही देर में मन्नू बोली- चूत में बहुत तेज खुजली हो रही है.. तुम अपना लंड पेलकर मिटा दो।

मैंने लंड को उसकी चूत में पेलकर झटके लगाने शुरू कर दिए और उसने भी अपनी गाण्ड उठा-उठाकर मेरा पूरा साथ अपनी सिसकारियों के साथ दिया।
‘आआआगह.. उउउहह.. बहुत अच्छे.. और लगाओ.. हाँअहह.. बहुत मज़्ज़ाआ आ रहआ है..’

इस तरह हमारी चुदाई काफ़ी देर तक चली.. जिसमें वो इतनी गरम हो चुकी थी कि कई बार झड़ चुकी थी।
चुदाई के बाद हम दोनों निढाल होकर पड़े रहे।

उस रात मैंने मनप्रीत की पूरी रात में 3 बार चूत चोदी.. जिससे उसकी चूत अब पूरी तरह से सूज चुकी थी और मनप्रीत का कहना था- अब बस करो.. मेरी चूत में अब जलन होने लगी है.. अब मुझसे सहा नहीं जा रहा है.. बस करो..

दोस्तो, आज मैं आपको एक बात और बता दूँ.. मैं अपनी लाइफ में 4 लड़कियों को चोद चुका हूँ.. जिसमे तीन तो कुंवारी ही थीं.. मगर मुझे सबसे ज्यादा मज़ा मनप्रीत की चूत से ही मिला था।

कुछ ऐसी ही थी मेरी और मनप्रीत की कहानी। अब हम दोनों सिर्फ़ फोन पर ही बातें करते हैं और किसी भी तरह मिल कर महीने में दो बार चुदाई ज़रूर करते हैं।

दोस्तो, कैसी लगी मेरी देसी कहानी, प्लीज़ मुझे मेल करके ज़रूर बताना।
मुझे आपके ईमेल का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा। मेल आईडी लिखी है.. मेल जरूर जरूर करना..
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