परोपकारी बीवी-3

(Propkari Biwi-3)

This story is part of a series:

जवाहर जैन
मुझे लगा कि स्नेहा अब गम्भीर हो गई है, तो मैंने उसकी दोनो बाजूओं को पकड़ा और सामने बैठक में ही सोफे पर बैठाया और बोला- मेरी प्यारी स्नेहा कितनी भोली है। अरे सिर्फ़ आज एक रात की ही तो बात हैं कल से फिर हम दोनो ही होंगे तुम मुझसे जितना कहोगी उतना चोदूंगा, और जैसा कहोगी वैसा करूंगा,पर आज तुम्हारी इस जिद के कारण उस अलका को बहुत ठेस लगेगी। उसने तुम्हारे बोलने के कारण ही आज अपनी चूत चुदवाने की तैयारी की है। अब नहीं चुदेगी तो मन में तुम्हें गाली देगी ना !

मेरे समझाने पर वह अलका के घर उसे बताने गई और थोड़ी ही देर में वापस आकर बोली- चलिए।

मैं स्नेहा का दिल रखने के लिए उससे लिपटा और फिर बाहर निकल गया। स्नेहा मुझे उनके घर में अंदर घुसते तक देखती रही।

वहाँ अलका मुझे सामने बैठक में ही मिली। वह गाउन पहने थी।

मैंने औपचारिकतावश पूछा- कैसी हैं आप?
वह बोली- अभी तक दुखी थी, आप आए हो तब से थोड़ा चैन मिला है।
मैंने कहा- आप अभी-अभी नहाई हैं क्या?
उसने कहा- हाँ आप मुझे चोदेंगे ना इसलिए नहाई हूँ।

उसके मुख से ऐसी बेबाक भाषा सुन कर मैं चकित रह गया।
मैं बोला- तो चलिए फिर।

अलका मुझे लेकर अपने कमरे में आ गई। मैंने देखा कि बिस्तर पर आज उसने नई चादर बिछाई थी। वह फिर बाहर गई, और मुख्य दरवाजा बंद करके आई।

अब कमरे में आते ही मैंने उसे बाहों में पकड़ा और बोला- इतनी प्यारी महिला की मैसीजी को कदर नहीं हैं।
वह बोली- उस मादरचोद को शराब पीने और जुआ खेलने से फुरसत नहीं है।
मैं और कुछ बोलता, तभी वह बोली- छोड़ो उसको, मुझे चोदो।

अलका के मुँह से गाली और इतनी खुली बातें मैं पहली बार सुन रहा था, इसलिए थोड़ा अजीब सा पर अच्छा लगा। अब मैंने चुप होकर उसके होठों पर अपने होंठ रख दिए, पहले नीचे फिर ऊपर के होंठ की लंबी चुम्मी ली, फिर जीभ को उसके मुँह में डालकर घुमाया।

मैंने महसूस किया कि अलका गरम हो गई है पर उसका ध्यान मेरे लौड़े पर ही लगा है। उसके हाथ मेरे पजामे के ऊपर से ही लंड को मसलने लगे, फिर थोड़ी ही देर में वह अन्दर हाथ डालने लगी।

तब मुझे लगा कि मैं ही देर कर रहा हूँ तो मैंने उसके गाउन को ऊपर उठाकर सिर से बाहर निकालकर नीचे जमीन पर डाल दिया। अंदर उसने कुछ नहीं पहना था, ना ब्रा ना ही पैन्टी।

नंगी होने के बाद उसने मेरी शर्ट व पजामे को उतार दिया। इसके बाद मेरे तने हुए लंड को हाथ में पकड़कर बोली- आपका लंड मेरे पप्पू के लौड़े से बडा है।

मैं बोला- उनकी बात छोड़ो, उन्होंने तो आपकी इस प्यारी सी चूत की कदर नहीं की।

यह बोलते हुए मैं झुका और उसकी चूत को चाटने लगा। वहाँ खड़े होकर चूत चाटना हमारे लिए असहज हो रहा था, इसलिए अलका ने मेरे सिर पर हाथ रखा और मुझे बिस्तर पर ले आई। बिस्तर पर मैंने उसकी चूत की ऊपरी फली को जीभ से हिलाकर चाटा फिर चूत के छेद को बाहर से चाटने के बाद जीभ को छेद में डाल दिया।

उसकी चूत पानी छोड़ने लगी। इस समय अलका के मुंह से अजीब सी सैक्सी आवाजें निकल रही, यह आवाज सुनकर मैं और भी गरमा गया था। अब मैं ऊपर हुआ और अलका के होंठ को चूसने लगा। इधर अलका के हाथों ने मेरे लौड़े को पकड़ा और अपनी चूत में लगाकर अपने हाथों को मेरे पुट्ठे पर रखकर दबाया, खुद कमर को ऊपर उछाला तो इससे मेरा लंड उसकी चूत में घुस गया। अब वह लंड को और अंदर करने के लिए उछलने लगी। उसकी बेताबी देख मैं भी शाट लगाने लगा। पर थोड़ी ही देर में उसने मुझको जोर से भींचकर फिर ढीला छोड़ दिया। मैं समझ गया कि यह झड़ गई है इसलिए मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ाई और अपना माल अंदर ही छोड़ दिया।

अब अलका के चेहरे पर थकान और संतुष्टि के भाव थे।
मैंने पूछा- तुम्हें ज्यादा मेहनत करनी पड़ी ना? थक गई हो।
अलका मुझसे चिपकते हुए बोली- ऐसी थकान का मुझे कब से इंतजार था जवाहर। सही में मैं कहाँ गलत आदमी के हाथों में पड़ गई, उसने मादरचोद ने सिर्फ़ अपना सुख देखा है, मेरी जरूरतों को कभी नहीं समझा।
मैं बोला- चलो अब तो संतुष्ट हो ना?

वह बोली- हाँ, अब मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, पर अब मुझे ऐसा सुख देते रहना।

मैंने हां बोलकर उसे और चिपका लिया। अलका मुझसे छूटकर पूछने लगी- अपना काम निकालने के चक्कर मैंने आप पर ध्यान ही नहीं दिया। आपका गिरा या नहीं?
मैं बोला- हाँ गिरा ना !

अलका बोली- आपके गुड्डू को तो मैंने प्यार ही नहीं किया, क्या करूँ, उस समय इसे अपनी चूत में जल्दी से लेने के चक्कर में मैं इसे प्यार करना भूल गई थी।

मैं समझ गया कि अलका को अभी और चुदना है इसलिए वह अभी झड़कर सुस्त पड़े मेरे लंड को फिर से तैयार कर रही है।

अलका मेरी जांघों पर आई और मेरे लंड को अपने मुँह में पूरा डालकर चूसने लगी। लंड फिर तनने लगा, तनकर लंड का निचला पूरा हिस्सा अलका के मुंह से बाहर आ गया। अब वह मेरे तने लौड़े के सुपारे को ही मुंह में रखकर उसमें जीभ मारने लगी। कुछ ही देर में उसने लौड़े को छोड़कर मेरे मुँह से अपना मुँह चिपका दिया और मेरे ऊपर चढ़कर मुझे चोदने की तैयारी करने लगी, अपनी दोनों जांघों को फैलाकर चूत को मेरे लंड के पास लाई व चूत के छेद में लंड घुसेड़कर उछलने लगी।

लंड के चूत में घुसते ही मैंने भी नीचे से उछाल भर कर उसकी चूत को शांत करने में सहयोग देना शुरू किया। उसकी सैक्सी आवाजों ने मुझमें और जोश भरा। ऊपर से अलका व नीचे से मैं फुल स्पीड में एक-दूसरे के भीतर घुसने का प्रयास करते रहे।

इसी दौरान पहले मेरा गिरा, और कुछ ही देर में उसका भी हो गया। अलका काफी देर तक मेरे ऊपर ही पड़ी रही। मैंने भी उसे डिस्टर्ब नहीं किया।

थोडी देर में वह बोली- जवाहर तुम कल भी आओगे ना?
मैं बोला- इस बारे में तुम स्नेहा को बोलना, वही मुझे यहाँ भेजेगी।

अलका बोली- वह तुम्हें नहीं आने देगी। उसने मुझसे पहले ही कमिटमेंट ले लिया हैं कि मैं तुम्हारे साथ केवल एक बार ही सैक्स करूंगी। अब तुम्हारे ऊपर हैं कि तुम मुझे साथ देना चाहते हो या नहीं। बोलो न जवाहर, तुम मुझे दोबारा चोदोगे या नहीं?

मैं अलका को चोदना चाहता था पर स्नेहा को नाराज करके नहीं, मैंने अलका को कहा- अभी तुम मुझसे एक बार और चुदवाने के लिए स्नेहा को पटा लो फिर मैं आगे के लिए जमा लूँगा।

अलका बोली- अगर वो नहीं मानी तो तुम मुझे नहीं चोदोगे?

मैं बोला- अरे अभी कल के लिए तो तुम जुगाड़ लगाओ, फिर उसके आगे का मैं जमाता हूँ।

मेरी ऐसी ही बातों से अलका कल एक दिन और मेरे साथ चुदाई का मौका देने के लिए स्नेहा को मनाने को राजी हुई। इसके बाद हम लोग फिर चुदाई में लगे। अलका ने इस रात मुझसे चार बार चुदाई की। वहाँ लेटे-लेटे ही मैंने घड़ी देखी तो सुबह के तीन बज रहे थे। मैंने अलका से कहा- अब मैं अपने घर जाकर सोता हूँ, नहीं तो अब नींद आ गई तो मुश्किल हो जाएगी।

अलका एक बार फिर मुझे ऊपर से नीचे तक चूमी-चाटी व कल फिर मिलने की बात कहकर हट गई।

अब मैं भी खड़ा हुआ और अपने कपड़े लेकर झटपट पहने वो बाहर गेट तक मुझे विदा करने आई।

मैं बाहर निकलकर मैसीजी का गेट बंदकर अपने गेट से अपने घर में घुसा। मेरे घर का मुख्य दरवाजा बाहर से खुला था। अंदर आकर मैंने दरवाजा भीतर से बंद किया।

तब तक स्नेहा भी आ गई, उसे देखते ही मैंने कहा- अरे तुम अभी तक जाग रही हो?
स्नेहा बोली- आपके सामने मैंने जैसी स्थिति बना दी उसके बाद मैं कहाँ सो सकती थी।

मुझे उस पर बहुत दया आई और उसे चिपकाकर कहा- ऐसा नहीं है स्नेहा। अपने अच्छे मन से तुम्हें जो लगा वो तुमने किया, कोई भी अच्छी औरत अपनी सहेली का दुख दूर करने ऐसा ही करती।
स्नेहा बोली- तो कैसी लगी आपको अलका की चूत?
मैं बोला- बिस्तर पर तो चलो या यहीं सब पूछोगी।

स्नेहा अब मुझे लेकर कमरे की ओर बढ़ी।

कमरे में पहुंचकर मैंने अलका के साथ बिताई रात का कैसा अनुभव बताया।

अलका को अब आगे मैं चोद पाया या नहीं… यह कहानी के अगले भाग में।

मेरी अब तक की कहानी आपको कैसी लगी कृपया मुझे बताएँ।
[email protected]
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