सलहज की चूत

महेश गोयल
पाठको, आप सब को नमस्कार ! मैं अपनी पहली कहानी लिख रहा हूँ।
मैं 6 फीट का जवान कसरती बदन आकर्षक फौजी लगता हूँ।
मेरे साले की शादी दो साल पहले हुई थी। रेनू को जब मैंने पहली बार देखा तो मुझे लगा की हूर जमीन पर आ गई है। बस देखता ही रह गया।
मेरी साले की पत्नी खूबसूरत है। नाम रेनू, उम्र 22 साल, कद लम्बा, रंग साफ़, देखते ही बाँहों में ले कर चूमने को दिल करे।
नज़रें चार हुईं, मेरी आँखों मैं अपने प्रति वासना देख कर वो शर्म से लाल हो गई।
अब वो नज़र बचा कर बार-बार मेरे को ही देख रही थी।
खैर हमारे बीच ये आँख मिचोली का खेल दो साल चलता रहा।
18 माह तक कोई संतान न होने के कारण डॉक्टर से जांच कराने पर पता चला कि मेरे साले में कमी होने की वजह से वो माँ नहीं बन पाएगी और यौन सुख से भी वंचित रहेगी।
उसने मेरी बीवी को बताया कि 18 माह से वो सेक्स का कोई आनन्द नहीं उठा पाई थी।
इस घटना के बाद वो मेरी पत्नी के और पास आ गई।
रेनू को यौन सुख पाना था और उसकी नजर में मैं ही था जो उसे यौन सुख दे सकता था, पर वो शर्म से कुछ कह नहीं पाती थी।
मैं भी रेनू को चोदना चाहता था।
मैंने अपनी बीवी रेखा के साथ मिल कर एक योजना बनाई। मेरे साले का कैंटीन का बिज़नेस वेस्ट इंडिया में है। वो साल में 6 माह के लिए वहाँ पर जाता है, घर पर सासू और रेनू ही रह जाती हैं।
सासू 65 साल की एक उम्रदराज हैं। रेखा व मेरे प्लान की मुताबिक साले के जाते ही रेखा की बीमारी का बहाना बना कर साले के घर रहने चले गए।
सासू बूढ़ी हैं तो दिखाई भी कम देता है, हाथ-पैर भी कंपते हैं, बेचारी रात को जल्दी सोती और सुबह देरी से जगती हैं।
घर में दो कमरे थे, एक में मैं रेखा की साथ, दूसरे में रेनू सास के साथ सोती थी।
प्लान की मुताबिक मैं सुबह रेखा की जोर-जोर से आवाज़ लगाने पर तथा मेरा लंड जोर से हिलाने पर ही जागता था।
रेनू रोज़ सुबह यह सब ड्रामा देखती थी। मैं लुंगी पहनता था, सुबह मेरा लंड खड़ा रहता था जो 8 इंच लम्बा था।
एक दिन सुबह रेखा रसोई में काम कर रही थी, मैं सोने का नाटक कर रहा था।
रेखा ने जोर की आवाज़ लगाई- रेनू, अपने जीजा जी को जगा दे.. मैं रसोई में काम कर रही हूँ।
मेरा लंड खड़ा था, रेनू मेरे कमरे मैं आई दरवाज़े पर खड़ी हो कर मेरे लंड को निहारने लगी। जैसे बरसों पुरानी चाहत पूरी होने जा रही हो।
रेखा की आवाज़ आई- रेनू… जगाया या नहीं..!
रेनू ने चार-पांच बार ‘जीजाजी.. जीजाजी’ आवाज़ लगाई, पर मैं नहीं उठा।
वो बोली- दीदी, जीजाजी नहीं जागे..!
रेखा रसोई में से चिल्लाई- अरे लंड हिला कर उठा.. जैसे मैं करती हूँ ऐसे नहीं उठेंगे..!
अब रेनू बार-बार मेरे लंड को देखे रही थी। वो धीरे-धीरे चल कर बेड के पास आई और बेड पर बैठ गई, कांपते हाथ से लुंगी हटाई, लंड देखा, धीरे से हाथ मेरे लंड पर फेरा और धीरे से बोली- जीजाजी उठो..!
रेनू को मैं नज़र बचा कर बार-बार देख रहा था कि वो क्या कर रही है।
फिर जब उसने देखा मेरे पर कोई असर नहीं है, तो वो पूरे लंड को अपने हाथों में भर कर मसलने और खींचने लगी। मेरे लंड का आकार बढ़ने लगा।
रेखा- क्या हुआ…!
रेनू- लंड हिला रही हूँ.. पर जग नहीं रहे…!
रेखा- अरे जोर से हिला..!
रेनू- जोर से हिला तो रही हूँ..!
रेखा-अरे नहीं उठ रहे तो लंड चूस कर उठा.. लंड खड़ा हुआ या नहीं..!
रेनू- दीदी, लंड खड़ा है।
रेखा- तो चूस न..!
रेनू- अच्छा दीदी..!
फिर रेखा ने कहा- रेनू लंड चूसने से पहल अपनी ब्रा और पैन्टी उतार दे शायद तेरे मम्मे तन जाएँ..!
रेनू ने नाइटी की नीचे काली ब्रा-पैन्टी पहनी थी। उसने उतार दी, अब रेनू हल्की पारदर्शी नाइटी में थी। उसके बोबे मध्यम साइज़ के थे और भूरे निप्पल देख कर मुझे कण्ट्रोल करना मुश्किल हो रहा था।
रेनू ने लंड चूसना चालू कर दिया।
रेखा की आवाज़ आई, “रेनू जब तक वीर्य न निकले जब तक लंड चूस.. बाद में वीर्य पी जाना।”
वो बोली- ओके..
लंड खड़ा था वो एक अच्छी रांड की तरह मेरे लंड को अपने मुँह में ले कर जीभ से चूसने लगी। मुझको मज़ा आने लगा।
दस मिनट के बाद मेरा वीर्य निकला, वो पी गई, पर मैं अब भी नहीं जगा।
रेनू- दीदी जीजू नहीं जागे.. मैंने वीर्य भी पी लिया.. लंड भी जोर-जोर से हिला लिया।
रेखा- रेनू तू जीजू की पास लेट जा और उनके हाथ अपने बोबे पर रख कर उन्हें दबवा..।
रेनू ने पास लेट कर एक बोबे पर मेरा हाथ रखा तथा दूसरा मेरे होंठों से लगा दिया। धीरे-धीरे मैं रेनू के बोबे दबाने लगा व चूसने लगा।
क्या रुई की तरह मुलायम नरम बोबे थे..!
फिर रेनू गर्म हो चुकी थी, उसने मेरा एक हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर रखा। मैंने उंगली उसकी चूत में आगे-पीछे करनी चालू कर दी, गर्म भट्टी की तरह चूत भभक रही थी।
एक हाथ से रेनू मेरा लंड सहला रही थी, मैं गरम हो चुका था, वो अब नंगी मेरे साथ लेटी थी।
मैंने धीरे से आँख खोली और बोला- रेनू ये क्या कर रही हो..! तुम्हारी दीदी देख लेंगी..!
वो कुछ नहीं बोली और कस कर मुझसे लिपट गई।
मैंने होंठों का चुम्बन करना चालू कर दिया। उसे अपने नीचे ले कर उसकी चूत में धीरे-धीरे अपना लंड पेलने लगा।
वो चिल्लाई…
मैंने बोबे पर धीरे-धीरे हाथ फेरा तो वो कुछ शान्त हुई और मैंने जोर का धक्का मारा। मेरा 8 इंच लम्बा लंड रेनू की चूत की झिल्ली फाड़ता हुआ चूत में दाखिल हो गया।
चूत में से खून आने लगा।
मैं रेनू की सील तोड़ चुका था। अब वो आराम से मेरा लंड चूत में ले कर कमर उठा कर ऊपर-नीचे हो रही थी।
बीस मिनट बाद उसने पानी छोड़ दिया। मैंने भी अपना वीर्य चूत में डाल दिया।
रेखा दरवाज़े पर से सब देख रही थी, हँस रही थी.. रेनू खुश थी।
अब हम 3 माह तक रहे, मैं रोज़ रेनू को चोदता था, रेनू भी खुल गई थी। खूब मजे से चुदवाती, लंड चूसती।
एक माह के बाद बच्चा गर्भ में था, मेरी मेहनत रंग लाई, साले को खबर दी.. वो चूतिया भी खुश हुआ आगे क्या हुआ.. फिर कभी लिखूँगा।
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