ऑस्ट्रेलिया की बुलबुल रानी -1

(Australia Ki Bulbul Rani-1)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

अन्तर्वासना डॉट कॉम पर सेक्सी हिन्दी कहानियाँ पढ़ने वालों को चूतनिवास का नमस्कार! और लड़कियों के लिए मेरे लण्ड के 31 तुनकों की सलामी!
मैंने अपनी पिछली कहानियों में बताया था कि मुझे काम से तीन महीने के लिए ऑस्ट्रेलिया जाना पड़ा था, वहाँ एक हसीन लड़की से नैन (और बाद में लण्ड चूत भी) लड़ाने का मौका मिला जिसका मैंने अपनी आदत के अनुसार पूरा पूरा लाभ उठाया और वो सुंदरी मेरी रानी बन गई।
वहाँ क्या क्या हुआ था, यग कथा उसका ही वर्णन है।

हुआ यों कि वहाँ हमारी जान पहचान के एक सज्जन श्री शंकर प्रसाद अग्रवाल के बेटे की शादी का रिसेप्शन था जिसमें वहाँ रह रहे उनसे परिचित काफी भारतीयों को बुलाया गया था। पार्टी में बहुत से ऑस्ट्रेलियाई भी थे परन्तु भारतीयों की संख्या अधिक थी। अग्रवाल जी एक बिज़नेस मैन हैं और अच्छे धनवान हैं।
पार्टी शहर के बाहर एक मशहूर रिसोर्ट में रखी गई थी। कॉकटेल्स, स्नैक्स और खाना सभी का हाई क्लास इंतज़ाम था, कुछ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी रखा गया था जो दस बजे से शुरू होना था।
रिसोर्ट में एक बड़ा सा हॉल और उसके साथ लगा हुआ काफी बड़ा लॉन और स्विमिंग पूल में पार्टी थी, बहुत बढ़िया रोशनी की गई थी। सब कुछ अग्रवाल जी की हैसियत के अनुसार ही था।

शाम 8 बजे से लोग पहुँचने शुरू हो गए थे, करीब ढाई सौ मेहमानों का प्रबंध किया गया था। मैं और मेरी पत्नी जूसी रानी साढ़े आठ बजे पहुँच गए। जूसी रानी और महिलाओं के साथ गपशप में लग गई और मैं एक वाइन का गिलास हाथ में लेकर इधर उधर मंडराता हुआ अपने वाकिफ लोगों से हेलो हाय करने लगा।

कुछ देर बाद मैं हॉल से निकल कर बाहर गार्डन में चला गया क्योंकि काफी लोग वहाँ भी पार्टी का मज़ा ले रहे थे।
वहीं मेरी नज़र एक लड़की पर पड़ी जिसको देखते ही लण्ड में एक सुगबुगाहट सी हुई कि हाँ यह सुन्दरी चूत चुदक्कड़ हो सकती है इसलिए इस पर ध्यान देना चाहिए।

थोड़ा नज़दीक जाकर मैंने उसे गौर से निहारा, वो बेहतरीन खूबसूरती की मालकिन थी, पांच फुट छह इंच का क़द, छरहरा बदन और उम्र यही कोई 29 या 30 की… रंग इतना गोरा कि गोरी चमड़ी वाले ऑस्ट्रेलियाई भी फीके लगें।
गहरे काले रंग का पैंट सूट व हाई हील के कीमती जूते पहने वो गज़ब ढा रही थी, गले में एक पतली सी सोने की चेन से लटकता हुआ एक डिज़ाइनर पेंडल, हाथ में एक ड्रिंक का गिलास था, लगता था कि शायद रेड वाइन है, नाक नक्शा अति उत्तम ! बड़ी बड़ी आँखें, सुडौल सुन्दर बाहें और कन्धों तक लहराते हुए घने काले बाल ! मेकअप के नाम पर सिर्फ हल्के से कॉपर शेड की लिपस्टिक ! अकेली खड़ी ये क़यामत सब तरफ बिजलियाँ गिरा रही थी।

मैं तुरंत उसकी ओर लपका। यह तो निश्चित था कि बेपनाह हुस्न का मालिक यह पक्षी ज़्यादा समय तक आज़ाद न उड़ पायेगा। अगर मैंने देर की तो शिकारी बाज़ों से भरी इस में दुनिया कोई न कोई बाज़ इसको ले उड़ेगा।
उसके निकट पहुँच कर मैंने कहा- मैडम गुड ईवनिंग, मेरा नाम राज है!

हसीना ने शहद सी आवाज़ में मेरी ओर हाथ बढ़ाते हुए कानों में घंटियाँ सी बजाईं- गुड ईवनिंग राज जी। मेरा नाम निकिता है!
मैंने भी हाथ बढ़ा कर निकिता का नरम नरम मक्खन सा हाथ थाम लिया और कहा- निकिता जी… आपसे मिलकर बहुत अच्छा लगा… एक बात कहना चाहता हूँ..
निकिता- कहिये न… मुझे भी आपसे मिल कर अच्छा लगा!
मैंने अपनी ड्रिंक का एक सिप लेकर कहा- इस शहर के आदमी लोग बहुत बड़े इडियट हैं।
निकिता- ओह, रियली! आप ऐसा क्यों कह रहे हैं?

Comments

सबसे ऊपर जाएँ