शादी करने के चक्कर में-1

Shadi Karne Ke Chakkar mein-1
हैलो दोस्तो,

मेरा नाम रजत है और मैं गुड़गाँव में रहता हूँ।

मैं अन्तर्वासना का बडा प्रशंसक हूँ और काफ़ी सालों से इसकी कहनियाँ नियमित रूप से पढ़ता हूँ।

अन्तर्वासना को तहे दिल से धन्यवाद और बधाई देना चहता हूँ जिनके अथक प्रयास से इस देश में जाने कितने लोग अपने दिल की बात लाखों लोगो तक पहुँचा सकते हैं।

यह कहानी मेरी दोस्त मयूरी की है जो राजस्थान की रहने वाली है और जो एक बैंक में क्लर्क का काम करती है।

यह कहानी उसकी शादी के काण्ड की है जो मैं उसी की ज़ुबानी सुना रहा हूँ।

मैं मयूरी हूँ और मेरी उम्र 31 साल है…

अभी तक मेरी शादी नहीं हुई और मुझे इससे कोई खास परेशानी भी नहीं है।

देखने में मैं परी तो नहीं पर खासी अच्छी हूँ। मोटी नहीं हूँ पर भरे शरीर की गदराई जवानी है मेरी…

मुझे कहीं भी ज़मीन पर बिछा के मेरे ऊपर सोया जा सकता है, गद्दे की जरूरत नहीं होगी… चुदाई का पूरा ज़ुगाड़ हूँ मैं…

मेरे घर में मेरे अलावा मेरे 54 साल पापा सुरेन्द्र हैं जो एक होम्योपैथी डाक्टर है और 49 साल की मेरी मम्मी जिनका नाम सुषमा है…

मेरी मम्मी भी गर्म, मस्त और आकर्षक महिला हैं।

मेरा एक छोटा भाई है जो बैंगलोर में पढ़ाई करता है।

हमारा घर पुश्तैनी और खुले आँगन वाला दो मँज़िला मकान है।
ऊपर दो कमरे और नीचे दो कमरे और रसोई, नीचे के एक कमरे में मम्मी पापा सोते हैं और एक कमरे में पापा अपना प्रैक्टिस करते हैं।

ऊपर के एक कमरे में मैं रहती थी और एक भाई का कमरा था जो खाली था।

उन दिनों मेरी शादी की बात चल रही थी और घर पर अक्सर लड़के मुझे देखने आते थे…
कोई जयपुर से, कोई इन्दौर, नासिक, पटना, दिल्ली, भोपाल, इलाहाबाद, गुड़गाँव और ना जाने कितने शहरों से…

जो लड़के मुझे शादी के लिये देखने आते थे वो हमारे घर के ऊपर वाले हिस्से में रुकते थे।

रात को मैं ऊपर अपने कमरे में और लड़के भैया के कमरे में सोते थे।

कभी कभी कोई लड़का आता था जिसके साथ मैने पहले फ़ोन पर बात की होती थी या उसको जानती होती थी…

उनके साथ रात छत पर घूमने जाती थी और देर रात तक हम बात करते थे…

रात को बात करते करते लड़के अक्सर सेक्स की बात करते और मुझे चूमते और मेरा बदन सहलाते थे…

पूरी रात हम बातें करते और सोते नहीं और वो मुझे चूमते, चूसते और चाटते थे…
मेरे बदन से छेड़खानी करते और मैं भी उनके साथ मस्ती और शरारत करती…
वो मेरे फ़ूले हुए सीने और नर्म पेट को खूब मसलते और रगड़ते…
मेरे गले और होंठों को चूमते…
मेरी नाभि में जीभ, उँगली और कभी लण्ड से रगड़ा जाता!

कुछ लड़के तो वहशी हो जाते और चूचियों, पेट, कमर और पीठ को ऐसे काटते थे कि ब्रा और कमीज़ भी नहीं पहना जाता…
कुछ लड़के तो सलवार के ऊपर से ही चूतड़ों, जाँघ और बूर को काट के नीला कर देते थे…

एक दिन मस्ती करते करते एक लड़के ने तो मेरी सलवार और पैंटी फ़ाड़ कर मेरी बूर को मुँह में भर लिया और घण्टे भर चूसा और कई बार दाँत भी गड़ाए…
मेरी टीट को उँगली और मुँह से खूब रगड़ा…

मैं दर्द और मज़े से छटपटाने लगी और मेरी गाण्ड बिस्तर पर उछलने लगी…

उसने अपने उँगलियों से मेरी बूर चौड़ी की और चढ़ गया मेरे ऊपर…

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फ़िर सारी रात अलग अलग आसन में मेरी चूत मारी उसने और मेरी चूत का कबाड़ा कर दिया…

कोई-कोई लड़का मुझे चोदता तो नहीं पर मुझसे पूरी पूरी रात अपना लण्ड चुसवाता था…
मेरे मुख को ऐसे ठोकते थे जैसे मेरा इम्तिहान ले रहे हों।कि मैं शादी के बाद भी भरपूर मज़ा दूँगी या नहीं…

मुझे देखने आने वाले तकरीबन आधे से ज्यादा लड़कों ने मुझे चोदा और कुछ ने मेरी गाण्ड भी मारी…

बाद में कुछ ना कुछ बोल कर वो शादी के लिये मना कर देते थे…

लेकिन साले कुछ इतने हरामी थे कि शादी के लिये मना करने के बाद भी मुझसे रात को फ़ोन पर बात करते और फ़ोन सेक्स कर के अपना पानी निकालते थे।

जब मैं 22 साल की थी, तब से मुझे लड़के देखने आने लगे थे और आज़ मैं 30 साल की हूँ…
पिछले 8-9 सालों में मुझे करीब 50-60 लड़कों ने घर पर देखा।

बाहर से भी और अन्दर से भी, कुछ ने तो बहुत अन्दर तक देखा…

मेरी उम्र बढ़ती जा रही थी और मम्मी पापा को मेरी शादी की चिंता…

लेकिन मुझे इन सब में मज़ा आने लगा था…

रात लड़कों के साथ बिताना, उनसे अपना बदन मसलवाना मुझ में सनसनी फ़ैला देता…

ऐसा नहीं था कि घर से बाहर मैं नहीं चोदी जाती थी…
घर के बाहर भी मेरे काफ़ी चाहने वाले या कहें कि चोदने वाले थे पर अपने घर में रात को चोरी से चुदने की बात ही अलग थी…

नीचे मम्मी पापा का लण्ड ले रही होती या वो मस्त नींद ले रहे होते और ऊपर मैं मस्त लण्ड ले रही होती थी।

लेकिन धीरे धीरे मेरे लिये रिश्ते आने बंद हो गये…

मेरी उम्र भी हो गई थी और रिश्तेदारों ने भी समझ लिया था कि मुझमें कोई कमी है इसलिये अब कोई रिश्ता नहीं भेजता…

पापा ने तो हाथ खड़े कर लिये कि जब इसकी शादी होनी होगी तो हो जायेगी।
पर मम्मी ने हार नहीं मानी।

वो एक पण्डित को जानती थी जो शादी के रिश्ते लाता था…

उसको मम्मी ने बोला मेरी शादी के लिये…

उसने भी कुछ रिश्ते भेजे पर बात नहीं बनी।

पण्डित जब भी आता तो मम्मी उसकी बहुत खुशामद करती और खूब सेवा सत्कार करती!

एक दिन मैं ऑफ़िस से जल्दी घर आ गई तो देखा पण्डित आया हुआ था और मम्मी से बातें कर रहा था।

पण्डित- देखो सुषमा जी, आपकी बेटी की उम्र बहुत हो गई है और ऐसे में अच्छे लड़के मिलना बहुत मुश्किल है। अच्छे लड़कों को छोड़ता कौन है आज़ कल… तुरंत उनकी शादी हो जाती है।

मम्मी- पर पण्डित जी, मेरी बेटी भी तो खूबसूरत है और सरकारी नौकरी में भी है… फ़िर रिश्ते क्यों नहीं मिलते?

पण्डित मेरी माँ के पास जाकर उनसे सट के बैठ जाता है और उनके हाथों पर हाथ रख कर बोला- देखो सुषमा, तेरी बेटी की शादी एक समस्या है और मैं इसका समाधान करना चाहता हूँ, इसलिये मैं साफ़-साफ़ कहता हूँ कि तेरी बेटी की खूबसूरती और उसका क्लर्क होना ही मुसीबत है।

मम्मी- पर वो कैसे?

पण्डित- देख, लोग सोचते हैं कि ऐसी खूबसूरत क्लर्क को उसके ऊपर वालों ने छोड़ा होगा क्या… और 30-32 साल की लड़की बिना मर्द और शाररिक सुख के नहीं होगी।

कहानी जारी रहेगी।

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