चोर से चूत चुदवाई

(Chor Se Chut Chudwai)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

दोस्तो, आज आपके लिए एक नई कहानी पेश है।
यह एक ऐसी कथा है जो बताती है कि जब काम दिमाग में चढ़ जाता है तो फिर और कुछ नहीं सूझता।
यह कहानी है इलाहाबाद के रहने वाली एक बहुत ही संभ्रांत घर की महिला जिसका नाम है सरोजिनी।
अब इलाहबाद में सरोजिनी को ढूंढने मत निकाल पड़ना क्योंकि सरोजिनी की पहचान छुपाने के लिए शहर का नाम बदल दिया गया है। बाकी कहानी में आने वाले सभी पात्रों के नाम असली हैं और सभी घटनाएँ बिल्कुल सच्ची हैं।

मैं, सरोजिनी, उम्र करीब 53 वर्ष, इलाहाबाद के एक अमीर और रसूखदार घर की मालकिन हूँ। पति के बहुत से कारोबार हैं, दोनों बेटे और मेरे पति मिल कर कारोबार संभालते हैं।
मगर जितना बड़ा कारोबार होता है, उतनी ही परेशानियाँ भी होती हैं।
इन्हीं परेशानियों की वजह से मेरे पति को हाई शूगर हो गई, शूगर का सबसे ज़्यादा असर उनकी आँखों, स्किन और सेक्स पावर पर हुआ। जो आदमी मुझे आधा पौना घंटा रगड़ता था वो इंसान अब इस हालत में था कि मैं जो मर्ज़ी कर लूँ मगर उसके अंग में कोई करार नहीं आता था, ज़िंदा मुर्दा एक समान था।

अब आप सोचेंगे के एक औरत होकर मेरी भाषा ऐसे कैसी हो गई?
तो सुनो, आज की बात नहीं है, करीब 3 साल पहले मैं अपनी किट्टी पार्टी में गई थी, वहाँ पर मेरी एक सहेली जो अपने पति की शुगर की प्रॉबलम के वजह से मेरी तरह ही काम अगन में जल रही थी, उसने मुझे बताया कि अगर ज़्यादा आग लगे तो अन्तर्वासना डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ लिया कर और अपने हाथ से ही अपनी वासना को शांत कर लिया कर!

अब पिछले तीन साल से मैं यही कर रही हूँ। जब घर पे कोई नहीं होता तो अपने लैपटाप पे अन्तर्वासना डॉट कॉम खोली, कोई अच्छी सी कहानी पढ़ी और कोई भी चीज़ जो मुझे ठीक ठाक लगी, अपने अंदर डाली और अपनी आग बुझा ली। किसी को पता भी नहीं चला, काम क्षुधा भी शांत हो गई, और बाहर मुँह मारने की भी ज़रूरत नहीं!
और जब पति को बताया तो उन्होंने भी बुरा नहीं माना, बल्कि मुझे एक प्लास्टिक का लंड ला कर दे दिया।

अब तो हालत यह हो गई कि पति देव मेरी चाटते, मैं उनका मरा हुआ लिंग चूसती, वो खुद उस नकली लंड को मेरी योनि में पेलते, और जब दोनों शांत हो जाते तो सो जाते।
कभी कभी मैं अकेली भी कर लेती, कभी कभी जब मेरा दिल करता तो पति के सामने ही कर लेती… वो भी हंस देते, उन्हें पता था कि मैं जो भी कर रही हूँ उनके सामने ही कर रही हूँ।

बेशक मेरी सेक्स की ज़रूरत पूरी हो रही थी, मगर फिर दिल में एक बात बार बार आती कि अगर कोई सच में ऐसा मर्द हो जिसका लंड सच में इस डिल्डो (नकली लंड) जितना तगड़ा हो तो उससे चुद कर क्या मज़ा आए!
मगर इसके लिए मुझे बाहर किसी और मर्द से चुदवाना पड़ता और वो मेरी बदनामी का कारण हो सकता था।
चलो खैर…

शाम को हम कभी कभार क्लब चले जाते थे, अब जब घर में बेइंतेहा पैसा हो तो पैसा अपने साथ बहुत सी बुरी आदतें भी लाता है। हमारे घर में सभी को शराब, सिगरेट की आदत थी। सभी मर्दों को और औरतों को भी।
घर की बहुएँ भी पीती थी, मैं तो सास थी, मैं कैसे पीछे रह जाती।
पति को जुआ खेलने की भी लत थी। सिर्फ यही नहीं और सब तरह की बुरी बातें भी हमारे घर में हो रही थी।
मुझे पता था के मेरे दोनों बेटों की बाहर भी सेटिंग थी और तो और मेरी दोनों बहुओं के भी बाहर यार रखे हुये थे, मगर हाई सोसाइटी में इन बातों को कोई महत्व नहीं दिया जाता।

दिवाली की रात थी, हम सब क्लब में थे, सबने उस दिन खूब दारू पी।
करीब ढाई बजे जब मुझे लगा कि मुझे ज़्यादा हो गई है तो मैंने अपने पति से घर चलने को कहा।
मगर उनके तो पत्ते फंसे थे, वो बोले- तुम जाओ घर, मैं तो अभी और खेलूँगा।

मैं क्या करती, बाहर आई, नशे में मैं लड़खड़ा रही थी, कार में बैठी और ड्राइवर घर तक ले आया।
कार से उतर कर जाने लगी तो लड़खड़ा के गिर पड़ी। ड्राइवर भागा भागा आया और आकार उसने मुझे उठाया- अरे मैम संभाल कर!
बेशक उसने मुझे सहारा देकर उठाया, मगर उसके हाथों के छूने से मैं पहचान गई कि साला मौके का फायदा उठा रहा है। वर्ना संभालने में कोई किसी औरत की छाती पकड़ता है।
मैंने उसका हाथ आराम से हटा दिया।

फिर एक बार सोचा, आज घर में कोई नहीं है, अगर मैं इसे ही अपने बेडरूम में ले जाऊँ तो?
फिर सोचा, नहीं नहीं, यह तो पता नहीं किस किस को बताएगा कि मैंने मेम साब की ली है।
छोड़ो इसे, मैं खुद को संभालती अपने बेडरूम में आ गई ए सी ऑन किया, बाथरूम में गई, अपने सारे कपड़े उतारे, पहले तो शावर के नीचे बैठे के खूब नहाई, फिर वापिस अपने कमरे में बिना कोई कपड़ा पहने ही आ गई!

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