जीजा साली की चुदने चोदने की बेकरारी

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जीजा साली को चोदने को बेकरार है तो साली की चूत भी उतनी ही गर्म है अपने जीजा से अपनी चूत की सील तुडवाने को !

दोस्तो, मेरा नाम लवलीन जैन है, प्यार से सब मुझे लवली कहते हैं। मैं इस वक़्त लुधियाना में रहती हूँ, मेरी उम्र 38 साल है, अगर मेरे बारे में अपने दिमाग में मेरी तस्वीर बनाना चाहते हैं तो जो लाल सूट वाली आंटी नोकिया लुमिया मोबाइल के ऐड में आती है हाँ, (इसको गड्डी तो चलानी आती है न) उसको सामने रख सकते हो, शक्ल का फर्क है पर रंग रूप और बॉडी मेरी वैसी ही है।

मैंने अपनी ज़िन्दगी में बहुत से सेक्सपीरियेंसिज़ किये हैं, शादी से पहले भी और शादी के बाद भी… ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि हम चार बहनें हैं, घर का माहौल बहुत खुला है।
जैसे जैसे हम बहने जवान होती गई, इश्क के पाठ पढ़ती गई, सबसे पहले बड़ी दीदी को लव हुआ, जब वो बी ए कर रही थी, उनका लव (बाद में हमारे जीजाजी) हमारे पड़ोस में रहता था, अक्सर रात को दीवार फांद के घर में आ जाता था और दीदी के प्यार की गहराइयों में गोते लगाया करता, जीत दीदी के साथ उसकी मौज मस्ती हैप्पी दीदी और लकी दीदी के साथ मैं भी देखती थी, चाहे मैं उस वक़्त छोटी थी, पर छोटी उम्र में ही मैं सब कुछ देख समझ चुकी थी।

बाद में जीत दीदी की शादी हो गई तो शादी में लकी दीदी का टांका जीजाजी के फुफेरे भाई से भिड़ गया, लकी दीदी तो इतनी गर्म हुई पड़ी थी कि सिर्फ तीन दिन की दोस्ती में उन्होंने सेक्स भी कर लिया, प्रॉब्लम यह आई कि वो प्रेग्नेंट यानि गर्भवती हो गई तो जल्दी जल्दी में दीदी की शादी उसी लड़के से कर दी गई।

उसके बाद पापा ने घर का माहौल थोड़ा सख्त कर दिया, मगर जो चीज़ें हम बचपन से देख रही थी, उससे खुद को कैसे बचा के रखती! अब तो घर में दो दो जीजाजी का भी आना जाना था, वो दोनों जब भी कभी हमारे घर आते तो हम दोनों बहनों से कुछ न कुछ छेड़खानी ज़रूर करते। मुझ से तो वो सिर्फ गले लगाना या किस वगैरह करते थे, मगर हैप्पी दीदी बड़ी थी तो उसके तो वो बूब्स भी दबा देते थे।

हम थोड़ा सा बुरा मानती मगर ज्यादा नहीं… इसी से उनकी हिम्मत बढ़ती गई और वो हमें खूब तंग करते, छोटे वाले जीजाजी तो मेरे बूब्स भी दबा देते पर बड़े जीजाजी सिर्फ ठीक ठाक सा मज़ाक करते थे।
मैं अब 10+2 में थी और हैप्पी दीदी बी कॉम सेकंड इयर में थी, हम दोनों भी पूरी जवान थी, और हम दोनों बहनों के बीच कोई पर्दा नहीं था, हम दोनों बहने आपस में हर बात शेयर करती थी।

एक दिन शाम को छोटे वाले जीजाजी आये, साथ में लकी दीदी भी थी, वो दूसरी बार प्रेग्नेंट थी। शाम को मैं छत पर बैठी पढ़ रही थी तो जीजाजी भी पास आ कर बैठ गए।
मुझे पता था कि पास आकर अकेले में बैठे हैं तो कुछ न कुछ ज़रूर करेंगे।
कुछ देर इधर उधर की बातें करने के बाद बोले- यार अब तो बहुत मुश्किल हो जाएगी, तेरी दीदी तो अब 6 महीने हाथ भी नहीं
लगाने देगी, बताओ मैं क्या करूँ?

मैंने कहा- क्यों दीदी को हाथ लगाने में क्या परेशानी है, वो तो आपकी वाइफ है।
वो मुस्कुरा के बोले- अरे हाथ लगाने का मतलब सिर्फ छूना नहीं है, मैं तो अपने भोलू की बात कर रहा हूँ, उस बेचारे का क्या होगा।
‘ये भोलू कौन है?’ मैंने पूछा।
‘है अपना एक यार, बेचारा बहुत दुखी है, कहता है अगर तेरे जैसी कोई गर्लफ्रेंड मिल जाये तो ज़िन्दगी में मज़ा आ जायें।’

मैंने तुनक कर जवाब दिया- हुंह, मेरे जैसी, जिसका नाम ही इतना सड़ा हुआ है, वो खुद कैसा होगा? भोलू, मैं तो कभी ऐसे वैसे की गर्ल फ्रेंड न बनूँ।
‘अच्छा अगर वो बिलकुल मेरे जैसा हो तो, फिर बनेगी उसकी गर्लफ्रेंड?’ जीजाजी ने मेरे कंधे पे हाथ रखते हुए पूछा।

‘हाँ फिर मैं सोच सकती हूँ।’ मैंने हंस के कहा, क्योंकि दिल ही दिल में मैं जीजाजी को बहुत पसंद करती थी।
‘तो समझ ले कि मैं ही हूँ।’ उन्होंने कहा तो मैं शर्मा गई- पर आप तो कहते थे कि आपका कोई दोस्त है?
मैंने उनसे कहा।
‘वो तो है, मेरी जान मगर पहले मैं यह पक्का करना चाहता हूँ कि तू मेरे विश्वास पर उससे दोस्ती करेगी, अगर करेगी तो मैं तुम्हें भोलू से अभी मिलवा सकता हूँ यहीं पर!’ उन्होंने बड़े जोश से कहा।

मैं कुछ नहीं बोली तो वो फिर से बोले- देख लवली, यह हम दोनों के बीच की बात है अगर तुम्हें भोलू पसंद न भी आया तो तू किसी से नहीं कहेगी, बात सिर्फ हम दोनों में रहेगी, हाँ या न तेरी मर्ज़ी, ठीक है?’
मैंने भी कह दिया- ठीक है, पर मैं फैसला उससे मिल कर ही करूँगी।
‘ओ.के. चल आँखें बंद कर… अभी भोलू को मिलवाता हूँ!” उन्होंने कहा।

मैंने कहा- देखो जीजू, कोई छेड़खानी मत करना!
वो मुस्कुराए और उठ कर नीचे देखा कि कोई सीढ़ियाँ चढ़ कर उपर तो नहीं आ रहा, जब सब ठीक देखा तो मेरे सामने आकर अपना लोअर और चड्डी एक साथ नीचे उतार दिया और अपने लण्ड को हाथ में पकड़ के हिलाते हुए बोले- यह है भोलू!

मैंने तो शर्म के मारे अपने हाथों में अपने चेहरे छुपा लिया- हाय जीजाजी, यह क्या कर रहे हो, आपको शर्म नहीं आती!

खैर लण्ड देखा तो मैंने पहले भी कई बार था, पर आज किसी ने पहली बार मेरे सामने और मेरे लिए अपना लण्ड निकाल के दिखाया था।
मैं उठ के जाने लगी तो जीजाजी ने मुझे पीछे से पकड़ के अपनी बाँहों में भर लिया और बोले- सुन लवली, आई लव यू, मैं तुम्हें कब से पसंद करता हूँ, तुम पर विश्वास करके ही मैंने तुम्हें अपनी बात बताई है, अपनी दोस्त समझ कर, तू प्लीज किसी से मत कहना, बस आज मैंने तुम्हें अपने दिल की बात कहनी थी सो कह दी!

जब जीजाजी ने मुझे पीछे से इस तरह से पकड़ा हुआ था तो उनका लण्ड मेरे दोनों चूतड़ों के बीच में घिस रहा था, मुझे मज़ा तो आ रहा था पर डर भी लग रहा था कि कोई देख न ले।
मैंने कहा- ठीक है, किसी को नहीं बताऊँगी, पर आप मुझे छोड़ो, कोई देख लेगा।
जीजाजी बोले- छोड़ देता हूँ, पर तुम्हें मेरे भोलू से थोड़ा प्यार करके जाना पड़ेगा, यह रूठा हुआ है, इसे मनाना पड़ेगा।

उनकी बात सुन के मैं शर्मा गई और मुस्कुरा भी दी। मुझे मुस्कुराती देख कर जीजाजी ने मेरा मुँह अपनी तरफ घुमा लिया और अपना लण्ड मेरे हाथ में पकड़ा दिया।
जब मैंने एक हाथ में पकड़ लिया तो उन्होंने मेरा दूसरा हाथ पकड़ा और वो भी अपने अपने लण्ड पे रख दिया, जब मैंने दोनों हाथों में उनका लण्ड पकड़ लिया तो वो अपने लण्ड को मेरे हाथों में आगे पीछे चलाने लगे और और देखते देखते उनका लण्ड पूरा तन गया।
मैं शर्मा रही थी, जीजाजी ने मुझे बाँहों में कस रखा था, उन्होंने पहले मेरे दोनों गालों को चूमा फिर प्यार से मेरे होंठों को किस किया, फिर मेरे होठों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगे।

यह सब मैं अपनी दीदी को करते देख चुकी थी, मगर मेरे साथ आज ये पहली बार हो रहा था। किस करते करते जीजाजी ने अपनी जीभ से मेरे दोनों होंठ चाटे, फिर जीभ को मेरे मुँह के अन्दर डाल के घुमाने लगे।

उफ़्फ़… क्या मज़ा आ रहा था, यह तो बहुत ही मज़ेदार काम है ! मैं आँखें बंद करके इस लम्हे के मज़े ले रही थी, तो जीजाजी ने अपना हाथ मेरी शर्ट के अन्दर डाल कर पीछे से मेरी ब्रा की हुक खोल दी और मेरी पीठ पे हाथ फिराने लगे।
मैं मदहोश हुई जा रही थी, जीजाजी ने दूसरा हाथ मेरी सलवार में डाला और मेरे दोनों चूतड़ों को सहलाने लगे।

मर्द का स्पर्श पाकर मैं तो बेसुध सी हुई जा रही थी और उनका तना हुआ लण्ड मेरे पेट पे धक्के पे धक्के मार रहा था। जीजाजी ने मेरी शर्ट ऊपर उठा दी और मेरे दोनों बूब्स बाहर निकाल कर देखा, मेरे छोटे छोटे निप्पल सख्त हो चुके थे, जीजाजी ने मेरे बूब्स को
सहलाया, दबाया, चूमा और मुँह में लेकर चूसा, मेरे आनन्द की कोई सीमा नहीं थी, मैं तो अब खुद चाहती थी कि जीजाजी मुझे चोद दें।
जब मैं दीदी लोग को मज़े ले ले कर चुदाई करते देखती थी तो मैं भी चाहती थी कि कोई मुझे भी टिका कर चोदे और अपनी जवानी की आग में कभी मूली, कभी गाजर और न जाने क्या क्या ले कर बुझाती थी, मगर आज तो मेरी चूत में एक मर्द का मोटा ताज़ा लण्ड घुसने जा रहा था तो इस अवसर को मैं कैसे जाने देती… मैं तो खुद चुदने के लिए मरी जा रही थी।

जीजाजी ने मेरी सलवार खोल के उतार दी, अपना लोअर और चड्डी भी उतार दिए, मैंने टाँगें फैला दी, जीजाजी मेरी दोनों टाँगों के बीच में आ गए, मैंने उनका लण्ड खुद अपनी चूत पे रखा, जीजाजी धक्का मारा और उनका लण्ड मेरी चूत में घुस गया।

जीजा साली की चुदाई में रंग में भंग

मोटा था, थोड़ा अटक कर गया, पर घुस गया… मैं आनन्द से सराबोर हो गई मगर तभी नीचे से माँ की आवाज़ आई, वो मुझे खाने के लिए नीचे बुला रही थी।
हम दोनों को बहुत अफ़सोस हुआ, जीजाजी बोले- लवली अब जब अगली बार मिलेंगे तो यह अधूरा काम पूरा करेंगे।

मैंने जल्दी जल्दी अपने कपड़े पहने और जीजाजी का चेहरा अपने हाथों में पकड़ा और उनके होंठों पे एक चुम्बन देकर बोली- पक्का, अगली बार !
और मैं अपनी माँ को हजारों गालियाँ देती नीचे आ गई।
अगले दिन वो चले गए, उसके बाद हम अक्सर फ़ोन पर लम्बी लम्बी बातें करते, और बातें करते करते बहुत ही खुल गए, हर बार गन्दी बातें, नॉन वेज जोक्स, गालियाँ और फ़ोन सेक्स, हमने सब किया।

फिर दीदी को बेटा हुआ, मैं भी अपनी माँ के साथ दीदी को देखने गई, सब कुछ ठीकठाक था, जब मौक़ा मिला तो जीजाजी ने मुझे अपनी बाँहों में कस लिया और बोले- साली… मादरचोद, अब मिल रही है यार से, कब से तड़प रहा हूँ।
मैंने भी उन्हें पूरे जोर से अपनी बाँहों में भर लिया- मैं भी तो मरी जा रही थी आपसे मिलने को, पर क्या करूँ, सब लोग पास थे जीजाजी।

उन्होंने मुझे चूमा तो मैंने खुद ही अपनी जीभ उनके मुँह में डाल दी और वो मेरी जीभ चूसने लगे।
वाह क्या आनन्द आया मुझे, मैंने पैंट के ऊपर से ही उनका लण्ड अपने हाथ में पकड़ लिया और बोली- जीजाजी, अब बर्दाश्त नहीं होता, मुझे ये चाहिए, आई लव भोलू, इसे मेरी भोली से मिला दो, दोनों की शादी करा दो।

तो वो बोले- तू ऐसा कर, कुछ दिन के लिए यहाँ रुक जा, तेरे अगले पिछले सब जन्मों की प्यास बुझा दूंगा।

खैर उस वक़्त हम ज्यादा कुछ नहीं कर सके मगर बाद में ऐसा ही हुआ, मम्मी तो वापिस चली गई, मगर दीदी की देखभाल के लिए मुझे वहीं छोड़ गई।

दीदी का सीज़ेरियन ऑपरेशन हुआ था तो वो तो दवाई खा कर सो जाती थी।
रात को जब जीजाजी, काम से वापिस लौटे तो मैंने उन्हें खाना दिया, उन्होंने पूछा- लकी सो गई क्या?

मैंने कहा- नहीं अभी नहीं, अभी दवा नहीं खाई है, खाकर सो जाएँगी।
‘जब तेरी दीदी सो जाये तो मेरे कमरे में आ जाना!’

जब दीदी सो गई तो मैं जीजाजी के कमरे में चली गई, मुझे तो कमरे में घुसते ही जीजाजी ने पकड़ लिया- अब देर न कर जल्दी से कपड़े उतार दे।
मेरे साथ ही जीजाजी ने भी अपने कपड़े उतार दिए, दोनों जने अल्फ नंगे एक दूसरे की बाँहों में समा गए। जीजाजी ने मुझे गोद में
उठा लिया और बेड पे ले गए।
मुझे नीचे लेटा कर खुद मेरे ऊपर लेट गए, मैंने भी अपनी टाँगें फैला कर उनको अपने बीच में समां लिया, होंठों से होंठ मिले, जीभ से जीभ, और पता नहीं कब, उनका लण्ड मेरी चूत में समां गया।
मेरी चूत भी जी भर के पानी छोड़ रही थी, जीजाजी की चुदाई से फच फच की आवाज़ आ रही थी।
वो बोले- साली, बहुत पानी छोड़ रही है?

मैंने कहा- भोलू को देख कर भोली में मुँह में पानी आ गया है।
मगर सेक्स के दौरान हमने ज्यादा बात नहीं की क्योंकि मेरा पहला सेक्स था, मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था और जीजाजी को अपनी सबसे छोटी साली चोदने में बहुत आनन्द आ रहा था।

कोई 3-4 मिनट की चुदाई के बाद मैं झड़ गई और उसके 1-2 मिनट बाद ही जीजाजी भी झड़ गए।
जीजाजी ने मेरी चूत में ही अपना माल छुड़वा दिया था, उसके बाद हम दोनों साथ साथ पेशाब करने गए, मैंने खुद जीजाजी को पीछे से अपनी बाँहों में भर लिया और उनका लण्ड पकड़ कर उन्हें पेशाब करवाया, मैं खुद भी इस बात का एहसास करना चाहती थी कि लड़के खड़े होकर अपना लण्ड पकड़ कर कैसे पेशाब करते हैं।
पेशाब करके अपने आप को धो साफ करके हम फिर वापिस बेड पे आ गए। बेड पर आते ही फिर से वही सब शुरू हो गया। इस बार जीजाजी ने मेरी चूत चाटी और मैंने भी उनका लण्ड अपने मुँह में लेकर चूसा।

‘घोड़ी बनेगी?’ जीजाजी ने पूछा।
‘नहीं कुतिया बनूँगी।’ मैंने हंस कर कहा।

जीजाजी ने मुझे उल्टा लेटा कर मेरी कमर ऊपर उठाई तो मैं खुद भी उठा कर कुतिया वाली पोजीशन में आ गई।
जीजा बोले- ले कुतिया, अपने कुत्ते से चुद!
और उन्होंने अपना लण्ड फिर से मेरी चूत में घुसा दिया।

वो दिन और आज का दिन… हम दोनों जीजा साली का इश्क आज 15 साल बाद भी चल रहा है, हम आज भी सेक्स करते हैं, मेरा बड़ा बेटा मेरे जीजा का ही है, अब तो इस बात का पता मेरी दीदी को भी है।

इसके बाद और भी कई किस्से है मेरी चुदाई के… वो फिर कभी सुनाऊँगी।
अभी एक प्यारी सी विदा…
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