गुजराती भाभी की चुदाई की देसी स्टोरी

(Gujarati Bhabhi Ki Chudai Ki Desi Story)

हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम राहुल है, मेरी पिछली स्टोरी
अकेली इंडियन भाभी की चुदासी जवानी
के लिए मुझे आप सभी के काफ़ी सारे रिप्ला मिले, मुझे बहुत अच्छा लगा. उसमें काफ़ी सारी लड़कियों के मेल भी थे, मैंने उनमें से कई के साथ भी बात की और कुछ के साथ ज्यादा ही बात की. उनके सभी साथ मैंने अपने ईमेल रिलेशन को अभी तक बनाए रखा है, लेकिन मुझे लड़कियों से ज़्यादा आंटी और भाभी में इंटरेस्ट है.

इस कहानी में मैंने एक भाभी के बारे में लिखा है, जो कि मुझे पिछले महीने अहमदाबाद के बोपल एरिया के गोटिला गार्डेन में मिली थीं. उनका नाम अपूर्वा है, वो अपने बच्चे के साथ आई थीं. भाभी दिखने में 27 साल की लग रही थीं. उन्होंने उस वक्त लैगीज और कुर्ता पहन रखा था. उस ड्रेस में से भाभी की जांघें और गांड का आकार पूरी तरह से पता लग रहा था. भाभी की चुचियां ज़्यादा बड़ी नहीं थीं, लेकिन उनकी गांड बहुत ही अच्छी तरह से उठी हुई थी, बिल्कुल राउंड शेप में.

मैं भी उधर अपनी गर्लफ्रेंड के साथ आया हुआ था. हम सभी ने पहले नाश्ता किया और फिर रैकेट खेलने लगे. गेम खेलते वक्त भाभी का बेटा, जोकि 5 साल का था, वो बार बार बीच में आ रहा था. भाभी उसको डांटकर वापिस ले जाती थीं… लेकिन वो लड़का तब भी नहीं मान रहा था.

भाभी ने गुस्से से अपने बेटे को गाल पर ज़ोर से चांटा लगा दिया, तो बेटा ज़ोर से रोने लगा. उस टाइम मुझे बहुत बुरा लगा, मैंने भाभी को बोला- आपको ऐसा नहीं करना चाहिए.

अब भाभी उसको चुप करवाने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन वो चुप ही नहीं हो रहा था. मैंने उसके बेटे को रैकेट दिया तो वो जल्दी से खड़ा हो गया और मेरी गर्लफ्रेंड के साथ खेलने लगा. अब वो बहुत ही खुश दिख रहा था. भाभी ने भी उसको पहली बार इतना खुश देखा था, ऐसे ही बातें चलती रहीं और भाभी को पता लगा कि हम दोनों हर संडे को गोटिला गार्डेन में खेलने के लिए आते हैं.

इसके बाद भाभी भी हर संडे आने लगीं और साथ में उसका बेटा भी आने लगा. इस तरह भाभी हमारे साथ घुल मिल गईं. उन्होंने एक संडे को हमको खाने पे इन्वाइट किया, तो वहां उनके पति के साथ भी मुलाक़ात हुई.
अब हमारे रिश्ते एकदम पारिवारिक हो गए थे. भाभी मुझसे अपनी हर बात शेयर करने लगी थीं. यहां तक कि उनको कोई भी काम होता था तो वे मुझे बोल देती थीं.

फिर एक दिन भाभी का कॉल आया कि उनके बाथरूम में गरम पानी नहीं आ रहा है, मेरे पति भी नहीं हैं. मुझे समझ नहीं आ रहा है कि क्या करूँ.
भाभी की परेशानी समझ कर मैं उनके घर, समस्या देखने के लिए चला गया. मैंने वहां जाकर गीजर को ठीक किया, तो भाभी खुश हो गईं.

मैं चलने लगा तो भाभी बोलीं- रूको, चाय पीकर जाना.

वो मेरे लिए चाय लेकर आईं और हम दोनों बैठ कर बात करने लगे और चाय की चुस्की लेने लगे.
भाभी से बातों के दौरान पता लगा कि उसके पति मार्केटिंग टूर पे गए हैं और बेटा प्ले ग्रुप में गया था.

मैंने महसूस किया कि भाभी मुझे चोरी छुपे बार बार देख रही थीं. मैंने ध्यान से देखा तो मुझे वो थोड़ी टेन्शन में सी लगीं.
मैंने उनसे पूछा- क्या बात है भाभी?
उन्होंने बताया कि जैसे आप मेरे बेटे को और मुझको खुश रखने की कोशिश करते हो, वैसे जिसको करनी चाहिए, वो नहीं करता है.

मैं समझ गया कि भाभी अपने पति से खुश नहीं हैं. वे इस तरह की बातें करते हुए रोने लगीं और मेरे करीब होकर मेरे कंधे पर सर रख कर सुबकने लगीं.
मैंने भाभी को ऐसे ही सांत्वना देते हुए अपने गले से लगा लिया और उनकी पीठ को सहलाते हुए कहा कि चिंता मत करो… भाभी मैं हूँ ना… आपको किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो, मुझे याद कर लेना.

भाभी को अपने गले से लगा कर सहलाने से मेरे शरीर में तो करंट सा दौड़ गया था. क्योंकि मेरे गले लगाने से भाभी मुझसे कुछ ज्यादा ही चिपक गई थीं. मैंने महसूस किया कि भाभी मुझे छोड़ना ही नहीं चाह रही थीं.

मैंने अलग होने का प्रयास किया तो भाभी ने मुझे जकड़ लिया और बोलीं कि मुझे तुम्हारी दिलासा से बहुत अच्छा लग रहा है.
फिर दस मिनट के बाद हम दोनों अलग हुए. मैंने भाभी की तरफ देखा तो भाभी मुझे प्यासी नजरों से देख रही थीं.

फिर मैं वहां से चला आया. दूसरे ही दिन उन्होंने मुझे फिर कॉल किया और बताया कि आज मेरे बाथरूम के शावर में पानी नहीं आ रहा है, प्लीज़ जल्दी आ जाओ.

मैं जल्दी से भाभी के घर चला गया और बाथरूम में जाकर देखने लगा. भाभी भी मेरे साथ ही बाथरूम में खड़ी थीं. फिर मैंने डाइवरटर को ओपन किया और भाभी को डाइवरटर पे हाथ रखने को बोला कि आप हाथ लगाना, मैं पानी शुरू करता हूँ.

जैसे ही मैंने वाल्व ओपन किया तो पानी इतने तेज प्रेशर से आने लगा कि भाभी उसको रोक नहीं पाई और तभी शावर से भी पानी गिरने लगा. तो भाभी इससे एकदम से चौंक गईं और पीछे खिसक गई. इस चक्कर में भाभी की गांड मेरे लंड पे दब गई. चूंकि पूरी ताकत से मेरे ऊपर आ गई थीं, तो मेरे मुँह से भी ‘आह निकल गई. उधर भाभी को भी थोड़ा पता लगा कि उनकी गांड में कुछ सख्त सा आइटम चुभ रहा है, तो वो मेरी तरफ घूम गईं और मुझसे सॉरी बोलने लगीं.

मैंने भी भाभी को ‘इट्स ओके…’ बोल दिया. अब मैंने पीछे देखा तो पानी का प्रेशर सीधा भाभी की गांड के बीचों बीच में लग रहा था तो उनकी आँखें बंद हो गई थीं और उनके होंठ कांप रहे थे.

मुझे पता चल गया कि भाभी गरम हो चुकी हैं, मैंने भी मौके पर चौका मारके उनको अपनी बांहों में खींच लिया और उनको किस करने लगा. मेरा किस करना शुरू हुआ तो भाभी भी मुझे चिपक गईं और किस में मेरा साथ देने लगीं.

मैंने भी भाभी के गालों पर पूरी दम से किस करते हुए उनके मस्त मम्मों पर एक हाथ रख कर उनकी एक बॉल दबाने लगा. मेरा दूसरा हाथ भाभी की गांड पे फिरने लगा. अब वो गरम हो चुकी थीं.

मैंने मेन वाल्व बंद किया और कपड़े उतार कर बेडरूम में जाने लगा. भाभी मेरे आगे चल रही थीं, उनकी गांड तो ऐसे मटक रही थी कि जैसे कोई तरबूज हो, बिल्कुल राउंड शेप में थी.

मैंने भी अपने मन में सोच लिया था कि आज भाभी की गांड भी ज़रूर मारूँगा.

बेडरूम में जाके भाभी मुझे लिपट गईं और मुझे किस करने लगीं. फिर अलग होकर बोलीं कि थोड़ा सोमरस भी साथ ले लें.
मैं हामी भर दी और भाभी ने शराब की बोतल से दो पैग बनाए. हम दोनों ने एक एक पैग ड्रिंक की और फिर आगे के काम पर लग गए.

अब हम दोनों 69 की पोज़िशन में आ गए थे. मैं उनकी चूत चाटने लगा था, मुझे उनकी चूत की महक बड़ा कामुक कर देने वाली लगी. मैं अपनी जीभ को अन्दर घुसा कर चाट रहा था. भाभी भी मेरे लंड को पूरा मुँह में गले तक लेकर चूस रही थीं.

फिर मैंने भाभी को सीधा लिटाया और उनकी चुत चाटने लगा. इस वक्त मैं भाभी की चुत को पूरे ज़ोर से चाट रहा था तो उस दौरान भाभी की मदभरी आवाज निकल रही थी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… क्या खा ही जाओगे… आह…

उनकी कामुक आवाज़ मुझे और अधिक गरम कर रही थी. तभी भाभी अकड़ गईं और वो मेरे सिर को पकड़ कर चुत के अन्दर दबाने लगीं. मैंने भी पूरा मुँह खोल कर उनकी पूरी चूत मुँह में भर लिया. तभी भाभी ने अपनी चुत का पानी छोड़ दिया और मैंने उनकी चूत का सारा पानी मुँह में ले लिया. आह भाभी की चूत का पानी का बिल्कुल नमकीन टेस्ट था.

चुत का पूरा पानी पीने के बाद मैंने भाभी की चूत को चाट कर साफ़ कर दी. फिर मैं खड़ा हुआ तो मेरे होंठ पर भाभी की चूत का रस लगा था. भाभी ने देखा तो वो झट से मेरे होंठों पर अपने होंठों से किस करके अपनी चुत रस को चाटने लगीं. इस वक्त बड़ा ही गरम माहौल बन गया था, जिससे भाभी फिर से चुदासी हो गईं.

अब मैं बेड पे लेट गया था. वो अब मेरे लंड को चूस रही थीं. वो भी पूरा लंड मुँह में ले रही थीं. भाभी इस वक्त पूरे जोश में मेरा लौड़ा चूस रही थीं. उस टाइम उनकी ऐसी आवाज़ आ रही थी, जैसे वो कुल्फी को चचोर रही हों.

दस मिनट के बाद मैं झड़ने को हुआ तो मैंने भाभी के मुँह को पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगा. मेरी चरम सीमा के अंत में मैंने ज़ोर देकर पूरा लंड उनके गले तक घुसा दिया. वो ‘उम्म… उम्म…’ करने लगीं और मैंने पूरा माल सीधा उनके गले में उतार दिया.

फिर हम दोनों थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहे. इसके बाद हम दोनों ने एक एक पैग का मजा लिया. इससे फिर से सेक्स का मन होने लगा. मैंने भाभी की चूचियों को चूसा तो इस बार उन्होंने मेरे लंड को हिलाकर खड़ा किया और किचन से मक्खन लेकर आईं. भाभी ने मेरे लंड पर मक्खन लगा दिया. मैंने भी थोड़ा सा मक्खन लेकर भाभी की चूत में लगा दिया. अब मैंने लंड को भाभी की चूत के मुँह पर रखा और सुपारा घिसने लगा.

भाभी तेज साँसें ले रही थीं और बोल रही थीं- प्लीज़ अब घुसा भी दो… आह पूरा लौड़ा पेल दो मेरी चूत में… प्लीज़…
मैंने उनको थोड़ा और तड़पाया तो भाभी भड़क उठीं और ज़ोर से बोलीं- घुसा ना अन्दर मादरचोद जल्दी से…
मैंने माँ की गाली सुनी तो मैंने भी गाली देते हुए एक ज़ोर का झटका दे दिया- ले माँ की लौड़ी खा मेरा मूसल…

मेरा आधे से ज्यादा लवड़ा फ्च्छ करके भाभी की चूत के अन्दर चला गया.

भाभी भी ‘आहह आह… सस्स… स…’ करने लगीं. उनकी आँखें उबल पड़ीं… भाभी को दर्द होने लगा था. मैं आधे ही लंड को थोड़ी देर भाभी की चुत में हिलाता रहा. इसके बाद में मैंने एक झटका और दिया तो इस बार पूरा सात इंच का लौड़ा चूत की जड़ तक अन्दर चला गया.

वो ‘आअहह… आहह… मुऊउंमा…’ करने लगीं और रोने लगीं. मैंने भी परवाह किए बिना ज़ोर के झटके चालू ही रखे. पूरा रूम ‘प्पुउऊच… प्पुउउक्च पुउच्च…’ की आवाज से गूँज रहा था.

दस मिनट तक भाभी की चुत चुदाई के बाद मुझे अब उनकी गांड मारनी थी, तो मैंने उनको डॉगी स्टाइल में आने को बोला.
भाभी झट से कुतिया बन गईं.
अब मैंने भाभी की पूरी गांड के छेद में मक्खन भर दिया और अपने लंड पे भी मक्खन लगा कर अन्दर पेला तो लंड सटाक से अन्दर चला गया. भाभी की आह निकल गई और वो ‘आह सस्स… अम्म्म…’ करने लगीं.

मुझे लगा कि भाभी शायद गांड मराने की आदत है इसलिए इनको ज्यादा दिक्कत नहीं हुई. मैंने भाभी से पूछा- आपकी गांड तो चुदी हुई लग रही है भाभी?
तो उन्होंने बताया कि मैं बैंगन पे कंडोम लगा कर गांड में आगे पीछे करती रहती हूँ… क्योंकि मेरे पति का लंड बहुत ही सॉफ्ट है… तुम्हारे जैसा कड़क नहीं है… इसीलिए चूत के साथ गांड भी रमा हो गई है… अब तुम फ़ालतू की बातें छोड़ो और काम पर लग जाओ.

मैंने धीरे धीरे करके अपना पूरा लंड भाभी की गांड में डाल दिया. इसके बाद मैंने उनको थोड़ा झुकने को कहा तो उन्होंने ऐसा ही किया. अब भाभी की गांड ऊपर को उठ गई थी और उनके ऊपर मैं चढ़ कर गांड मार रहा था. मैं अपने लंड के जोर के झटके लगाने लगा.

ठप ठप ठप की मधुर आवाज़ के साथ वो आहह आहह आहह कर रही थीं और उनकी गांड स्प्रिंग की तरह दब के ऊपर नीचे हो रही थी, सच में बहुत ही मज़ा आ रहा था. थोड़ी देर में मैं झड़ने को हो चला था.
मैंने उनसे पूछा- माल कहां गिराना है?
उन्होंने कहा कि मेरी गांड की तुम ऊपर से तो मालिश करते ही हो, अब अन्दर भी क्रीम लगा कर मालिश कर दो.

मैं ज़ोर से झटके लगाने लगा, फिर मैंने एक ज़ोर से झटके के साथ पूरा लंड अन्दर घुसा दिया और भाभी से चिपक गया.

‘आहह आहह…’ मेरी आवाज निकली और मैं पूरा झड़ गया. वो भी गांड के होल को दबा के मेरे लंड को निचोड़ रही थीं. मेरे मुँह से लगातार ‘आह आह…’ निकल रहा था. मैं भी भाभी के ऊपर ऐसे ही थोड़ी देर पड़ा रहा.

फिर जब लंड नॉर्मल हुआ तो मैं उठकर अलग हो गया.

दोस्तो और सहेलियो भाभियो… बताओ न… कैसी लगी मेरी देसी सेक्स स्टोरी… जल्दी से मुझे मेल करके बताओ
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