बेशर्म साली-4

(Besharam Saali- Part 4)

This story is part of a series:

अभी तक आपने पढ़ा:

आह आह आह… रेखा रानी तू तो हरामज़ादी सच मच में मर्द मार क़ातिल है. बहनचोद ऐसा जूस, जिसके सेवन से आदमी की रूह फड़क उठे! माँ की लौड़ी इसको रस कहना तो सरासर ग़लत होगा… ये तो मधु कहलाना चाहिए.”

इतना बोल कर मैंने रेखा रानी के झांट प्रदेश को चाटना आरम्भ किया. झांटें पांच छह रोज़ पहले साफ की गई थीं. बाल थोड़े थोड़े उगे हुए थे, किन्तु यह दिख रहा था कि बहुत गहरे काले रंग के झांटों के रोयें हैं. इसके अलावा झांटों का प्रदेश भी काफी बड़ा था. रानी के मुंह से बेसाख्ता सिसकारियाँ निकल रही थीं.

अब आगे:

मैं अपनी साली की जाँघों के बीच घुटनों के बल बैठा और एक ही शॉट में लंड चूत में ठोक दिया. रानी ने एक चीख मारी और तड़पने लगी, ज़ोर ज़ोर से अपना सिर इधर से उधर हिलाने लगी.
शॉट इतना तगड़ा था कि लौड़े के सुपारे ने रेखा रानी की यूटरस के दरवाज़े पर ज़ोरदार दस्तक दी. चूत ने दनादन गर्म गर्म मलाई उगली. चूत मलाई से पूरी भर चुकी थी जिसमें लंड ख़ुशी ख़ुशी धंसा हुआ था. चूत अच्छी कसी हुई थी. खैर जब उसका नालायक पति चुदाई ज़्यादा नहीं कर पाता होगा तो चूत ढीली होती भी कैसे.
रेखा रानी ने मस्ती में आकर अपनी टाँगें कस के मेरी कमर से लिपटा लीं और उनको पूरी ताक़त से भींच लिया.
 
मैंने उसके चूचुक मसलते मसलते धक्के लगाने शुरू किये. मैं धक्कों की स्पीड मिक्स कर रहा था. कभी कुछ धक्के हौले हौले, फिर कुछ धक्के तेज़ और फिर एक या दो धक्के बहुत तगड़े. रानी अच्छे से मस्ता गई थी, वो कुछ बोलना चाहती थी लेकिन मुंह से केवल आहें ही निकल रही थीं.

रानी भी नीचे से अपने चूतड़ उछाल उछाल के चुदवा रही थी. दन दन दन… धक्के पे धक्का, धक्के पे धक्का, और धक्के पे धक्का!!! हर धक्के पर रेखा रानी की क़ातिल चूचियां उतने ही तेज़ी से थिरकतीं. ऊपर नीचे, दाएं बाएं, हर तरफ. क्या मज़ेदार नज़ारा था! मैं एकटक उन चूचियों का नाच देखे जा रहा था. हवस की लगातार बढ़ती हुई तेज़ी धक्कों की रफ़्तार को और भी तेज़ किये जा रही थी. रेखा रानी के बाल तितर बितर हो गए थे. अधखुली आँखें, होंठों पर मंद से मुस्कान, माथे पर आयी हुई ज़ुल्फ़ों की दो चार लटें. हम दोनों ही तीव्र गति से चरम सीमा की ओर दौड़े जा रहे थे.

रेखा रानी ने मेरी पीठ पर मस्ती में अपने नाखून गड़ा दिये और ज़ोर ज़ोर से खरोंचने लगी. भिंची भिंची आवाज़ में बोली- राजे… कम्बख्त… इतने ज़ोर से उरोज कुचल रहा था… साले बेरहम जानवर… बस झड़ने वाली हूँ मैं… .अब धक्का दे… हाँ… हाँ दे… दे… दे… हाँ हाँ ऐसे ही दिये जा राजे… हाय राजे मैं कहाँ उड़े जा रही हूँ… लगता है अब गिरी और अब गिरी… आह आह आह!
और एक तेज़ झुरझुरी के साथ रेखा रानी स्खलित हो गई.

रानी इतने ज़ोर से स्खलित हुई कि झड़ने से ज़रा पहले बदहवास होकर, चूतड़ उछाल उछाल के उसने बेड हिला के रख दिया. यहाँ तक कि उसकी सू सू भी थोड़ी सी निकल गई. उसका स्वर्ण रस छूटा और हम दोनों की जाँघें भीग गयीं. थोड़ा सा बिस्तर भी भीग गया. उसके स्वर्ण रस की गर्मी जैसे ही मुझे महसूस हुई मैं भी चरम आनन्द तक जा पहुंचा और आठ दस बार ज़बरदस्त पेलमपेल मचा के झड़ गया, ढेर सारा लावा रेखा रानी की चूत में भर गया.
मैं निढाल होकर उसके उपर ढेर हो गया. मेरा वज़न रेखा रानी कैसे झेल गई पता नहीं.

रेखा रानी की आहों से कमरा गूंज उठा. मैंने उसके होंठों पर होंठ लगाए तब जाकर कुतिया का शोर बंद हुआ. थोड़ी देर होंठ चूसकर मैंने कहा- जान… तेरी चूत है या अँधा कुआं… बहनचोद इतनी ढेर सारी मलाई और ऊपर से ढेर सारा लावा… सब का सब लील गई. कितनी जगह है इस छोटी सी बुर में?

रेखा रानी ने प्यार से एक चपत मुझे लगायी- मूरख चंद… सर्प शांत होकर छोटा हो गया ना तो बन गई जगह… बहुत आनन्द आया राजे… बरसों की आग बुझ गई.
इतना कह के रेखा रानी ने मेरे मुंह पर चुम्मियों की झड़ी लगा दी.

चुदाई के बाद हम दोनों ही थोड़ा थक गए थे. रेखा रानी से तो हिला भी नहीं जा रहा था. आपस में लिपट कर, चूमते हुए हम लेटे रहे. रेखा रानी की तो आँख भी लग गई. एक विस्फोटक चुदाई के बाद की मस्ती भरी थकन की नींद में खोयी रेखा रानी की सुंदरता को निहार निहार के मैं कुछ समय तक यूँही पड़ा रहा. रेखा रानी तो मस्ती में धुत्त गहरी नींद में चली गई थी.

जब दिल की धड़कनें और साँसें सामान्य हो गयीं तो मैंने उठ कर स्थिति का मुआयना किया. मेरा लंड मेरी साली की गीली चूत में से फिसल के कब का बाहर निकल चुका था. मैंने रेखा रानी को हौले से सीधा कर दिया और उसकी टाँगें थोड़ी से फैला दीं. रानी ने ऊँआ… ऊँआ..ऊँआ किया लेकिन जागी नहीं.

चूत के आस पास का सारा भाग, जांघों का काफी बड़ा भाग, समस्त झांट प्रदेश रेखा रानी के मधु और मेरे वीर्य से सना हुआ था. स्वर्ण रस छूट जाने के कारण शरीर के यह सब भाग भीगे हुए भी थे. बाथरूम जाकर तौलिया लाया और अपना लौड़ा, टट्टे इत्यादि को पोंछ दिया. उसके बाद रेखा रानी की चूत, जांघों और झांट प्रदेश को चाट के साफ किया. रेखा रानी थोड़ी हिली डुली तो, लेकिन ‘क्यों तंग कर रहे हो?’ मुनमुना कर फिर सो गई.
 
मैं भी आराम से कुर्सी पर बैठा इस हुस्न और कामुकता की जीवित तस्वीर को देखता रहा.
लेकिन कुछ ही देर में मेरे लंड ने फिर से अपनी मौजूदगी जतानी शुरू कर दी. इस सेक्स बम को देखे जाऊंगा तो लौड़ा कब तक चुप रह सकता था.

मैंने नीचे फर्श पर बैठ कर रेखा रंडी के पैरों के गुलाबी तलवों पर जीभ फिरानी शुरू कर दी. वाह क्या स्वाद था!
फिर मैंने मदमस्त होकर जीभ निकाल के रानी के पंजे को खूब चाटा. बीच बीच में मैं पूरा पंजा मुंह के अंदर घुसा लेता था. मैं पंजा चूसता, एक एक करके अंगूठे और उंगलियों पर जीभ फिराता, उंगलियों के बीच के स्थान को चाटता. मेरा मुंह पानी से भरे जा रहा था.

इस चाटने चूसने की क्रिया से रेखा रानी की नींद भी खुल गई. सिसकारियाँ लेते हुए रेखा रानी ने इसी प्रकार प्रसन्नतापूर्वक अपने दोनों पैर चटवाये. मैंने उसके मुलायम मुलायम तलवे चूसे, उतने ही मुलायम एड़ी पूरी मुंह मे लेकर चूसी. बीच बीच में अनेक बार मैंने उसके टखने भी चाट लिये.

अब रेखा रानी के मुंह से भी उत्तेजना से भरी हुई सीत्कार आने लगी थी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ लगता था कि मेरी दूसरी रानियों की तरह यह रांड भी पांव चटवा के बहुत मज़ा पाती थी.
 
‘राजे राजे राजे… मैं तेरी गुलाम बन गई… अब से मैंने तेरी रखैल… इतना मज़ा!!! हाय… हाय… .बदन जल के स्वाहा हो जायेगा मेरा.’ रेखा रानी इतनी गर्म हो चुकी थी कि उस से बोला भी नहीं जा रहा था.
वो मेरे ऊपर आ गई और उसकी नरम नरम, गरम गरम, गोल गोल चूचियाँ मेरे लंड को बीच में लेकर लंड को मसलने लगीं. फूल से नाज़ुक किन्तु अकड़े हुए चूचुक अपने इधर उधर पाकर लौड़े की तो ऐश लग गई. वो बार बार तुनक तुनक के रानी को सलामी देने लगा.

रानी अब ज़ोर ज़ोर से सी सी उम्म अहह.. शस्स… की आवाज़ निकाल रही थी. उसने उठकर अपने आप को सही पोसिशन में सेट किया और लंड के सुपारे को अपनी मधु से लबालब बुर के मुंह पर जमाया और ‘राज.. ए.. ए.. ए… ए… ए…’ की एक लम्बी पुकार के साथ वो फचाक से लंड के ऊपर बैठती चली गई.

मेरी साली की चूत रस से बिल्कुल तर बतर थी, इसलिये मेरा लौड़ा बड़े आराम से उसके भीतर घुसता चला गया और सुपारा जाकर रेखा रानी की बच्चेदानी को चूमने लगा. रस या कह लो मधु चूत से फफक फफक के बाहर निकल कर इधर उधर फ़ैल गया. उससे मेरी झांटें भी सन गई थीं.

लंड उस उत्तेजित चूत में डूब कर मतवाला हो गया. रेखा रानी ने धीमे धीमे चूतड़ और चूत हिला हिला कर चोदना शुरू किया और आगे को जितना झुक सकती थी, उतना झुक गई. उसने अपने चूचुक मेरे मुंह से लगाये और धीरे से बोली- चल राजे, अब जल्दी से मेरे दूध को दबा दबा के चूस… पूरी मुंह में लेकर ज़ोर से दांत गाड़ दे इनमें. तभी इनकी सख्ताई कुछ घटेगी…

अपनी बड़ी साली की चूची मुंह में लेकर मैं मस्त होकर चूसने लगा, कभी कभी निप्पल को और कभी कभी चूची को कस के काट भी लेता. लेकिन रानी इतनी मस्त थी कि वो खुद ही अपने मम्मे नाख़ून घुसा घुसा के निचोड़ रही थी और धक्के भी मारती जाती थी. मैं भी अपने नितम्ब उछाल कर रानी के धक्कों में धक्के मिला रहा था.

सब लड़कियों की तरह रेखा रानी को भी चुदाई का कण्ट्रोल अपने हाथ में लेकर बड़ा मज़ा आ रहा था. उसने अपना निचला होंठ दांतों में दबा रखा था और हचक हचक कर मुझे चोद रही थी.
रानी ने अब धक्के तेज़ तेज़ टिकाने शुरू कर दिये. उसके मुंह से हाय उम्म हाय मम्म आह आह ऊ ऊ ऊ जैसी आवाज़ें मेरी ठरक को कई गुना करे जा रहीं थीं.

फिर उसने थोड़ा पीछे को सरक कर अपने पांव मेरे कंधों पर जमा दिये और बाज़ू मेरे घुटनों पर. इस प्रकार सेट होकर रेखा रानी ने जो धमाचौकड़ी मचाई है कि पूछो मत. इस पोज़ में वो बड़े तगड़े तगड़े धक्के मार सकती थी और वैसा ही कर रही थी. चूत के गाढ़े रस में लिपटा हुआ मेरा लंड जब घुसता तो फच्च फच्च की ऊँची आवाज़ आती. बुर से बहते हुए मधु से मेरा सारा कटि प्रदेश गीला हो चुका था.
रेखा रानी की साँसें उखड़ने लगीं थीं. वो अब भैं भैं करके हांफ रही थी, जैसे घोड़ी लम्बी दौड़ लगाते हुए हांफती है या कुतिया गर्मी में हांफती है.

अब रेखा रानी ने अपने को पूरा घुमा के अपनी पीठ मेरी तरफ कर ली और हाँफते हुए बोली- राजे… मेरे हाथ दुख गये दूधों को दबाते दबाते… अब तू इनको ज़रा ताक़त लगा के मसल. पीछे से जकड़ेगा तो ज़्यादह ताक़त लगा पायेगा… समझ ले तुझे इनका कीमा बनाना है.

मैंने वही किया जो रेखा रानी की फरमाईश थी. साली के चूचे कस कर जकड़ लिए और दोनों पंजे अकड़ा कर उँगलियाँ अंगूठे उनमें गाड़ कर ऐसे मसलने लगा जैसे सचमुच में उनका कीमा बनाना हो. निप्पल को उंगली और अंगूठे के बीच ज़ोर ज़ोर से उमेठ देता जैसे निम्बू का रस निकलते हैं. कुचों और निप्पल के इस प्रकार हो रहे मर्दन से मेरी रेखा रानी बौरा सी गयी थी. बेतहाशा फुदक फुदक कर चोदन खेल खेल रही थी. कमरिया उछाल उछाल के अपने जीजा को चोद रही थी. क्या ज़बरदस्त चुदक्कड़ थी मेरी ये हरामज़ादी साली! क्या धक्के लगाती थी!! क्या सीत्कारें भरती थी!!! सुभानअल्लाह!!!!

मित्रो, मुझे आशा है कि मेरी साली की चूत चुदाई का यह वृतांत आपको अच्छा लग रहा होगा. अपनी राय मुझे इमेल में लिखना न भूलियेगा.
धन्यवाद
चूतनिवास
[email protected]

What did you think of this story??

Comments

Scroll To Top