जीजू संग खेली होली-2

प्रेषिका : कामिनी सक्सेना

सवेरे से ही मेरा मन बहुत खुश था। आज चुदना जो था। मैं किसी ना किसी बहाने जीजू के कमरे में आती जाती रही। मैंने आज बहुत ही तीखा मेकअप किया था। आंखो के किनारों को काजल से और सुन्दरता दे दी थी। सफ़ेद टाईट पजामा, पहन लिया था, टॉप भी ऐसा था कि थोड़ा सा ऊपर किया और चूचियाँ आराम से बाहर ! मैं अपने कमरे में होली के रंग एक जगह रख रही थी कि जीजू कमरे में घुस आये। उसके पजामे में से उभरा हुआ लण्ड साफ़ नजर आ रहा था।

“नेहा, बस जल्दी से, एक बार मज़ा दे दो।”

मुझे बिना मौका दिये उन्होंने मुझे बाथरूम में धकेल दिया और बाहों के घेरे में ले लिया और अपने अधर मेरे अधरों से चिपका दिये। मेरे स्तनों को भींच लिया। मैंने भी मौका नहीं चूका, पजामे के ऊपर से ही उनका मद मस्त इठलाता हुआ लण्ड कस कर थाम लिया। वो तड़प उठे।

“दीदी आ जायेंगी … अब हटो !”

“वो तो नहाने गई है और पापा, मम्मी पास की दुकान पर गये हैं !”

वाह, तब तो जीजू की खैर नहीं ! मैंने पजामे का इलास्टिक खींच कर नीचे कर के उनका लण्ड थाम लिया और मुठ मारने लगी। तभी जीजू ने भी मेरा टाईट पजामा नीचे खिसका दिया और मेरी चूत में अंगुली घुसा दी। मैं आनन्द से तड़प उठी। हम दोनों तन्मयता से अपने अपने काम में जुट गये और काम-क्रिया में लिप्त हो गये। मेरे मुख से सिसकारियाँ निकलने लगी थी। किसी के आने की आशंका और तनाव से मैं जल्दी ही झड़ गई, और जीजू भी जोर जोर से झटके लगाने से झड़ गये। झड़ते ही जीजू ने प्यार से मुझ बाहों में कस लिया और एक गहरा प्यार भरा चुम्मा ले लिया। चूत का गीला पन तौलिए से साफ़ कर लिया। मैंने पजामा ऊपर चढ़ा लिया। जीजू भी अपने लण्ड को सम्भाल रहे थे। मैंने अपने आप को निहारा और लगा कि मैं बिलकुल शरीफ़ लग रही हूँ तो मुस्कराती हुई बाहर निकल आई। कुछ ही देर नीतू भी आ गई। हम दोनों सहेलियाँ गुपचुप बाते करने लगी और फिर मैंने जीजू को दस बजे का समय दे दिया।

हम दोनों नीतू के ही घर की ओर चल पड़ी। रास्ते में कुछ शरारती लड़कों ने हमारा रास्ता रोक कर हमारे साथ मस्ती भी की। किसी ने तो शराफ़त से रंग लगाया और किसी ने हमारे चूतड़ और स्तन तक दबा डाले। किसी तरह से हम वहाँ से भाग निकली और स्कूटी सीधे घर पर ही रोकी। ये होली की मस्ती थी जो अक्सर लड़कियों के साथ होती थी।

घर आते ही हम दोनों ने कपड़े बदल लिये और चुदने के लिये हल्के कपड़े पहन लिये। बस स्कर्ट ऊपर किया और चूत सामने … मैंने नीतू का स्कर्ट उठा कर उसकी चूत देखी तो वो गीली हो रही थी। मेरा भी वही हाल था।

“जाने कब आयेंगे जीजू … बस जल्दी से आ जाये और मार दे मेरी…!” मेरी चुदने की इच्छा बलवती होने लगी। मैंने उसे बताया कि आज सवेरे भी मैंने जीजू का माल मुठ मार कर माल निकाल दिया था, तो नीतू के दिल से एक आह निकल पड़ी। तभी जीजू अपनी मोटर साईकल से आ गये। रंग से पूरे पुते, कपड़े पानी से तर थे।

आते ही उन्होने अपनी जेब से रंग निकाला और हमें भी रंग से सराबोर कर दिया। हमने जीजू को खींच कर कमरे के अन्दर ले लिया और उनका पजामा उतार दिया। तभी नीतू ने रंग भरी पानी की बाल्टी जीजू पर उंडेल दी, पलट कर जीजू ने भी पानी से नीतू को पूरा भिगो दिया। नीतू और जीजू गुत्थमगुत्था हो रहे थे। नीतू की चूचियाँ और चूतड़ को बुरी तरह से जीजू दबा रहे थे … नीतू भी सेक्सी चीखों से जीजू का जोश बढ़ा रही थी। नीतू के कपड़े अस्त-व्यस्त से हो गये थे। उसके चूत नंग धड़ंग हो चुकी थी। जीजू ने टॉप ऊपर के उसके बोबे बाहर निकाल दिये थे। जीजू ने अब नीतू को नीचे बिछी हुई दरी पर ही लेटा कर दबा डाला था। नीतू चीख चीख कर अपने प्यार का इज़हार कर रही थी। नीतू की हालत देख कर मेरे दिल में भी वासना तीव्र हो उठी। साली ये तो तबियत से चुद जायेगी, और मैं तड़प कर रह जाऊंगी।

तभी नीतू की एक सेक्सी चीत्कार से मेरा ध्यान भंग कर दिया। जीजू का लण्ड उसकी चूत में समा चुका था। जीजू ने भी अपनी सफ़लता से खुश हो कर एक वासना से भरपूर एक दहाड़ सी मारी और उसके छोटे छोटे स्तन भींच लिये। मेरे शरीर में एक सिरहन सी उठ खड़ी हुई। मेरे मन में जीजा-साली का गालियों भरा गांव का होली का स्वांग याद हो आया । मैं गुनगुना उठी, जीजू चोदते हुये मेरा गाना सुनने लगे।

जीजाजी ने की मस्ती, होली में चुद गई गोरी रे

साली ने खोली फ़ोकी, फ़ंस गई डण्डी मोरी में

जीजा जी फ़ड़ फ़ड़ करन लाग्यो, मस्ती में मारी चोदी रे

साली ने ले ली पूरी रे, मस्ती छा गई फ़ोकी में,

उछल उछल कर पेल्या रे, माल निकाला भोसी में

साली जी चुद गई मस्ती मे, होली में चुद गई गोरी रे

” अब तू भी चुद ले गौरी !” जीजू ने हंसते हुये मेरी और एक बोसा फ़ेंका, जिसे मैंने लेकर दिल से लगा लिया।

मैंने जल्दी से अपने बचे-कुचे कपड़े उतार कर फ़ेंक दिये और जीजू की पीठ से चिपकने लगी। जीजू ने मुझे किस किया और अपना पूरा ध्यान नीतू पर लगा दिया। मैं क्या करूँ ! हाय, मैं अपने बोबे जीजू की पीठ पर घिसने लगी। फ़िर कुछ समझ नहीं आया तो मैंने थूक से अंगुली गीली की और उसे धीरे से जीजू की गाण्ड में घुसा दी। जीजू ने प्यार से मुझे देखा और आंख मार दी। मैं और प्यार से मेरी अंगुली को जीजू की गाण्ड में गोल गोल घुमाने लगी। जीजू का लण्ड की उत्तेजना और भी बढ गई और लण्ड फ़ूल उठा।

उनके चोदने की रफ़्तार बढ़ गई। नीतू वासना की तड़प से अपनी चूत को उछालने लगी और जोर जोर से चीखने लगी। जीजू इस चुदाई से बहुत आनन्द आ रहा था। उसे लग रहा था कि नीतू को चुदाई में असीम आनन्द आ रहा है … और उसकी वासनायुक्त चीखें इस बात का प्रमाण थी। नीतू की छोटी छोटी चूचियाँ बहुत कठोर हो चुकी थी। उसके मसले जाने से उसकी अधीरता बढती जा रही थी। उसकी सेक्सी चीखें मेरे शरीर में भी सिरहन पैदा करने लगी थी। तभी नीतू की आनन्द भरी चीख ने मेरा ध्यान उसकी ओर आकर्षित कर दिया। उसका पानी निकल चुका था। जीजू के धक्के जारी रहे … पर अब उस चूत से फ़च फ़च की आवाजें आने लगी थी।

जीजू ने अपना लण्ड उसकी चूत से निकाला, चिकने रस से भीगा हुआ उसका लण्ड बड़ा मोहक लग रहा था। पर दूसरे ही क्षण उसने मुझे दबोच लिया और मेरे ऊपर सारा भार डाल दिया। मुझे वो दरी गड़ने लगी। मैंने उसे कराहते हुये पल्टी मारने को कहा और मैं उसके ऊपर आ गई। मैंने कपड़े से अपनी पनीली चूत पोंछ ली और उसके खड़े लण्ड को दोनो पलकों के बीच में सेट कर दिया। फिर उसे हौले से अन्दर ठेल दिया। जीजू का लण्ड अब मेरी योनि में प्रविष्ट कर चुका था। नीतू पास में लस्त सी पड़ी हुई थी।

मैंने भी जीजू को अपने आनन्द का परिचय एक चीख के साथ दिया और उसका पूरा लण्ड चूत में घुसा लिया। मुझे समझ में आ गया था कि जीजू को चुदाते समय लड़कियो की मस्ती भरी चीखे सुनने अच्छी लगती है। सो मैंने भी नाटक करने में कोई कसर नही छोड़ी। मेरे झूलते हुये बोबे उसके हाथों में मसले जाने लगे। मैंने भी मस्ती में चीखना का दौर चालू कर दिया। जीजू के कानों में धीरे धीरे गालियाँ भी घोलने लगी।

” जीजू, भेन चोद मुझे चोद ही दिया ना, मस्त लौड़ा है मेरी जान”

“तेरा गाना, मस्त था … किसने सिखाया”

“मेरा भोसड़ा मस्त लगा ना जीजू…”

“नेहा , चिकनी चूत है रे तेरी तो …”

“तो मेरे राजा, फ़ाड़ दे मेरी भोसड़ी को…”

फिर धीरे से चीख उठी, उसकी चुदाई मस्त थी, खास कर के उसका मोटा लण्ड, मुझे उत्तेजना की सीमा पर ले जा रहा था। तभी मैंने एक चीख और मारी … नीतू ने तेल लगा कर मेरी गाण्ड में अपनी अंगुली पिरो दी थी। कितना मोहक समा था … मैं जीजू को धमाधम चोद रही थी। तभी जीजू ने मुझे एक बार पल्टी मार नीचे कर लिया और मेरे भोसड़े में फिर लण्ड फ़िट कर दिया। ज्योंही उसका लण्ड मेरी चूत में पूरी ताकत के साथ घुसा सो सच की चीख निकल गई। उसने गहराई में जोर से ठोक दिया था … मात्र दो तीन पुरजोर ठुकाई से मेरा काम रस छूट गया … मेरे मुख से झड़ने की चीख उभरी । जीजू ने मुझे आश्चर्य से देखा। जाने जीजू में कितना दम था … झड़ने का नाम ही नही ले रहा था। उसने मुझे चूमते हुये उल्टी लेटा दिया और उसका सुहाना स्पर्श पूरी पीठ पर आ गया।

तभी जैसे मेरी आंखे उबल सी पड़ी। उसके रस से भरे चिकने लण्ड ने मेरी गाण्ड के छेद को फ़ैलाते हुये अन्दर घुस गया था। मुझे ऐसा लगा कि गाण्ड जैसे फ़ट गई हो। मेरी हल्की सी चीख निकल गई। पर मुझे गाण्ड चुदाई भी तो चाहिये थी ना। नीतू से मैं एक कदम अब आगे थी … उसने तो मात्र चूत चुदाई थी, पर मेरी तो गाण्ड भी चुद रही थी। मैंने अपनी गाण्ड की रोक हटा दी और उसे ढीली कर दी। बहुत जोर था साले के लौड़े में … वो मुस्टण्डा बेफ़िक्री से अन्दर बाहर आ जा रहा था। मेरी गाण्ड में अब आनन्द भरी गुदगुदी होने लगी थी। नीतू ये सब देख देख कर मचले जा रही थी।

“जीजा जी अगली बार मेरी मार देना ना … देखो तो नेहा को कितना मजा आ रहा है।” मुझे लगा कि नीतू की जैसे नजर लग गई हो, जीजू ने दहाड़ते हुये अपना वीर्य छोड़ दिया और मेरी गाण्ड में वो भरता चला गया। आखिर मेरी गाण्ड का टाईट छेद उसका लण्ड कब तक सहता। वो मेरी पीठ पर लेट गया और मुझे अब गुदगुदी सी हुई। उसका मोटा लण्ड झड़ कर सिकुड़ने लगा और मीठी सी सिरहन के साथ अपने आप बाहर निकलने लगा। उसके निकलते ही जैसे वीर्य मेरी गाण्ड से धीरे धीरे बाहर रिसने लगा। नीतू ने एक बर्तन में उसे एकत्र कर लिया।

“जीजा जी अब उठो ना… कि बस नेहा के ऊपर यूँ ही पड़े रहोगे” नीतू ये सब देख कर तड़प सी रही थी, अब उसे भी कुछ चाहिये था। मैंने नीतू को मुस्करा कर आंख मारी।

“अब आंख मत मार … तू तो दोनो तरफ़ से चुदवा कर इतरा रही है और मैं…?”

जीजू मेरी पीठ से उतर गया और अब हम तीनों ही सोफ़े पर बैठे थे। नीतू अन्दर जा कर कुछ मेवे और मिठाईयाँ ले आई।

“पहले भोग लगा लो …”

“अभी तक भोग नहीं लगाया …?”

“अरे नहीं वो तो भगवान को लगाया था… मैं तो लण्ड देवता कि बात कर रही हूँ।”

नीतू ने जीजू के वीर्य को मिठाई से लगाया और लण्ड से छुला कर मुझे खिला दिया।

“बोलो लण्ड देवता की जय, शुभ होली !” नीतू ने हाथ जोड़ कर लण्ड की पूजा की। मैंने भी उसी वीर्य को मिठाई में मिला कर लण्ड से रगड़ कर नीतू के मुख में डाल दी। फिर हम दोनों ने अपने चूत का गीलापन मिठाई में लगा कर जीजू के मुख में डाल दिया।

तीनों ने होली की बधाईयां एक दूसरे दी और चुदाई के अगले दौर की तैयारी करने लगे।

इस कहानी को पीडीएफ PDF फ़ाइल में डाउनलोड कीजिए! जीजू संग खेली होली-2

प्रातिक्रिया दे