बिजली कटी, किस्मत जगी

प्रेषक : राज मधुकर

मैं राज मधुकर बहुत समय से अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़ रहा हूँ। मेरी उम्र 24 साल है, मैं दिल्ली में रहता हूँ, अच्छा सुडौल शरीर है और सुंदर लड़कियाँ देखते ही मेरा मन उन पर फिसल जाता है। कई बार सोचा कि अपने जीवन की घटनाओं के बारे में लिखूँ। पर पता नहीं हिम्मत नहीं हो रही थी। आज जब एक बार फिर से मैं अन्तर्वासना की साईट पर गया तो फ़ैसला किया कि एक बार तो अपना अनुभव मैं भी लिखूँ। यह अन्तर्वासना पर पहली कहानी है।

अब मैं आप लोगों को अपनी कहानी सुनाता हूँ।

अपनी कहानी शुरू करने से पहले मैं पाठकों को बता दूँ की मेरी कहानी कोई झूठी या मन से बनाई हुई नहीं है, यह उतनी ही सच्ची है जितनी की सेक्स की जरुरत…

यह बात उस समय की है जब मैं कक्षा ग्यारह में पढ़ता था। मेरे पापा के दोस्त की बेटी हमारे घर रहने आई। वो बारहवीं की परीक्षा दे कर यहाँ अपने आगे की पढ़ाई के लिये कोचिंग करने आई थी। वो देखने में बहुत ही सुन्दर थी। उसने जींस और टॉप पहना हुआ था, उसकी हाईट 5’4″ होगी और उसके बाल बहुत लंबे और काले नागिन की तरह, आँखें काली काली और बड़ी बड़ी, गाल कश्मीर के सेब की तरह लाल-लाल, होंठ गुलाब की पंखुडियों की तरह गुलाबी और उसके स्तन पूरे भरे हुए, टॉप फाड़ कर बाहर आने को थे। अगर ठीक से कहूँ तो उसका फिगर कुछ 36-30-36 रहा होगा। मैं तो देखते ही फ्लैट हो गया और काफी देर तक उसे देखता ही रहा। उसका नाम मीनू था।

मैंने जिस दिन से उसे देखा, उसी दिन से मैं उसे चोदने की तरकीब सोचने लगा और उससे बातें करने की कोशिश करने लगा।

मैं अक्सर जब वो नहाने जाती थी तो बाथरूम के पास जाता था कि कहीं उसका दरवाज़ा गलती से खुला रह गया हो और मैं अन्दर चला जाऊँ। पर ऐसा कभी नहीं हुआ। मैं अक्सर अपने बाथरूम का दरवाज़ा भी खुला छोड़ देता था कि वो गलती से आ जाये और कुछ बात आगे बढ़े।

हम लोग इस बीच एक दूसरे से बात करने लगे। कभी कभी एक दूसरे से बात करते करते हमारा बदन एक दूसरे से सट जाता था। इस तरह मैं उसके बदन को छूकर अपनी गर्मी शांत करता था।

एक दिन रात के समय हमारे घर में बिजली कटी हुई थी और मेरे कमरे मैं और वो अकेले थी। हम लोग आपस में बात कर रहे थे। अंधेरे में कुछ न दिखने के कारण अचानक मेरा हाथ उसके चुच्चे पर टकरा गया पर उसने कुछ नहीं बोला। मैंने उसका हाथ पकड़ लिया। उसने कुछ नहीं कहा। मैं समझ गया कि मामला फ़िट हो गया है। जिसके लिए मैं तरस रहा था वो सब मेरे साथ हो रहा था।

मैं समझ गया कि आज मैंने पहल नहीं की तो फिर मैं कभी भी पहल नहीं कर पाऊँगा। इसलिए मैंने उसे अपनी ओर खींचा ओर फिर उसके होठों पर अपना होंठ रख दिए। पहले ऊपर का होंठ खूब चूसा, फ़िर नीचे वाला चूस के लाल कर दिया, फ़िर मैंने उसकी कमीज में हाथ डाल दिया और पेट को सहलाते हुए मम्मे तक पहुँच गया, साथ में लिप-किस भी हो रही थी। फिर मैंने उसकी कमीज ऊपर की और ब्रा के ऊपर से उसके मम्मों को खूब रगड़ा।

फ़िर मैंने झटके के साथ साथ उसके मम्मों को दबोचा, किस किया, काटा, निप्पल को चूसा। मैं ओर आगे कुछ करता कि बिजली आ गई और मुझे और उसे कमरे से बाहर जाना पड़ा। उसके बाद हमें 2-3 दिन तक कोई मौका नहीं मिला।

फिर एक दिन मैं घर पे अकेला था, घर पे कोई नहीं था। कोई नहीं रहने के कारण मैं बड़े ही रोमांटिक मूड में था। जब वो दिखी तो उसको देखते ही मेरे लंड ने फ़िर से सलामी दी और मैं मन ही मन बड़ा खुश हुआ, मेरा पूरा शरीर उत्तेजना के मारे थरथरा रहा था। जिस के लिए मैं तरस रहा था वो सब मेरे साथ हो रहा था और मैं होश में नहीं था। मेरे जोश के सागर में उफ़ान आने लगा।

मैंने उसे देखा वो दूर से मुझे देख रही थी। मैं उसके पास गया और मैंने आव देखा न ताव और उसकी कमर में हाथ डाल कर उसे अपनी तरफ़ खींचा और एक किस उसके होंठों पर दे दी।

वो मेरी इस हरकत से एकदम घबरा गई और कहने लगी- यह तुम क्या कर रहे हो?

मैंने कहा- तुम आज मुझे मत रोको !

और मैंने उससे एक और बार किस कर डाला। वो मुझे दूर धकेलने लगी लेकिन उसके हुस्न का जादू सा मुझ पर चल गया था, मैंने फट से उसकी चूचियों को पकड़ लिया और उसके होंठों को पागलों की तरह चूमने लगा।

अब वो भी मान गई, उसे भी मज़ा आने लगा।

मैंने पहले उसे और ख़ुद को पूरी तरह से नंगा कर दिया। उसके दूध जैसे गोरे बदन को देखकर मेरा लंड तुंरत फ़नफ़नाने लगा। मैंने उसकी चूत को देखा जो बालों से ढकी थी। मैंने एक हाथ से उसके होंठों और एक हाथ से उसकी चूत को मसलना शुरू किया जिससे वो स्स्स्स् स्स सस्श्ह्ह्ह् हह्ह्छ आअ ह्ह्ह्ह्ह् की आवाजें निकलने लगी। उसे अब मजा आने लगा। वो मेरे अंगूठे को चूसने लगी। नीचे मेरा हाथ चिपचिपाने लगा, यानि कि वो पूरी तरह से गर्म हो गई, तो बोली- प्लीज़ अब मुझसे नहीं रहा जाता, अपना लंड मेरी चूत में डालो वैसे ही बहुत खुजली हो रही है।

उसके इतना बोलते ही मैंने अपना लंड लिया और उसकी चूत का निशाना लगाया और जोर से धक्का मारा, वो आ आअ ह्ह्ह ह्ह्ह्ह्ह् करके चिल्ला उठी, लंड भी फिसल गया, उसकी चूत बहुत तंग थी, वो पहली बार चुदवा रही थी।

मैंने फिर से निशाना लगाया और जोर से धक्का मारा, इस बार लंड बुर में फंस गया, वो फिर चिल्ला उठी, अब तो मैंने जोर जोर से धक्के मार मार कर उसके अन्दर पहुंचाने लगा, वो चिल्लाती रही, अब तो उनके मुँह से केवल आआ आअह्ह्ह् ऊऊह्ह्ह म्ममाआअर्र्र्र्र् ग्ग्गआआआऐईईईइ, राज, मुझे बहुत दर्द हो रहा है,प्लीज बाहर निकालो नहीं तो मैं मर जाऊँगी।

फिर से मैं धक्के मारने लगा और साथ ही उसके होंठों को अपने होंठों से चूसने लगा जिससे वो ज्यादा चिल्ला न पाए। तो वो मेरे होंठों को बहुत जोर से चबाने लगी। अब लंड पूरी तरह से उसकी चूत की जड़ में घुस गया तो बोली- पूरा घुस गया?

मैं बोला- हाँ पूरा घुसेड़ दिया मैंने। अब शुरू करूँ?

वो बोली- हाँ, अब मारो धक्के !

फिर मैंने उसे लगातार धक्के मारना शुरू किया। वो फिर से चिल्लाने लगी- आआआह ह्ह्ह आआह्ह

इतने में वो एक बार झड़ गई, जिससे उसकी चूत गीली हो गई और लंड थोड़ा अच्छे से अन्दर बाहर होने लगा। अब मेरे छोटे से रूम में केवल खचाखच फचफच आह्ह्हछ ऊउउह्ह्छ की आवाजें आने लगी। अब वो भी पूरे जोश में आ गई। अपनी गांड उछाल उछाल के चुदवाने लगी, बोली- और जोर से डाल, आज मेरी चूत को पूरा मजा दे दे, जोर से और जोर से आआआअह्ह !

उसकी बातों से मैं और जोश में आ गया और जोर से धक्के मरने लगा। करीब 25-30 धक्के मारने के बाद मैं उसके ऊपर गिर गया। हम लोग थोड़ी देर ऐसे ही रहे। उसके बाद हम दोनों ने साथ में शॉवर लिया। वो बहुत खु्श थी मैं भी बहुत खुश था।

उस दिन हमने दो बार चुदाई का मज़ा लिया और इसके बाद हमें जब भी मौका मिलता, हम यह खेल खेलते थे।

फिर कुछ दिन बाद वो अपने घर चली गई। उसके बाद मैं आज भी किसी के इन्तज़ार मैं हूँ कि कोई फिर आये ! पर आज तक इन्तज़ार में ही हूँ।

तो दोस्तो, यह था मेरा पहला सेक्स अनुभव !

आपको मेरा पहला सेक्स अनुभव कैसा लगा, कृपया अपनी राय मुझे जरूर भेजना !

इस कहानी को पीडीएफ PDF फ़ाइल में डाउनलोड कीजिए! बिजली कटी, किस्मत जगी

इस कैटेगरी की और अधिक कहानियाँ पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें कोई मिल गया या ऐसी ही अन्य कहानियाँ

प्रातिक्रिया दे