चूचियाँ कलमी आम-3

(Chuchiyan kalmi Aam-3)

This story is part of a series:

अब मुझे भी अहसास हो गया था कि अब यह चुदने को पूरी तरह तैयार है जो उसके मेरे सीढ़ी चढ़ने पर कहे शब्दों से और सिद्ध हो गया- बाबू, चल तो रही हूँ।

कहीं कमर में झटका न आ जाए नही तो क़लमी आम तो क्या संतरे की फांक भी नहीं मिलेगी, मैंने उसे बदन और लौड़े से रगड़ते हुये ढीला छोड़ दिया।
वो आगे आगे चूतड़ मटका मटका कर चलने लगी, कमरे की रौनक देख उसकी आँखें चौन्धिया गई।
कमरे में घुसते ही मैंने लैच लाक खींच दिया जिससे दरवाज़ा बंद हो गया।

चूँकि मैं बारिश में नमी के कारण कमरे में ऐ सी ऐसे ही चलते छोड़ गया था, ठण्ड से उसकी चूचियों की घुन्डियाँ तन गई और उसके बदन पर रौंगटे खड़े हो गए।

अचानक उसकी दूध जैसी चिकनी चमकती त्वचा चिकने खुरदरी सी हो गई।
मैंने सोचा कहीं कि यह बीमार न पड़ जाये, उसे सीधे धका कर बाथरूम में ठेल दिया, हाथ में पकड़े उसके और मेरे कपड़े वाशिंग मशीन में डाल पानी छोड़ पांच मिनट की रिन्सिंग पर लगा दिया।

जैसे ही मैं उसकी तरफ बढ़ा, उसने हाथ से रुकने का इशारा किया। वो बिल्कुल शावर के नीचे थी, अचानक मैंने शावर खोल दिया, वो उससे बचने बढ़ी तो मुझ से लपट गई।

मैंने कहा- कपड़े कैसे साथ घूम रहे हैं और तू शरमा रही है?

मेरे तने हुये जौकी को देखकर वो बोली- कौन नंगा है और कौन कपड़ों में?
मैंने झटके से जौकी खींचकर उसे भी वाश-टॅब में पटक दिया।
मेरा तना हुआ लौडा देखकर उसकी आँखों में भयमिश्रित चमक फ़ैल गई।

मैंने आगे बढ़कर उसे अपनी बांहों में भर लिया शावर बंद करके लिक्विड जैल उसके बदन पर मलने लगा।

क्या तराशा हुआ ठोस बदन था, सिर्फ़ उसके स्तन थोड़े से लटके थे जो उसकी खूबसूरती को और बड़ा रहे थे।
चिकना तना हुआ पेट बाहर को जेनिफर लोपेज़ की तरह शरीर के अनुपात से थोड़े बड़े निकले हुये चूतड़, चिकनी सुडौल जांघें किसी ख़ूबसूरत एंटीक कुर्सी के पाये सी मज़बूत और तरशी पिंडलियाँ…

वापस हाथ ऊपर लाया तो मुनिया के दर्शन हो गए, हाथी के सूंड के नीचे खुला खुला गुलाबी मुंह जैसा रंग, उससे लेसदार टपकती बूँद और अभी जैसे कल परसों में ही झांटे साफ़ कर के बाल बनाये गए हैं।

उसके बदन पर बाथिंग जेल लगाते उसके पूरे बदन का जायेज़ा लिया, जैसे ही मुनिया छूने लगा, उसने टांगें समेट लीं।

मैं उठा तो उसकी नज़रें झुकी हुई थी, उसने जेल मेरे हाथ से ले ली, अपने हाथों में उंडेल मेरे पूरे बदन पर मलने लगी।

मुझे भी के नर्म नर्म हाथ बड़ा मज़ा दे रहे थे लेकिन मेरे लौड़े के आसपास आती लेकिन छूती नहीं खैर !

फिर मैंने आगे बढ़कर वाश टब से कपड़े निकाल ड्रायर में डाल दिये और आकर शावर चालू कर उसके साथ खड़ा हो नहाने लगा।

उसके बाद उसे एक तौलिया दिया, जिससे उसने अपना बदन पौंछ लिया और स्तन के ऊपर बोबों को ढकते तौलिया बाँध लिया।

मैंने उसे खींच दिया और उसी तौलिये से अपना बदन पौंछने लगा।

फिर मैंने उसे बेदिंग-गाऊन पहना दिया। फिर मैं उसे कमर के नीचे से उठाकर कमरे में ले आया।
वापस आकर उसके सारे कपड़े लाकर कुर्सियों पर पंखे के नीचे फैला दिये इधर एसी उधर पंखा !

वो सब कुछ आईने में टुकुर टुकुर देख रही थी, उसकी पीठ मेरी ओर थी, मैंने बढ़कर उसे पीछे से बांहों में जकड़ लिया।

अचानक सीटी की आवाज़ से वो चौंक गई, काफ़ी पॉट में पानी गर्म हो गया था, मैंने आगे बढ़कर दो मगों में काफी ऊड़ेली, एक उसे पकड़ाया और उसे बिस्तर पर बिठा स्टूल लेकर एक कप मैं भी लेकर बैठ गया।

मैं उसको निहारे जा रहा था और वो सिमटे जा रही थी!
हम दोनों को ही समझ नहीं आ रहा था कि काफी ज्यादा गर्म है या हम!

मैंने कुछ कहना चाहा तो उसने उंगली के इशारे से मना कर दिया।

मेरी कॉफ़ी खत्म फ़िनिश हुआ तो उसने भी बड़ी सी घूँट भर ली।

मैंने उससे कप ले मेज़ पर रख दिये, पलटा तो वो अपने सीले कपड़ों को हाथ लगा रही थी।

गौरी बोली- जाने दे बाबू, बस बहुत हो गया!

लेकिन उसकी आवाज़ उसका साथ नहीं दे रही थी, मैंने आगे बढ़कर उसे पीछे से जकड़ लिया और बेदिंग गाउन से हाथ डाल उसके दोनों आम अपने कब्ज़े में ले लिये।

उसने अपने बदन को ढीला छोड़ कर अपने चूतड़ मेरे लंड पर गड़ा दिये।

मैंने उसके कान के पीछे अपने जलते होंठ रख दिये, मैंने उसे पलटाया और बेल्ट खोल कर गाउन नीचे डाल दिया।

उसने अपने दोनों हाथ सीने पे रख लिये, मैंने हाथ नीचे किये तो उसने मेरा तौलिया खींच दिया, मेरा तना लंड उसे सैल्यूट करने लगा।
वो भी कनखियों से मेरे लंड को निहार रही थी, उसे लेता हुआ मैं बिस्तर पर पीठ के बल लेट गया, उसे अपने ऊपर लेकर मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये लेकिन उसने बजाये चुम्बन करने के मेरे होंठ पर काट लिया और बोली- बाबू, तुम्हें तो मेरे पास से बू आती थी ना?
मैंने जवाब न देते हुये उसकी गर्दन को चूमा और एक हाथ से एक चूचे की गोलाई नापता निप्पल को उंगली और अंगूठे से पकड़ करके
हौले हौले मसलने लगा।
धीरे धीरे बदन को नीचे करके दूसरे चूचे के निप्पल को होंठ से काट कर दबा कर उसके गर्म बदन को अपने शरीर से रगड़ता नीचे बढ़ने लगा। जब उसके पेट पर नाभि के पास चूमा तो उसका पूरा शरीर कमान सा उठ गया।

मैंने मौका जान एक हाथ कमर से सरका कर बिल्कुल चूतड़ के नीचे रख दिया और पेडू को उठा कर जांघो की संधि पर जीभ रगड़ दी।

अब उसका शरीर अकड़ने और लरज़ने लगा।

मैंने और आगे बढ़ कर चूत की गुलाबी फांकों को खोल अपनी जीभ के नुकीले सिरे से उसकी मदन मणि क्लिटोरियस को पहले छुआ और जैसे ही थोड़ी उभर कर कड़क हुई दांतों से दबा दिया।

वो झटके से उठी और मेरे सर को हटाने की कोशिश करने लगी, उसके चूत से लसलसे नमकीन अंडे की गंध से मिलेजुले नारियल पानी से नमकीन स्वाद वाले फव्वारे छुट रहे थे।

मैंने उसे जीभ के चौड़े हिस्से से रगड़ कर चाटा तो वो जोर जोर से हिलने लगी।

अब मैं एक उंगली उसकी चूत में डाल कर धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा और जीभ से उसकी चूत में निर्वात सा बनाता चाटने चूसने
और काटने लगा जब तक कि उसका शरीर अकड़ कर जोर जोर से लरज़ने न लगा।

और फिर वो छटपटाई और शरीर को ढीला छोड़ दिया।

मैंने देखा उसका शरीर पसीने से सराबोर था और साँसें उखड़ी उखड़ी सी थी, उसकी धौंकनी सी चलती सांस पर उसके मम्मे तेज़ी से ऊपर नीचे हो रहे थे।
मैं ऊपर बढ़ कर अपने होंठ से दायाँ मम्मा और बायें बोबे को हाथ से गूंथने लगा। वो छूटने को थोड़ा छटपटाई तो दायें हाथ को मैंने पीठ के पीछे से निकाल कर उसका कन्धा पकड़ लिया।

अब जो मैं थोड़ा उठा तो मेरा तन्नाया लंड उसकी चूत के एन मुहाने पर था।

उसने आँखें खोलने की कोशिश की और फिर मूँद ली।

मैंने हल्का सा सरकाया तो लौड़ा चूत की लसलसी दीवारों से रगड़ता अपनी जगह बनाता तकरीबन तीन साढ़े तीन इंच पर रुक गया, उसने अपने हाथ के नाखून मेरी छाती पर गड़ा दिये।
अभी भी मेरा लौड़ा पांच साढ़े पांच इंच बाहर था, मैं समझ गया कि इस फ़ुद्दी की चुदाई और खुदाई बस यहीं तक हुई है, मैंने दूसरे हाथ को भी उसके चूतड़ के नीचे से निकाल कर कमर को पकड़ते लौड़ा थोड़ा बाहर खींचा, उसने कसमसा कर अधखुली आँखों से मुझे देखा मैंने एक ही झटके में बचा हुआ पूरा लंड उसकी चूत में पेल दिया।

उसके मुख से निकलती चीख को मैंने अपने होंठों से दबा दिया।

उसकी आँखों से दो आँसू लुढ़क पड़े और पैर पटकती न न करते दायें बायें गर्दन हिलाने लगी।
जब उसकी हरकत कुछ कम हुई तो मैंने थोड़ा सा पीछे खींच कर लौड़ा फिर उसकी चूत में पेल दिया, दो चार धक्कों के बाद अब जब में लंड बाहर खींचता तो वो खुद ही अपने चूतड़ उठा कर मेरा साथ देने लगी।

उसकी चूत बहुत टाईट थी, मुझे लगा कि ऐसे तो मैं जल्द ही झड़ जाऊँगा, मैं उसे अपने ऊपर लेता चित्त लेट गया और कंधे पकड़ कर मैंने उसके अपने ऊपर बैठा लिया।

अब वो मेरे लंड पर कूद कूद कर लंड ले रही थी।

थोड़ी देर बाद उसकी चूत में फिर संकुचन हुआ और मेरा लंड कस गया, वो मुझ पर कटे झाड़ सी गिर पड़ी।
मैंने उसे साइड में लेकर पीछे से तिरछे धक्के लगाने लगा एक हाथ से उसकी चूची भी मसलता जाता था।

उसने मुझे देखा और ऊपर आने का इशारा किया मैं जैसे ही हटा उसने अपने चूतड़ों के नीचे तकिया लगा लिया।

मैंने उसकी दोनों टाँगें कंधे पर रख तकिये को सेट किया और धक्के लगाने लगा।

अब वो आह आह की आवाजें निकालती कभी मुझे देखती, कभी खुद अपनी चूचियाँ उंगली और अंगूठे से रगड़ती।

अचानक उसने अपने दोनों पैर मेरी कमर के गिर्द जकड़ लिए और हवा में उठती चली गई।
सिर्फ उसका सर बिस्तर पर टिका था, अब जो नया अनुभव मुझे हुआ कि उसकी चूत ने लंड को पूरा जकड़ लिया, अब ऐसा लगा जैसे एक थरथराहट सी हो रही है और जैसे तेज़ी से कोई मेरे लंड की टिप पर कुछ चीज़ रगड़ती सी महसूस हो रही थी।
जैसे बड़ी सी आरेंज आइस बार को छोटे मुंह में घुसाने की कोशिश कर रहा है…
और मेरे माथे पर पसीने के बूंदे चुचुहा आईं और इस मज़े से मेरी हिम्मत ने भी जवाब दे दिया, मैंने अपने आपको वहाँ से हटाने को कोशिश की कि बाहर वीर्य की छूट कर दूँ।

उसने पहली बार आँखें खोली और इशारा किया कि अन्दर ही छोड़ दो।
ऐसा बिरला अनुभव !
मैं उस पर ही गिरता सा गया और चेतनाशून्य हो गया !
शास्त्रों में मैथुन या रति मूर्छा सिर्फ सुना था आज उसका प्रत्यक्ष अनुभव हो गया।
थोड़ा होश आया तो बारिश के बाद हल्का अँधेरा कमरे में था, गौरी अभी भी अपने चूतड़ के नीचे तकिये लगाए चित लेटी थी, मेरी एक टांग अभी भी उस पर थी, मेरी बिल्कुल भी उठने की इच्छा नहीं थी।

अचानक मेरे लौड़े पर गौरी का हाथ हल्का हल्का सा लंड की टिप को पौंछ सहला रहा था, लंड फिर से अपने आकार में आ रहा था।
उसने एक हाथ से लंड पकड़े पकड़े अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिये और अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी और जिस ढंग से उसने मेरी जीभ चुसाई और डीप किसिंग की, उसका जवाब नहीं !
फिर उसने अपनी दोनों टांगें जोड़े जोड़े सरकते मेरी गर्दन और छाती को चूमती चाटती मेरे निप्पल को ऐसे अंदाज़ में चूसा कि मेरा लंड
हिलने लगा।
उसका हाथ चूँकि लंड पर था जिसे उसने साफ़ महसूस किया और वो चूमती चाटती मेरे पेट से होती जांघों की जड़ों को चाटती।

मैंने सोचा भी न था कि लंड के मुंह पर उभर आई प्रीकम की बूँद को उंगली से साफ़ कर उसने लौड़ा गप से मुंह में भर लिया, दो बार जोर जोर से चूस कर बोली- मेरे आम खाने हैं और अपना केला नहीं खिलाना?
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चूँकि मैं पहले संभोग से ही इतना थका था कि यह अनुभव मुझे स्वर्ग का अहसास करा रहा था।

बहुत देर तक खेलने और लगातार मुंह से चूसने से लौड़ा काफ़ी फूल गया था लेकिन बड़ी मेहनत से अपने मुंह से लगातार चूसती चकोटती रही।
आखिर जैसे ही उसे लगा वीर्य आने वाला है, उसने मुंह हटा लिया और टट्टे सहलाने लगी।

दूध में उबाल आते आते जैसे रह गया, फिर उसने मुंह में लिया फिर वही प्रक्रिया दोहराई बिना वीर्य निकले जैसे मैं दो बार स्खलित होने के अहसास से भर गया। फिर उसे न जाने क्या सूझी कि उसने सामने पड़ी हाल्स-मैन्थल की गोली उठा कर मुंह में रख ली अब फिर उसने जो चूसना शुरू किया तो लंड पर ठंडी सी फुरेरी आने लगी, लंड अन्दर बाहर करते करते उसने जब मैंने बिस्तर पर मज़े से अपनी टाँगें पटकनी शुरू की तो उसने लौड़े को जड़ से पकड़ लिया और मुंह लंड पर तेज़ तेज़ चलाने लगी।
मुंह हटा कर उसने पहले मुझे देखा फिर तनाव और फूले लंड को देखा और मेरे सर के नीचे तकिया लगा दिया जिससे अब मैं अपने लंड और उसके मुंह को साफ़ साफ़ देख सकता था।

उसने फिर गप से मुंह में लौड़ा लिया और हाथ का दबाव कम करके उसने मुंह के अन्दर ही जुबान लंड के निचले हिस्से में फेरना शुरू किया।

अब मेरा कंट्रोल ख़त्म हो गया, मैंने उसके सर पर हाथ रखा कि वो मुंह न हटाये और वीर्य की मोटी से धार, मुझे ऐसा लगा जैसे उसके साथ मूत भी निकाल आया, उसने अन्दर से आते लावा को गटक लिया और उसे ठसका सा लगा और उसकी नाक से वीर्य और उसकी लार का मिला जुला मिश्रण बाहर सा आया जिसे उसने वापस अन्दर ले लिया।

उसके बाद फिर मुझे कोई होश नहीं रहा अपने इस अहसास में डूबता उतरता कब नींद के आगोश में समां गया।

पता नहीं बाहर से काकी और नौकरों की मिली जुली थोड़ी आवाज़ से नींद खुली तो देखा कि बाहर काकी की आवाज़ आ रही है, दूसरा दिन निकल आया था।
शायद मैंने अपने मोबाइल में देखा तारीख दिन और गौरी को लेकर मेरा अनुभव सब बदल चुके थे, मेरी किताब में कागज का एक पन्ना फड़फड़ा रहा था,
उस पर लिखा था
‘मुझसे मिले बगैर मत जाना, मैं परसों आऊँगी!’
पहली बार किसी की तुम्हारी…

और मैं उस पन्ने को हाथ में लिए फिर कल की यादों में खो गया, मेरे लंड ने उठ कर मेरा साथ देना शुरू कर दिया था।

अपनी अमूल्य राय और प्रोत्साहन शब्द या इसकी कमियों ख़ूबी से अवश्य अवगत कराएँ।

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