सलहज की कसी चूत को दिया सन्तान सुख-2

(Salhaj Ki Kasi Chut Ko Diya Santan Sukh- Part 2)

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मेरी सेक्सी कहानी के पिछले भाग में आपने पढ़ा कि अपनी सलहज अनीता की मटकती गांड को देख कर रात में ही मेरे मन में उसकी चूत चुदाई के ख्याल आने लगे थे. मैं उसके बारे में सोच कर मुठ मार रहा था. कमरे की लाइट बंद थी और अचानक से लाइट जलाकर वो मेरे कमरे में आ गई. फिर मैंने उसे कमर दर्द की मालिश के लिए बाम की शीशी दे दी और वो चली गई.
अब आगे की कहानी …

बाम की शीशी देकर वो वापस अपने कमरे में चली गई लेकिन मुझे अभी भी नींद नहीं आ रही थी. कुछ देर के बाद उसके कराहने की आवाज आने लगी तो मैं उठ कर उसके कमरे में गया.
मैंने कहा- क्या बात है? अभी भी दर्द है क्या?
वो बोली- हां जीजा जी.
मैंने कहा- रुको, मैं जरा बाम लेकर आता हूं.

मैं वापस से अपने कमरे में गया और बाम लेकर आ गया. मैंने उससे कहा कि लाओ मैं तुम्हारी कमर की मालिश कर देता हूं. तुम अपने हाथ से ठीक तरह से मालिश नहीं कर पा रही होगी इसलिए दर्द नहीं जा रहा.

पहले तो वो मना करने लगी. मेरे जोर देने पर उसने हां कर दी. मगर फिर उसने सोचा कि बाम लगाने के लिए मैक्सी को ऊपर उठाना पड़ेगा. यह सोच कर उसने अपने मन में कुछ शर्म के विचार से फिर मना कर दिया.

मैंने उसको मनाने की बहुत कोशिश की लेकिन उसने हां नहीं की. इसलिए मैं बाम की शीशी को उसके पास ही छोड़ कर अपने कमरे में वापस आ गया. मेरे आने के बाद उसने शायद दोबारा से बाम लगाने की कोशिश की होगी.

उसके बाद भी जब उसका दर्द नहीं गया तो उसने मुझे दोबारा बुलाया.
मैंने कहा- अगर ज्यादा ही दर्द है तो एक दर्द निवारक गोली खा लो.
वो मेरी बात पर किसी सोच में पड़ गयी.
शायद वो यह सोच रही थी कि अगर उसको गर्भ ठहर गया होगा तो ऐसी दवा खाने से नुकसान हो सकता है. इसलिए उसने आखिरकार सोचने के बाद बाम लगवाने के लिए हां कर दी.

वो बेड पर लेट गई. उसकी गांड ऊपर की तरफ थी जो उसकी मैक्सी में से उठी हुई दिख रही थी. मैं उसके पास ही बेड पर बैठ गया. मैंने धीरे से उसकी मैक्सी को उठा दिया. उसने नीचे से काले रंग की पैंटी पहनी हुई थी.

उसकी गोरी जांघों में उसकी पैंटी को देख कर मेरे मुंह में लार आने लगी और लंड तन कर बिल्कुल अकड़ गया. उसकी गांड में पैंटी पूरी तरह से फंसी हुई थी. मैंने उसकी मैक्सी थोड़ा और ऊपर उठा कर उसकी पीठ तक कर दिया.

फिर मैंने अपने हाथ में बाम ली और उसकी कमर पर मालिश करने लगा. उसकी कमर को मैं मालिश कम और सहला ज्यादा रहा था. उसके चिकने बदन पर मेरे हाथ रेंगते हुए मेरी उत्तेजना एकदम से तेज हो गई थी.

मालिश करते हुए अब मेरे हाथ उसकी बगलों से होते हुए उसकी चूचियों तक छूने लगे. उसने शायद नीचे से ब्रा नहीं पहनी हुई थी क्योंकि अभी तक मुझे उसकी ब्रा की पट्टी नहीं दिखाई दी थी. मैं धीरे-धीरे मालिश करते हुए अपने हाथों को उसके चूचों तक लेकर जा रहा था.

जैसे जैसे मेरे हाथ उसके बदन पर मालिश कर रहे थे वैसे वैसे ही उसके शरीर के रोंगटे अब खड़े होने लगे थे. दस मिनट तक मैंने बड़े ही प्यार से उसकी कमर की मालिश की और इस दौरान कई बार उसके चूचों को छू लिया.

फिर वो पलट गई. उसने मेरी तरफ ऐसी नजर से देखा कि जैसे धन्यवाद कह रही हो. फिर उसने एकदम से मेरे हाथ को अपने हाथ में ले लिया और उसको सहलाने लगी. वो मेरे चेहरे की तरफ देख रही थी और मैं उसके चेहरे को पढ़ने की कोशिश कर रहा था.

वो मेरे हाथ को ऐसे सहला रही थी जैसे मुझे अपने ऊपर आने का निमंत्रण दे रही हो. यह मेरे लिये ग्रीन सिग्नल के जैसा था. मैंने भी मौके का फायदा उठाते हुए अपने दोनों हाथ उसकी चूचियों पर रख दिये और उसकी चूचियों को दबा दिया.

उसने मेरी इस पहल पर मुझे कस कर पकड़ लिया और मुझे अपनी तरफ खींच लिया. मैं उसकी छाती पर लेट गया और मेरी छाती उसके चूचों से जा सटी. उसने मेरी पीठ पर अपनी बांहों का घेरा बना कर मुझे अपने आगोश में लेना शुरू कर दिया.

अब मैं भी उसके बदन की खुशबू में खो जाना चाहता था. मैंने उसकी गर्दन को चूमना शुरू कर दिया. उसके बाद मैंने उसके होंठों पर अपने प्यासे होंठ रख दिये और दोनों ही एक दूसरे के जिस्म से लिपटते हुए एक दूसरे के होंठों का रस पीने लगे.

मेरा लंड तन कर फटने को हो गया. मैंने उसकी पैंटी पर अपने लंड को घिसना शुरू कर दिया. वो भी नीचे से गांड उठा कर इस बात का संकेत दे रही थी अब उसकी चूत मेरा लंड लेने के लिए गर्म हो चुकी है.

फिर मैंने अपने हाथ नीचे लाते हुए उसकी पैंटी को उसकी जांघों से खींच दिया. पैंटी उतरते ही उसकी चूत मेरे सामने नंगी हो गई. उसकी चूत पर हल्के बाल थे. शायद हमारे घर पर आने से पहले ही वो चूत के बालों की सफाई करके आई थी.

मैंने उसकी चूत में उंगली दे दी. वो कसमसा उठी. पहले मैंने एक उंगली से उसकी चूत को कुरेदना शुरू किया. अनीता की चूत सच में काफी कसी हुई महसूस हो रही थी. फिर दो उंगली डाली और फिर पूरी हथेली रख कर उसकी चूत को रगड़ने लगा.

वो अब कराहने लगी थी. उसके चूचे तेजी से ऊपर नीचे हो रहे थे. मैंने अब उसकी मैक्सी को निकाल दिया और उसे उसके जिस्म से बिल्कुल अलग कर दिया. अनीता मेरे सामने पूरी की पूरी नंगी हो गई थी. मैंने उसके चूचों में मुंह दे दिया और उसके चूचों को दबाते हुए उनको पीने लगा.

अनीता ने मुझे कस कर अपनी बांहों में भींचते हुए मेरा मुंह अपने चूचों में दबाना शुरू कर दिया. काफी देर तक उसके चूचों को चूसने और चाटने के बाद मैं नीचे की तरफ बढ़ा. उसकी नाभि को चूमा और फिर उसकी चूत पर एक चुम्बन दे दिया.

उसकी चूत में जीभ देकर तेजी के साथ अन्दर बाहर करने लगा तो वह एकदम से तड़प उठी. उसने मेरी बनियान को अपनी तरफ ऊपर खींच कर निकलवा दिया. मैं ऊपर से नंगा हो गया था. वह मेरी छाती पर अपने कोमल हाथों को चलाने लगी. मेरा लौड़ा मेरी लोअर में तना हुआ पागल हो चुका था.

अनीता ने मुझे अपने ऊपर खींच कर मुझे फिर से चूमना शुरू कर दिया. अब उसका हाथ नीचे से होता हुआ मेरे लंड को टटोलता हुआ मेरे लंड पर जा पहुंचा. वो मेरे लंड को नीचे ही नीचे सहलाने लगी. मैं उसके होंठों को चूसने में लगा हुआ था और वो मेरी लार को पीने में लगी हुई थी.

अब मुझसे कंट्रोल न हुआ तो मैंने उसकी चूत में पूरा हाथ दे दिया.
वो कराह उठी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ और बोली- जीजा जी, अब इसको आपका औजार चाहिए. इन उंगलियों से इसकी प्यास नहीं बुझने वाली.
मैं उसका इशारा समझ गया. वो मेरे लंड से चुदने के लिए तड़प उठी थी.

मैं उठ कर सावधानी सुनिश्चित करने के चलते अपने कमरे में गया. मैंने देखा कि बच्चे गहरी नींद में सो रहे थे. फिर मैं चुपके से वापस आ गया. आते ही मैंने अपनी लोअर को निकाल दिया. मेरा लंड मेरे अंडरवियर को अपने कामरस से गीला कर चुका था.

जब मैंने अंडरवियर उतारने के लिए अपने हाथ लंड की तरफ बढ़ाये तो अनीता ने मुझे रोक दिया. उसकी यह मंशा मैं समझ नहीं पाया. फिर उसने मुझे बेड पर लिटा दिया. वो खुद मेरे ऊपर आ गई. उसकी गांड मेरे अंडरवियर में तने हुए लंड पर टिकी हुई थी.

उसके बाद उसने मेरी गर्दन को चूमना शुरू कर दिया. मेरी छाती को चूमा और पेट पर किस करते हुए मेरे झाटों तक आ पहुंची. उसके यह चुम्बन मुझे पागल किये जा रहे थे. फिर उसने धीरे से मेरे अंडरवियर की इलास्टिक को अपने हाथों से नीचे कर दिया और इलास्टिक के नीचे जाते ही मेरा फनफनाता हुआ लंड उसके होंठों से टकरा गया.

मेरे लंड को देख कर उसकी चेहर पर एक मुस्कान और आंखों में चमक सी आ गई. उसने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ा और अपना मुंह खोल कर मेरे लंड को अपने मुंह में भर लिया.

सलहज के द्वारा लंड चुसवाने में जो मजा मुझे आया वो मैं शब्दो में नहीं बता सकता. उसने एक मिनट के लिए लंड को चूसा और फिर दोबारा से मेरे बदन से लिपटने लगी. उसकी चूत मेरे लंड पर रगड़ने लगी.

अब मैंने बेकाबू होकर उसको बेड पर नीचे गिराया और उसकी टांगों को उठा कर अपना लंड जो कि उसकी लार से बिल्कुल गीला हो चुका था उसकी चूत पर लगा दिया.

नंगी सलहज की चूत पर गर्म लौड़ा रखकर मैंने एक धक्का मारा और अपना लंड उसकी चूत में उतार दिया. लंड पूरा नहीं गया. कुछ सेंटीमीटर रह गया. मैंने दोबारा से धक्का मारा और फिर पूरा लंड जड़ तक उसकी चूत में घुसा दिया.

मेरे इस आखिरी धक्के से उसके होंठ खुलने के साथ ही उसके मुंह से एक कराहना फूट पड़ी. वो मेरे बदन से लिपट गई. मैंने उसको दोबारा से नीचे गिराया और उसके बदन पर लेट कर उसके होंठों को चूसते हुए उसकी चूत की चुदाई शुरू कर दी.

अनीता की गर्म चूत में लंड गचके लगाने लगा. उसकी चूत की चुदाई करते हुए ऐसा लग रहा था कि मैं किसी टाइट कुंवारी चूत की चुदाई कर रहा हूं. उसने अपनी चूत में मेरे लंड को जैसे कस कर भींच रखा था.

बीच-बीच में वो मेरे होंठों को भी चूस रही थी. काफी देर तक ऐसे ही मैं लेट कर उसकी चूत की चुदाई करता रहा. फिर उसने अपनी टांगों को मेरी गांड पर लपेट लिया जिससे मेरे लंड का जड़ तक का भाग उसकी चूत से जाकर सटने लगा.

मैंने उसकी कमर को हल्का सा उठा दिया और उसकी गांड हल्की सी ऊपर आ गयी. अब मेरे लंड के धक्के उसकी चूत की गहराइयों को अंदर तक नापने लगे. अब उसको दर्द होने लगा था लेकिन मेरे लंड के आनंद में वो दर्द को अनदेखा कर रही थी.

“आह्ह … चोदो जीजा जी … अम्म … जीजा जी तुम्हारा लंड …. आह्हह … मुझे चोदते रहो … आह्या … स्स्स … बहुत मजा आ रहा है.” वो मेरे कानों के पास अपने होंठों को लाकर ऐसे ही कामुक सिसकारियां लेते हुए बड़बड़ा रही थी.

दस मिनट तक उसकी चूत की चुदाई करते हुए हो गये तो वो एकदम से मेरी पीठ को खरोंचने लगी और मेरी गर्दन पर काटते हुए मुझसे ऐसे लिपटी कि जैसे चंदन के पेड़ पर नागिन लिपट रही हो. उसकी चूत से निकलते गर्म झरने को मैं अपने लंड पर महसूस कर सकता था.

वो झड़ कर ढीली पड़ गई. उसके बाद दो-चार धक्कों के बाद मेरा माल भी उसकी चूत में निकल गया. मैं भी उसके ऊपर लेट कर हांफने लगा. वो मेरी पीठ को सहला रही थी. काफी देर तक हम ऐसे ही पड़े रहे.

अनीता की चूत में इतनी गर्मी होगी मैंने कभी नहीं सोचा था. मेरे पेटू साले के लंड से शायद उसको संतुष्टि नहीं मिल पा रही थी. इसलिए उसने अपनी प्यास को मेरे लंड से बुझा लिया आज.

फिर हम अलग होकर एक दूसरे की बगल में लेट गये. वो कहने लगी- जीजाजी, आपका लंड मेरे पति से बहुत मोटा है. मुझे चुदाई में पहली बार इतना मजा आया है.

मैंने भी कह दिया कि मैं भी तुम्हें कई दिनों से चोदने की फिराक में था.
वो बोली- मैं जानती हूं. आपका तना हुआ लंड देख कर मैं आपके मन की बात समझ गयी थी. लेकिन कभी जाहिर नहीं कर पाई.

उसके बाद हम दोनों ने फिर से एक दूसरे को चूमना शुरू कर दिया. उसके बाद चुदाई के कई राउंड हुए. मैंने अनीता की चूत को चोद-चोद कर लाल कर दिया. इस तरह सुबह के चार बजे तक चुदाई चली. फिर मैं बच्चों के पास आकर लेट गया. अनीता भी बुरी तरह थक कर चूर हो चुकी थी और मैं भी.

सुबह मेरी पत्नी ने दरवाजे पर बेल बजाई तो मेरी आंख खुली. अनीता शायद तब तक उठ चुकी थी और किचन में नाश्ता बना रही थी. मेरी बीवी के आने के बाद अनीता की चूत की चुदाई का मौका नहीं लग सका. उसकी स्कूल की छुट्टियां खत्म हो गईं और उसके विदा होने का दिन आ गया.

मुझे ही उसको वापस मेरे ससुराल छोड़ने की जिम्मेदारी मिली. रास्ते में भी ट्रेन के सफर में हम दोनों बस चूमा-चाटी ही कर पाये. मेरे ससुराल जाकर मैं वापस आने लगा तो उसने अकेले में बुला कर मुझसे कहा कि आपके लंड की चुदाई के बाद मेरी चूत असली सुहागन महसूस कर रही है. मुझे पूरा यकीन है कि आपका बीज मेरी गोद हरी कर देगा.

उसने मुझे गले से लगा लिया और फिर मैं सबसे विदा लेकर अपने घर आ गया. घर आने के बाद भी मुझे अपनी सलहज अनीता की चूत की याद सताती रही. मगर अब उसके पास जाने का मौका पता नहीं कब मिलना था.

मेरी सेक्सी कहानी अंतिम भाग में जारी रहेगी.
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