एक सोची समझी साजिश-1

(Ek Sochi Samjhi Sajish-1)

This story is part of a series:

अन्तर्वासना के पाठकों को मेरा नमस्कार। मेरी पिछली कहानियाँ
मेरी चाहत अधूरी रह गई
और
मामा की बेटी से जाने अनजाने
को आपने बहुत सराहा, इसके लिए आप सबका दिल से आभारी हूँ। यह कहानी मेरे और मेरी एक दूर के रिश्तेदार की बेटी के साथ घटी घटना पर लिखी है।

बात बीते वर्ष दिसम्बर की है, मैं अपनी बुआ जी के बेटे की शादी में गया हुआ था। मैं शादी से एक हफ्ते पहले ही पहुँच गया था। अतः मेहमानों के रहने व खाने पीने का बंदोबस्त मुझे ही करना था और मैं अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहा था।

पर शादी वाली रात को शायद किस्मत मुझ पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान थी। शादी से एक दिन पहले वो हसीना बुआ जी के घर आई जिसे मैं एक बार देखा तो अपलक देखता ही रह गया। लम्बाई 5’2″, कमर तक लंबे बाल, 34-28-34 की मस्त फिगर, किसी बूढ़े की पानी निकल देने को काफी था।
उसका नाम सोनी (नाम बदला हुआ) था। मैंने अपने बुआ जी की बेटी और अपने मामा जी की बेटी से उसके बारे में जरुरत लायक जानकारी मालूम की, और फिर मामा की बेटी से कहा की किसी भी तरह से मेरी उस से दोस्ती करवा दो।

इस पर मामा की बेटी मुझसे गुस्सा होते हुए बोली- हाँ हाँ, जाओ न उसी से दोस्ती करो, मुझसे तो मन भर गया है न अब?
(मेरी पिछली कहानी में मेरे और मामा की बेटी के संबंधो का जिक्र है, उसे पढ़ें)

मैंने उसे मनाते हुए कहा- नहीं मेरी जान, तुमसे मेरा मन कभी नहीं भर सकता। वो तो बस हव भाव से थोड़ी अच्छी लगी, इसीलिए कहा कि उससे दोस्ती करवा दो।

कुछ देर तक मान मनौवल करने के बाद वो राजी हो गई और मेरी सोनी से मुलाकात करवा के दोस्ती भी करवा दी।
अब तो मेरी खुशी का ठिकाना ना था। मैं हर पल सोनी के आसपास रहने की कोशिश में रहने लगा, वो भी मेरे ही आसपास रहने की कोशिश करने लगी। उसकी आँखों में एक अजब सी चाहत झलक रही थी, जैसे वो कुछ कहना चाह रही हो।

रात बीतने पर जब ज्यादातर लोग सोने चले गए तो मैंने मामा की बेटी से आँख बचा के सोनी को छत पर आने का इशारा करके ऊपर चला आया।
कुछ मिनटों में ही सोनी भी मेरे पास थी। जैसे ही वो मेरे पास आई, पता नहीं मुझे क्या हुआ, मैं बोल पड़ा- आई लव यू! I Love You…

पर इसके बाद तो मेरी सिट्टीपिट्टी गुम हो गई कि यह मैंने क्या कह दिया, कहीं उसने शोर मचा दिया या किसी को कह दिया तो मेरी इज्ज़त की वाट लग जायेगी।
डर के मारे मैं उसकी तरफ पीठ कर के खड़ा हो गया, तभी अचानक वो हुआ जिसकी मैंने कल्पना भी नहीं की थी, वो मेरे पीठ से लिपट गई और कहने लगी- विराज, मैं भी तुम्हें चाहने लगी हूँ, जब से तुम्हें देखा है, तब से मेरा मन किसी काम में नहीं लग रहा है।

मैं भी उस से लिपट गया और उसके माथे को चूमते हुए बोला- पगली, फिर बताया क्यों नहीं?
और मैं उसके होठों पर अपने होंठ टिका दिए पर उसने मुझे रोक दिया- अभी नहीं, कोई आ जायेगा।
सोनी बोली।

मैं बोला- कोई नहीं आएगा इतनी ठण्ड में ऊपर, प्लीज!
और उसके होठों और चेहरे को चूमना शुरू कर दिया। वो भी मुझसे कस कर लिपट गई और मेरा साथ देने लगी।
मैं उसकी पीठ सहला रहा था और धीरे धीरे अपने हाथ को सरकते हुए उसके बूब्स पर टिका दिए। जैसे ही मैंने उसके बूब्स को छुआ, उसके और मेरे शरीर में एक करेंट सा दौड़ गया। उसका विरोध ना पाकर मैं उसके दोनों बूब्स को बारी बारी से सहलाने और दबाने लगा। अब तक वो भी सामान्य हो चुकी थी और मेरा साथ देने लगी थी।

थोड़ी देर तक चुम्मा-चाटी करने के बाद उसने मुझे रोक दिया और कहा- ठण्ड लग रही है, चलो नीचे चलते हैं।

हम दोनों नीचे आ गए और वो अपनी माँ के पास सोने चली गई।
दुबारा उससे मिलने का कोई उपाय न देख मैं भी सोने चला गया।

अगले दिन शाम तक मैं व्यस्त रहा। बारात की तैयारियाँ, सारे विधि व्यव्हार सम्पन्न होते होते शाम हो गई पर तब तक सोनी मुझे एक बार भी नज़र नहीं आई।
मैं थोड़ा परेशान हो गया की कहीं किसी को रात के बारे में कुछ पता तो नहीं चल गया।
टेंशन में इतनी ठण्ड में भी मेरे पसीने छूटने लगे।

तभी मेरी बुआ जी ने कहा- अब बारात निकलने ही वाली है, जल्दी जा के तैयार हो आओ।

मैं तैयार होने कमरे में चला आया तभी मेरी बुआ जी भी मेरे पीछे कमरे में आइ और बोली- बेटा ऐसा कर, फूफा जी से बाईक की चाभी ले ले और सोनी को अपने साथ ले आइयो।
सोनी का नाम सुन कर मैं उनसे झट से पूछा- क्या हुआ उसे, वो ठीक तो है ना?

बुआ बोलीं- नहीं, उसके पेट में थोड़ा दर्द है, हो सकता है कि वो ना जा पाए, अगर वो आने से मना कर दे तो उसका ख्याल रखने के लिए तू रुक जाना।

‘आप बिल्कुल भी चिंता न कीजिये बुआ जी!’ मैं बोला- मैं हूँ ना, सब संभाल लूँगा। वैसे अभी वो है कहाँ?

‘वो अपने कमरे में ही है, जा एक बार उस से मिल ले, वो जा पायेगी या नहीं यह भी पूछ लेना!’ कह कर बुआ जी चली गईं।

मैं सोनी को ढूंढते हुए उसके कमरे में पहुँचा, देखा कि वो बिस्तर पर लेटी है, रजाई ओढ़ रखी है। मैं दौड़ कर उसके पास पहुंचा और उसकी तबियत के बारे में पूछने लगा, तभी उसने एक थप्पड़ मुझे खींच के लगाया और रोने लगी- तुम्हें मेरा जरा भी ख्याल है, बस बोल दिया ‘आई लव यू’ और हो गया। मतलब निकल गया और गायब हो गए। सुबह से ढूंढ रही हूँ पर एक बार भी दिखाई नहीं दिए।
सोनी रोते रोते मुझसे लिपट गई- तुम्हें पता भी है, मैं कितना परेशान हो गई थी, कहाँ हो?

मैंने उसे प्यार से चुप करते हुए सारी बातें बताई कि मैं तैयारियों में व्यस्त था, तब जा कर कहीं वो मानी।

फिर मैं उससे नाराज होते हुए बोला- तुम भी तो एक बार भी नहीं आई देखने कि मैं किस हाल में हूँ।

वो बोली- हाय मेरे राजा, तेरी तो नाराजगी में भी प्यार झलकता है। मैं तो सुबह से तुम्हें ढूंढ रही थी पर जब तुम नहीं दिखे तो पेट दर्द का बहाना बना कर बिस्तर पकड़ लिया।

‘क्या?’ मैं आश्चर्यचकित रह गया- तुमने बहाना बनाया था कि तुम्हारे पेट में दर्द है और तुम बारात नहीं जाओगी?

‘प्लीज तुम भी किसी तरह कोई भी बहाना बनाकर रुक जाओ।’ वो रुआंसी होते हुए बोली- कल तो मैं चली ही जाऊँगी, तो जाने से पहले तक मैं अपना सारा समय तुम्हारे साथ बिताना चाहती हूँ।

‘ठीक है…’ मैं बोला- बस तुम एक काम करो, अगर तुमसे बुआ जी या कोई भी पूछे तो कह देना कि तुम बारात नहीं जाओगी। पेट दर्द अभी तक ठीक नहीं हुआ है। बाकी मैं संभाल लूँगा।

‘ठीक है!’ वो बोली और मेरे होठों पर एक प्यार भरा चुम्बन दिया। फिर मैं उसके कमरे से निकल बुआ जी के पास गया और उन्हें बताया कि सोनी की तबियत ठीक नहीं हुई है और वो बारात नहीं जा पायेगी।

बुआ जी बोलीं- तो बेटा, तू उसके साथ घर पर ही रुक जा!

मैं झट से तैयार हो गया और कहा- आप बेफिक्र रहिये। और मैं खुशी में झूमता हुआ कमरे से बाहर निकला कि सामने मामा की बेटी को देख कर चौंक गया।
शायद उसने मेरी और बुआ की बाते सुनी थी…
प्रिये पाठको, यह एक लंबी कहानी है जो कई भागों में प्रकाशित होगी।
आप लोग कृपया मेल करके मुझे बताये कि अब तक का वाकया कैसा लगा।
माफ कीजिये कि मैंने कहानी को थोडा लंबा खींचा, पर यह सब बताना जरुरी था नहीं तो आगे चलकर कहानी का रस खत्म हो जाता। आगे के भागों में मैं बताऊँगा कि कैसे मैं कैसे एक सोची समझी साजिश का शिकार हुआ।
तब तक आप मुझे मेल करके बतायें कि कहानी कैसी लगी।
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