होटल राजदूत की मोना-2

प्रेषिका : मोना सिंगल

मेरे लौड़े से निकली बाकी की रस की सारी पिचकारियाँ टब के पानी में जा गिरी !

जब मैंने आँखें खोलीं तो देखा कि वह उंगली से मेरे रस को उठा कर चख रही थी, तब मैंने उससे पूछ लिया- कैसा स्वाद है?

वह शर्मिंदा हो कर जल्दी जल्दी उस रस वाले पानी से ही नहाने लगी।

मैं उसे वहीं नहाते हुए छोड़ कर कमरे में आकर कपड़े उतार कर बेड पर लेट गया और उसका इंतज़ार करने लगा !

मोना जब नहा कर बदन पोंछते हुए कमरे में बेड के पास आई तो मैंने उचक कर उसका हाथ पकड़ कर अपने ऊपर गिरा लिया, मैंने उसे कस कर अपनी बाजुओं में जकड़ लिया और अपने होंट उसके होंटों ऊपर रख दिए और उसे चूमने लगा। मोना ने पहले तो थोड़ा संघर्ष किया लेकिन जल्द ही मेरे चुम्बन की लय में बह गई और खुल कर साथ दिया तथा उसने मेरे चुम्बन का उतर मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल कर दिया। फिर तो हम दोनों काफी देर तक एक दूसरे के होंठ और जीभ को बारी बारी चूसते रहे।

इस सब के चलते मेरे लौड़ा खड़ा हो ही चुका था, और शायद मोना को चुभने लगा तो उसने अपने हाथ को दोनों के बदन के बीच में डाल कर लौड़े को पकड़ कर अपनी दोनों टांगों के बीच में सरका दिया। अब मेरी झांटों के काले बाल उसकी चूत के भूरे रंग के बालों से गले मिल रहे थे और मेरा लौड़ा अंदर घुसने के लिए उसकी चूत के पट खुलने की इंतज़ार में उसके बाहर पहरेदार की तरह खड़ा हुआ था।

मैंने भी अपने हाथ दोनों के बदन के बीच में सरका कर मोना के मम्मों को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया और उसकी निप्पलों को अपनी उँगलियों और अंगूठे के बीच में लेकर मसलने लगा।

निप्पलों को मसलने का असर जल्द ही दिखा, जब मोना ने अपने होंठ मेरे होंठों से अलग किये और आह्ह… आह्ह्ह… आह्ह्ह… करने लगी।

मेरे पूछने पर कि उसे क्या हो रहा है तब उसने बताया कि नीचे उसकी चूत में कुछ हो रहा था लेकिन वह सब उसे अच्छा भी लग रहा था।

मैंने निप्पलों को मसलना जारी रखा और वह बीच में रुक रुक कर आह… आह्ह… आह्ह्ह… भी करती रही और बातें भी करती रही। बातों ही बातों में उसने बताया कि उसने मेरे मोटे और लंबे लौड़े जितना बड़ा लिंग पहले कभी नहीं देखा था। मेरे यह पूछने पर कि उसने कितना बड़ा लिंग देखा हुआ था तो उसने उतर दिया कि उसने सिर्फ बच्चों का छोटा सा लिंग ही देखा हुआ था।

इसके बाद उसने मेरा लौड़े को चूमने की इच्छा जाहिर की तो मेरा मन खिल उठा और तब मैंने उसे कहा कि मैं उसे जैसी क्रिया करने को कहूँ और अगर वह वैसा ही करेगी तो उसे बहुत ही अच्छा लगेगा तो वह मेरे कहे अनुसार अगली क्रिया के लिए तैयार हो गई।

मैं उठा और उसे नीचे लिटा कर उल्टा होकर लेट गया और कहा कि वह मेरे लौड़े को चूमे और अपने मुँह में लेकर चूसेगी तो उसे बहुत मज़ा आयेगा तथा मुझे भी अपनी चूत चूसने देगी तो मज़ा दुगना हो जायेगा।

जब वह इसके लिए मान गई तब मैंने अपना लौड़ा उसके मुँह में डाल दिया और उसकी टांगें चौड़ी कर उसकी चूत पर मुँह रख दिया। मोना कुछ देर तक तो सिर्फ लौड़े की टोपी को चूमती रही फिर अपना मुँह खोल कर टोपी को मुँह में ले लिया व चूसने लगी।

मैं भी उसकी चूत को चूसने लगा और उसके भग-शिश्न को जीभ से सहलाने लगा। जब उसे चूत की चुसाई का आनंद आने लगा उसने मेरे लौड़े को और अंदर करने के लिए अपना पूरा मुँह खोल दिया। मैं इसी मौके के लिए तैयार था और तब मैं अपने बदन को ऊपर नीचे कर लौड़े को उसके मुँह के अंदर बाहर करने लगा।

दस मिनट के उस प्रकरण के बाद मोना ने लौड़े को मुँह से बाहर निकाल कर जोर से चिल्लाई आह्ह… आह्ह्ह… आह्हह्ह… आह्ह्ह… आईईईइ… और अकड़ गई, उसकी चूत में से रस का फव्वारा छूट पड़ा !

झिल्ली के छोटे से छिद्र में से जो तेज फुहार निकली थी उसकी वजह से मेरा सारा चेहरा गीला होगया था। मैंने किसी युवती को फुहार मारते हुए पहली बार देखा था इसलिए बहुत अचरज तो हुआ पर आनन्द भी आया। हम दोनों ने एक बार फिर वही क्रिया दोहराई और दो मिनट के बाद ही मोना एक बार फिर से मेरे लौड़े को मुँह से बाहर निकाल कर जोर से चिल्लाई आह… आह… आहह्ह… आह्ह… आआआहहहईईइ… और अकड़ गई और उसकी चूत में से रस की एक बार फिर पहले जैसी फुहार छूट पड़ी ! क्योंकि इस बार मैं तैयार था इसलिए मैंने अपना मुँह खुला रखा और उसका सारा रस पी गया।

उस बहुत ही स्वादिष्ट रस का मैं आनन्द ले ही रहा था कि मोना ने मेरे लौड़े को मुँह में लेकर जोर से चूसा जिससे मैं भी अकड़ गया और मुँह से आह्ह… आह्ह्ह… की आवाज़ निकालते हुए अपने रस का स्खलन मोना के मुँह में ही कर दिया !

मोना का मुँह मेरे रस से भर गया था इसलिए मैंने अहिस्ता से लौड़े को उसके मुँह से बाहर खींच लिया जिससे मोना को रहत मिली और उसने मेरा सारा रस चटकारे लेते हुए गटक लिया।

मैं रस स्खलन के कारण थक गया था इसलिए मोना के ऊपर से उठा और सीधा होकर उसके पास लेट गया। मोना भी दो बार रस स्खलन से निढाल हो गई थी इसलिए मेरे सीधा हो कर लेटते ही वह मेरे से चिपट गई! थकान और हम दोनों के बदन की गर्मी के कारण कुछ ही देर में हम दोनों को नींद आ गई !

रात आठ बजे जब मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि मोना सीधी होकर लेटी हुई थी और उसकी टाँगें चौड़ी हो रखी थी, उसकी सुंदर चूत मेरे सामने खुली पड़ी थी !

मेरा मन उस चूत को उसी समय फाड़ने के लिए डोलने लगा लेकिन जल्दबाजी या जबरदस्ती करने से कोई गलती न हो जाए इसलिए मैंने मोना के मम्मों को सहलाना शुरू कर दिया।

मोना को जैसे ही मेरा स्पर्श महसूस हुआ तो वह घबरा कर एक झटके से उठ कर बैठ गई और मुझे घूरने लगी, लेकिन जैसे ही उसे दो घंटे पहले मिले आनंद की याद आई तो वह मुस्करा कर मेरे से लिपट गई और मुझे चूम लिया। फिर जब उसने आँख उठा कर टाइम देखा तो परेशानी उसके चेहरे पर छा गई।

परेशानी का कारण जानने पर उसने बताया कि जब तक वह घर पहुँचेगी तब तक बहुत रात हो जायेगी और तब तक उस मकान के सब लोग सो गए होंगे और कोई उसे दरवाज़ा भी नहीं खोलेगा। उसने कहा कि अगर होटल में कोई कमरा खाली होगा तो उसे उसमे सोना पड़ेगा नहीं तो सारी रात होटल के रिसेप्शन में बैठ के निकालनी पड़ेगी, लेकिन उसे डर इस बात से था कि वह होटल वालों को देरी होने का कारण क्या बताए। उसकी बात सुन कर मैंने उसे कहा कि उसे रात में कहीं जाने की ज़रूरत नहीं है, यहाँ पर डबल बेड है, उस पर हम दोनों एक साथ ही सो जायेंगे और उसे खींच कर अपने सीने से लगा लिया!

मुझे भूख लगी थी इसलिए मैंने खाना आर्डर कर दिया और अपनी लुंगी पहनते हुए मोना से कहा कि वेटर के आने से पहले वह अपने सारे कपड़े पहन ले और उसके आते ही वह बाथरूम में चली जाये।

जैसा मैंने कहा था, उसने वैसे ही किया और वेटर के जाते ही कमरे में आ गई। मेरे कहने पर मोना ने मंगाया हुआ खाना परोसा और हम दोनों ने मिल कर खाया तथा उसके बाद हम कुछ देर तक एक साथ बैठ कर टीवी देखते रहे। मोना को सुबह जल्द ही काम पर जाना था इसलिए बार बार बेड की ओर देख रही थी, मैं समझ गया कि वह सोना चाहती थी।

मैंने टीवी बंद किया और उसे सोने के लिए कहा लेकिन वह वहीं बैठी रही। जब मैंने उसे वजह पूछी तो कहने लगी कि उसे यही कपड़े कल भी पहनने थे इसलिए वह उन कपड़ों में नहीं सो सकती और उसके पास दूसरे कपड़े नहीं हैं।

तब मैंने उसे समझाया कि हमारे बीच में कोई पर्दा तो रहा नहीं इसलिए वह बिना कपड़ों में भी सो सकती है, अगर उसे कोई दिक्कत है तो वह मेरी लुंगी को मम्मों के ऊपर से बाँध कर अपने बदन को ढक कर सो सकती है।

यह कह कर मैंने लुंगी उतार कर उसे दे दी, नाईट लाईट जला कर नंगा ही बेड पर लेट गया।

मोना ने मेरे सामने ही सारे कपड़े उतार कर एक ओर रख दिए और लुंगी बाँध कर साथ वाले बेड पर लेट गई। मैंने उसके ओर मुख कर लिया और उसकी नंगी टांगों को देखता रहा, उत्तेजना के बढ़ने से मेरा लौड़ा खड़ा हो गया।

मोना भी जाग रही थी और उसने मेरे लौड़े को खड़ा होते देख कर मेरी ओर करवट कर ली। मैंने देखा कि उसका मुख तो मेरी ओर था लेकिन उसकी निगाहें मेरे लौड़े पर थी और उसका हाथ आहिस्ता आहिस्ता मेरे लौड़े की तरफ बढ़ रहा था, इसलिए मैं करवट लेकर सीधा लेट गया।

मोना मेरी इस हरकत से सकपका गई, कुछ देर तो वैसे ही लेटी रही फिर उठ कर बैठ गई और यह कहते हुए कि लुंगी को इस प्रकार बाँध कर उसे नींद नहीं आ रही क्योंकि उसका दम घुटता है, उसने लुंगी उतार कर फैंक दी और मेरी तरह नंगी हो कर लेट गई। उसको उस स्थिति में देख कर मैं बेकाबू हो गया और हाथ बढ़ा कर उसे अपने पास खींच कर अपने साथ चिपटा लिया। मोना भी शायद यही चाहती थी इसलिए उसने कोई विरोध नहीं किया और अपने एक हाथ में मेरे खड़े लौड़े को पकड़ कर मेरे से लिपट कर लेट गई।

मोना भी शायद अपने पर काबू नहीं कर पा रही थी इस लिए दस मिनट चिपके रहने के बाद उसने कहा कि मेरे लौड़े से निकलने वाला रस उसने खाया था और वह उसे बहुत मीठा लगा था तथा वह उसे पीना चाहेगी !

उसके यह कहने पर मैंने उसे बोला कि जैसा मैं उसे कहूँगा अगर वह करेगी तो मैं उसे रस पिला दूंगा !

कुछ देर तो वह सोचती रही फिर वह मान गई और मेरे कहे अनुसार पलट कर मेरे लौड़े को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और अपनी चूत मेरे मुँह पर रख दी। लगभग पांच मिनट चूसने के बाद जब मेरा लौड़ा भी सख्त हो गया और मोना भी गरम हो गई तब मैंने उसने पलटने को कहा और उसे अपनी चूत को लौड़े के ऊपर रखने को कहा।

मोना जब पलट कर मेरे लौड़े के ऊपर बैठ गई तब मैंने उसे थोड़ा ऊँचा कर के अपने लौड़े को पकड़ कर उसकी चूत के मुँह पर सेट कर उसे नीचे बैठने को कहा। जैसे ही वह नीचे हुई तो मेरा तना हुआ लौड़ा उसकी चूत में घुसने लगा और मोना को दर्द होने लगा तो वह फिर ऊँची हो गई!

मैंने मोना समझाया कि उसे थोड़ी तकलीफ तो होगी और दर्द भी होगा लेकिन उसे वह बर्दाश्त करना पड़ेगा तभी उसे मीठा रस मिलेगा। यह सुन कर वह एक बार फिर नीचे हुई तो मैंने उसके नीचे से हल्का सा धक्का लगा दिया! क्योंकि उसकी चूत अंदर तक मेरी थूक से गीली हो रखी थी इसलिए मेर लौड़े की टोपी उसमें घुस गई और उसने चूत की झिल्ली फाड़ दी। मोना दर्द के मारे बहुत जोर से चीखी और ऊपर उठने लगी तब मैंने उसकी कमर पकड़ कर उसे नीचे की ओर खींच लिया और नीचे से एक धक्का भी लगा दिया जिससे मेरा लौड़ा दो इंच उसकी चूत के अंदर सरक गया। फिर तो मोना दर्द के मारे चिल्ला पड़ी और बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी। तब मैंने उसे कस कर पकड़ लिया और अपने बदन के साथ चिपका लिया। मोना रोने लगी और बार बार चिल्ला कर कह रही थी कि उसे बहुत दर्द हो रहा था, उसे लग रहा था कि उसकी चूत फट गई है और उसमें से खून भी निकल रहा है।

उसकी आँखों से निकले आंसूओं को देख कर मैंने उसे कहा- अगर मीठा रस पीना है तो थोड़ा दर्द तो सहना पड़ेगा !

और उसे अपने साथ लिपटा लिया।

कुछ देर वैसे ही लेटे रहने के बाद मोना कुछ शांत हुई तो मैंने उसे कहा कि वह बैठ कर अहिस्ता अहिस्ता नीचे की ओर सरके और लौड़े को चूत के अंदर जाने दे।

मैंने उसे समझाया कि वह आराम से बिना दर्द हुए ऐसा कर सकती है क्योंकि वह दर्द के एहसास होने पर रुक सकती है। मैंने उसे बताया कि अगर मैं लौड़े को अंदर धकेलता हूँ तो हो सकता है कि मैं तेज धक्का लगा दूं और उसे तेज दर्द हो जाए। मोना मेरे कहे अनुसार रुक रुक कर उईई… उईईई… करते हुए धीरे से नीच की ओर सरकने लगी और लगभग पांच मिनट में पूरा लौड़ा उसकी चूत में फिट हो गया।

इसके बाद मैंने उसको कहा- वह थोड़ा ऊपर उठ कर नीचे होए और लौड़े को चूत के अंदर बाहर करे !

मोना नीचे ऊपर होने लगी, पहले धीरे धीरे और फिर जब उसे मज़ा आने लगा तो तेज़ी से हिलने लगी। मैंने भी नीचे से हल्के धक्के लगाने शुरू कर दिए, जिसकी वजह से मोना को बहुत आनन्द आने लगा और वह तेज़ी से उचकने और आह… आह्ह… आह्ह्ह… आहह्ह्ह… की आवाजें निकलने लगी।

फिर अचानक ही वह अकड़ी और बहुत जोर से आआआह्ह्हईईईईइ… कर के चिल्लाई और झटके से लौड़े के ऊपर बैठ गई, जिसके कारण मेरे लौड़े की टोपी उसकी बच्चेदानी घुस गई! उसकी संकीर्ण चूत सिकुड़ कर बहुत तंग हो गई और मेरे लौड़े को अंदर की ओर खींचने लगी।

जब मैंने नीचे से एक धक्का दिया तो चूत में से रस की फुहार छूट निकली और मोना एक बार फिर आआआआह्ह्हहईईईईइ… करती हुई अकड़ गई और उसकी चूत ने मेरे लौड़े को कस के जकड़ लिया तथा मेरे ऊपर गिर पड़ी।तब मैंने उसे अपने बाहों में जकड़ कर करवट ली और उसे नीचे कर मैं उसके ऊपर चढ़ गया। इसके बाद मैं हिलना शुरू हो गया और उसे तेज़ी से चोदने लगा !

अगले दस मिनट में मोना की चूत ने तीन बार फुहार छोड़ी और मेरे लौड़े को जकड़ कर रगड़ रगड़ कर आनन्द देने लगी। जब मुझे लौड़े में सनसनाहट महसूस की तो मैंने झट से लौड़े को चूत से बाहर निकल कर उसे मोना के मुँह में डाल कर अपना रस उसमें छोड़ दिया।

मोना ने निकले रस को जल्दी जल्दी निगलना शुरू कर दिया और जैसे ही वह रिसना बंद हुआ तब उसने लौड़े को चूस कर बचे खुचे रस को खींच लिया।

इसके बाद हम दोनों निढाल हो कर लेट गए और हमें पता ही नहीं लगा कि हम कब नींद की गहराइयों में पहुँच गए।

सुबह छह बजे मोना की नींद खुली और उसने मेरे लौड़े, अपनी टांगों और बेड की चादर पर खून लगा देखा तो उसने घबरा कर मुझे उठाया और उसके बारे में पूछा।

मैंने उसे बताया कि जब चूत की झिल्ली फटती है तो यह खून एक बार ही निकलता है अब अगली बार चुदाई करेंगे तब यह नहीं निकलेगा।

वह मुस्कुरा दी और हम दोनों ने एक साथ बाथरूम में जाकर एक दूसरे को धोया व नहलाया और कपड़े पहन कर अपने अपने काम पर चल पड़े! हाँ जाते जाते हम दोनों ने शाम को फिर मिलने और रात वाली क्रिया दोहराने का वादा ज़रूर किया!

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