फ्री सेक्स कहानी: भाई की कृपा से दुधारू चुत मिली

(Free Sex Kahani: Bhai Ki Kirpa Se Dudharu Chut Mili)

अन्तर्वासना के सभी पाठकों को अल्फाज का प्रणाम. भाबियों आंटियों को स्पेशल प्रणाम.

जैसा कि लिखा है.. मैं अल्फाज भोपाल मध्य प्रदेश से हूँ, वैसे मूल निवास इटारसी मध्य प्रदेश है. जी हां और ये मेरा असली नाम नहीं है, पर ये नाम अच्छा लगता है. आप मुझे इसी नाम से जाने. अन्तर्वासना पर ये मेरी प्रथम कहानी है, उम्मीद करता हूँ, आपको अच्छी लगेगी और इस कहानी में एक प्रतिशत भी मिलावट नहीं है. ये पूर्णतः सत्य घटना पर आधारित है.

मैं एक एवरेज बॉडी का मालिक हूँ, लंड भी छह इंच से थोड़ा ज्यादा ही लम्बा है, जो कि किसी भी चुत को भी ठंडा करने के लिए पर्याप्त है.

ये बात उन दिनों की है, जब मैं भोपाल के गौतम नगर में रहकर अपनी इंजीनियरिंग के तीसरे साल में था. हमारे रूम में मेरे साथ चार और दोस्त भी थे. सन 2013 का वर्ष था. जिंदगी दोस्तों के साथ बड़े ही आराम से और भरपूर एन्जॉयमेंट के साथ चल रही थी, कमी थी तो बस चूत की. चाहिए तो थी, पर चूत के लिए ‘जानू शोना..’ वाले चोचलों में पड़ना भी नहीं चाहता था. शायद यही कारण था कि इंजीनियरिंग को भरपूर एन्जॉय कर पाया.

फिर जिंदगी में वो दिन आ ही गया, जब पहली बार चूत का आनन्द नसीब हुआ. हम तीन दोस्त सामने वाले रूम में बैठे थे, तभी हमारे पड़ोस में जो एक भैया रहते थे, वे भी हमारी ही तरह फन लविंग और बकचोद हुआ करते थे.

एक दिन अचानक वो हमारे रूम पर रात में ग्यारह बजे आये और बिना कोई भूमिका बनाये बोले- चूत चाहिए किसी को, हां तो चलो.

मैं अपनी वर्जिनिटी ऐसे ही वेस्ट नहीं करना चाहता था, पर मैं भी महाबकचोद था, सो बोल उठा- मुझे चाहिए.. चलो भैया.. किधर है?
मेरे अलावा और कोई जाने के लिए आगे ही नहीं आया. उनके रूम पे जाते समय रास्ते में भैया से पूछा- भैया बताओ तो कुछ?
भैया बोले- रूम पर तीन लड़कियां आयी हैं, कॉल गर्ल नहीं हैं.. बस शौकीन हैं. बस तू साइड में बैठकर हाथ फेरने लगना बाकी काम वो कर लेंगी.
मैंने कहा- ठीक है भैया, चलो.

मेरे मन में पहली बार चुदाई का एक्साईट्मेंट भी था और पहली बार का डर भी था, पर बिना चोदे रूम पे लौट जाता तो इज्जत मिट्टी में मिल जाती.. इसलिए आगे बढ़ना ही बेहतर समझा.

रूम पर पहुंचे, लड़कियों को देखकर मैंने भैया को इशारा कर दिया कि ये वाली चोदूँगा, भैया ने आँखों ही आँखों में इशारा किया कि ठीक है.

बातों का दौर शुरू हुआ, फिर भूख लगी सो सबने साथ में बैठकर खाना खाया, फिर सोने की तैयारी होने लगी.

माफ़ करना कहानी को दूसरी और मोड़ रहा हूँ, पर उसी वक़्त हमारे रूम के नीचे से एक शराबी, स्कूटी चुराने की कोशिश कर रहा था, वो पकड़ा गया तो हम सभी उसको पीटने चले गए.

लगभग आधे घंटे तक उसको पीटा, फिर पुलिस बुलाकर उसे पुलिस के हाथों सौंपकर वापस रूम आ गए. तब तक लड़कियां सो चुकी थीं, या यूं बोलूँ कि लेट गयी थीं.

भैया ने इशारा किया कि तू साइड में लेट जा.

जगह बहुत कम थी, फिर भी बीच में धंस गया. लेटने की पोजीशन कुछ इस तरह से थी कि पहले एक लड़की, फिर भैया का एक दोस्त, फिर मैं, मेरे बाजू में वो लड़की, जिसे मैंने पसंद किया था, फिर उसकी साइड में एक और लड़की और सबसे लास्ट में वही भैया, जो मुझे लेकर गए थे.

जो भैया के बाजू में लेटी थी, उसके बोबे इतने शानदार थे कि क्या बताऊं. ये बात मैंने भैया को बता दी थी. लेटने के बाद मैंने मेरी वाली के ऊपर धीरे से हाथ डाल दिया (माफ़ी चाहूंगा, इस सत्यघटना में मै किसी का भी नाम लेकर उसके लिए परेशानी खड़ी करना नहीं चाहता) उसने मेरा हाथ हटा दिया. पर मा-बदौलत कहां मानने वाले थे, हाथ फिर से डाल दिया. तभी भैया ने मेरा हाथ लेकर धीरे से बड़े बूब वाली लड़की के बोबे पे रखवा दिया. क्या बताऊं दोस्तों.. क्या मखमली बोबे थे. मैंने बड़े बूब वाली के शर्ट के अन्दर धीरे से हाथ डाल दिए.

पर वो मुझसे बोलने लगी- इतनी मस्ती आ रही है, तो अपनी वाली के दबा ले ना.
मैं बोला- दोनों के ही मजे लेने में क्या परेशानी है?

बाद में मेरा हाथ वापस अपनी वाली के ऊपर आ गया, धीरे धीरे में कपड़े के ऊपर से ही उसके मम्मों का आनन्द लेने लगा. वो बार बार मेरा हाथ अपने मम्मों से हटाती और मैं वापस रख लेता.

अब उसका विरोध कम होता जा रहा था. इसी बीच मैंने उसकी गर्दन पे किसिंग चालू कर दी और दूसरा हाथ पेट से होते हुए उसकी चुत की तरफ बढ़ चला. पहले तो उसने मेरा हाथ चूत तक जाने से रोक लिया, पर फिर धीरे धीरे वो भी बेचैन होने लगी.

जैसे ही चूत पर हाथ टच हुआ उसके मुँह से ‘आआअह्ह्ह..’ निकल गयी. लगभग पन्द्रह मिनट के इस कार्यक्रम में वो इतनी गरम हो गयी कि समझ लीजिएगा कि बस नाड़ा खुलने की देर थी.

इसके बाद जैसे ही मैंने कहा- सामने वाले रूम में चलो.

वो तुरंत ही वो सामने वाले रूम में आ गयी. सामने वाले रूम को केवल चुदाई के लिए खाली छोड़ा गया था. सामने वाले रूम में आते ही दोनों एक दूसरे को बेतहाशा किस करने लगे. थोड़ी ही देर में दोनों के कपड़ों ने तन का साथ छोड़ दिया. दोनों एक दूसरे के शरीर का आनन्द लेने लगे. उसे बिस्तर पे बैठाकर अपना लंड उसके मुँह में दे दिया. थोड़ी सी ना नुकर के बाद उसने लॉलीपॉप की तरह लंड चूसना शुरू कर दिया.

क्या बताऊं ऐसा लग रहा था कि आसमान में उड़ रहा होऊं. मेरे हाथ बराबर उसके मम्मों के साथ लड़ाई लड़ रहे थे. मैं उसे बिस्तर पर गिराकर में उसके मम्मों से खेलने लगा. उसके एक बूब को चूसते ही मेरे मुँह में कुछ लिक्विड सा आया.

मैंने पूछा तब उसने बताया- मेरा दूध है, मैं एक साल के बच्चे की माँ हूँ.

यकीन मानिये मेरे लिए सब कुछ पहली बार ही था, जैसे ही मेरे मुँह में लिक्विड महसूस हुआ, मेरी गांड ही फट गयी थी. भेनचोद ये क्या आ गया मुँह में. पर फिर सोचा, जाने दो चोदने पे ध्यान लगाओ और वापस मम्मों से खेलने लगा.

इस सबसे वो इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गयी कि मुझसे बोली- यार अब नहीं सहन होता.. अब डालो भी अंदर!

बस इतना सुनते ही मैंने उसकी चूत पे लंड लगाया और एक ही धक्के में पूरा अन्दर कर दिया. एक बच्चे की माँ होने के बावजूद उसके मुँह से चीख निकल पड़ी और फिर शुरू हुआ धक्कों का खेल.
थोड़े धक्कों के बाद उसने कहा- अब मैं ऊपर आती हूँ.

मेरे नीचे लेटते ही वो मेरे ऊपर चढ़ गयी, मेरे लंड को अपनी चूत पर सैट करके नीचे होने लगी और मेरा पूरा लंड उसकी चूत निगल गयी, फिर वो उछल उछल कर चुदने लगी. पूरे रूम में हम दोनों की साँसों की आवाज गूँज रही थी, चुदाई पूरे जोरों पर थी.

तभी दरवाजा एकदम से खुला और वो बड़े बूब वाली लड़की हमें छेड़ने के अंदाज में अन्दर आ गयी. वो कहने लगी- मैं लाइट चालू करूँगी, तुम दोनों यह क्या कर रहे हो, मुझे भी देखना है.

उसके एकदम से आने से हम दोनों का मूड खराब हो गया. मैंने उससे कहा- ठीक है तू कर ले लाइट चालू.. फिर तुझे भी मुझसे चुदना पड़ेगा.

इतना सुनते ही वो चुपचाप वापस दूसरे कमरे में चली गयी. उसके आने से एक फायदा हुआ जो एक्साइटमेंट में मैं कंडोम लगाना भूल गया था, मैंने उसे याद दिलाया कि हम बिना कंडोम के चुदाई कर रहे है. तो वो उठी और नंगी ही दूसरे कमरे में गयी और एक कंडोम लेकर आयी. अब उस लड़की या यूं कहूँ कि आंटी ने मेरे लंड पे कंडोम चढ़ा दिया और एक बार फिर धक्कमपेल चालू हो गयी.

थोड़ी देर बाद मैंने उससे कहा- मुझे डॉगी स्टाइल में चोदना है.
तो वो बोली- नहीं सीधे ही करो.

मेरा तो नया नया स्वाद था, तो ठीक है.. जो मिला, उसी में खुश.

मैंने उसे धकापेल चोदा लेकिन मेरा डिस्चार्ज ही नहीं हुआ और वो तीन बार डिस्चार्ज हो गयी.
तब उसने पूछा- क्या दवा लेकर के आये हो.
मेरे मना करने पर बोली- फिर इतनी देर कैसे?
मैं- मुझे नहीं पता, मेरा तो पहली बार ही है.
वो बोली- पहली बार..? हो ही नहीं सकता.
मैंने कहा- मत मानो.. मुझे क्या..

इतना कह कर फिर तेज तेज धक्के लगाने लगा. अब मुझे चूमने लगी थी, शायद उसे कुंवारा लंड मिलने की ख़ुशी थी.
लगभग बीस मिनट के धक्कों के बाद फाइनली मेरा डिस्चार्ज हुआ और दोनों पसीने से लथपथ, वहीं लेट गए.

थोड़ी देर रेस्ट करने के बाद हमें उठना पड़ा, क्योंकि अब उस कमरे में उसकी सहेली के चुदने की बारी थी. मैंने कंडोम निकाल कर वहीं रख दिया. फिर हमने कपड़े पहने और मैं अपने रूम में अपने दोस्तों क पास आ गया.

उस समय लगभग दो बज गए थे. आते ही मैंने दोस्तों को बताया- भाई झंडे गाड़ दिए आज तो.
वो सब एक साथ बोल उठे- भाग भोसड़ी के! हमें सिखाएगा.. चल निकल.
मैंने बोला- मत मानो.. माँ चुदाओ.

अभी मुझे रूम पे वापस आये तीन चार मिनट ही हुए थे, तभी पीछे से भैया आये. वे बोले- अबे लौड़े अल्फाज.. वो कंडोम तो फेंक देना चाहिए था.. चल उसको उठा और फेंक साले.
तब सबने भैया से पूछा कि क्या सच में इसने चोद दिया?
तब उन्होंने बताया- हां बे, और इसको बीच में डिस्टर्ब भी किया हमने, तब भी साला चुदाई में लगा रहा.

मैं उनके कमरे में गया, कंडोम फेंक के आया. तब तक भाई वहीं बैठ के बाकी बातें बता रहे थे कि कैसे उन्होंने बड़ी बूब वाली के मजे भी मुझे दिलवाये.

फिर मुझे याद आया कि मैं जिस लड़की को चोद आया, उसका नाम तो पूछा ही नहीं. फिर भैया ने मुझे बताया कि उसका नाम सकीना था.

उसके बाद हम आज तक कभी नहीं मिले ना ही कांटेक्ट करने की कोशिश की. बस एक दूसरे की अंडरस्टेंडिंग से मजे लिए बस.

ये मेरी पहली चुदाई की कहानी थी, उम्मीद है.. आप सभी को पसंद आयी होगी. इसके बाद भी बहुत चूतों का स्वाद लिया, वो सब अगली कहानियों में आप सबके साथ शेयर करूँगा.

आपको मेरी फ्री सेक्स कहानी कैसी लगी, मुझे जरूर बताइये. मेरा मेल एड्रेस है.
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