सम्भोग का सफर-1

(Sambhog Ka Safar-1)

This story is part of a series:

कथा : शालिनी भाभी (राठौर)
लेखक : अरुण
हाय दोस्तो… आपकी शालिनी भाभी एक बार फिर से आप सबके लण्ड खड़े करने आ गई है अपनी एक नई कहानी लेकर !

भूले तो नहीं ना मुझे?

मैं लेडी राउडी राठौर, आपकी शालिनी भाभी, आया कुछ याद?

तो लगी शर्त
जीजा मेरे पीछे पड़ा

गर्मी का इलाज
डॉक्टर संग मस्ती
और चूत से चुकाया क़र्ज़ !

आया कुछ याद?

हाँ जी, आपकी वही शालिनी भाभी जयपुर वाली !

आज मेरी कहानी का हर एक दीवाना मुझे चोदने को बेचैन है। सच मानो अब तो मेरी चूत भी चाहती है कि मैं अपने हर दीवाने का लण्ड अपने अंदर घुसवा कर चुद जाऊँ पर यह मुमकिन नहीं है यारो !

आज की कहानी की ख़ास बात यह है कि इस कहानी का मेरा हीरो भी आप सबका जाना पहचाना है।

दोस्तों तुम्हें याद होगा कि मेरी आखिरी कहानी ‘चूत से चुकाया क़र्ज़’ अन्तर्वासना के ही एक जाने पहचाने लेखक अरुण ने लिखी थी, क्यूंकि मैं सेक्स में तो बहुत एक्सपर्ट हूँ और खूब मज़े ले लेकर सेक्स करती हूँ लेकिन उसे कहानी के रूप में लिखना मेरे बस की बात नहीं है और मेरी पहले की सभी कहानियाँ लिखने वाले राज अपने बिज़नेस में व्यस्त होने की वजह से अब मेरे सम्पर्क में नहीं थे और ऐसे में अरुण ने मेरी उस कहानी को मेरे शब्द दिए।

अरुण से मेरी दोस्ती इसलिए भी हो गई कि हम दोनों एक ही शहर जयपुर से हैं, तो एक दूसरे को मेल करने का सिलसिला शुरू हुआ और उस कहानी को जबरदस्त रेस्पोंस भी मिला, मेरा मेल हजारों मेल से भर गया, सभी लोग मुझसे दोस्ती और मुझे चोदना चाहते थे।

यदि वो चुदाई का सिलसिला यूँ ही चलता रहता तो मैं हमेशा पलंग पे नंगी ही पड़ी रहती लेकिन मैं दोस्ती के और मेल के मज़े लेने उन्हें जवाब देने में बिज़ी हो गई।

और फिर मुझे इस अरुण के सेक्सी सेक्सी मेल में रस आने लगा और सेक्स चैट में न जाने कितनी बार में गीली हो गई।

चूंकि एक गृहणी हूँ तो मेरा यह नियम है सख्ती से कि किसी को भी अपना फोन न. नहीं देती हूँ।

लेकिन साले इस अरुण ने इतनी ज्यादा सेक्सी इतनी ज्यादा सेक्सी चैट की कि मुझे उत्तेजना के उन पलों में टाइप करके मेसेज भेजना और पढ़ना रास नहीं आया और हम फोन सेक्स पर आ गए।

अरुण ऑफिस टाइम में अपनी कार में आ जाता और मैं सबके चले जाने के बाद अपना कमरा बंद कर के अरुण के साथ फोन पर ही चुदाई के भरपूर मज़े लेने लगी और पूर्ण निर्वस्त्र पड़ी होकर कान में इयरफोन लगा के अपने हाथों से ही अपने वक्ष और अपनी चूत का मर्दन करती रहती।

लेकिन सेक्स वो चिंगारी है जो एक बार सुलगने के बाद कब भयंकर आग में (काम वासना की आग) में बदल जाती है, पता ही नहीं चलता, यही मेरे साथ भी हुआ, चूंकि हम एक ही शहर से थे और वो हमेशा ही मुझ से मिलने की ज़िद करता रहता था पर मैं टालती जा रही थी।

लेकिन फोन सेक्स पर वो मेरे साथ जिस तरह के फॉर-प्ले का जिक्र करता, अलग अलग तरह से चुदाई करता, उसे सुन सुन कर मेरे मन में भी कहीं न कहीं उससे मिलने की चाहत जागने लगी।

वो भी शादीशुदा और परिवार वाला था तो मुझे यह डर भी नहीं था कि वो मेरे पीछे ही पड़ जाएगा और उसे फोन नम्बर देकर मैं उसे आज़मा चुकी थी क्यूंकि अरुण खुद मुझे हर कभी फोन नहीं करता था, जब मैं उसे मिस काल देती, तभी वो फोन करता था, मुझे उसकी यह बात पसंद आई।

फिर हमने मिलने का निश्चय किया और हम जयपुर के एक शॉपिंग माल में मिले।

मैं वहाँ शॉपिंग के लिए गई थी, अरुण से रु-बरु मिलना बहुत ही उत्तेजक लग रहा था।

मैंने उसे अपने बहुत से फ़ोटो मेल किये थे, इसलिए वो मुझे तुरंत ही पहचान गया, और मैंने भी उसके बहुत से फ़ोटो देखे थे तो समझ गई कि यही है मेरा नया हीरो, उसका व्यक्तित्व बहुत खुशनुमा और आकर्षक था और मैं भी कुछ कम नहीं हूँ, वो मुझे देखते ही फ़िदा हो गया।

उसने जानबूझ कर मुझ से हाथ मिलाया, मैं मर्द की जात को भली भांति जानती हूँ, वो किसी न किसी बहाने औरत को छूना चाहते हैं, यही उसने भी किया।

फिर हमने एक जगह सॉफ़्टी आइस क्रीम खाई, वो एकटक मुझे निहारे ही जा रहा था, और में उसकी इस स्थिति के मज़े ले रही थी, कभी अपने बालों को झटक के और कभी अपनी ड्रेस ठीक करके !

फिर मैंने उसके और मज़े लिए मैंने सॉफ़्टी प्र ऐसे जीभ फिरानी शुरू की जैसी कि लंड के सुपारे पे फिराते हैं और उसे ऐसे चूसने लगी जैसे ब्लू फिल्म्स में लंड को चूसते हैं।

वो भी समझ गया और मुस्करा कर मेरे गाल दबा के बोला- तुम सॉफ़्टी ऐसे ही खाती हो?

मैं इतरा कर बोली- अब ऐसी ही आदत पड़ गई है।
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !

और ये कहते हुए पूरी सॉफ़्टी को निगलने का उपक्रम किया, वो पागल ही हो गया।

और मैं उसकी हालत देख कर हंस पड़ी। इस प्रयास में मेरे होंठ पर काफी सारी सॉफ़्टी लग गई, मैं उसे साफ़ करती, उससे पहले ही अरुण ने खुद अपनी उंगली मेरे होंठों पर रख दी और उत्तेजक तरीके से मेरे होंठों को दबाते हुए और मसलते हुए पूरी सॉफ़्टी साफ़ कर दी।

उसका यह मादक स्पर्श बहुत ही उत्तेजक लगा मुझे, और मुझे अपनी चूत तक में हलचल महसूस हुई, मेरे होंठों की पूरी क्रीम उसकी उंगली पर लगी हुई थी, मैंने उसे साफ़ करने के लिए उसे नेपकिन दिया लेकिन उसने बहुत ही कामुक अंदाज़ में उस उंगली को अपने मुँह में डाल लिया और ऐसे चूसा जैसे उसने मेरी गीली चूत में अंदर तक उंगली घुसा कर चूत के रस में संधी हुई अपनी उंगली को चूसा हो।

उसका यह कामुक अंदाज़ देख कर मेरे तन बदन में सिरहन सी दौड़ गई और मुझे लगा कि अब मुझे चलना चाहिए वरना इस बन्दे के साथ कुछ देर और रुक गई तो यह मेरी पूरी कच्छी गीली कर देगा।

मैंने कहा- अब मुझे चलना चाहिए!

और वो मुझे अपनी कार में घर छोड़ने को बोलने लगा लेकिन मैं उसे अभी इतनी जल्दी अपना घर नहीं बताने वाली थी, इसलिए मना कर दिया और ऑटो करके घर आ गई।

अरुण मेरा बहुत दीवाना बन गया था, यह बात तो मुझे उसके फोन सेक्स और उसकी बातों से मालूम ही थी लेकिन इस मुलाक़ात के बाद हुआ यह कि मैं उसकी ज्यादा दीवानी बन गई।

उसके व्यक्तित्व से अब मैं बहुत ज्यादा प्रभावित हो चुकी थी, उसमें सेक्स आकर्षण के अलावा सेन्स ऑफ़ ह्यूमर भी बहुत अच्छा था, उसने मुझे उस मुलाक़ात के दौरान खूब हंसाया भी और यह बात तो आप लोगों को भी मालूम होगी जो उसकी कहानियाँ अन्तर्वासना पर पढ़ते हैं, अरुण की कहानियों में सेक्स के साथ हास्य का भी तड़का रहता है।

अब वो मुझसे अकेले में मिलने की ज़िद करने लगा, मर्द की जात ऐसी होती है कि उनका मन सिर्फ सेक्सी बातों, मेल मुलाक़ात, छूने, चूमने से नहीं भरता, उन्हें सेक्स चाहिए, और यहाँ तो ऐसा मामला था कि मैं खुद भी अब उसके साथ सम्भोग के मज़े लेना चाहती थी,

अब बस हमे मौके और जगह की तलाश ही थी।

और वो मौका ऐसा मिलेगा और हम ऐसी अजीबो-गरीब स्थिति में सेक्स करेंगे, यह हमने सोचा ही नहीं था।

हुआ यूँ कि मुझे अजमेर यूनिवर्सिटी में किसी छोटे से काम से अजमेर जाना था, यह बात मैंने उसे बताई थी कि मैं फोन पर नहीं मिलूँगी।

जयपुर से अजमेर ज्यादा दूर नहीं है, और मेगा एक्सप्रेस हाइवे की वजह से आने जाने में टाइम भी नहीं लगता, मुझे उम्मीद थी कि मैं अपना काम निपटा कर 7-8 घंटे में वापिस भी आ जाऊँगी, पड़ोसन को बोल दिया था कि वो स्कूल से आने के बाद बेटे को कुछ देर संभाल लेगी।

जब उसे यह बात पता चली तो वो बोला- मैं तुम्हें अजमेर ले चलता हूँ, कार से तो हम और भी जल्दी वापिस आ सकते हैं।

यह बात मुझे जंच गई, हालांकि मुझे यह अंदेशा था कि वो कार में मेरे साथ कुछ गड़बड़ कर सकता है, लेकिन दोस्तो, मेरा खुद का मन ही मचल रहा था अब, तो मैंने उसे हाँ कर दी और सुबह बेटे को स्कूल के लिए रवाना कर के मैं खुद तैयार होने लगी।

मैंने अपने आप को आईने में देखा, भगवान ने मुझे बहुत ही सुन्दर बनाया है, मेरा बदन सेक्सी और फिगर तो मर्दों की जान लेने वाला है, मेरा बदन 34-26-36 है, गोल चेहरा, फूले फूले गाल, जिसे अक्सर सेक्स के समय लोग बहुत ज्यादा खींचते हैं, गोरा रंग, काले बाल और नीली आँखें !

मैंने देखा है कि लोग, चाहे मर्द हो या औरत, मैं जब भी बाहर जाती हूँ, मुझको ही देखते रहते हैं। मुझे पता है कि जब भी मैं चलती हूँ, मेरे गोल गोल चूतड़ बहुत ही प्यारे सेक्सी अंदाज़ में मटकते हैं और मेरी तनी हुई चूचियाँ तो सोने पर सुहागा हैं जो किसी भी मर्द को पागल बना देने के काबिल हैं।

और सब से खास बात, मैं हमेशा ही अच्छे, मेरे सेक्सी बदन को सूट करने वाले कपड़े पहनती हूँ। मैं अपना बदन ज्यादा नहीं दिखाती, पर जितना भी दिखता है, आप समझ सकतें है कि क्या होता होगा। मैं मन ही मन मुस्करा देती हूँ जब मर्द लोग चुदाई की भूख अपनी आँखों में लिए और लड़कियाँ, औरतें जलन से मुझको देखती हैं। मैं भगवान को हमेशा बहुत बहुत धन्यवाद देती हूँ कि उसने मुझे इतना सुन्दर बनाया और मैं हमेशा अपने शरीर का ध्यान रखती हूँ, मैं रोज़ योग करती हूँ और जरूरी कसरत करती हूँ ताकि मेरा बदन हमेशा ऐसा ही रहे।

क्यूंकि चुदाई मुझे बेहद पसंद है और आज तो मुझे जाने के पहले से साफ़ साफ़ पता था कि कुछ न कुछ तो होगा, यह मुझे अंदेशा था, इसलिए मैंने अरुण की सुविधा के लिए उस दिन नाड़े वाले सलवार की बजाये इलास्टिक वाली लेगिंग पहनी, जो आसानी से खिसक सकती थी, ऊपर एक ढीला सा टॉपर डाल लिया और अपनी ब्रा का सबसे पहला वाला हुक लगाया ताकि अरुण यदि रास्ते में मेरे वक्ष मसलना, दबाना चाहे तो न उसे कोई परेशानी हो न मुझे।

परफ्यूम लगाने के लिए उसने मना किया था क्यूंकि इसकी खुशबू उसके जिस्म में काफी देर तक रह सकती थी, जो वो नहीं चाहता था।

पूरी तरह से टिप टॉप हो कर मैंने अपने आप को शीशे में निहारा, मैं मस्त लग रही थी, फिर गॉगल लगाया।

उस दिन जयपुर में सुबह से ही बारिश का मौसम हो रहा था, घने बादल छाये हुए थे और दिन में भी अँधेरे का ही अहसास हो रहा था, हल्की हल्की बूंदा बांदी तो शुरू भी हो गई थी।

मैंने मन ही मन सोचा कि अच्छा है कि अरुण की कार से जा रही हूँ, ऐसे ख़राब मौसम में बस या ट्रेन से जाने में परेशानी होती

और फिर रास्ते में कुछ सेक्सी सा होने की उम्मीद मेरे तन-बदन में आग लगाए हुई थी।

पास की चौराहे पर पहुँच कर उसे फोन किया, वो तुरंत ही आ गया शायद वो काफी पहले से ही आस-पास आ गया होगा।

अरुण मेरा जबरदस्त दीवाना बन गया था पिछले 5-6 महीनो से।

मैं जैसे ही कार में उसके पास बैठी, उसने मेरे गाल चूम के मेरा स्वागत किया, बोला- बहुत सुंदर और सेक्सी लग रही हो।

मैंने उसे उसकी सीट पर धकेलते हुए कहा- प्लीज़ चलो यार, पहले शहर से बाहर तो निकलो !

और हम चल पड़े।
इसके आगे की यात्रा अगले भाग में।

अरुण- [email protected] gmail.com
आपकी शालिनी- [email protected]
शालिनी की फेसबुक आईडी [email protected]

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