कमाल की हसीना हूँ मैं -6

(Kamaal Ki Haseena Hun Mai-6)

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

दोनों जोड़े वहीं अलग-अलग कंबल और रज़ाई में घुस कर बिना कपड़ों के ही अपने-अपने पार्टनर से लिपट कर सो गये। मैं और समीना आपा बीच में सोये थे और दोनों मर्द किनारे की ओर सोये थे। आधी रात को अचानक मेरी नींद खुली।

मैं ठंड के मारे टाँगों को सिकोड़ कर सोई थी। मुझे लगा मेरे जिस्म पर कोई हाथ फिरा रहा है। मेरी रज़ाई में एक तरफ़ जावेद सोया हुआ था। दूसरी तरफ़ से कोई रज़ाई उठा कर अंदर सरक गया और मेरे नंगे जिस्म से चिपक गया।

मैं समझ गई कि ये और कोई नहीं सलमान है। उसने कैसे समीना आपा को दूसरी ओर कर के खुद मेरी तरफ़ सरक आया, ये पता नहीं चला।

उसके हाथ अब मेरे चूतड़ों पर फिर रहे थे। फिर उसके हाथ मेरे दोनों चूतड़ों के बीच की दरार से होते हुए मेरी गाण्ड के छेद पर कुछ पल रुके और फिर आगे बढ़ कर मेरी चूत के ऊपर ठहर गये।

मैं बिना हिले-डुले चुपचाप पड़ी थी। देखना चाहती थी कि सलमान करता क्या है। डर भी रही थी क्योंकि मेरी दूसरी तरफ़ जावेद मुझ से लिपट कर सो रहे थे।

सलमान का मोटा लंड खड़ा हो चुका था और मेरे चूतड़ों पर दस्तक दे रहा था।

सलमान ने पीछे से मेरी चूत में अपनी एक फिर दूसरी अँगुली डाल दी। मेरी चूत गीली होने लगी थी। टाँगों को मोड़ कर लेटे रहने के कारण मेरी चूत उसके सामने बिल्कुल खुली हुई तैयार थी।

उसने कुछ देर तक मेरी चूत में अपनी उँगलियों को अंदर-बाहर करने के बाद अपने लंड के गोल टोपे को मेरी चूत के मुहाने पर रखा। मैंने अपने जिस्म को ढीला छोड़ दिया था। मैं भी किसी पराये मर्द की हरकतों से गरम होने लगी थी।

उसने अपनी कमर से मेरी चूत पर एक धक्का लगाया।

‘आआआहह…हह… !’ मेरे मुँह से ना चाहते हुए भी एक आवाज निकल गई। तभी जावेद ने एक करवट बदली।

मैंने घबरा कर उठने का बहाना किया और सलमान को धक्का दे कर अपने से हटाते हुए उसके कान में फुसफुसा कर कहा- प्लीज़ नहीं, जावेद जाग गया तो कयामत आ जायेगी।’

‘ठहरो जानेमन! कोई और इंतज़ाम करते हैं !’ कहकर वो उठा और एक झटके से मुझे बिस्तर से उठा कर मुझे नंगी हालत में ही सामने के सोफ़े पर ले गया।

वहाँ मुझे लिटा कर मेरी टाँगों को फैलाया। वो नीचे कार्पेट पर बैठ गया। फिर उसने अपना सिर मेरी जाँघों के बीच रख कर मेरी चूत पर जीभ फिराना शुरू किया।

मैंने अपनी टाँगें छत की तरफ़ उठा दीं। वो अपने हाथों से मेरी टाँगों को थामे हुए था। मैंने अपने हाथों से उसके सिर को अपनी चूत पर दाब दिया। उसकी जीभ अब मेरी चूत के अंदर घुस कर मुझे पागल करने लगी।

मैं अपने बालों को खींच रही थी तो कभी अपनी उँगलियों से अपने निप्पल को जोर जोर से मसलती। अपने जबड़े को सख्ती से मैंने भींच रखा था जिससे किसी तरह की कोई आवाज मुँह से ना निकल जाये। लेकिन फिर भी काफी कोशिशों के बाद भी हल्की दबी-दबी कराह मुँह से निकल ही जाती थी।

मैंने उसके ऊपर झुकते हुए फुसफुसाते हुए कहा- आआहहह… ये क्या कर दिया आपने ! मैं पागल हो जाऊँगीऽऽऽऽ प्लीऽऽऽऽज़ और बर्दाश्त नहीं हो रहा है… अब आआ… जाओऽऽऽऽ’

लेकिन वो नहीं हटा। कुछ ही देर में मेरा जिस्म उसकी हरकतों को नहीं झेल पाया और चूत रस की एक तेज़ धार बह निकली। मैं निढाल हो कर सोफ़े पर गिर गई। फिर मैंने उसके बाल पकड़ कर उसके सिर को जबरदस्ती से मेरी चूत से हटाया।

‘क्या करते हो? छी-छी इसे चाटोगे क्या?’ मैंने उसको अपने चूत-रस का स्वाद लेने से रोका।

‘मेरी चूत तप रही है… इसमें अपने हथियार से चोद कर शाँत करो।’ मैंने भूखी शेरनी की तरह उसे खींच कर अपने ऊपर लिटा लिया और उसके लंड को पकड़ कर सहलाने लगी। उसे सोफ़े पर धक्का दे कर उसके लंड को अपने हाथों से पकड़ कर अपने चेहरे पर ले लिया।

मैंने कभी किसी के लंड को मुँह में लेना तो दूर कभी होंठों से भी नहीं छुआ था। जावेद बहुत जिद करते थे कि मैं उनके लंड को मुँह में डाल कर चूसूँ लेकिन मैं हर बार उनको मना कर देती थी। मैं इसे एक गंदा काम समझती थी।

लेकिन आज ना जाने क्या हुआ कि मैं इतनी गरम हो गई और बहुत नशे में भी थी कि खुद ही सलमान के लंड को अपने हाथों से पकड़ कर कुछ देर तक किस किया।

जब सलमान ने मुझे उनके लंड को अपने मुँह में लेने का इशारा करते हुए मेरे सिर को अपने लंड पर हल्के से दबाया तो मैंने किसी तरह का विरोध ना करते हुए अपने होंठों को खोल कर अपने सिर को नीचे की ओर झुका दिया। उनके लंड से एक अजीब तरह की खुशबू आ रही थी। कुछ देर यूँ ही मुँह में रखने के बाद मैं उनके लंड को चूसने लगी।

अब सारे डर और सारी शरम से मैं परे थी। ज़िंदगी में मुझे अब किसी की चिंता नहीं थी। बस एक जुनून था, एक गर्मी थी, जो मुझे झुलसाये दे रही थी। मैं उसके लंड को मुँह में लेकर चूस रही थी। अब मुझे कोई चिंता नहीं थी कि सलमान मेरी हरकतों के बारे में क्या सोचेगा। बस मुझे एक भूख परेशान कर रही थी जो हर हालत में मुझे मिटानी थी।

वो मेरे सिर को अपने लंड पर दाब कर अपनी कमर को ऊँचा करने लगा। कुछ देर बाद उसने मेरे सिर को पूरी ताकत से अपने लंड पर दबा दिया। मेरा दम घुट रहा था। उसके लंड से उसके वीर्य की एक तेज़ धार सीधे गले के भीतर गिरने लगी।

उसके लंड के आसपास के बाल मेरे नाक में घुस रहे थे। पूरा रस मेरे पेट में चले जाने के बाद ही उसने मुझे छोड़ा। मैं वहीं जमीन पर भरभरा कर गिर गई और तेज़-तेज़ सांसें लेने लगी।

वो सोफ़े पर अब भी टाँगों को फैला कर बैठा हुआ था। उसके सामने मैं अपने गले को सहलाते हुए जोर-जोर से साँसें ले रही थी।

उसने अपने पैर को आगे बढ़ा कर अपने अंगूठे को मेरी चूत में डाल दिया। फिर अपने पैर को आगे-पीछे चला कर मेरी चूत में अपने अंगूठे को अंदर-बाहर करने लगा। बहुत जल्दी उसके लंड में वापस हरकत होने लगी।

उसने आगे की ओर झुक कर मेरे निप्पल पकड़ कर अपनी ओर खींचे तो मैं दर्द से बचने के लिये उठ कर उसके पास आ गई। अब उसने मुझे सोफ़े पर हाथों के बल झुका दिया। पैर कार्पेट पर ही थे। अब मेरी टाँगों को चौड़ा करके पीछे से मेरी चूत पर अपना लंड सटा कर एक जोरदार धक्का मारा।

उसका मोटा लंड मेरी चूत के अंदर रास्ता बनाता हुआ घुस गया। चूत बुरी तरह गीली होने के कारण ज्यादा परेशानी नहीं हुई। बस मुँह से एक दबी-दबी कराह निकली ‘आ…आआहह…हह’ उसके लंड का साइज़ इतना बड़ा था कि मुझे लगा कि मेरे जिस्म को चीरता हुआ गले तक पहुँच जाएगा।

अब वो पीछे से मेरी चूत में अपने लंड से धक्के मारने लगा। उसके हर धक्के से मेरे मोटे-मोटे बूब्स उछल-उछल जाते।

वो मेरी गर्दन को टेढ़ा करके मेरे होंठों को चूमने लगा और अपने हाथों से मेरे दोनों मम्मों को मसलने लगा। काफी देर तक इस तरह मुझे चोदने के बाद मुझे सोफ़े पर लिटा कर ऊपर से ठोकने लगा।

मेरी चूत में सिहरन होने लगी और दोबारा मेरा चूत-रस निकल कर उसके लंड को भिगोने लगा। कुछ ही देर में उसका भी वीर्य मेरी चूत में फ़ैल गया। हम दोनों जोर-जोर से सांसें ले रहे थे। वो मेरे जिस्म पर पसर गया। हम दोनों एक-दूसरे को चूमने लगे।

तभी गजब हो गया…
जावेद की नींद खुल गई। वो पेशाब करने उठा था। हम दोनों की हालत तो ऐसी हो गई मानो सामने शेर दिख गया हो।
कहानी जारी रहेगी।
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