नंगी कहानी: वासना के पंख-4

(Nangi Kahani: Vasna Ke Pankh- Part 4)

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दोस्तो, आपने इस शौहर बीवी की इस नंगी कहानी के पिछले भाग में पढ़ा कि कैसे प्रमोद और मोहन ने अपनी बीवियों को अदल-बदल करके चोदने की योजना बनाई थी। इस योजना के तहत प्रमोद अपनी देसी बीवी को हनीमून पर ले जाने वाला था ताकि वो थोड़ी खुल के चुदवाने में अभ्यस्त हो जाए।

इस भाग में देखते हैं प्रमोद उसे कितना खुल के चुदवाना सिखा पाया…

प्रमोद- देख वो मेरी दूकान पर मैंने जो टीवी कूलर बेचना शुरू किया था ना तो टीवी कंपनी ने टारगेट दिया था। पूरा करने वाले डीलर को यूरोप में दो लोगों के लिए 5 दिन घुमाने का इनाम था। तो मैंने तो टारगेट से ज्यादा टीवी बेच डाले। तो अब जल्दी ही यूरोप जाने का प्रोग्राम है।
मोहन- मुबारक हो भाई। लेकिन, इसका मेरी वाली खुशखबरी से क्या वास्ता।

प्रमोद- वास्ता ये है कि मैंने अभी तुझे बताया ना कि भाभी की संगती में रह के शारदा ढंग से चुदाई करना सीख गई। इसलिए मुझे उम्मीद है कि वहां विदेशी लोगों का खुलापन देखेगी तो शायद वो भी हमारी मस्ती में शामिल होने को राजी हो जाए। मैंने सुना है वहां किसी किसी बीच पर नंगे घूमना आम बात है।
मोहन- ऐसा है क्या? फिर तो घुमा ला। तब तक संध्या की चूत भी थोड़ी टाइट हो जाएगी। फिर दोनों भाई मिल के साथ में भाभीचोद बनेंगे।
इस बात पर दोनों बहुत हँसे।

नशे का सुरूर और वासना अब सर चढ़ चुका था। दोनों जल्दी ही नंगे हो गए और एक दूसरे की बीवी को कैसे चोदेंगे ये बातें करते करते मस्ती करने लगे। ऐसे तो दोनों एक दूसरे की पत्नी के बारे इज्ज़त से ही बात करते थे लेकिन आज नशे में उनको शायद लग रहा था कि उनकी कल्पना सच हो ही जाएगी। आगे क्या होने वाला था ये तो समय को ही पता था।

अगले दिन प्रमोद वापस शहर आ गया। अगले दो महीने तो पासपोर्ट और वीज़ा के जुगाड़ में निकल गए, उसके बाद प्रमोद ने ट्रेवल एजेंट के साथ मिल कर काफी विचार विमर्श किया और प्लान में काफी सारे बदलाव करवाए। ट्रेवल एजेंट को कंपनी जो भी पैसे दे रही थी उसके अलावा प्रमोद ने भी अपनी तरफ से उसे पैसे दिए ताकि प्लान में कुछ और चीज़ें जोड़ी जा सकें। जो ज़रूरी नहीं लगा उसे हटा कर कुछ पैसे बचा भी लिए। प्रमोद अब असली बनिया बनता जा रहा था।

प्रमोद ने शारदा को जैसा देस वैसा भेस का हवाला दे कर कुछ मॉडर्न कपड़े खरीदवा दिए थे। शारदा भी संध्या की सलाह मान कर कुछ खुल गई थी इसलिए उसने ज्यादा आनाकानी नहीं की।

आखिर वो दिन आ गया जब प्रमोद और शारदा को अपने हनीमून पर निकलना था।
एक लम्बी फ्लाइट के बाद सुबह ये लोग पेरिस पहुंचे। शुरुवात हल्के फुल्के घूमने फिरने से ही करने का प्लान था। कुछ उत्तेजना बनाए रखने के लिए प्रमोद ने शारदा को स्कर्ट-टॉप के अन्दर कुछ ना पहनने की सलाह दी थी जो कि शारदा ने मान ली थी।

सबसे पहले लूव्र संग्रहालय जाने का कार्यक्रम था। जब कभी शारदा थोड़ी बोर होने लगती तो मौका देख कर प्रमोद उसके कसे हुए टॉप के ऊपर से ही उसके उरोजों को छेड़ देता जो कि बिना ब्रा के उस टॉप के ऊपर से भी काफी मुलायम लग रहे थे। यूं तो गर्मी के दिन थे लेकिन पेरिस में थोड़ी ठण्ड तो फिर भी थी ही। जब तक ये लूव्र संग्रहालय में घूम रहे थे तब तक तो महसूस नहीं हुआ था, लेकिन जैस ही वो वहां से बाहर आये, अचानक ठंडी हवा के झोके ने दोनों के रोंगटे खड़े कर दिए।

कुछ देर बाद प्रदीप का ध्यान गया कि केवल रोंगटे ही खड़े नहीं हुए थे बल्कि साथ कुछ और भी खड़े हुए थे। नहीं नहीं अभी तक तो प्रमोद का लंड सोया हुआ था, लेकिन अब शायद शारदा के खड़े हुए चूचुक देख कर वो भी जागने लगा था। उसके कसे हुए टॉप के अन्दर वो नग्न उरोज जो अपनी गोलाइयों को पूरे प्राकृतिक रूप में उस टॉप के अन्दर से भी प्रदर्शित कर पा रहे थे. अब और भी नग्नता के और भी करीब आ गए थे क्योंकि अब शारदा के दोनों चूचुक साफ़ खड़े हुए दिखाई दे रहे थे। उसे इस रूप में देख कर उसकी नंगी देह की कल्पना करना बहुत मुश्किल काम नहीं रह गया था।

प्रमोद ने इस दृश्य को हमेशा के लिए संजो लेने के लिए अपने कोडॅक कैमरा से उसकी एक तस्वीर ले ली। फिर वो एफिल टावर जैसे और भी कई जगहों पर गए। दोनों ने बहुत मज़ा किया। शाम को अपने अगले गंतव्य पर जाने के लिए एअरपोर्ट पर चेक-इन करने के बाद जब दोनों वहीँ एअरपोर्ट के शौपिंग एरिया में घूम रहे थे तब अचानक प्रमोद की नज़र में कुछ आया और चलते चलते प्रमोद ऊपर वाली मंज़िल पर शारदा को कुछ दिखाने लगा।

प्रमोद- वो देखो! उस दूकान पर पहिये वाले जूते मिलते हैं।
शारदा- तो उसमें क्या बड़ी बात है? वो तो अपने यहाँ भी मिलते हैं।
प्रमोद- और वहां पर खेलकूद का सामान मिलता है।
शारदा- क्या, हो क्या गया है आपको? मुझे वहां ये सब फालतू चीज़ें क्यों दिखा रहे हो?
प्रमोद- ताकि तुम यहाँ नीचे ना देख पाओ। हा हा हा…

जैसे ही शारदा ने नीचे देखा तो वो चौंक गई। वो एक कांच के फर्श पर खड़ी थी और उसके नीचे निचली मंजिल पर लोग आ-जा रहे थे। पहले तो उसे बड़ा मज़ा आया कि वो जैसे हवा में उड़ रही है लेकिन जैसे ही उसे याद आया कि अपनी स्कर्ट के अन्दर वो बिलकुल नंगी है और उसकी चूत अब सब लोगों के सामने खुली हुई है, वो शर्म से पानी पानी हो गई। उसने जल्दी से अपने पाँव सिकोड़ लिए।

शारदा- आप भी ना, बड़े बेशर्म हैं। पहले बता देते तो मैं सम्हाल के आती ना।
प्रमोद- फिर ये मज़ा कहाँ से आता?
शारदा- आपको अपनी पत्नी की उस की नुमाइश करने में मज़ा आता है?
प्रमोद- ‘उस की’?
शारदा- हाँ, मतलब मेरी वो… समझ जाओ ना!

प्रमोद- अरे यार, यहाँ हिंदी कोई नहीं समझता। चूत बोलो चूत!
शारदा- आप दिन पे दिन बहुत बेशर्म होते जा रहे हैं। तो मेरी चूत दुनिया को दिखा के क्या मज़ा मिला आपको?
प्रमोद- तुम भी तो दिन पे दिन बिंदास होती जा रही हो। रही बात तुम्हारी चूत की तो मज़ा तो दुनिया को आया होगा मुझे तो तुमको और बिंदास बनाना है इसलिए ऐसा किया।

शारदा- इतनी बिंदास तो हो गई हूँ। आगे हो के आपको चोद डालती हूँ। ऐसे गंदे गंदे शब्द बोलने लगी हूँ। और कितना बिंदास बनाओगे?
प्रमोद- इतना कि सारी दुनिया के सामने मुझे चोद सको।
शारदा- मजाक मत करो। कोई सारी दुनिया के सामने नंगा होता है क्या? पागल कहेगी सारी दुनिया।

इस बात पर प्रमोद बस मुस्कुरा दिया। मन ही मन वो ये सोच कर हंस रहा था कि शारदा को अभी पता नहीं था कि वो जहाँ जा रहे हैं वो किस बात के लिए प्रसिद्ध है। केप ड’अग्ड, फ्रांस में उस समय एक छोटा सा गाँव था तो अपने प्रकृतिवादी रिसॉर्ट्स के लिए उन दिनों काफी प्रसिद्ध हो रहा था। रात का खाना प्लेन में ही हो गया और सोने के समय से पहले दोनों रिसोर्ट में पहुँच गए थे। थकान काफी थी इसलिए सीधा सोने चले गए। अगली सुबह शारदा फ्रेश हो कर आई और तैयार होने के लिए अपने कपड़े निकालने लगी।

शारदा- आज कहाँ चलना है और उस हिसाब से क्या कपड़े पहनूं?
प्रमोद- वो बिकिनी ली थी ना, फूलों के प्रिंट वाली वो पहन लो और उसके ऊपर ये कुरता डाल लो।
शारदा- क्या बात कर रहे हो आप भी। ये इतना झीना कुरता वो भी ये चिंदी जैसे कपड़ों के ऊपर। नहीं नहीं… ये पहन के मैं बाहर नहीं जा सकती। मुझे तो लगा था आपने ये इसलिए दिलवाया है कि अगर ज़्यादा गर्मी पड़ी तो रात को पहन के सोने के काम आएगा।

प्रमोद- एक काम करो। ये पहन लो… साथ में हम ये बड़ी वाली शाल ले चलते हैं, अगर तुमको लगे कि कोई तुमको गलत नज़र से देख रहा है तो ये ओढ़ लेना।
शारदा- ठीक है। और आप क्या पहनोगे?
प्रमोद- बस ये एक चड्डी काफी है।
शारदा- हाँ, आप तो हो ही बेशरम।

फिर दोनों तैयार हो कर निकल पड़े। एक बास्केट में वही बड़ी सी शाल कुछ बियर की कैन और कुछ नमकीन रख लिया था। बीच ज्यादा दूर नहीं था, बल्कि यूँ कहें कि सामने ही दिख रहा था बस वहां तक पहुंचना था। दूर से लोग बीच पर धूप सेंकते दिख रहे थे लेकिन ठीक से नहीं। तभी थोड़ी दूरी पर एक अधेड़ उम्र का आदमी बीच की तरफ जाता हुआ दिखाई दिया। उसके पास भी वैसा ही बास्केट था जैसा होटल वालों ने प्रमोद और शारदा को दिया था लेकिन वो पूरा नंगा था।

शारदा- हे भगवान! सुबह सुबह ये पागल ही दिखाना था? अब देखो, मैं कल ही कह रही थी ना… इस इंसान को आप पागल ही कहोगे ना। चलो अपन थोड़ा दूसरी तरफ चल देते हैं।
प्रमोद- तुम्हारा मतलब उस तरफ?

प्रमोद ने इशारा करके बताया और जब शारदा ने उस दिशा में देखा तो दंग रह गई। वहां एक खूबसूरत जोड़ा जो लगभग उनकी ही उम्र के थे और वो भी पूरे नंग-धड़ंग बीच की ओर जा रहे थे। वो आपस में बात करते हुए बड़ी फुर्ती से बीच की ओर बढ़ रहे थे और उनकी हरकतों को देख कर कहीं से भी ऐसा नहीं लग रहा था कि वो पागल थे। शारदा कुछ समझ पाती इस से पहले प्रमोद ने एक और दिशा में इशारा किया।

वहां तो एक पूरा परिवार नंगा बैठा था। पति-पत्नी और एक करीब दस साल की लड़की और लगभग छह साल का लड़का जो वहां रेत में किले बना रहे थे। ये लोग अब बीच पर आ गए थे और हर जगह जो भी स्त्री-पुरुष और बच्चे धूप सेंक रहे थे वो सब नंगे ही थे। शारदा तो कुछ समझ ही नहीं पा रही थी।

शारदा- ये सब क्या हो रहा है। कहाँ ले आए हो आप हमको?
प्रमोद- ये एक प्रकृतिवादी लोगों का गाँव है। इन लोगों का मानना है कि प्रकृति ने जैसा हमें बनाया है, हमको वैसे ही रहना चाहिए। इनका खानपान रहन सहन सब प्राकृतिक होता है।

इतना कहते कहते प्रमोद ने बास्केट में रखी शाल रेत पर बिछा दी और अपनी चड्डी निकाल कर उस पर लेट गया।

शारदा- अरे ये लोग जो हैं वो हैं लेकिन आप तो शर्म थोड़ी करो। ऐसे सबके सामने नंगे हो रहे हो!
प्रमोद- जैसा देस वैसा भेस। बल्कि अगर तुम ऐसे घूमोगी तो सब तुमको ही देखेंगे। मैं तो कहता हूँ कम से कम ये कुरता तो निकाल ही दो।
प्रमोद अपनी बीवी को नंगी करना चाहता था कि उसकी शर्म पूरी खुल जाए और वो अपनी नंगी बीवी की नंगी कहानी अपने दोस्त और भाभी को सुनाये.

शारदा को प्रमोद की बात सही लगी। अब तक काफी लोग उसे अजीब नज़र से देख चुके थे। उसने भी कुरता निकाल दिया और शाल के ऊपर लेट गई। दोनों एक दूसरे की तरफ करवट ले कर लेटे थे और अपने एक हाथ पर सर को टिका कर दूसरे हाथ से बियर पी रहे थे। प्रमोद ने शारदा को हज़ार बार नंगी देखा था लेकिन आज ऐसे खुले बीच पर बिकिनी में उसे देख कर प्रमोद का लंड खड़ा हो गया। उधर शारदा ने पहली बार बियर पी थी तो उसे थोड़ी चढ़ने लगी थी।

शारदा- अरे तुम्हारा तो लंड खड़ा हो गया। चूस दूं क्या?
प्रमोद- अरे नहीं! यहाँ लोग प्राकृतिक रहने के लिए नंगे रहते हैं सेक्स के लिए नहीं। लेकिन अब ये खड़ा हो गया है तो इसको लेकर तो कहीं जा भी नहीं सकते… अच्छा नहीं लगेगा। तुम्हारे कुरते से ढक लेता हूँ तुम हाथ से हिला के झड़ा दो।

शारदा ने थोड़ी देर कोशिश की लेकिन जब प्रमोद नहीं झड़ा तो शारदा नशे में बोलने लगी- चोद लो यार, यहाँ सब वैसे भी नंगे ही तो घूम रहे हैं।
शारदा नशे में समझ नहीं पा रही थी कि वहां बच्चों वाले परिवार भी थे।

लेकिन प्रमोद को एक नया उपाय सूझा, उसने शारदा को समुद्र में चलने को कहा। दोनों भाग कर पानी में चले गए और इतने गहरे पानी में जा कर खड़े हो गये कि पानी उनकी छाती तक था। कभी लहर भी आती तो गले तक ही आ रहा था।

ऐसे में प्रमोद ने शारदा की बिकिनी बॉटम (पेंटी) को नीचे सरका के पीछे से अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया। समंदर की लहरों में दोनों की चुदाई के झटके कहीं खो गए और देखने वालों को यही लग रहा है कि कोई अपनी बीवी के साथ लहरों का आनंद ले रहा है। शारदा पर नशे की खुमारी थी और ऊपर से समंदर की लहरों में झूलते हुए ऐसी चुदाई उसने पहली बार अनुभव की थी।

आखिर में जब वो झड़ी तो कुछ देर के लिए तो आनंद के अतिरेक से वो बिल्कुल निढाल पड़ गई। अगर प्रमोद तब उसे पकड़ ना लेता तो शायद वो डूब ही जाती।
थोड़ी देर बाद जब उसे थोड़ा होश आया तो नशा पूरी तरह से उतर चुका था।
जैसे ही वो सम्हालने लायक हुई उसे एक और झटका लगा।
उसकी बिकिनी बॉटम गायब थी। जब प्रमोद ने चोदने के लिए उसे नीचे सरकाया था तब तो शारदा ने उसे अपने पैर चौड़े करके घुटनों से ऊपर अटका रखा था लेकिन चुदाई के मज़े में जब उसका बदन ढीला पड़ा तो वो नीचे सरक कर लहरों में कहीं बह गई। दोनों ने मिल कर काफी ढूँढा लेकिन आसपास कहीं नज़र नहीं आई।

शारदा- मैं ऐसे बाहर नहीं निकल सकती; आप मुझे आपका बरमूडा ला कर दो ना, मैं वही पहन कर बाहर आ जाऊँगी।
प्रमोद- ऐसे घबराओ मत यार, दिमाग से काम लो। यहाँ सब औरतें नंगी ही घूम रही हैं ऐसे में तुमने बिकिनी पहनी थी वही लोगों को अजीब लग रहा था। अब तुम मेरे साइज़ का बरमुडा पहनोगी और उसे हाथ से पकड़ कर चलोगी तो सब हँसेंगे तुम पर। ऐसे ही चल दोगी तो शायद कोई देखेगा भी नहीं।

ठन्डे दिमाग से सोचा तो बात शारदा को भी सही लगी; थोड़ी हिम्मत करके वो बाहर आ गई। थोड़ी ही देर में उसे समझ आ गया कि अगर वो इस बीच पर नंगी भी घूमे तो किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता।
दोनों ने तौलिये से अपने अपने बदन को सुखाया और वहीं थोड़ा घूमने का सोचा।

प्रमोद- अब ये ऊपर की ब्रा भी निकाल ही दो। बड़ा अजीब लग रहा है, चूत दिखा रही हो और बोबे छुपा रही हो।
शारदा- हे हे… बात तो आपकी सही है, और वैसे भी यहाँ किसी को फर्क नहीं पद रहा कि मैं यहाँ नंगी खड़ी हूँ।

इतना कहकर शारदा ने बिकिनी टॉप भी निकाल दिया और खुले आसमान के नीचे पूरी नंगी हो गई। काफी देर तक दोनों वहीं बीच पर घूमते रहे। शारदा को आज़ादी का एक नया ही अहसास हो रहा था। वो नंगी ही बीच पर दौड़ लगा रही थी समंदर की आती जाती लहरों में छई-छप्पा-छई कर रही थी। प्रमोद बहुत खुश था शारदा का ये रूप देख कर।

देसी बीवी की नंगी कहानी जारी रहेगी.

दोस्तो, आपको कैसी लग रही है मेरी न्यूड स्टोरी, बताने के लिए मुझे यहाँ मेल कर सकते हैं [email protected] आपके प्रोत्साहन से मुझे लिखने की प्रेरणा मिलती है।