साली की चूत चुदाई की कोशिश

(Sali Ki Choot Chudai Ki Koshish)

प्रिय पाठको, आपने मेरी साली की चूत चुदाई की पिछली कहानी
क्सक्सक्स फिल्म दिखा कर साली को मनाया चुदाई के लिये
पढ़ी, अब उससे आगे की कहानी पढ़ें!

बहुत दिनों के बाद ममता, मेरी साली, अपने मायके आयी थी; उसके पति प्रभात रंजन भी साथ आये थे।
कुछ दिनों के बाद हम लोग भी पूरे परिवार के साथ अपनी बीवी के मायके यानि मेरी ससुराल पहुँच गए।

मुझे प्रभात जी बेहद शरीफ और नेक दिल इंसान लगे। उनका ऑफिस खुल जाने के कारण दो दिन बाद ही चले गए और मैं खुश था कि कभी मौका मिला तो चौका मारुँगा।

एक दिन मौका मिल ही गया, ममता छत के ऊपर गीले कपड़ों को सुखाने रस्सी पर डाल रही थी और मैं छत पर ही संयोग से टहल रहा था। आँगन की तरफ से बेडशीट डालने के कारण उधर से ऊपर कोई देख नहीं सकता था कि छत के ऊपर क्या हो रहा है। मैं चुपके से ममता के पीछे से गया और जाकर उसे जोर से बांहों में पकड़ लिया और उसकी चूचियों को दबा दिया।

मुझे लगा कि पुराना प्यार पलट कर जवाब मिलेगा और ममता पलट कर आलिंगन में ले लेगी। पर ममता शांत रही और सधे शब्दों में आदेश रूप में बोली- जीजा जी, अब मैं किसी की अमानत हूँ भला होगा कि आप मुझे छोड़ दें।
मैंने सोचा कि लगता है इतने दिन हो गये हैं, तो साली भाव खा रही है, मैंने उसे और कस कर पकड़ लिया।

इतने में ममता ने अपना हाथ मेरे आलिंगन पाश में घुसा कर एक झटका दिया और मेरे आलिंगन से मुक्त हुयी, मेरी एक हाथ की कलाई पकड़ कर अपना एक पैर मेरे पैर में लगाते हुये दूसरे हाथ को मेरे गले के चारों तरफ लेते हुये पटखनी दे दी।
मैं हवा में लहराते हुये धड़ाम से सीमेंट की पक्की छत पर गिर गया।

उसने अपना छत के धूल से सना भीगा पाँव सीधे मेरे छाती के ऊपर रख दिया।
कहते हैं न धोबिया पाट से मुझे चारों खाने चित कर दिया।

यह सब इतना जल्दी हुआ कि मुझे संभलने का समय ही नहीं मिला; चोट लगी सो अलग।
घायल शेरनी की तरह दहाड़ते हुए वो बोली- आपको एक बार में समझ में नहीं आती? कैसे उस व्यक्ति को धोखा दूँ जिसने ससुराल में मेरा साथ दिया मेरी गलतियों पर पर्दा डाला।
मैंने घिघियाते हुये कहा- कहोगी… तब तो पता चलेगा।

ममता बोली- जानते हैं जीजू, शादी की रात सभी सुहागरात मनाते हैं; यह कोई नयी बात नहीं है। पर नया यह है कि कैसे एक पति ने अपने पहले से चुदी पत्नी का साथ देते हुये कुंवारी लड़की के साथ मनी सुहागरात में बदल दे। पहली रात का सपना हर लड़की पाल कर रखती है, चाहे उसके पहले से ढेर सारे अफेयर्स क्यों न हो। मैं भी उस हसीन पल से गुजरी, सब कुछ हुआ, मैं चुदी; बहुत दिनों के बाद चुदने के कारण दर्द भी हो रहा था; पहली मिलन की सिहरन भी थी; चुदने के बाद मैं उनसे लिपट गयी थी और उनके पूरे शरीर को अपने चुम्बनों से भर दिया था. उनके पूरे शरीर पर लिपस्टिक के दाग थे। पर उसके बाद मेरे चूत से निकले द्रव्य को सफेद तौलिये से उन्होंने पौंछा और मेरे कान में धीरे से फुसफुसाये- डियर आपका सील पैक पहले से टूटा था।

मैं गुस्से से पागल हो गयी और पूरे जोर से बोली- आप मुझ पर शक कर रहे हैं?
वो मुस्कुराते हुये बोले- मुझे कुछ नहीं कहना है परंतु कल जनानी (औरतें) लोग साफ सुथरा टॉवेल देखेंगी तो आपका क्या जवाब होगा?
जिसकी मैंने कल्पना नहीं की थी, वह यक्ष प्रश्न मेरे सामने खड़ा था। मेरी चोरी अभी पति ने तो कल सवेरे सभी औरतों को मालूम हो जाएगी।

मैं रोने लगी और सारे बात बताने लगी:
उन्होंने मुझे रोका और कहा- मुझे आपके भूत से कोई मतलब नहीं है और न ही मुझे आपके कहानी को जानने की इच्छा है। गलतियाँ सभी से होती हैं, मैंने आपके वर्तमान से शादी की है और आशा रखता हूँ कि भविष्य में हम दोनों एक दूसरे को धोखा नहीं देंगे।

मैं रो रही थी और उनसे कहा- नहीं… कभी नहीं! पर इस समस्या से कैसे निपटा जाये। और प्लीज आप मुझे आप न कहें, मैं आत्मग्लानि से मरी जा रही हूँ, मेरा बचपना था!

उन्होंने तत्काल अपनी तर्जनी मेरे होंठों पर रख कर कुछ भी बोलने से मना कर दिया और बोले- भूल जाओ उस वाकया को! बीता हुआ समय लौट कर नहीं आता।

जीजू आप तो मुझसे उम्र में रिश्ते में बड़े थे और आप रोकने के बजाये और सेक्स के लिये उकसाते रहे, मैं सहज तरीके से नहीं पटी तो ब्लू फिल्म दिखा दिखा कर पटाया। जानते हैं, उन्हें पता चल चुका है कि मेरा सील तोड़ने वाले आप ही हैं क्योंकि ऊपर वाले हरेक शब्द उनके हैं, हर बार वे यही कहते हैं कि बड़े का काम है सही रास्ता दिखाना, साली मुँह बोली बहन होती है, उसे सही रास्ता दिखाना चाहिए न कि घरवाली बनाने का सपना देखना चाहिए। यह जानते हुये भी वो मुझे यहाँ छोड़ कर गये हैं पर अभी भी आप सुधरने का नाम नहीं ले रहे।

मैं हकला कर इतना ही पूछ पाया कि उनको कैसे मालूम चला।

साली बताने लगी:
आपका छिछोरापन, आपकी आसक्ति मेरे ऊपर मेरी शादी के बाद भी दिखती थी. जब तब आप मेरे चूतड़ों को सहला देते थे।

ऊपर से एक दिन जब वो ससुराल आये हुये थे तो एक बक्से की ओर इशारा करते हुये बोले कि आपकी लव लेटर उस बक्से में सहेज कर रखी हुयी हैं, आशा करता हूँ कि आप इसे जितना जल्दी हो सके, नष्ट कर दें। उस समय मैं पसीने से नहा गयी थी। मुझे काटो तो खून नहीं था.
मैंने पूछा कि आपको कैसे मालूम कि इसमें खत हैं।
आपके हर खत से निकलती इत्र की खुशबू चीख चीख कर आपके गलत प्यार का बखान कर रहा है।
उसके बाद उन्होंने कहा कुछ नहीं… पर सुर्ख लाल आँखें सब कुछ बयाँ कर दी थी।

जानते हैं जीजू… सुहागरात की रात हम सब के लिए हसीन पल होता है, सोच सोच कर शरीर में सिहरन पैदा होने लगती है, चूत पिघलने लगती है… पर मैं दूसरी मुसीबत में थी, मैं रो रही थी और रोते रोते कह रही थी कि सभी औरतें क्या सोचेगी क्योंकि एक रिश्ते की चाची तो ताना मारते हुये कहते गयी थी कि बहू चने के खेत में चना तोड़ने तो नहीं जाती थी न।
मैंने जब उनसे ‘ना’ कही तो वह आगे चालू हो गयी कि ‘हाँ चलो अच्छा है… वरना आज की छोड़ियाँ चना तोड़ते तोड़ते कब गन्ना के खेत में अपना चना छिलवा आती हैं, पता ही नहीं चलता। एक मुद्दत हो गयी गाँव में कुंवारी बहुरिया के आये… सब तो पहले से ही खेली खिलायी आती हैं।

मैंने इन से पूछा- मैं क्या करुँ’ बताइये न प्लीज?
वे थोड़ा झल्ला कर बोले- थोड़ा रुको तो सही, मुझे सोचने का समय तो दो।
थोड़ी देर बाद पूछने लगे- अच्छा ये बताओ तुम्हारी महीना कब शुरु होगा?
मुझे गुस्सा आ गया कि ये क्या फालतू का प्रश्न लेकर बैठ गये मैं दूसरी उलझन में हूँ और ये… पर गुस्से पर काबू करते रुकते हुए मैं बोली- परसों!
उन्होंने कहा- ठीक है, तब आज हम लोगों ने सुहागरात नहीं मनाई… कल घर वालों से आप यही कहेंगी। आप यही कहेंगी कि वो कह रहे थे कि आज मैं थक गया हूँ सो कल करेंगे।

वही हुआ।
पर चाची ताना मारने से कहाँ रुकने वाली थी, कह ही डाली- क्यों रे प्रभात का इंजन फेल न न हो गया है?
सारी औरतें हँसने लगी।

दूसरी रात को भगवान का नाम ले रही थी कि आज कौन सा बहाना बनाना पड़ेगा कि इतने में मेरी छोटी ननद मेरे बगल में आकर लेट गयी और कहने लगी भाभी आज की रात आपको मुझसे ही काम चलाना पड़ेगा, भैया अपने दोस्तों के साथ शादी की पार्टी मनाने गये हुये हैं, कह कर गये हैं कि हो सकता है सुबह हो जाये, ममता को कहना कि सो जाये इंतजार न करे।
ननद आँख मारते हुये बोली- अगर आपको लेस्बियन में इंटरेस्ट है तो आपकी छोटी ननद पूरी तरह से तैयार है।
इस पर हम दोनों हँस पड़ी.
शायद यह बाते उसने माहौल को हल्का करने के लिये कही।

मैंने भी कहा- जब आपके भैया का लंड मिलेगा ही तो आप पर बुरी नजर क्यों डालना?
हम लोग खुलकर बात करने लगे। पर ननद रानी कि खोजी नयन कुछ तो ढूंढ रही थी। तकिया के नीचे रखे सफेद टॉवेल पर नजर पड़ते ही उसे खींच कर सर्च ऑपरेशन शुरु कर दी। रात की निशानी का कड़ापन कहीं नहीं था। वो बोली- क्या भाभी… पहली रात केवल क्रीज पर खड़े रख कर गुजर गया? न कोई बॉल न किया न कोई बैटिंग।
मैं सोच में पड़ गयी कि वह टॉवेल गया कहाँ।

अब हम ननद भाभी का हँसी मजाक भी चलने लगा, दोनों को कब नींद आयी, पता ही नहीं चला. सुबह के आठ बजे जब सासु माँ उठाने आयी तब जा कर नींद खुली। पर रात में ही ननद ने प्रॉमिस करवा लिया कि वह और उसकी सहेली रात में मेरे पलंग के नीचे सोने वाले हैं, अंपायरिंग करना है, पर भाई को पता नहीं चलना चाहिये।

रात हुई मेरे बेड को ननद रानी ने फिर से सुहागरात की तरह सजा दिया था। वो कमरे में घुसे कि मैं इशारे में बताने लगी कि बेड के नीचे कोई है।
उन्होंने इशारे में उत्तर दिया कि उन्हें पता है। फिर कान में फुसफुसाते हुये बोले कि जैसा मैं करुँ, केवल साथ देते जाना।

उन्होंने एक एक करके मेरे पूरे आभूषण को उतारा, कुछ को पलंग पर तो कुछ को जानबूझ कर पलंग के नीचे गिरा दिया। मेरे ब्रा और पैंटी को तो आधी साड़ी के साथ नीचे फेंक दिये कि नीचे लेटी मेरी ननदें उसको देख सके।
सर से मुझे चूमते हुये मेरे चूचियों के साथ अठखेलियाँ करने लगे दोनों चूचियों के ऊपर जहाँ पर सब की निगाहें पड़ सकें, जोर से सक करना शुरु कर दिया. जोर इतना था कि दोनों चूचियों पर नीला निशान पड़ गया, मैं तो दर्द से कराह उठी थी। यही क्रिया पेट पर तथा दोनों जाँघों पर भी किए, सभी जगह नीला निशान पड़ गया था। मेरा सिसकारी पूरे कमरे में गूँज रही थी।

जब जब वो निशान पड़ने के लिये जोर से सक करते, मैं दर्द से कराहती थी, नीचे अंपायरों को लगता कि कुंवारी चूत हलाल होने के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने मेरे दोनों पैरों को उठा कर अपना लंड मेरे चूत में पेल दिया तो वो बिना विघ्न बाधा के लंड अंदर तक जा पहुँचा। चूत के रस से उनका लंड सरोबार हो चुका था, मैं पेलाई का आनंद ले रही थी कि उन्होंने लंड बाहर निकाल कर गांड के नीचे तकिया लगा दिये जिससे मेरे गांड का छेद ठीक से दिखायी देने लगे फिर लौड़े को छेद के ऊपर टिकाया और जोर से चिकोटी काटी मैं दर्द से छटपटाते हुए बोली- हाय रे, दर्द कर रहा है, थोड़ा धीरे से नहीं कर सकते क्या? आराम से करिये ना दर्द कर रहा है.

वो मुस्कराये और इशारा किये ‘हाँ यही…’ और गांड में लंड को ठेल दिये. मैं फिर जोर से बोली- हाय रे… मर गयी… दर्द कर रहा है, थोड़ा धीरे और आराम से। रुकिये आराम हो जाये तब जल्दीबाजी नहीं, नहीं तो मेरा फट कर बिखर जायेगा। गांड तो मेरी कुंवारी थी तो जितना दर्द झिल्ली फटने में नहीं हुआ था उससे ज्यादा दर्द गांड में पहली बार लंड के घुसने से हो रहा था।
मैं दर्द से छटपटा रही थी, दोनों पैरों को पलंग पर पटक कर कह रही थी- अभी निकालिये इसको… बहुत मोटा औजार है आपका! प्लीज, इतनी बेदर्दी अच्छी बात नहीं… लगता है खून निकल जायेगा।

वो मुस्कुराते हुये कहे- पहली बार सब को थोड़ा दर्द करता है अच्छा तुम बस एक से बीस तक गिनो।
मैं तुनकते हुये बोली- आप पेल रहे हैं कि गिनती सिखा रहे हैं?
वो बोले- गिनो तो सही।
मैंने गिनती शुरु की, अंत होते होते बे बोले- अब कैसा लग रहा है?
मैं बोली- अब आराम लग रहा है।

तो फिर उन्होंने पेलायी शुरु कर दी। हौले हौले मुझे भी मजा आने लगा और चूतड़ उचका उचका कर लंड लेने लगी। जब खलास हो रही थी तो उन्होंने इशारा किये जोर से बोलने के लिये, मैं जोर से बोली- अब बस, मुझे कुछ हो रहा है। शायद कुछ निकल रहा है गरमा गरम… मेरी जांघों पर फैल जायेगा. जल्दी हटिये… लगता है पूरा बिस्तर खराब हो जायेगा।

वो भी राजधानी की रफ्तार से धकाधक पेलना क्या गांड मारना जारी रखे, फिर भड़भड़ा कर मेरे ऊपर गिर गये।
कुछ समय बीत जाने के बाद उजले तौलिये से पौंछा तो फिर सवालिया आँख से पूछा- मेन्सीस नहीं हुई हो क्या?
मैं फिर रोने लगी यह यह सोच सोच कर कि कल क्या कहूँगी गाँव की औरतों को। अब तो कोई बहाना भी नहीं है, नीचे की अंपायर तो पूरा ढिंढोरा पीटने के लिये तैयार हैं। मैं सुबक रही थी पर नीचे वाली कन्यायें कुछ अलग ही समझ रही थी।

सुबकते हुये मैं कब सोयी पता नहीं चला. पर थोड़ी देर बाद उनका हाथ फिर शरीर पर रेंग रहा था, मैं अलसाई सी उठी पर मुझे लगा कि मैं वर्षों से प्यासी हूँ, उनके लंड के खड़ा होने से पहले ही मेरी चूत पूरी भीगी हुयी थी।
वो उठे, मेरे चूतड़ को ऊपर उठाते हुए मेरे चूतड़ के नीचे तौलिया रख दिया, मैंने इशारे में कहां कि अब भी मेन्सिस नहीं हुई है।
वो कुछ बोले नहीं पर मुस्कुराते रहे, इशारे से कहे ‘मुझ पर भरोसा रखो, सब मुझ पर छोड़ दो।’

वे मेरे चूत में लंड घुसा कर शांत भाव से स्थिर रहे और जेब से पॉउच निकाल कर संधि स्थल पर गिरा दिया कुछ ठंडा ठंडा चिप चिपा पदार्थ मेरे बुर पर से होते मेरे चूतड़ों को भिगा रहा था। ठंडापन मैं चूतड़ों के नीचे भी महसूस कर रही थी।
मेरे ध्यान को वहाँ से हटवाते हुये उन्होंने पेलायी फिर से शुरु कर दी।

पलंग की चरमराहट और मेरी सीत्कारें तो मुझे चरमोत्कर्ष पर ले जा रही थी. पर यही मेरे पलंग के नीचे घुसी ननदों की हालत खराब किये हुये थी।

बाद में दोनों ने बताया कि हर चुदायी के साथ उन दोनों ने भी लेस्बियन सेक्स कर चूत की खाज शांत की थी और अपना अपना चूत रस मेरी पैंटी और ब्रा में पौंछा था।

चुदायी के बाद उन्होंने तौलिया खींच कर दिखायी सब जगह खून का दाग था। तौलिया को सींचते हुये बेडशीट को भी सींच दिया था।
मैं धीरे से बोली- पति देव, इतना खून नहीं निकलता है।
वो बोले- तुमको बचाने के जोश में पैथो लैब से कुछ ज्यादा खून ले आया था। कल शाम दोस्तों का पार्टी तो बहाना था, असल में खून का ही जुगाड़ कर रहा था। अधिक हो गया कोई बात नहीं कोई ध्यान नहीं देगा। कोई कसर रहेगी तो नीचे बीबीसी की खबरी है न… तुम्हारे उठने से पहले पूरे घर को चुदायी की दास्तान मिर्च मसाले के साथ मालूम रहेगी।

मैं पूरी नंग धड़ंग उनसे लिपट कर एक छोटी बच्ची की तरह रोने लगी थी, सुबकते सुबकते कब उसी हालत में सो गयी, उन्होंने कब उठ कर मुझे चादर ओढा दी, पता भी नहीं चला।
हुआ वही… हम लोगों के उठने से पहले दोनों ननदें बाहर जा कर रात का पूरा वृतांत घर में कह चुकी थी।

घर की नौकरानी आकर मुझे उठाने लगी तो थोड़ा चादर हटा कर देखी. मुझे पूरी नंगी देख धीरे से मुझे जगाया और तैयार कर बाहर ले गयी और साथ में तौलिया आदि भी।
उसने मुझे जल्दी जल्दी तैयार कर नहाने में मदद की, मैंने भी मना नहीं की, पति की इच्छा के अनुकूल मैं भी चाहती थी कि वो भी पूरे शरीर पर पड़े नीले निशान को देखे, उस पर उसने खूब चुटकी ली, मैं भी एक का दो सुनाती रही।

नहाने के बाद मैंने पीले रंग की साड़ी पहनी, उसके साथ लो कट मैचिंग ब्लाउज पहनी। ब्लाउज ऐसा था कि चूचियों पर पड़े नीले निशान साफ दिख रहे थे। शायद मेरे पतिदेव यही चाहते थे कि नहाने वाले के अलावा सब कोई निशान को देखे। जिन अंगों पर औरतों की नजर न जा रही थी, वहाँ पर जबरी साड़ी उठा कर साड़ी समेटते हुए जांघों पर पड़़े निशान दिखाने की भरपूर कोशिश करती रही।
वही चाची जांघों पर उभर आये निशान को देखते हुये बोली- अरे प्रभात तो देखने में कितना सीधा दिखता है… पर देखो तो, जांघों को भी काट खाया है।

मुझे संतोष हुआ कि उनकी रात की मेहनत काम कर रही है।

फिर आगे चाची बोली- का रे बहुरिया, तोहार (तुम्हारा) खजाना तो सही सलामत है कि वहाँ भी काट खाया?
मैंने शरमाते हुये मुँह आंचल में ढक लिया पर माँजी आकर चाची को उलाहना देने लगी- अरे चाची, अब रहने दिया जाये, कितना खिंचायी करेंगी? नयी नयी है, अब क्या क्या जवाब देगी! अपनी रात याद करिये ना… आपकी सुहागरात की कहानी तो अभी तक हम लोग की जबान पर है।

चाची बोली- न रे प्रभात की माई, हय सुहागरात पर तो… मैं मर जांवा… मेरी 100 सुहागरात के बराबर है ये तो, का रे बहुरिया सही कही या नहीं।
मैंने शरमाते हुये सभी बड़ों के पैर छूकर प्रणाम किया. निशान देख कर सभी मुस्कुराते रहे और पूरा आर्शीवाद बरसाते रहे।

इतने देर में मेरे पतिदेव भी उठकर बाथरुम चले गये, जल्दी जल्दी रुम का बेडशीट को बदला गया।
वो नहाकर बाहर चले गये।
दोपहर होते होते गांव की औरतें भी आ चुकी थी, जो नहीं भी आना चाह रही थी, वो इस इवेंट को मिस नहीं करना चाह रही थी, आखिर गाँव में इंटरटेनमेंट का इससे बढ़िया साधन तो कुछ और होता नहीं।

मेरी ननदें सभी को अपने तरीके से किस्सा सुनाती और साथ में दूसरी औरतें भी अपने सुहागरात की कहानी भी मजे लेकर सुना रही थी। घर में दो गुट बन गये थे, एक ननदों की फौज तो एक मेरी सासु माँ के ग्रुप का सभी के अपने कहानी मेरे आँखों बरबस झलक जा रही थी।
अगर सभी के कहानियों का संकलन किया जाता तो महाभारत के जितना मोटा कहानी संग्रह बन जाता।

पूरा घर आनंदमयी उत्साह से भरा था।

इतने देर में धोबिन भी आ चुकी थी, उसे अन्य कपड़ों के साथ तौलिया चादर मेरा पेटीकोट और उनका पायजामा अलग से दिया गया। वो भी मुँह ढक कर हँस रही थी और बोली- मालकिन इसको साफ करने के लिये तो बख्शीश देना पड़ेगा।

दिन भर इसी चुहलबाजी हँसी मजाक में बीत गया।
रात में मैं उनकी छाती पर सर रख कर बहुत देर तक रोती रही।

आज भी हम लोगों की सुहागरात गाँव की औरतों की जुबान पर है और हर नयी बहुरिया को उसी पैमाना पर तौला जाता है तो गाँव की ननदें भी आकर यही कहती हैं कि भाभी, आप वाली सुहागरात का मजा अपनी सुहागरात पर भी नहीं मिला।

‘अब बताओ जीजू, अब आप चाहते हो कि मैं उनको धोखा दूँ?’
मैं इतना ही कह सका- नहीं रे, अब अपना पैर हटाओ, दर्द हो रहा है।

उसने पैर हटाया तो देखा कि उसके पैरों के निशान मेरे शर्ट के ऊपर उभर आया था। कमर दर्द अलग हो रही थी, साथ में सर के पीछे भी चोट का गुबंद उठ गया था।

इतने में उसकी सहेली सुधा ने नीचे से आवाज दी। साली साहिबा ने भी कहा- आती हूँ, थोड़ा कपड़ा फैला लूँ।

वह नीचे गयी और मैं सीधे बाथरुम में अपना शर्ट खुद से साफ करने! आखिर बीवी को क्या जवाब देता कि शर्ट पर पांव का दाग कैसे पड़ा।

कैसी लगी मेरी अरमानों पर पानी फिरने की कहानी? आपके मेल मेरा हौसला बढाते हैं।
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