रूबी की सील तोड़ दी-1

Rubi ki Seal Tod di-1
हाय दोस्तो, मैं समीर बरेली से हूँ।
आपको याद तो होगा आपने मेरी पहली कहानी पढ़ी ‘भाभी की नज़र’
बहुत दोस्तों के मेल आए बहुत अच्छा लगा, बहुत सारी लड़कियाँ मुझसे मिलना चाहती हैं और मैं बरेली की दो लड़कियों से मिला भी हूँ, पर उनकी कहानी बाद में लिखूँगा।

आज जो कहानी मैं आप लोगों को बताने जा रहा हूँ वो मेरी भाभी की बहन की कहानी है उसका नाम रूबी है।

रूबी की उम्र 20 साल है, वो इंटर में पढ़ती है। रूबी का रंग तो सांवला है लेकिन उसका जिस्म बहुत कामुक है, सबसे मस्त तो रूबी के दूध हैं जो गोल-गोल और छोटे से हैं।
उन्हें देख कर लगता है कि छोटी-छोटी मौस्समियाँ रखी हुई हैं जो भी देखे तो उसका मन करे कि इन मौस्समी का सारा रस निचोड़ ले।

उन दिनों रूबी मेरी भाभी के साथ रहने आई थी और जब रूबी वहाँ रहने लगी तो मैंने भी वहीं रहने का मन बना लिया।

मेरा मन रूबी को चोदने का करने लगा था कि बस एक बार रूबी को चोद लूँ, तो मज़ा आ जाए।
कभी-कभी रूबी की कमसिन गोलाईयों को देख कर मेरा मन ललचाने लगता था मेरा मन करता था कि रूबी को नंगी करके अपनी बाँहों में भर लूँ।
उसकी छोटी-छोटी कसी हुए चूचियों को मुँह में भर कर देर तक चूसता रहूँ और फिर उसे बिस्तर पर लिटा कर उसकी नन्ही सी चूत में अपना लण्ड घुसा कर खूब चोदूँ।

मैंने रूबी को चोदने की योजना बनानी शुरू कर दी। मैंने अन्तर्वासना की कुछ कहानियों का प्रिंट आउट लेकर उसकी किताब में रख दिया और रूबी पर नज़र रखने लगा।

रूबी जब अकेली होती तो उन कहानियों को पढ़ती तो उसकी साँसें गरम और तेज़ हो जाती थीं।

जब मैं उससे कहता कि क्या पढ़ रही हो देखूँ ज़रा तो वो छुपा लेती और कहती- मेरे नोट्स हैं।

मेरा मन रूबी को चोदने का बहुत करने लगा, हर वक्त मन में यही लगा रहता था कि रूबी को जल्दी से चोद लूँ लेकिन ऐसा मौक़ा नहीं मिल रहा था।

आख़िर एक दिन ऊपर वाले ने मेरी सुन ली।

मोहल्ले में थोड़ी दूर पर एक शादी थी, जिसमें भाभी और पूरे घर का दावत में न्यौता था और रूबी को बुखार था सो वो नहीं गई।

मुझे लगा कि रूबी को चोदने का यही सही मौक़ा है। मैंने भी भाई से मना कर दिया कि मैं शादी में नहीं जा रहा हूँ मेरे सर में दर्द है।

तो भाभी ने मेरे और रूबी के लिए खाना बना दिया और भाई ने मेरी और रूबी की दवाई ला दी।

शाम को सब शादी में चले गए, जाते समय भाभी ने कहा- वक्त से दोनों खाना खा लेना और फिर दवाई खा लेना और सो जाना और रूबी अगर तुझे डर लगे तो तू मेरे कमरे में सो जाना, वहीं मेरे ही कमरे में ही समीर का बिस्तर दूसरी चारपाई पर लगा देना और दोनों वहीं सो जाना।

भाई और भाभी दोनों चले गए और दरवाज़ा बाहर से बंद कर गए।

हम दोनों ने खाना खाया और मैं दूसरे कमरे में लेट गया, रूबी ने बर्तन रखे और वो भाभी के कमरे में लेट गई।

थोड़ी देर बाद रूबी आई और उसने कहा- मुझे अकेले डर लग रहा है।

तो मैंने अपना बिस्तर भाभी के कमरे में दूसरी चारपाई पर लगा लिया और लेट गया। मैं अपने मोबाइल में अन्तर्वासना की क़हानी पढ़ने लगा।

थोड़ी देर बाद जब मैं बाथरूम में जाने लगा तो रूबी से कहा- मैं बाथरूम जा रहा हूँ, डरना मत और मेरा मोबाइल मत उठाना।

मैं चला गया, थोड़ी देर बाद जब वापस आया तो चुपके से देखा कि रूबी मेरा मोबाइल देख रही है।

मैंने जानबूझ कर आवाज़ की, तो रूबी ने मेरा मोबाइल मेरे बिस्तर पर डाल दिया।

मैं आकर फिर से बिस्तर पर लेट गया, थोड़ी देर बाद मैंने रूबी से कहा- मेरे सर में दर्द हो रहा है, तू दबा दे।

रूबी मेरे बिस्तर पर आकर मेरा सर दबाने लगी, उसके गर्म हाथ मेरे माथे पर चल रहे थे और मेरे दिल की बेचैनी बढ़ा रहे थे।

थोड़ी देर बाद मैंने रूबी से कहा- आराम से बैठ जाओ और फिर रूबी आराम से दोनों टाँगें ऊपर करके बिस्तर पर बैठ गई।

थोड़ी देर बाद मैंने रूबी से पूछा- तुम मेरे मोबाइल में क्या देख रही थीं?

तो रूबी का मुँह लाल हो गया और बोली- कुछ नहीं।

फिर मैंने रूबी की रान पर हाथ रख दिया, तो रूबी ने कुछ नहीं कहा।

मैं रूबी की रानों को सहलाने लगा थोड़ी देर बाद रूबी की साँसें गरम और हल्की सी तेज़ हो गईं।

फिर मैंने रूबी के सर पर हाथ रखा और उसके सर को अपने चेहरे पर झुकाया, थोड़ा ना-नुकर के बाद रूबी का चेहरा मेरे चेहरे के पास आ गया।
उसकी गरम साँसें मेरे चेहरे से टकराने लगीं और फिर मैं रूबी के होंठ पर चुम्बन करने लगा।
फिर रूबी का हाथ मेरे सर पर चलने लगा और मैंने रूबी को पूरा अपने ऊपर लिटा लिया और अपनी बाँहों में कस लिया।

रूबी के दूध मेरे सीने में चुभने लगे, चुदाई का बुखार मेरे सर पर चढ़ कर बोलने लगा था।

अब मैंने चुम्बन के साथ-साथ रूबी के दूध सहलाना शुरू कर दिए थे।

रूबी की साँसें बहुत तेज़ हो गई थीं और रूबी मेरे सर और सीने को सहला रही थी।

मैंने रूबी की कमर में हाथ डाल कर अपने से और चिपका लिया और कहा- बस ऐसे ही सहलाती रहो बहुत आराम मिल रहा है।

मैं उसकी पीठ पर हाथ फेरने लगा। थोड़ी ही देर में मेरा पूरा जिस्म वासना की आग में जलने लगा, मेरा मन बेकाबू हो गया।

मैंने रूबी की बांह पकड़ कर उसे अपने नीचे कर लिया।

मैं उसके चेहरे को अपनी हथेलियों में लेकर उसके होंठों को चूमने लगा।

रूबी को मेरा यह प्यार शायद समझ में नहीं आया, वो कसमसा कर मुझसे अलग होते हुए बोली- नहीं समीर.. यह ग़लत है.. शादी से पहले ये सब करना गुनाह है।

मैंने कहा- रूबी मुझे आज मत रोको… मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ और तुझसे ही शादी करूँगा… आज मुझे मत रोको, आज मुझे जी भर कर प्यार करने दो। मैं आज तुमको हर तरह से प्यार करना चाहता हूँ, तुम्हारे हर एक अंग को चूमना चाहता हूँ… प्लीज़ आज मुझे मत रोको।

मैंने अनुरोध भरे स्वर में कहा तो रूबी ने कहा- लेकिन मैं तो अभी छोटी हूँ।

रूबी ने अपना डर जताया तो मैंने कहा- वह सब तुम मुझ पर छोड़ दो… मैं तुम्हें कोई तकलीफ़ नहीं होने दूँगा।

मैंने उसे भरोसा दिलाया तो रूबी कुछ देर गुमसुम सी लेटी रही।

मैंने पूछा- बोलो क्या कहती हो?

रूबी ने कहा- ये सब करके तुम मुझे छोड़ तो नहीं दोगे?

मैंने कहा- मैं तुझसे ही शादी करूँगा।

तो रूबी ने कहा- ठीक है समीर आप जो चाहे कीजिए.. मैं सिर्फ़ आपकी खुशी चाहती हूँ।

रूबी का चेहरा शर्म से लाल हो रहा था। रूबी की स्वीकृति मिलते ही मैंने उसके नाज़ुक बदन को अपनी बाँहों में भींच लिया और उसके पतले-पतले रसीले होंठों को चूसने लगा।
उसका विरोध समाप्त हो चुका था।

मैं अपने एक हाथ को उसके कपड़े के अन्दर डाल कर उसकी छोटी-छोटी चूचियों को हल्के-हल्के से सहलाने लगा, फिर उसके निप्पल को चुटकी में लेकर मसलने लगा।

थोड़ी ही देर में रूबी को भी मज़ा आने लगा और वो ‘सीईई आहह उफफफ्फ़… आहह… बहुत अच्छा लग रहा है…’ करने लगी।

रूबी की मस्ती को देख कर मेरा हौसला और बढ़ गया, हल्के विरोध के बावजूद मैंने रूबी का ऊपर का कुर्ता उतार दिया और उसकी एक चूची को ब्रा से बाहर निकाल कर मुँह में लेकर चूसने लगा।

दूसरी चूची को मैं हाथ में लेकर धीरे-धीरे मींज रहा था, रूबी को अब पूरा मज़ा आने लगा था।
वह धीरे-धीरे बुदबुदाने लगी- ओह… आहहाहह समीर.. मज़ा आ रहा है… और ज़ोर-ज़ोर से मेरी चूची को चूसो…

मैंने उसके निप्पल तो हल्के से काटा तो रूबी मादक आवाज़ में बोली- ऊहह जानू… तुमने ये क्या कर दिया..? रूबी को पूरी तरह से मस्त होते देख कर मेरा हौसला बढ़ गया।

मैंने कहा- रूबी मेरी जान… मज़ा आ रहा है ना?

‘हाँ जान.. बहुत मज़ा आ रहा है।’ रूबी ने मस्ती में कहा।

रूबी को पूरी तरह मस्त देख कर मैंने उसका हाथ अपने लौड़े पर रख दिया और कहा- अब तुम मेरा लण्ड मुँह में लेकर चूसो और ज़्यादा मज़ा आएगा।

पहले तो रूबी ने मना किया लेकिन मेरे ज़्यादा ज़ोर देने पर वो मान गई।

वो मेरे लण्ड को मुँह में लेने के लिए अपनी गर्दन को झुकाने लगी।

तो मैंने उसकी बांह पकड़ कर उसे इस तरह लिटा दिया कि उसका चेहरा मेरे लण्ड के पास और उसके चूतड़ मेरे चेहरे की तरफ हो गए।

वो मेरे लण्ड को मुँह में लेकर आईसक्रीम की तरह मज़े से चूसने लगी। मेरे पूरे शरीर में हाई-वोल्टेज का करंट दौड़ने लगा।

मैं मस्ती में बड़बड़ाने लगा- आहह जानू… शाबाश… बहुत अच्छा चूस रही हो… और अन्दर लेकर चूसो..

रूबी और तेज़ी से लण्ड को मुँह के अन्दर-बाहर करने लगी, मैं मस्ती में पागल होने लगा।

मैंने उसकी सलवार और चड्डी दोनों को एक साथ खींच कर टाँगों से बाहर निकाल कर पूरी तरह नंगी कर दिया और फिर उसकी टाँगों को फैला कर उसकी चूत को देखने लगा।

वाह… क्या गुलाबी चूत थी… बिल्कुल मक्खन की तरह चिकनी और मुलायम और बिल्कुल साफ चिकनी-चमेली थी। ऐसा लग रहा था कि आज या कल में ही साफ़ की हुई है।

मैंने रूबी से पूछा तो उसने बताया कल शाम को ही बनाई थी।

मैंने अपना चेहरा उसकी जाँघों के बीच घुसा दिया और उसकी चूत पर अपनी जीभ फेरने लगा।
चूत पर मेरी जीभ की रगड़ से रूबी का शरीर गनगना गया, उसका जिस्म मस्ती में काँपने लगा।

वह बोल उठी- हाय… ये आप क्या कर रहे हैं… मेरी चूत क्यों चाट रहे हैं… आहह… मैं पागल हो जाऊँगी… ओह.. हाय… मुझे ये क्या हो रहा है…

रूबी मस्ती में अपनी कमर को ज़ोर-ज़ोर से आगे-पीछे करते हुए मेरे लण्ड को चूस रही थी।

उसके मुँह से थूक निकल कर मेरी जाँघों को गीला कर रहा था।

मैंने भी चाट-चाट कर उसकी चूत को थूक से तर कर दिया। करीब दस मिनट तक हम ऐसे ही एक-दूसरे को चूसते-चाटते रहे, हम लोगों का पूरा बदन पसीने से भीग चुका था।

अब मुझसे सहा नहीं जा रहा था, मैंने कहा- अब और बर्दाश्त नहीं होता… तू सीधी होकर अपनी टाँगें फैला कर लेट जा.. अब मैं तुम्हारी चूत में लण्ड घुसा कर तुम्हें प्यार करना चाहता हूँ।

मेरी इस बात को सुन कर रूबी डर गई, उसने अपनी टाँगें सिकोड़ कर अपनी बुर को छुपा लिया।

क्या मैं रूबी की चुदाई कर पाया? इसका रस आपको अगले भाग में मिलेगा, अन्तर्वासना से जुड़े रहिए।
कहानी अगले भाग में समाप्य।
मुझसे अपने विचारों को साझा करने के लिए लिखें।

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