कामना की साधना-6

(Kaamna Ki Sadhna-6)

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मेरे पास अब सोचने का समय नहीं था। किसी भी क्षण मेरा शेर वीरगति को प्राप्त हो सकता था, मैंने आगे बढ़कर अपना लिंग उसके स्तंनों के बीच की घाटी में लगा दिया।

मैं दोनों हाथों से कामना के स्तनों को पकड़कर लिंग पर दबाव बनाने लगा, असीम आनन्द की प्राप्ति हो रही थी, वो घाटी जिसमें से कभी मेरे सपनों के अरमान बह जाते थे। आज लिंग का प्रसाद बहने वाला था। अभी मैं उस आनन्द की कल्पना ही कर रहा था कि लिंग मुख से एक पिचकारी निकली जो सीधी उसके गले पर टकराई और फिर धीरे धीरे छोटी छोटी 3-4 पिचकारियों और निकली जिसके साथ कामना के दोनों स्तनों पर मेरी मलाई फैल गई।

अब मेरा शेर कामना के सामने ढेर हो चुका था, मैंने कामना से कहा- तुमको मलाई बहुत पसन्द है ना ! खाओगी क्या?’
वो सिर्फ मुस्कुरा कर रह गई।

मैं पीछे मुड़कर लिंग धोने लगा तभी उसने सीट से खड़े होकर शावर चला दिया। हम दोनों के बदन इतने गरम थे कि लग रहा था शावर का पानी भाप बनकर उड़ जायेगा। मैंने पानी से कामना के दोनों स्‍तनों को साफ किया, और अपनी बात कामना के सामने रखी…’यार तुम इतनी सुन्दर हो, ऐसे लगता है जैसे साक्षात् अप्सरा धरती पर आ गई हो, पर नीचे देखो बालों का कैसे झुरमुट पैदा कर रखा है तुमको अपनी सफाई का ध्यान रखना चाहिए।’

कामना बोली- मुझे नहीं पता था कि आप मेरे साथ ये सब करने वाले हो, और बहुत दिनों से समय नहीं मिला सफाई का घर जाकर करूंगी अब।’
मैंने कहा- तुम रूको मैं अभी अपनी शेविंग किट लाता हूँ और सफाई कर देता हूँ।’
वो शर्माते हुए बोली- जो कर चुके हो वो कम है क्या जीजा जी?’

तब तक मेरी शेविंग किट मेरे हाथों में आ चुकी थी। मैंने शेविंग क्रीम, ब्रश और रेजर निकाला, तथा कामना को फिर से वैर्स्टन स्टाइल वाली सीट पर बैठने को कहा। थोड़ा सा ना-नुकुर करने के बाद कामना सीट पर बैठ गई। वो पहले ही भीगी हुई थी इसीलिये क्रीम लगाने में समय नहीं लगा। मैं तेजी से क्रीम लगाकर झाग पैदा करने लगा। कामना फिर से सीईईई…सीईईई…की आवाज निकाल रही थी।

मैंने पूछा- कुछ परेशानी है क्‍या?’
‘बहुत गुदगुदी हो रही है…’ कामना बोली।

मैंने देखा कि वो आंख बंद करके बैठी उस प्रक्रिया का पूरा आनन्द ले रही थी। मैंने उसको बता दिया कि अब हिलना बिल्कुल नहीं है नहीं तो रेजर से कट सकता है। इसी के साथ रेजर से जंगल की सफाई शुरू कर दी। मुश्किल से 1 मिनट बाद ही वो घना जंगल, सफाचट मैदान में बदल गया। जिसके बिल्कुल बीच से एक बिल्कुल पतली सुरंग का रास्ता जा रहा था। अब वो सुरंग इतनी सुन्दर लग रही थी कि देखकर ही लिंगदेव फिर से मुँह उठाने लगे।

मैंने कामना की योनि को पानी से अच्छी तरह धोकर तौलिये से पौंछा और समय न गंवाते हुए उसको गोदी में उठाकर वापस कमरे में लाकर बिस्तर पर लिटा दिया।

अब वो अपने पूरे होश में आ चुकी थी और पुन: अपना पुराना राग आलापने लगी, कामना बोली- जीजू अब और नहीं प्लीज ! अब जाने दीजिये।’

मैंने कहा- यार इतनी मेहनत से जंगल साफ किया है कम से कम उसका मेहनताना तो दोगी ना।’
‘अब नहीं !’ बोलकर वो उठने लगी।

मैंने तय किया था कि किसी भी स्तर पर कामना के साथ जबरदस्ती नहीं करूंगा इसीलिये मैं तुरन्त पीछे हट गया, और बोल दिया ‘ठीक है अगर तुम नहीं चाहती तो जा सकती हो।’

बिस्तर पर लेटी-लेटी वो तिरछी नजरों से मुझे देखती रही, फिर बोली- जीजू, आपसे एक बात पूछूं क्या?’
‘हाँ पूछो।’
‘आप इतने अच्छे क्यों हो?’
‘क्यों अब मैंने क्या कर दिया?’

‘मैं इस समय आपके सामने बिल्कुल नंगी लेटी हूँ, आप कुछ भी करते तो मैं मना नहीं कर पाती, पर आप मेरे एक बार मना करने पर ही पीछे हट गये।’

‘देखो कामना, सैक्स प्यार का विषय है, सैक्स के बिना प्यार अधूरा है, और दो लोग जब सैक्स करते हैं तो वो उन दोनों को शारीरिक रूप से कम बल्कि मानसिक रूप से अधिक जोड़ता और संतुष्ट करता है, और आप जबरदस्ती से ना तो किसी का प्यार पा सकते हैं ना ही दे सकते हैं और ना ही किसी को जबरदस्ती संतुष्ट कर सकते हैं। इसीलिये जबरदस्ती का सैक्स मुझे पसन्द नहीं है।’

कामना मेरी बात को बहुत गौर से सुन रही थी, वो बोली- इस समय अगर आपकी जगह और कोई भी होता और मैं उसके सामने ऐसे नंगी लेटी होती तो शायद मेरे लाख मना करने पर भी वो मेरी नहीं सुनता चाहे सहमति से चाहे जबरदस्ती पर वो मेरे साथ सबकुछ कर गुजरता।’

‘सॉरी कामना पर मैं वैसा नहीं हूँ, तुम उठो, अपने कपड़े पहनो और जाकर सो जाओ।’ बोलकर मैं बराबर में पड़े हुए सोफे पर बैठ गया, और कामना को देखकर मुस्कुराने लगा।

कामना बिस्तर से उठी और बोली- जीजा जी, इसीलिये तो मैं हमेशा से आपकी फैन हूँ। काश मेरी किस्मत में भी आप जैसा कोई होता।’ बोलकर वो सोफे पर ही आ गई।

मैंने कहा- नहीं कामना, अब तुम जाओ।’

पर कामना सोफे पर मेरे दोनों ओर अपने पैर फैलाकर मेरी ओर मुँह करके मेरी गोदी में बैठ गई। मेरा लिंग फिर से उसकी योनि से टकराने लगा पर मैंने खुद पर कंट्रोल करते हुए उसको नीचे उतरने को कहा।

‘जीजा जी, सच में दिमाग बोल रहा है कि मुझे चले जाना चाहिए, पर दिल साथ नहीं दे रहा मैं क्या करूं?’ वो बोली।
‘यह तो तुमको सोचना है।’ मैंने कहा।

अचानक कामना से पैंतरा बदला और बोली- बहुत नखरा कर रहे हो, सीधे सीधे लाइन पर आ जाओ अब नहीं तो आज आपका ही रेप हो जायेगा…’ कहकर उसने अपने नरम और गरम होंठ मेरे होठों पर लगा दिया।

‘आहहह…’ क्या मुलायम होंठ हैं कामना के। शायद उस वक्त मैं उसके लिये कोई यही शब्द भी नहीं सोच पा रहा था। पर उस आनन्द की कल्पना भी मेरे लिये मुश्किल थी। मैं उसके होठों को लॉलीपॉप की तरह चूसने लगा और वो मेरे। हम दोनों फिर से उसी खुमार में खोने लगे। कामना मेरी गोदी में नंगी बैठी थी मेरा लिंग लगातार उसकी योनि और गुदा को छू रहा था। वो फिर से जाग गया था।

लिंग देव अब नई सवारी करने के लिये तैयार हो गये। कामना ने अपने नितम्ब तेजी से हिलाने शुरू कर दिये। मुझे लगने लगा कि उसकी इस हरकत से तो यहीं बैठे बैठे मैं फिर से डिस्चार्ज हो जाऊँगा। मैंने कामना को फिर से गोदी में उठाया और बिस्तर पर पटक दिया। बिस्तर पर गिरते ही मेरा लिंग फिर से उसकी आंखों के सामने था, जिसे उसने तुरन्त अपने होठों के हवाले कर दिया।

मैं कामना के दोनों ओर पैर करके उसके ऊपर आ गया। अभी मैं कामना को और तड़पाने के मूड में आ गया था। बमुश्किल कामना के मुँह से अपना लिंग निकालने के बाद मैंने फिर से उसके होठों पर अपने होंठ रख दिया और प्रगाढ़ चुम्बन में कामना को बांधने लगा। अब कामना भी खुलकर खेल रही थी। वो मेरे होठों को जबरदस्त तरीके से चूसने लगी। मैंने अपने दोनों हाथों को कामना के दोनों स्तनों पर रख दिया और तेजी से दबाने लगा।

‘उम्म… आह… धीरे… और करो…’ की आवाज कामना के मुँह से आने लगी।

मैंने तुरन्त अपने होंठ कामना की गर्दन पर रख दिये। उसको चेहरे, गर्दन, कंधे पर किस करना शुरू कर दिया। पर वो शायद मुझसे भी ज्यादा आतुर थी। कामना ने मुझे हल्का सा धक्का मारकर बराबर में बिस्तर पर नीचे लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर आ गई। मेरे दोनों हाथों को पकड़ कर खुद ही अपने पके हुए आमों पर रख दिया…

अब कामना मेरे पूरे बदन पर धीरे धीरे चुम्बन करने लगी, माथे पर, गालों पर, होठों पर फिर ठोड़ी पर, कंधे पर, कानों पर लगातार उसकी चुम्बन वर्षा हो रही थी, मैं नीचे लेटा कामना की हर हरकत देख रहा था, वो किस करते करते नीचे की ओर सरकने लगी मेरी छाती पर आकर लगातार चूमने और चाटने लगी। उसके बाद बाजू पर हाथों पर, नाभि पर… ‘आहह…’ लिंग के चारों ओर भी कामना का चुम्‍बन जारी था।

इस बार आह… भरने की स्थिति मेरी बन चुकी थी। शर्मिली हिरनी से कामना भूखी शेरनी बन चुकी थी, मैं उसके अन्दर की औरत को बाहर निकाल चुका था। मेरी जांघों पर उसकी उंगलियाँ गुदगुदी पैदा करने लगी। नीचे जाते जाते उसका चुम्बन मेरे पैरों के अंगूठे तक पहुँच गया। वहीं से कामना पलटी और मेरे मुँह की तरफ पीठ करके ऊपर की ओर आने लगी अब कामना की योनि बिल्कुल मेरे मुँह के ऊपर थी। वो मेरा लिंग अपनी मुँह में सटक चुकी थी। मैंने भी अपनी जुबान निकाल कर उसकी योनि की दरार पर रख दी।

‘हम्म…’ ये क्या? कामना की योनि के दोनों सांवले सलोने होंठ तो अपने आप ही फुदक रहे थे। ओह आज समझ में आया कि योनि को लोग ‘फुद्दी’ क्यों बोलते हैं, कामना की योनि सच में फुद्दी बन चुकी थी, वो अपने आप ही फुदक रही थी।

मैंने अपनी जीभ से उसकी दरार की चाटना शुरू कर दिया और हाथों को फिर से उसके बूब्स पर रख कर उसके दाने को सहलाने लगा। उसकी दरार में से बूंद बूंद रस टपक रहा था जो मेरी जबान में लगकर पूरी दरार पर फैल रहा था। कामना की चिकनी योनि चमचमा रही थी। अब चाटने में बहुत आनन्द आ रहा था। मैं लगातार उसकी फुद्दी की दरार को ऊपर से चाट रहा था।

कामना खुद ही चूतड़ आगे पीछे हिला-हिला कर मुझे मजा देने लगी। कुछ देर बाद वो अपनी योनि को मेरी जीभ पर दबाने लगी। मैं फिर भी उसकी दरार को ही चाटता रहा। क्योंकि मैं चाहता था कि अब कामना अपने मन की करे। तभी कामना ने बीच में से अपना एक हाथ पीछे निकालकर फुद्दी के दोनों होठों को अलग अलग कर मेरी जीभ के उपर रख दिया। मेरी जीभ कामना की योनि के अन्दर की दीवारों का निरीक्षण करने लगी। अन्दर से मीठा रस टपक रहा था। मैं उस रस को चाटने लगा और कामना नितम्ब हिला-हिला कर मेरी मदद करने लगी।

मैंने अपना एक हाथ बाहर निकला कर ऊपर किया और तर्जनी उंगली धीरे से कामना की गुदा में सरकाने की कोशिश की। ‘आह…नहीं…’ की आवाज के साथ वो कूद कर आगे हो गई, ओर मेरी तरफ देखकर बोली- आप इतने बदमाश क्यों हो?’

मैंने बिना कोई जवाब दिये अपने उंगली कामना की योनि में घुसा दी और अच्छी तरह गीली करके फिर से उसकी कमर पकड़कर गुदा में उंगली सरकाने लगा थोड़ा सा प्रयास करने के बाद उंगली का अगला हिस्सा उसके पिछले बिल में घुस गया। अब मैंने योनि और गुदा दोनों रास्तों से कामना की अग्नि को भड़काना शुरू कर दिया। कामना पागलों की तरह मेरे ऊपर धमाचौकड़ी करने लगी…कुछ ही सैकेन्डों में उसका बदन अकड़ने लगा और वो मेरे ऊपर धड़ाम से गिर गई। कामना का पूरा शरीर पसीने से तरबतर था।

कहानी जारी रहेगी।
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