रेलगाड़ी में मिली भाभी की चूत

(Railgadi Me Mili Bhabhi Ki Chut)

नमस्कार दोस्तो, मैं बैड मैन!
आप सभी ने मेरी पिछली कहानियों की सराहना की, धन्यवाद.
मेरी पिछली कहानी थी: अन्तर्वासना ने मिलाया भाभी से
आज मैं आपको अपनी एक ऐसी कहानी बारे में बता रहा हूं जो आज से लगभग 5-6 साल पहले मेरे साथ घटी थी।

मैंने नई-नई बैंक जॉब ज्वाइन करी थी और ट्रेनिंग लेकर कोलकाता से वापस आ रहा था। शालीमार से चलकर कुर्ला तक जाने वाली ट्रेन थी. मेरा फर्स्ट एसी में रिजर्वेशन था, 2 बर्थ का केबिन था, जो कोलकाता से खाली चल रहा था.

टीटी आया तो उससे मैंने पूछा.
उसने कहा- टाटानगर से कोई लेडी चढ़ने वाली है।

मैं भी निश्चिंत होकर मूवी देखने लग गया. मैंने सोचा कि जब आएगी तब देखा जाएगा कि क्या होता है।

टाटानगर आया. मैंने खाना नहीं खाया था तो खाना खाने के लिए नीचे उतर गया. इसी बीच वो लेडी कूपे में आकर बैठ गई और मैं बिना खाना खाए ट्रेन में आकर बैठ गया क्योंकि ट्रेन चलने लगी थी.
मैं जैसे ही कूपे के अंदर घुसा, सामने उस लड़की को देखकर, उसे मैं लेडी नहीं कहूंगा क्योंकि वह 25-26 साल की खूबसूरत लड़की ही थी. लगता था जैसे भगवान ने बड़े प्यार से बहुत ही समय देकर उसके एक एक अंग को तराशा हो.
ऐसा लग रहा था जैसे कोई आसमान से परी उतर कर मेरे साथ उस कूपे में बैठ गई है।

उसकी काली आंखें, तीखी नाक … मुस्कुराती थी तो ऐसा लग रहा था जैसे होंठों से फूल झड़ रहे हों.
मैंने उसका अभिवादन किया और कूपे का दरवाजा बंद करने का आग्रह किया. उसने बिना किसी संकोच हामी भर दी।

फिर हम दोनों ने खाना खाया. चूंकि मेरे पास तो कुछ था नहीं, उसने ही मुझे खाना आफर किया।

माफी चाहूंगा मैं उसका नाम बताना भूल गया, उसका नाम पूर्णिमा था, 32-30-36 का फिगर था, रंग गोरा काले लंबे बाल, और गहरे गुलाबी कलर के कुर्ते से साथ जामुनी सलवार और दुपट्टा ली हुई थी।
वो टाटा से अपने ससुराल मुम्बई जा रही थी और मैं रायपुर तक जा रहा था।

लगभग 11 बज रहे थे, मैं मूवी देखने लगा वो भी मेरे साथ मूवी देखने लगी, हम दोनों ऐसे बैठ गए थे जैसे पति पत्नी हों.
मैंने पूर्णिमा से कहा- मुझे कपड़े पहन के नींद नहीं आती, कपड़े बदल के आता हूं.

तो उसने कहा- कहाँ जाएंगे, लाइट बन्द कर के यहीं बदल लीजिए।
मैंने भी कहा- ठीक है!
और कपड़े उतार के सिर्फ बरमूडा पहन लिया।

चूंकि वो इतनी हॉट थी मेरा लन्ड बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था, और नाईट बल्ब की हल्की रोशनी में शायद उसे एहसास हो गया था. मैंने बनियान भी नहीं पहना था जानबूझ कर, ताकि वो मेरी छाती देख कर थोड़ी तो बहके।

और वो असर हुआ, उसने कहा- मुझे भी चेंज करना है!
तो मैंने कहा- चेंज क्या करना है, मेरी तरह उतार कर बैठ जाओ, हम दोनों के अलावा कौन आने वाला है।

तभी अचानक दरवाजा बजा, मैंने खोला तो टीटी था.
उसने टिकट चेक किया और मुझे ‘गुड नाईट सर’ बोल कर चला गया.

मैंने डीएनडी का लोगो लगाया और दरवाजा बंद कर के पूर्णिमा से बोला- लो अब तो टीटी भी चला गया, अब तो कोई नहीं आने वाला!
उसने मुझे गुस्से से देखा. फिर अचानक से मेरे लन्ड को दबा कर बोली- देखो यार, तुम मुझे चोदना चाहते हो; ये तो मुझे समझ में आ रहा है. पर क्या तुम जानते हो कि मुझे भी तुमसे चुदवाने का मन है?
मैंने पूछा- कैसे? क्या बात कर रही हो?

वो बोली- जैसे ही तुम कूपे में आए थे, मुझे लगा आज मेरी आग शांत हो जाएगी. 3 महीने से मायके में हूं और मेरी चूत तड़प रही है. इनको छुट्टी नहीं मिल रही कि मुझे आ कर ले जायें. मजबूरन अकेले सफर करना पड़ रहा है।

मैं बोला- कोई बात नहीं! अकेले नहीं आज हम दोनों सफर करेंगे!
बोल कर मैंने बरमूडा से अपना लन्ड निकाल कर पूर्णिमा के हाथ में दे दिया और बोला- हिला और चूस!
इतना बोल कर मैंने उसकी कुर्ती को उतार दिया.

अब वो लाल रंग की ब्रा में मस्त माल दिख रही थी और मेरे लन्ड को बड़े प्यार से मुंह में लेकर वो मस्त आइसक्रीम जैसे चूस रही थी और मैं उसके दूध दबाने की नाकाम कोशिश कर रहा था. पर वो कहाँ मानने वाली थी! 3 महीने से बिना चुदी शादी शुदा औरत को जब लन्ड मिल जाए तो वो खा जाने वाली होती है।

उसने मेरा माल निकल जाने तक चूसा और पूरा माल पी गयी। फिर पूरा लन्ड चाट कर साफ कर के बोली- मज़ा आ गया! आज 3 महीने बाद लौड़े का रस पीने को मिला है.
बोलते बोलते भाभी खुद मेरी गोद में बैठ गयी.

मैं उसके होंठ चूसने लगा और ब्रा में हाथ डाल कर उसके दूध मसलने लगा. उसके कान के पीछे किस करके चाटने लगा. तो वो एकदम से कामुक हो गयी और फिर से मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर मसलने लगी.

फिर मैं उसकी सलवार में हाथ डाल कर भाभी की चूत में उंगली करने लगा. तो उसने पैर फैला कर हाथ को जगह दे दी. अब वो मेरे गोद में थी, और हम दोनों किस कर रहे थे, मेरा एक हाथ उसकी चूत मसल रहा था तो दूसरा उसके ब्रा खोलने में लगा था.

ब्रा खोल कर उसके भूरे निप्पल को मसलने लगा औऱ दूध को जोर जोर से दबना शुरू कर दिया.

Bhabhi Ki Chut
Bhabhi Ki Chut

15 मिनट के खेल के बाद पूर्णिमा खुद पूरी नंगी हो गयी, बोली- मेरी चूत चाट! कुछ तो राहत मिले!
बोल कर बर्थ में पैर फैला कर बैठ गयी.

पूर्णिमा भाभी की चूत में जरा जरा से बाल थे जो उसकी चूत को और आकर्षक बना रहे थे.
मैंने जैसे ही चूत में जीभ लगायी, वो एकदम से सिहर उठी. मैं उसकी चूत चाटने लगा, उसके भगनासे को चाटता, कभी उसकी चूत में जीभ डालता. इन सब से वो और उत्तेजित हो कर अपने दूध खुद मसलने लगती.

औऱ फिर भाभी की चूत ने रस छोड़ दिया.
उससे मैंने पूछा- ये क्या?
तो बोली- जब मैं तुम्हारा लन्ड चूस रही थी, तब से अपना लावा रोक रखा था कि तुम्हारे मुँह में छोडूंगी.

फिर मैं उसको बर्थ में लेटा कर फिर से उसके दूध मसलने लगा. वो और कामुक होकर मेरे लन्ड को दबाने लगी औऱ चोदने को बोलने लगी।
पर मैं उसके गोरे दूध को लाल करने में लगा था।

फिर उसके दूध पीते हुए मैं उसकी चूत में उंगली डाल कर अंदर बाहर करने लगा और वो तड़पने लगी।
औऱ फिर से भाभी की चूत ने पानी छोड़ दिया, जिसको मैंने पूरा चाट कर साफ कर दिया. और अब पूर्णिमा चुदने के लिए पूरी तरह तैयार थी.

मैंने उसके दोनों पैर अपने कंधों पर रखे और लन्ड को चूत के अंदर प्रवेश देने लगा. वैसे तो वो पूरी चुदी हुई लड़की थी, पर 3 महीने से न चुदने के कारण उसकी चूत टाइट हो गयी थी.

और मेरा लन्ड जैसे ही उसकी कसी चूत के अंदर गया, वो चिल्ला उठी- आराम से करो … अभी ताजी चूत है, ठीक से चुदी भी नहीं है.
मैंने पूछा- क्यों, सुहागरात नहीं मनाई क्या?
तो वो बोली- उनका ठीक से खड़ा नहीं होता तो बड़ी मुश्किल से अंदर जाता है. और 5-7 झटके में लटक जाते हैं. सास बच्चे की जिद में लगी है, अब उनको कैसे समझाऊं? अगर आज तुम ठीक से करे तो शायद मेरी जिंदगी संवर जाएगी।

अब मेरी विचार धारा बिल्कुल बदल गयी थी, 12:30 बज रहे थे और मुझे कम से कम 3 गेम करना था।

मैंने लन्ड को थोड़ा गीला किया औऱ आराम से डालने लगा. लंड जैसे ही आधा गया तो भाभी की चूत से खून आने लगा तो वो बोली- सही मायनों में आज मेरी चुदाई हुई है.

फिर मैंने पूरी ताकत से दूसरा झटका मारा और लन्ड अंदर तक चला गया. उसकी सांसें गहरी होकर गले में अटक गई थी और मुझे जोर से पकड़ कर नाखून गड़ा दिए थे।
मैं उसके ऊपर चढ़े चढ़े उसको सहला रहा था.

10 मिनट बाद जब वो नार्मल हुई तो मैंने चुदाई चालू की और 15 मिनट बाद पूरा माल भाभी की चूत में डाल कर उसके ऊपर लेट गया।

फिर वो मुझे हटने के लिए बोली.

उसने बताया- आज से पहले मुझे चुदने का सही मज़ा नहीं पता था. आज चुदाई का सही मतलब जाना है मैंने!
यह बोलते हुए वो फिर मेरा लन्ड चाटने लगी और खड़ा करने लगी।
पूर्णिमा बोली- आज रात भर मेरी चुदाई करो।

थोड़ी देर में मेरा लंड फिर खड़ा हो गया तो मैंने फिर उसे घोड़ी बनाया और पीछे से भाभी की चूत में डाल कर उसकी चुदाई करने लगा. बीचबीच में उसके गांड में थप्पड़ मार कर उसकी चीख सुनने का मज़ा आता था. औऱ मैं उसकी गांड में उंगली कर के उसको ज्यादा उत्तेजित कर रहा था.

जब मैं थक जाता तो वो गांड हिलाती और वो थकती तो मैं अपनी कमर हिला रहा था.

करीब 20 मिनट बाद मेरा निकलने को हुआ तो मैं पूरा माल उसकी चूत में भर कर बर्थ में उसके ऊपर लेट गया।

उस रात हम लोगों ने 2 बार और चुदाई की और हर बार मैं उसकी चूत भरता रहा।

सुबह करीब 7 बजे रायपुर आने वाला था, हम दोनों कपड़े पहन कर सलीके से हुए, फिर दोनों ने मोबाइल नम्बर बदली किए और एक दूसरे को गले लगा कर बैठ गए.

उसकी निगाहें मुझे जाने के लिए मना कर रही थी, पर बिछड़ना तो पड़ता ही है।
मैं रायपुर में उतर गया.

डेढ़ महीने बाद उसने मुझे खुशखबरी दी कि वो माँ बनने वाली है.
और उसने मुझे बहुत बार धन्यवाद बोला।

उसके बच्चा होने के बाद कुछ महीनों तक बात चलती रही फिर अचानक से उसके मैसेज और फ़ोन आने बंद हो गए, शायद मोबाइल गुम गया हो या जो भी रहा हो, आज भी वो मेरे दिल में बसी है।

दोस्तो, कहानी कैसी लगी, आप मुझे मेल पर या हैंगआउट में भी मैसेज कर सकते हैं
ईमेल : [email protected]

What did you think of this story??

Comments

Scroll To Top